व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 1,048 अंक लुढ़का
मुंबई, 13 फरवरी : भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,048.16 अंक या 1.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,626.76 और निफ्टी 336.10 अंक या 1.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,471.10 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल शेयरों ने किया। इसके कारण सूचकांकों में निफ्टी मेटल (3.31 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (2.24 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी (2.23 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (2.04 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.90 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (1.88 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (1.68 प्रतिशत) और निफ्टी कंजप्शन (1.63 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में एचयूएल, इटरनल, टाटा स्टील, टाइटन, टीसीएस, पावर ग्रिड, बीईएल, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक, एनटीपीसी, इन्फोसिस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडिगो लूजर्स थे। वहीं, बजाज फाइनेंस और एसबीआई ही केवल हरे निशान में बंद हुए ।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,032.85 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,438 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 311.20 अंक या 1.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,032.90 पर बंद हुआ।
एलकेपी सिक्योरिटीज में रूपक दे ने कहा कि अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत के बाद निफ्टी की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। दिन अंत में इंडेक्स एक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इंडिया विक्स फिर से 200 डीएमए के पार चला गया है, जो बाजार भागीदारों के बढ़ते डर को दिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 25,500 के आसपास है। अगर यह टूटता है तो निफ्टी 25,000 के आंकड़े को भी छू सकता है। इसके लिए रुकावट का स्तर 25,800 के आसपास है।
दूसर तरफ, कच्चे तेल में तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 68 डॉलर प्रति औंस और डब्ल्यूटीआई क्रूड आधा प्रतिशत की तेजी के साथ 63 डॉलर प्रति औंस पर था।
राष्ट्रीय
आरबीआई ने एनआरआई और ओसीआई के लिए बढ़ाई इक्विटी निवेश सीमा

मुंबई, 5 जून: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि शेयर बाजार में कारोबार होने वाले इक्विटी साधनों में बिना सेबी पंजीकरण के निवेश करने के लिए एनआरआई (अनिवासी भारतीय) और ओसीआई (भारतीय मूल के विदेशी नागरिक) की निवेश सीमा बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद अपने संबोधन में कहा कि यही सुविधा अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्तियों (पीआरओआई) को भी एनआरआई और ओसीआई के समान उपलब्ध कराई जाएगी।
गवर्नर ने कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) को प्रोत्साहित करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, अधिकृत डीलर (एडी) बैंकों को 3 से 5 वर्ष की नई एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाने के लिए पूरी हेजिंग लागत वहन करने की समान सुविधा भी 30 सितंबर 2026 तक दी जाएगी।”
विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से आरबीआई ने पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों के लिए “निर्दिष्ट प्रतिभूतियों” के दायरे का विस्तार करने का फैसला किया है। इसके तहत 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) को शामिल किया जाएगा।
मल्होत्रा ने कहा कि सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश पर लागू अल्पकालिक निवेश, निवेश एकाग्रता और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से जुड़ी सीमाओं को भी हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ये कदम और सरकार द्वारा शुक्रवार सुबह घोषित कर लाभ (टैक्स बेनिफिट) सरकारी उधारी के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेंगे।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि निर्यात आय की प्राप्ति के लिए समयसीमा को फिर से 9 महीने करने का प्रस्ताव रखा गया है।
उन्होंने कहा, “इन उपायों से देश के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही हम निर्यात को बढ़ावा देने और पूंजी प्रवाह आकर्षित करने के लिए आगे भी आवश्यक नीतिगत बदलाव करते रहेंगे।”
संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि भारत की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “हम किसी विशेष विनिमय दर या उसकी किसी सीमा को लक्ष्य नहीं बनाते। विनिमय दर का निर्धारण बाजार की ताकतों के आधार पर होने दिया जाता है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार बढ़ी हुई अनिश्चितता के दौरान सट्टेबाजी के दबाव के कारण बाजार में ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, जो आर्थिक बुनियादी कारकों के अनुरूप नहीं होते और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य बाजार द्वारा तय किए गए स्वाभाविक बदलावों को रोकना नहीं है, लेकिन अत्यधिक अस्थिरता और अव्यवस्थित बाजार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आरबीआई वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने और अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए सतर्क बना रहेगा।
राष्ट्रीय
आंधी-तूफान के बाद ग्रेटर नोएडा में जाम, विकास प्राधिकरण का विशाल बोर्ड गिरा (लीड -1)

