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भारतीय शेयर बाजार में छाई लाली, सेंसेक्स 1,200 अंक तक टूटा; जानिए इस बड़ी गिरावट के मुख्य कारण
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मुंबई : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी50 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ खुले।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत टूटकर 72,326.54 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 350 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 22,453 के इंट्रा-डे लो पर आ गया। इस दौरान, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इस तेज गिरावट के चलते कुछ ही घंटों में निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 422.04 लाख करोड़ रुपए (शुक्रवार) से घटकर 416.06 लाख करोड़ रुपए रह गया (दोपहर 12.30 बजे तक)।
बाजार में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध है, जो एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर गया है। इस युद्ध के खत्म होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला बढ़ाया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है।
दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी 85-90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है; ऐसे में महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है।
तीसरा कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 28.1 के पार पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है। आमतौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है।
चौथा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में 27 तारीख तक भारतीय बाजार से 1.23 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। इससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।
पांचवां कारण एफएंडओ (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी है। 30 मार्च को मार्च सीरीज के कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों के चलते फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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लगातार दूसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में 374 अंकों की बढ़त

वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस बीच सेंसेक्स में 374 अंकों की बढ़त दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी 24,600 से ऊपर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार की गिरावट से पहले भी घरेलू बाजार ने लगातार चार सत्रों में तेजी दर्ज की थी।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंक यानी 0.48 प्रतिशत बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 11.35 अंक या 0.05 प्रतिशत बढ़कर 24,636.00 पर बंद हुआ।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.8 प्रतिशत की तेजी आई। इसके साथ ही निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, इसके विपरीत निफ्टी मीडिया सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.28 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी रियल्टी में भी 1.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी क्रमशः 1.01 प्रतिशत और 0.99 की गिरावट देखने को मिली, जबकि निफ्टी आईटी में 0.95 प्रतिशत की गिरावट आई।
निफ्टी50 इंडेक्स में एसबीआई, बीईएल, इटरनल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखी गई, जबकि इसके विपरीत पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग गतिविधियों को सामान्य करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के लिए तेज हुई कूटनीतिक कोशिशों से बाजारों को सहारा मिला।
आरबीआई के स्थिर पॉलिसी रुख और विकास के सकारात्मक नजरिए से बाजार का उत्साह और बढ़ा, जिससे हैवीवेट, बैंकिंग और एनर्जी शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखी गई।
एक्सपर्ट ने कहा कि निवेशक आने वाली तिमाहियों में बेहतर कमाई की उम्मीद भी कर रहे हैं, क्योंकि क्रूड की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम हो सकता है और मार्जिन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बाजार की इस बदली हुई सोच के बीच, ओ2सी-आधारित कारोबार के लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन के बाद अब इसमें ‘बार्गेन बाइंग’ (कम कीमत पर खरीदारी) देखी जा रही है, क्योंकि बाजार एनर्जी, टेलीकॉम, रिटेल और अन्य क्षेत्रों में इसकी लंबी अवधि की वैल्यू का फिर से आकलन कर रहे हैं।
हालांकि, ऑटो, मेटल, आईटी, रियल्टी और सीमेंट जैसे कई क्षेत्रों में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) देखी गई, लेकिन स्मॉल-कैप शेयरों में तेजी के कारण व्यापक बाजार मजबूत बना रहा।
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सोने में बड़ी तेजी, वायदा में दाम 1.49 लाख के पार

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सोने में लगातार तेजी देखी जा रही है और गुरुवार को सत्र की शुरुआत के साथ ही वायदा बाजार में सोने का दाम 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 के कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,48,493 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,49,029 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 10:13 पर यह 850 रुपए या 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,49,343 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,48,900 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,49,525 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,27,584 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,27,500 रुपए प्रति किलो पर था।
फिलहाल यह 336 रुपए या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,27,920 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,27,008 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,28,397 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,320 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.36 डॉलर प्रति औंस पर थी।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह अमेरिका-ईरान के बीच हमले का रुकना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ गई हैं और इससे महंगाई बढ़ने की संभावनाएं पहले के मुकाबले कम हुई हैं।
उन्होंने आगे कहा कि डॉलर इंडेक्स के 100 के नीचे आने से भी कीमती धातुओं की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।
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मेटा के एआई मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी टेस्ट के दौरान बाहरी सिस्टम को किया हैक

अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने कहा कि उसके एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी टेस्ट के दौरान इंटरनेट तक पहुंच बनाई और एक बाहरी सर्विसेज सिस्टम को हैक कर लिया। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई।
इससे पहले भी एआई से जुड़े ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिसने सवाल खड़ा किया है कि क्या कंपनियों का टेक्नोलॉजी पर कंट्रोल है या नहीं।
मेटा ने कहा कि उसके हाल ही में जारी किए गए मॉडल ‘म्यूज स्पार्क 1.1’ ने एक अज्ञात थर्ड-पार्टी सर्विस के सिस्टम में सेंध लगाई।
कंपनी ने बताया कि मेटा जिस साइबर-सिक्योरिटी वेंडर ‘इरेगुलर’ के साथ मिलकर टेस्टिंग एनवायरनमेंट तैयार कर रही थी, उसमें हुई एक गड़बड़ी की वजह से एआई मॉडल इंटरनेट से कनेक्ट हो गया।
मेटा ने बयान में कहा, “कंपनी जिस स्वतंत्र टेस्टिंग कंपनी ‘इरेगुलर’ का इस्तेमाल करती है, उसकी तरफ से हुई एक गलत कॉन्फिगरेशन की वजह से टेस्टिंग के दौरान हमारा एक मॉडल अनजाने में इंटरनेट से कनेक्ट हो गया।”
कंपनी ने आगे बताया कि इसके बाद मॉडल ने एक थर्ड-पार्टी सर्विस की सिक्योरिटी में मौजूद कमी का फायदा उठाया, यह घटना वैसी ही थी जैसी पहले दूसरी कंपनियों के साथ हो चुकी है।
हालांकि, मेटा इस बात की जांच कर रही है कि असल में क्या हुआ था और सभी तथ्य सामने आने के बाद कंपनी इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगी।
इसके अलावा, बीते दो हफ्तों में ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी दूसरी एआई कंपनियों ने भी इसी तरह की समस्याओं की जानकारी दी है, जिनमें टेस्टिंग के दौरान उनके मॉडल्स ने बाहरी सर्विसेज के सिस्टम को हैक कर लिया था।
सिस्टम में खामियों को खोजने और फिर उनका फायदा उठाने के लिए एआई एजेंटों की बढ़ती क्षमताओं ने सुरक्षा शोधकर्ताओं और सरकारी नेताओं को समान रूप से चिंतित कर दिया है, जिन्होंने अधिक कठोर सुरक्षा जांच और अधिक सुरक्षित परीक्षण वातावरण की मांग की है।
जुलाई में, एंथ्रोपिक ने खुलासा किया था कि उसके क्लाउड मॉडल ने आंतरिक साइबर सुरक्षा मूल्यांकन के दौरान तीन संगठनों के उत्पादन बुनियादी ढांचे में अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली, क्योंकि परीक्षण वातावरण में गलत कॉन्फिगरेशन के कारण अनजाने में इंटरनेट कनेक्टिविटी चालू हो गई थी।
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