अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और मॉरीशस की साझेदारी ऊंची उड़ान भरेगी : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और मॉरीशस के बीच साझेदारी भविष्य में ऊंची उड़ान भरेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त रूप से मॉरीशस के नए सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन किया। इसी मौके पर मोदी ने दोनों देशों के बीच की साझेदारी भविष्य में और मजबूत होने की बात कही।
मॉरीशस के वरिष्ठ सदस्यों और दोनों देशों के अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह वर्चुअल (वीडियो कांफ्रेंस) उद्घाटन कार्यक्रम हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी साझेदारी आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाई छुएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पोर्ट लुइस में नई सुप्रीम कोर्ट इमारत हमारे सहयोग और साझा मूल्यों का प्रतीक है।”
मोदी ने कहा कि भारत और मॉरीशस दोनों हमारी स्वतंत्र न्यायपालिकाओं का सम्मान हमारी लोकतांत्रिक प्रणालियों के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में करते हैं और यह कि यह प्रभावशाली नई इमारत अपने आधुनिक डिजाइन और निर्माण के साथ सम्मान का प्रतीक है।
मोदी ने याद दिलाया, “हमने कुछ महीने पहले संयुक्त रूप से लैंडमार्क मेट्रो परियोजना और एक नए अत्याधुनिक अस्पताल का उद्घाटन किया था। मुझे यह जानकर खुशी है कि ये दोनों परियोजनाएं मॉरीशस के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं।”
मोदी ने कहा कि इतिहास ने हमें सिखाया है कि विकास साझेदारी के नाम पर, राष्ट्रों को निर्भरता साझेदारी में मजबूर किया गया और इसने औपनिवेशिक शासन को जन्म दिया और वैश्विक शक्ति ब्लॉकों को जन्म दिया।
उन्होंने कहा कि भारत विकास साझेदारी बना रहा है, जो भविष्य और सतत विकास के लिए सम्मान, विविधता, देखभाल द्वारा चिह्न्ति है। मोदी ने कहा कि भारत के लिए विकास सहयोग में सबसे बुनियादी सिद्धांत अपने भागीदारों का सम्मान करना रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारियां वाणिज्य से संस्कृति, ऊर्जा से इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य से आवास, आईटी से बुनियादी ढांचा और खेल से लेकर विज्ञान तक विविध हैं और भारत दुनिया भर के देशों के साथ काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर भारत को अफगानिस्तान में संसद भवन में मदद करने के लिए सम्मानित किया जाता है, तो नाइजर में महात्मा गांधी कन्वेंशन सेंटर बनाने से जुड़ा होना भी गर्व की बात है।
उन्होंने कहा, “भारत न केवल आपकी मदद करने में गर्व महसूस करता है, बल्कि हम इसे अपना सौभाग्य भी मानते हैं कि इस मदद से आप अपने युवाओं, अपनी अगली पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद करें। यही कारण है कि प्रशिक्षण और कौशल हमारे विकास सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की इमारत का निर्माण भारतीय अनुदान सहायता के साथ किया गया है और यह कोविड-19 के प्रकोप के बीच पोर्ट लुइस की राजधानी के भीतर पहली भारत-समर्थित बुनियादी ढांचा परियोजना होगी।
नई सुप्रीम कोर्ट इमारत परियोजना 2016 में भारत सरकार द्वारा मॉरीशस तक विस्तारित 35.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर के ‘विशेष आर्थिक पैकेज’ के तहत कार्यान्वित की जाने वाली पांच परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना निर्धारित समय के भीतर और अपेक्षित लागत से कम में पूरी हुई है।
भारत सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि यह इमारत 4,700 वर्गमीटर से अधिक के क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें 10 मंजिल और लगभग 25,000 वर्गमीटर का निर्मित क्षेत्र है। इमारत में थर्मल और ध्वनि इन्सुलेशन और उच्च ऊर्जा दक्षता पर ध्यान देने के साथ आधुनिक डिजाइन जैसी विशेषताएं हैं।
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मेलोनी ने ‘मित्र’ प्रधानमंत्री मोदी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री को ‘मित्र’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “मैं ‘अपने मित्र’ पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देती हूं।”
उनके अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा संपन्न और सफल बने रहने की कामना करते हुए उन्होंने भारत और इटली के बीच गहरी दोस्ती और आपसी सहयोग को आगे भी मजबूत करते रहने की भी बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। अमेरिका से लेकर अफ्रीकी देश अपनी शुभकामनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंचा रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खास संदेश के साथ जन्मदिन की बधाई दी। इसमें उन्होंने भारत-रूस की साझेदारी को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की और ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मिले सम्मान के लिए आभार जताया।
क्रेमलिन ने संदेश का कुछ हिस्सा साझा किया है। पीएम को सम्मानित शख्स बताते हुए लिखा, “आप (पीएम मोदी) अपने देशवासियों और वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक सम्मानित शख्स हैं। भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में आपके व्यक्तिगत योगदान को जितना भी सराहा जाए, कम है।”
