राजनीति
भारत ने पाकिस्तान के साथ प्रत्यक्ष युद्ध जीते हैं और परोक्ष युद्ध भी जीतेंगे: राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ सीधे युद्ध जीते हैं और अब परोक्ष युद्ध भी जीतेंगे। राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां इंडिया गेट पर भारत- पाकिस्तान के 1971 के युद्ध की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘स्वर्णिम विजय पर्व ‘ समारोह का उद्घाटन करने के मौके पर कहा 1971 के युद्ध में शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान अब अघोषित युद्ध कर रहा है और आतंकवाद तथा अन्य भारत विरोधी गतिविधियों के जरिए देश के शांतिपूर्ण माहौल में व्यवधान पैदा करना चाहता है। भारतीय सेनाओं ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया था और अब आतंकवाद को जड़ से मिटाने का काम जारी है। हम उसके साथ सीधा युद्ध जीत चुके हैं और परोक्ष युद्ध में भी हमारी विजय ही होगी।
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की कट्टर भारत विरोधी भावना का जिक्र करते हुए कहा भारत के खिलाफ पाकिस्तान की कठोर भावना को इस तरीके से समझा जा सकता है कि वह अपनी मिसाइलों के नाम भी उन हमलावरों के नाम पर रखता है जिन्होंने भारत पर हमले किए थे और इनके नाम गौरी, गजनबी, अब्दाली रखे गए हैं जबकि भारत ने अपनी मिसाइलों के नाम आकाश, पृथ्वी और अग्नि रखे हैं और हाल ही में हमने अपनी एक मिसाइल का नाम संत रखा है।
उन्होंने 11 दिसंबर को हेलीकॉप्टर लांचर स्टैंड- ऑफ एंटी टैंक नाशक मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)को बधाई दी है। इसे डीआरडीओ ने स्वदेशी तौर पर विकसित किया है।
उन्होंने कहा कि दो विश्व युद्धों के बाद 1971 का भारत- पाकिस्तान का युद्ध काफी निर्णायक था। वह युद्ध हमें बताता है कि धर्म के आधार पर भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक भूल था और पाकिस्तान का उदय धर्म के नाम पर
ही हुआ था लेकिन वह एक नहीं रह सका है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि 1971 का युद्ध भारत की नैतिकता और लोकतांत्रिक परंपराओं को एक उत्कृष्ट उदाहरण है और ऐसा इतिहास में बहुत ही कम देखा जाएगा कि किसी देश को युद्ध में हराने के बाद दूसरा देश उस पर अपना प्रभुत्व नहीं सौंपता है लेकिन अपने राजनीतिक प्रतिनिधि को सत्ता सौंप देता है और भारत ने भी यही किया था क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया और न ही किसी देश की एक भी इंच जमीन पर कब्जा किया।
उन्होंने बंगलादेश में लोकतंत्र की स्थापना में भारत के योगदान का जिक्र किया और यह भी कहा कि पिछले 50 वर्षों में उसने काफी प्रगति की है जो पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि उस समय के पूर्वी पाकिस्तान में लोगों और महिलाओं पर हो रही ज्यादतियां पूरी मानवता के लिए खतरा थी और उन लोगों को अन्याय तथा शोषण से मुक्ति दिलाना भारत का कर्तव्य था।
उन्होंने उस युद्ध में भारत की जीत सुनिश्वित करने वाले जाबांज वीरों तथा शहीदों का जिक्र करते हुए कहा कि देश हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।
उन्होंने देश के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक बहादुर सैनिक , बेहतर सलाहकार और बेहतरीन इंसान थे।
इस कार्यक्रम की परिणिति पूरे वर्ष की विजयी ज्योति की यात्रा के समापन के साथ होगी और इस स्वर्णिम विजय मशाल ने देश के कोने कोने की यात्रा की है तथा इस दौरान उस युद्ध में शहीद हुए जवानों के गांवो की मिट्टी के नमूने भी एक त्र किए गए। इसका मशाल यात्रा का समापन 16 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली में एक भव्य समारोह में किया जाएगा।
महाराष्ट्र
वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविज़न के तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) 30 जून और 29 जुलाई, 2026 के बीच घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।

मुंबई। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के निर्देशों के अनुसार, मुंबई रीजन (मुंबई शहर और उपनगर) में एक स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) ऑफ़ इलेक्टोरल रूल्स प्रोग्राम लागू किया जा रहा है। इसके तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) 30 जून से 29 जुलाई, 2026 के बीच घर-घर जाकर काम करेंगे। डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे ने वोटर्स से अपील की है कि वे संबंधित बीएलओएस को ज़रूरी जानकारी देकर सहयोग करें।
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) ऑफ़ इलेक्टोरल रूल्स प्रोग्राम के तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) घर-घर जाकर वोटर्स को उनके एन्यूमरेशन फ़ॉर्म देंगे। फ़ॉर्म में ज़रूरी जानकारी भरनी होगी, साइन करने होंगे और एक कॉपी Bबीएलओएस को वापस करनी होगी। गृह भ्रमण से पहले, यदि संभव हो तो, मतदाताओं को https://voters.eci.gov.in वेबसाइट या ईसी नेट ऐप पर पिछली मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) में अपने या अपने माता-पिता का विवरण (नाम, निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता सूची भाग संख्या, क्रम संख्या) खोजना चाहिए। हालांकि, अगर आपका या आपके माता-पिता का नाम पिछली मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) में नहीं है, तो आपको निम्नलिखित दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना चाहिए: जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, कक्षा 10 (मैट्रिक) या शैक्षिक प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी/पेंशनभोगी पहचान पत्र, परिवार प्राधिकरण द्वारा जारी पहचान पत्र, परिवार पंजीकरण के सभी दस्तावेज। सरकार, वन अधिकार प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण का प्रमाण; 1 जुलाई 1987 से पहले बैंक, डाकघर, जीवन बीमा निगम या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र या आधार कार्ड। पिछली वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में अपनी डिटेल्स जानने के लिए, इलेक्शन कमीशन की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं या https://voters.eci.gov.in/searchInSIR/S2UA4DPDF-JK4QWODSE लिंक पर क्लिक करें। ज़्यादा जानकारी के लिए, पास के वोटर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के ऑफिस या हेल्पलाइन नंबर 1800 22 1850 पर संपर्क करें और वोटर लिस्ट के रिवीजन को सफल बनाएं।
राष्ट्रीय समाचार
ब्रिटेन की संसद में पहुंचने वाले पहले भारतीय थे दादाभाई नैरोजी, लड़कियों के लिए खोला था स्कूल

