राजनीति
आतंकवाद पर सरकार ने दिखाई सख्ती, बंदूक और कलम वाले नक्सलवाद की काट जरूरी : नरेंद्र मोदी
हरियाणा के सूरजकुंड में 2 दिवसीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सत्र को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आतंकवाद को लेकर सख्ती दिखा रही है, अब बंदूक वाले नक्सलवाद और कलम वाले नक्सलवाद की काट निकालना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्री और गृह मंत्रियों को संबोधित करते हुए बताया कि आतंकवाद, हवाला और भ्रष्टाचार पर सरकार द्वारा सख्ती दिखाई जा रही है। वहीं आतंकवाद के ग्राउंड नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी राज्य इसकी गंभीरता को समझ रहे हैं। बस इसके लिए एकसाथ मिलकर लड़ाई लड़नी होगी। सभी राज्यों और केंद्र की एजेंसियों में समन्वय जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद पर भी प्रहार करते हुए कहा कि नक्सलवाद के हर फॉर्म को पराजित करना होगा। बंदूक वाले नक्सलवाद को भी और कलम वाले नक्सलवाद को भी। इसकी काट निकालना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये युवा पीढ़ी को भृमित रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैसे हमने नक्सल प्रभावित जिलों पर फोकस किया है, वैसे ही वो अब अपना इंटलेक्च ुअल दायरा उन जगह पर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जहां से वो आने वाली पीढ़ियों में विकृत मानसिकता पैदा कर सकते है। वो समाज में एक खाई पैदा कर सकते हैं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि नक्सलवाद से समझदारी से निपटना होगा। फोर्स को एक्सपर्ट होना होगा। उन्होंने कहा कि इन्हें विदेशों से भी मदद मिलती है। इनका चेहरा मोहरा अलग दिखता है और काम ये अलग करते हैं। सुरक्षा एजेंसियां को इसे समझना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और नार्थ ईस्ट में विकास के चलते उग्रवादी मुख्य धारा में लौट रहे हैं। इसी तरह सीमा सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों को एक दिन बॉर्डर क्षेत्रों में गुजारना चाहिए ताकि वहां की असलियत पता चल सके। अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि शिविर की चर्चा में एक केलक्टिव रोडमैप बनेगा जिसमें सभी लोग मिलकर काम कर सकेंगे।
राजनीति
सीएम विजय ने पुलिस दिवस पर दी बधाई, बोले-कानून-व्यवस्था बनाए रखकर जनसेवा करते हैं पुलिसकर्मी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार को तमिलनाडु पुलिस दिवस पर पुलिसकर्मियों को बधाई दी। उन्होंने राज्य भर में शांति बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा करने और कानून का शासन बनाए रखने में उनके साहस, बलिदान और समर्पण की सराहना की।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, सीएम विजय ने कहा कि यह दिन 1859 में मद्रास डिस्ट्रिक्ट पुलिस एक्ट (मद्रास जिला पुलिस अधिनियम) के लागू होने की याद दिलाता है। यह एक ऐतिहासिक कदम था जिसने इस क्षेत्र में एक आधुनिक और संगठित पुलिस बल की स्थापना का रास्ता साफ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी अपराध को रोककर और कानून-व्यवस्था बनाए रखकर एक बहुत जरूरी जनसेवा करते हैं। उनकी जिम्मेदारियां केवल रोजमर्रा के पुलिसिंग कार्यों से कहीं ज्यादा हैं, खासकर तब जब समुदाय आपातकालीन स्थितियों, खतरनाक हालात या प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हों।
सीएम विजय ने कहा कि पुलिस अधिकारी खुद की परवाह किए बिना लोगों की जान, संपत्ति और अधिकारों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सेवा करते हुए उनकी बहादुरी और बलिदान समाज से हमेशा सम्मान और सराहना पाने के हकदार हैं।
पुलिस बल के सभी सदस्यों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक शांति सुनिश्चित करने और कानून के शासन को मजबूती से स्थापित करने के लिए उनका निस्वार्थ काम बहुत जरूरी है। पुलिसकर्मी अक्सर मुश्किल हालात में कठिन कर्तव्यों का पालन करते हैं और उन पर बड़ी पेशेवर जिम्मेदारियां होती हैं।
सीएम विजय ने कहा कि उनकी सरकार पुलिसकर्मियों के काम के बोझ को कम करने वाले उपायों को प्राथमिकता देगी। सरकार पुलिस बल को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस करके उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश भी करेगी, ताकि अधिकारी बदलती पुलिसिंग जरूरतों और सार्वजनिक सुरक्षा चुनौतियों का ज्यादा प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए जरूरी कल्याणकारी कार्यक्रम उपलब्ध हों।
पुलिस दिवस के संदेश में इन प्रतिबद्धताओं को प्रशासन की उस व्यापक जिम्मेदारी के हिस्से के तौर पर पेश किया गया, जिसका मकसद कानून लागू करने की व्यवस्था को मजबूत करते हुए बल का समर्थन करना है। बेहतर तकनीक, काम का सही बोझ और परिवार के कल्याण के भरोसेमंद उपायों से पुलिसकर्मियों को ज्यादा प्रभावशीलता और आत्मविश्वास के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सीएम विजय ने तमिलनाडु भर में सेवा कर रहे पुलिसकर्मियों को सलाम करते हुए और सामान्य समय के साथ-साथ संकट के समय में भी समुदायों की सुरक्षा में उनकी भूमिका को मान्यता देते हुए अपनी बात समाप्त की।
उन्होंने अधिकारियों को उनकी अटूट जनसेवा के लिए धन्यवाद किया और कहा कि उनकी निरंतर सेवा सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिकों की सुरक्षा और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
आईआरजीसी का दावा-ईरान ने किए जवाबी हमले, तीन तेल टैंकरों और अन्य जहाजों को बनाया निशाना

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने शनिवार को अमेरिकी हमले के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों और अन्य क्षेत्रों में अमेरिका से जुड़े तीन जहाजों को निशाना बनाया।