रूसी राष्ट्रपति ने हाल ही में दिल्ली में हुई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर) के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी। इसका जिक्र भी संदेश में है। भारत में मिली मेहमाननवाजी की प्रशंसा करते हुए आगे लिखा,” पिछले सप्ताह नई दिल्ली की मेरी यात्रा के दौरान मुझे और रूसी प्रतिनिधिमंडल को मिले गर्मजोशी भरे और स्नेहपूर्ण स्वागत और मेहमाननवाजी के लिए मैं अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं।”
वहीं इजरायली राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि आपके कौशल ने भारत को दुनिया के दमदार देश के तौर पर स्थापित कर दिया है।
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गाजा में इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त बहुमंजिला इमारत गिरी, 11 बच्चों समेत 21 लोगों की मौत

पश्चिमी गाजा शहर में एक रिहायशी इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों में 11 बच्चे और 6 महिलाएं शामिल हैं। इस हादसे में 25 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल ने बताया कि ‘अल-सादा’ नाम की छह मंजिला इमारत बुधवार तड़के ढह गई। यह इमारत पहले इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। यह इमारत निकट पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुख्यालय के पास स्थित थी। इस इमारत में लगभग 100 विस्थापित लोग रह रहे थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बासल ने कहा कि बचाव टीमों ने 16 घंटे तक चले अभियान के दौरान 45 लोगों को सुरक्षित निकाला और 21 शव बरामद किए। उन्होंने बताया कि 35 अन्य लोग खुद ही निकलने में सफल रहे।
इमारत के मलबे के बाहर दर्जनों शोकाकुल परिजन इकट्ठा हुए। कई लोग अपने हाथों से ही मलबा हटाकर अपने प्रियजनों को खोजने की कोशिश करते दिखाई दिए। 54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने इस हादसे में अपने परिवार के लगभग 10 लोगों को खो दिया।
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनों और उपकरणों को लाने पर इजरायल की पाबंदियों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
गाजा में हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। बयान के अनुसार, भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों की कमी के कारण उन्हें निकालना मुश्किल हो रहा है। कार्यालय ने हजारों क्षतिग्रस्त इमारतों को टाइम बम जैसा खतरा बताया।
महमूद बासल ने चेतावनी दी कि सर्दियों के करीब आने के साथ 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और युद्धविराम की गारंटी देने वाले देशों से अपील की कि बचाव उपकरणों को गाजा में आने की अनुमति दिलाई जाए।ऐसा न होने पर ‘कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।’
यह इमारत ऐसे समय में गिरी है जब युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाएं जारी हैं। अक्टूबर 2025 में लागू हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, हमास और इजरायल के बीच चल रही बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
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मक्का के पास ड्रोन हमले पर भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्र में जल्द शांति बहाली की उम्मीद

भारत ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर बुधवार को गहरी चिंता जताते हुए क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में जारी बयान में कहा कि मक्का के पास हुई यह घटना शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए विशेष रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर हमें गहरी चिंता है। भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हमलों और नागरिकों के जीवन तथा बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली हर कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है। मक्का के पास हुई यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इस शहर का अत्यंत पवित्र महत्व है।”
जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होगी।
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस घटना के बाद आया है, जब सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्स ने मंगलवार शाम मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक ड्रोन को मार गिराया।
यमन में वैध सरकार की बहाली के लिए गठित गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने मक्का के दक्षिणी क्षेत्र में इस ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
अल-मालिकी ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने की यह दूसरी कोशिश है। इससे पहले 27 जुलाई 2017 को बैलिस्टिक मिसाइल से भी ऐसा प्रयास किया गया था। उन्होंने इसे “आतंकी और शर्मनाक कृत्य” बताते हुए कहा कि यह दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और उमराह यात्रियों में दहशत फैलाने की कोशिश थी।
उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और उमराह यात्रियों की सुरक्षा “रेड लाइन” है और गठबंधन बल हूती मिलिशिया की ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवश्यक और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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