महान स्वतंत्रता सेनानी और ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाने जाने वाले दादाभाई नैरोजी का निधन 30 जून 1917 को बंबई (मुंबई) में हुआ था। वे देश के प्रसिद्ध राजनेता, उद्योगपति, शिक्षाविद और विचारक थे। देश की संपत्ति को अंग्रेजों की ओर से लूटकर ब्रिटेन ले जाने का खुलासा दादाभाई नैरोजी ने किया था।
4 सितंबर 1825 को एक पारसी परिवार में जन्मे दादाभाई नैरोजी भारतीय राजनीति में बौद्धिकता के स्तंभ माने जाते थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई एलफिंस्टन इंस्टीट्यूट स्कूल में हुई। उनको बड़ोदरा के महाराजा का संरक्षण मिला था और इस रियासत में उन्होंने दीवान के रूप में भी काम किया। दादाभाई नैरोजी ने एक प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। उनकी पहचान एक समाज सुधारक के तौर पर भी की जाती है।
उन्होंने वर्ष 1849 में लड़कियों के लिए स्कूल खोला था, तब उनको रूढ़ीवादी पुरुषों के विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि उनमें अपनी बात को रखने की अद्भुत कला थी और वे हवा के रूख को मोड़ना जानते थे। पांच वर्ष के भीतर ही उनकी ओर से खोले गए स्कूल में छात्राओं की संख्या में कापी बढ़ोतरी हो गई थी। इसके बाद उन्होंने लैंगिग समानता की मांग उठाई थी।
वर्ष 1855 में दादाभाई नैरोजी ने जब पहली बार ब्रिटेन की यात्रा की तो वहां की समृद्धि देखकर स्तब्ध हो गए थे। उन्होंने समझने की कोशिश की कि उनका देश यानी भारत, इतना पिछड़ा क्यों है? तब उन्होंने दो दशक आर्थिक विश्लेषण की शुरुआत की थी। उनकी ब्रिटिश संसद में पहुंचने की महत्वाकांक्षा देश की गरीबी थी।
दादाभाई नैरोजी ब्रिटेन में भारतीयों की आवाज बने। बतौर राजनेता वह वर्ष 1892 से लेकर 1895 तक यूके हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसद थे। वे भारतीयों की परेशानियों को ब्रिटिश सरकार और वहां की जनता तक पहुंचाते थे। दादाभाई नैरोजी ने ब्रिटेन में महिलाओं के अधिकार सहित कई मुद्दों को जोरों से उठाया था। भारत दादाभाई नैरोजी के योगदान को हमेशा याद करता है और देश उनका ऋणी है।
महाराष्ट्र
सपा नेता अबू आसिम ने मुहर्रम जुलूस के दौरान ज़हरीली गोली से जानलेवा घटना की जांच की मांग की है और बिगड़ती कानून-व्यवस्था व अशांति पर चिंता जताई है।

मुंबई; सीनियर एसपी लीडर अबू आसिम आज़मी ने आज मुंबई महाराष्ट्र विधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र में बिगड़ते लॉ एंड ऑर्डर पर गहरी चिंता जताई। हाल ही में छेड़छाड़ के विवाद में दो लोगों पर चाकू से हुए हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में चोरी, डकैती, मर्डर और रेप की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, जबकि एडमिनिस्ट्रेशन कोई एक्शन नहीं ले रहा है। आज़मी ने मांग की कि रेप जैसे घिनौने जुर्म में शामिल लोगों को तुरंत फांसी दी जाए ताकि उनमें डर पैदा हो सके। युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के ट्रेंड पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस इसे कंट्रोल करने में पूरी तरह फेल रहे हैं। उन्होंने पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन से अपील की कि मुहर्रम या किसी और मौके पर संदिग्ध केमिकल (जैसे चूहे मारने की दवा या ज़हरीले पदार्थ) के साथ पकड़े जाने वाले आरोपियों के पीछे की बड़ी साज़िश का पर्दाफाश किया जाए। पुलिस ने अपनी ड्यूटी पूरी लगन से की, जिसकी वजह से फैयाज नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसके पीछे इस साज़िश में कौन शामिल था, इसकी भी जांच होनी चाहिए। आज़मी ने एनईटी के बाद टीईटी पेपर लीक होने पर सरकार की आलोचना की और कहा कि सरकार एग्जाम कराने में फेल रही है।
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