नोएडा, 4 जून: तेज आंधी-तूफान और बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाई, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में जनजीवन भी प्रभावित हुआ। ग्रेटर नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र में स्थित एनएच-91 पर लुहारली टोल प्लाजा के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तेज हवाओं के कारण विकास प्राधिकरण का एक भारी-भरकम सूचना बोर्ड टूटकर सीधे हाईवे पर गिर पड़ा।
इस घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवाओं का दबाव इतना अधिक था कि सड़क किनारे लगा विशाल लोहे का बोर्ड अपनी जगह से उखड़कर हाईवे पर आ गिरा।
बोर्ड गिरने से सड़क पर चल रहे वाहन चालक घबरा गए और वाहनों की रफ्तार अचानक थम गई। देखते ही देखते हाईवे पर लंबा जाम लग गया। घटना के दौरान एक लग्जरी कार भी बोर्ड की चपेट में आ गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। जाम के कारण एक एंबुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। हाईवे पर जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सामान्य कराने के प्रयास शुरू किए।
पुलिसकर्मियों के साथ टोल प्लाजा के कर्मचारियों और कुछ यात्रियों ने भी सड़क पर गिरे बोर्ड को हटाने में सहयोग किया। काफी मशक्कत के बाद बोर्ड को सड़क से हटाया गया और धीरे-धीरे वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवाओं के दौरान इस प्रकार के बड़े बोर्ड और होर्डिंग्स लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय
इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम पर बनी सहमति

वॉशिंगटन, 4 जून: इजरायल और लेबनान ने वॉशिंगटन में दो दिनों तक चली अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत के बाद युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने आगे भी सीधे बातचीत जारी रखने और सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने का वादा किया है, ताकि दक्षिणी लेबनान में किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की वापसी रोकी जा सके।
यह समझौता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश विभाग में हुई अमेरिका, इजरायल और लेबनान की चौथी उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक के बाद सामने आया।
इस फैसले की घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डैन हॉलर ने कहा, “अमेरिका के नेतृत्व में हुई बातचीत के नतीजे के तौर पर इजरायल और लेबनान ने युद्धविराम लागू करने पर सहमति दी है।”
तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह युद्धविराम इस शर्त पर लागू होगा कि “हिज्बुल्लाह की ओर से पूरी तरह से गोलीबारी बंद हो और उसके सभी लड़ाके दक्षिण लिटानी क्षेत्र से हट जाएं।”
यह भी तय हुआ है कि जल्द ही कुछ ‘पायलट जोन’ बनाए जाएंगे, जहां लेबनान की सेना पूरी तरह नियंत्रण संभालेगी।
डैन हॉलर ने कहा, “दोनों पक्षों ने अमेरिका के मार्गदर्शन में इस बात पर सहमति दी है कि ऐसे पायलट जोन जल्दी बनाए जाएंगे, जहां लेबनानी सेना पूरी तरह नियंत्रण रखेगी और किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं होगी।”
बयान में कहा गया कि ये कदम आगे चलकर दोनों देशों के बीच ‘एक व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते’ की स्थिति बनाने में मदद करेंगे।
तीनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और लेबनान के भविष्य के रिश्ते उनकी अपनी सरकारों की ओर से तय किए जाने चाहिए, किसी बाहरी ताकत की ओर से नहीं।
डैन हॉलर ने कहा कि सभी देशों ने इस बात की पुष्टि की कि इजरायल और लेबनान के भविष्य के संबंध दोनों संप्रभु सरकारों की ओर से तय किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश या गैर-सरकारी ताकत को लेबनान के भविष्य को बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इजरायल और लेबनान ने अपने बयान में कहा कि उनके बीच ‘कोई शत्रुता का इरादा नहीं है’ और उन्होंने सीधे बातचीत जारी रखने का वादा किया है, ताकि भरोसा बढ़ाया जा सके, पुराने विवाद सुलझाए जा सकें और एक बड़े समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
प्रतिनिधियों ने एक सुरक्षा ढांचे पर भी चर्चा की, जो 29 मई को पेंटागन में हुई बातचीत पर आधारित है। इसका मकसद दोनों देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करना है। इसमें ‘गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को खत्म करना और उनकी वापसी रोकना’ भी शामिल है।
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित रहा।
वॉशिंगटन ने लेबनान की सेना को समर्थन जारी रखने का भी वादा किया, ताकि वह पूरे देश में अपना नियंत्रण मजबूत कर सके। डैन हॉलर ने कहा कि अमेरिका ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दो जून वाले बयान को भी दोहराया, जिसमें कहा गया था कि ‘हिज्बुल्लाह सिर्फ इजरायल का नहीं, बल्कि अमेरिका और लेबनान का भी दुश्मन है।’
इजरायल ने दोहराया कि उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब ‘हिज्बुल्लाह का हथियार खत्म किया जाए और उसके पूरे ढांचे को लेबनान में पूरी तरह खत्म किया जाए।’
वहीं लेबनान ने कहा कि वह ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के आपसी सम्मान’ को जरूरी मानता है और ‘क्षेत्रीय अखंडता और पूरी तरह से संप्रभुता’ के सिद्धांतों पर जोर देता है। बेरूत ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के सहयोग से अपनी सेना की क्षमता बढ़ाएगा, ताकि पूरे देश में प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
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