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार मंच सेपाह न्यूज पर जारी एक बयान में नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जिन तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे ‘अनधिकृत’ मार्ग से गुजर रहे थे। बयान में कहा गया कि बाकी तीन जहाजों पर अन्य इलाकों में हमला किया गया।
नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद सभी जहाजों से अपील की कि वे अमेरिकी सेना के बहकावे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से बचें। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज ‘अनधिकृत’ मार्गों से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है।
इससे पहले शनिवार को ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी ने खबर दी थी कि ईरान के दक्षिणी तटों के पास तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया।
घटना के बाद ईरान की प्रमुख सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघारी ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह ईरानी जहाजों पर हमले और देश के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी जारी न रखे।
जोल्फघारी ने ईरानी मीडिया में जारी एक बयान में कहा, “अगर ईरानी जहाजों के खिलाफ दुश्मनी, असुरक्षा पैदा करने वाली कार्रवाइयां और उन्हें परेशान करना जारी रहा, साथ ही ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी भी जारी रही, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाएं क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों पर पहले से भी ज्यादा कड़े हमले कर सकती हैं। साथ ही इन कार्रवाइयों के और बढ़ने की भी संभावना है।”
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना जल्द ही ईरान के ‘पिकऐक्स माउंटेन’ को निशाना बना सकती है। यह एक मजबूत सुरक्षा वाला क्षेत्र है, जो ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास स्थित है। हालांकि ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को कम महत्व देते हुए इसे ‘बहुत छोटी बात’ भी बताया।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द पिकऐक्स पर हमला कर सकते हैं।” उन्होंने उस भूमिगत सुविधा का जिक्र किया, जहां अमेरिका के अनुसार ईरान ने अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का कुछ भंडार स्थानांतरित किया है।
साथ ही ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही स्थिति को युद्ध नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह एक सैन्य संघर्ष है, लेकिन बीच-बीच में होने वाला संघर्ष है।” हालांकि ट्रंप पहले कई बार इस स्थिति को ‘युद्ध’ भी कह चुके हैं, जबकि कुछ मौकों पर उन्होंने इस शब्द के इस्तेमाल से बचने की कोशिश की है।
ट्रंप ने कहा, “मैं इसे सैन्य संघर्ष कहता हूं क्योंकि हमारे लिए यह बहुत छोटी बात है। यह कोई बड़ी चीज नहीं है।”
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान ने अमेरिका या इजरायल से जुड़े जहाजों के वहां से गुजरने पर रोक लगा दी थी। वहीं अमेरिकी बलों ने भी ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विऔपनिवेशीकरण का मतलब व्यापक अभिलेखागार, अधिक भाषाएं और कठिन सवाल होना चाहिए: वित्त मंत्री सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत अब आत्मविश्वास से भरा हुआ है और अपनी विरासत का अध्ययन करने एवं उसे समझने के लिए किसी और की अनुमति का इंतजार नहीं करता है। साथ ही, उन्होंने देश के बौद्धिक इतिहास को समझने के लिए अधिक व्यापक और कठोर दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय राजधानी में एफआईएचसीआर वार्षिक इतिहास पुरस्कार समारोह और डॉ. एसएल भैरप्पा स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारत अपने शिलालेखों का फिर से अध्ययन कर रहा है, अपने समुद्री व्यापार के इतिहास को समझ रहा है और गणित के क्षेत्र में अपने योगदान की ओर लौट रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया ही विऔपनिवेशीकरण का सार होनी चाहिए, जिसका मतलब केवल एक निर्धारित पाठ्यपुस्तक को दूसरी पाठ्यपुस्तक से बदल देना नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “इसका मतलब व्यापक अभिलेखागार, अधिक भाषाएं, कठिन सवाल और ऐसे विद्वानों का कहीं बड़ा दायरा होना चाहिए, जिनकी बात वास्तव में सुनी जाए।”
कन्नड़ लेखक और विचारक डॉ. एसएल भैरप्पा के योगदान पर विचार करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी अपने अनुयायियों की सेना खड़ी करने की कोशिश नहीं की, बल्कि इस बात पर ध्यान दिया कि इंसान सत्य को देखने और समझने के अपने तरीके को कैसे बेहतर बना सकता है।
भैरप्पा के दार्शनिक विचार “सत्य मत्तु सौंदर्य”, जिसका अर्थ सत्य और सुंदरता है, का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसी प्राचीन सभ्यता के लिए बौद्धिक खोज और चिंतन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
वित्त मंत्री सीतारमण ने इस प्रक्रिया को “बौद्धिक स्वराज का एक कार्य” बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता ने भारतीयों को स्वयं शासन करने का अधिकार दिया, जबकि बौद्धिक स्वतंत्रता उन्हें खुद को जानने का अधिकार देगी।
वित्त मंत्री ने कहा, “यह सार्थक है कि भारत डॉ. एसएल भैरप्पा का सम्मान कर रहा है। उनकी डॉक्टरेट थीसिस का शीर्षक ‘सत्य मत्तु सौंदर्य’ ही उनके पूरे जीवन की दिशा को परिभाषित करता था।”
उन्होंने कहा, “इस मंथन को जारी रहने दें और प्रमाण, कठोरता तथा अंतरात्मा को अंतिम निर्णय देने दें।” उन्होंने कहा कि भारत को सामूहिक रूप से “बौद्धिक स्वराज के स्वर्णिम युग” की ओर बढ़ना चाहिए।
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