अंतरराष्ट्रीय समाचार
मोदी ने मॉरीशस सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन किया, चीन की आलोचना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मॉरीशस सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत का अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ विकास सहयोग बिना शर्त और बिना किसी प्रतिदान के होता है। मॉरीशस सुप्रीम कोर्ट की इमारत राजधानी पोर्ट लुइस में भारत से सहायता प्राप्त पहली बुनियादी ढांचा परियोजना है। विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि भारत सरकार ने इसके लिए 2.812 करोड़ अमरीकी डालर की सहायता दी और कोविड महामारी के बीच परियोजना पूरी हो गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ के साथ संयुक्त रूप से इमारत का उद्घाटन किया।
मोदी ने अपने वीडियो संबोधन में कहा, “भारत का विकास सहयोग किसी शर्त से बंधा नहीं होता और ना ही यह किसी भी राजनीतिक या वाणिज्यिक विचारों से प्रभावित होता है।”
बिना शर्त विकास सहयोग की यह बात चीन के संदर्भ में थी जिसे विदेश में अपनी सभी विकास परियोजनाओं में शोषणकारी और साम्राज्यवादी माना जाता है।
मोदी ने कहा, “विकास सहयोग का मुख्य सिद्धांत हमारे सहयोगियों के लिए सम्मान है और केंद्रीय प्रेरणा हमारे विकास अनुभवों को साझा करना है।” उन्होंने कहा कि मॉरीशस के साथ विकास सहयोग, भारत की विकास साझेदारियों के केंद्र में है।
प्रधानमंत्री ने भारत के विकास सहयोग के अंतर्निहित दर्शन के रूप में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करते हुए भारत और मॉरीशस के बीच घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत बनाने में जनोन्मुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने जोर दिया कि ‘सम्मान’, ‘विविधता’, ‘भविष्य की देखभाल’ और ‘सतत विकास’ के मुख्य मूल्य भारतीय विकास सहयोग को स्पष्ट करते हैं।
मोदी ने कहा कि आधुनिक डिजाइन और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ नया सुप्रीम कोर्ट भवन मॉरीशस न्यायपालिका के लिए एक उपयुक्त मंच और भारत और मॉरीशस के साझा मूल्यों व सहयोग का प्रतीक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना निर्धारित समय पर और प्रारंभिक अनुमानों से नीचे की लागत पर पूरी हो गई।
प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने परियोजना के लिए भारत के समर्थन पर गहरा आभार जताया। उन्होंने कहा कि इसने दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग के करीबी संबंधों को प्रतिबिंबित किया। उन्होंने पीएम मोदी से कहा, “हमारा देश, हमारे लोग आपके समर्थन के लिए आभारी हैं।”
इस साल मार्च में मोदी के प्रयागराज भाषण का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने कहा कि उनकी सरकार भी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास में यकीन रखती है।
उन्होंने कहा, “आज का यह आयोजन हमारे लोगों के कल्याण के लिए आधुनिकीकरण के प्रयास के प्रति हमारे दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता की गहराई को दर्शाता है। यह हमारे लिए पवित्र है और मुझे पता है, मोदी जी, कि हम दोनों इस दर्शन को साझा करते हैं।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और यूएई ने ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा की

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी के साथ बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और अधिक सुदृढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान, मिस्री और अल हाशमी ने पश्चिम एशिया घटनाक्रम और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूएई की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी से मुलाकात की। उन्होंने भारत-यूएई संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”
इससे पहले, भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने आधिकारिक दौरे पर यूएई पहुंचे विक्रम मिस्री का स्वागत किया।
20 अक्टूबर को, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मुंबई में एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। बैठक के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय (एमईए) में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
बाद में विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, “यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। हमारे सहयोग का दायरा और महत्वाकांक्षा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई देती है। भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”
वहीं, यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर बैठक के बारे में जानकारी साझा की। लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”
शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का यह भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा के बाद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका चीन और रूस की जासूसी ‘और भी बेहतर’ तरीके से करता है : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को अपने मध्यावधि चुनाव प्रचार अभियान का समापन किया। ईरान पर अमेरिकी हमले का बचाव किया, तेल की कीमतों को लेकर अपना पक्ष रखा और चीन -रूस की जासूसी को लेकर भी बड़ा बयान दिया। दावा किया कि अमेरिका ये काम उनसे कहीं बेहतर तरीके से करता है।
आयोवा के डुबुक में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने चीन और रूस की जासूसी को लेकर जताई गई चिंताओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसी ने मुझसे कहा कि चीन हमारी जासूसी कर रहा है। मैंने कहा, हां और हम भी उनकी जासूसी कर रहे हैं। इस बारे में चिंता न करें।”
उन्होंने आगे कहा, “चीन और रूस हमारी जासूसी कर रहे हैं। मैंने कहा, यह सच है। और हम भी उनके साथ ऐसा ही कर रहे हैं। लेकिन हम उनसे कहीं बेहतर तरीके से ऐसा करते हैं। इसलिए, इस बात की चिंता न करें।”
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब न तो कोई सैन्य क्षमता बची है और न ही बातचीत करने के लिए कोई नेता। उन्होंने कहा, “हमने इसकी शुरुआत नहीं की थी, लेकिन हम इसे खत्म कर रहे हैं। हम उनकी अच्छे से धुनाई कर रहे हैं।”
ट्रंप ने कहा, “उनके पास न तो रडार है, न ही विमान-रोधी हथियार और न ही कोई नेता। शायद हम नेताओं के मामले में कुछ ज्यादा ही आगे निकल गए हैं (इसका मतलब शीर्ष ईरानी नेतृत्व की हमलों में मौत से है), अब बात करने के लिए कोई बचा ही नहीं है। मैं किसी ऐसे व्यक्ति को खोजने की कोशिश कर रहा हूं जिससे बात की जा सके, लेकिन कोई भी राष्ट्रपति नहीं बनना चाहता।”
डुबुक में दो घंटे से कुछ अधिक समय तक बोलने के बाद, ट्रंप अपने मध्यावधि (मिडटर्म) अभियान की आखिरी रैली के लिए कंसास के सलीना रवाना हो गए।
सलीना की रैली में, ट्रंप ने फिर से अर्थव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “पिछले तीन महीनों में आपकी महंगाई दर 1.7 प्रतिशत तक गिर गई है। मुझे ‘स्लीपी’ (सुस्त) जो बाइडेन से विरासत में ऊंची कीमतें मिली थीं; मैंने ये कीमतें नहीं बढ़ाईं।”
उन्होंने कहा, “मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि “तेल की कीमतें बाइडेन और बराक हुसैन ओबामा के समय की तुलना में काफी कम हैं।”
ट्रंप ने ईंधन की ऊंची कीमतों को “इस देश और दुनिया की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी कीमत” बताते हुए कहा, “जब यह संघर्ष खत्म हो जाएगा, तो कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी।”
अमेरिका में मंगलवार को मतदान होगा, जिसमें हाउस (प्रतिनिधि सभा) और सीनेट पर नियंत्रण दांव पर लगा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
हूती के खिलाफ सऊदी गठबंधन का अभियान, दावा- अहम सैन्य संसाधनों को किया तबाह

यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा है कि उसने हूती गुट के महत्वपूर्ण संसाधनों को निष्क्रिय करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है।
गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “अभियान रविवार सुबह चलाया गया। यह कदम सऊदी अरब और यमन में नागरिकों और नागरिक ठिकानों पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के जवाब में उठाया गया था।”
अल-मल्की ने बताया कि हूती विद्रोही इन संसाधनों का इस्तेमाल अपने युद्ध प्रयासों को समर्थन देने और अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कर रहे थे, खासकर अपने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों के लिए।
समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के अनुसार, उन्होंने इस अभियान की जगह या इसके नतीजों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
इसके अलावा, रविवार को यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में स्थानीय निवासियों और एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि शहर में एक सरकारी सैन्य ठिकाने के पास हूती मिसाइल गिरी, जिससे एक जोरदार धमाका हुआ।
अपना नाम न बताने की शर्त पर ‘सिन्हुआ’ से बात करते हुए अधिकारी ने बताया कि मिसाइल पश्चिमी अदन के अल-बुरैका जिले में उस सैन्य ठिकाने के पास गिरी, जिसका इस्तेमाल सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना कर रही थी। इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज कई इलाकों तक सुनाई दी। हूती समूह ने इस हमले पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।
अदन, जो यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का अस्थायी मुख्यालय है, हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आ गया है।
यमन 2014 के आखिर से ही संघर्ष में उलझा हुआ है। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमनी सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप किया।
पिछले हफ्ते, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने ‘एक्स’ पर लिखा कि हूती समूह द्वारा भेजे गए एक ड्रोन को मक्का क्षेत्र में रोककर नष्ट कर दिया गया। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है।
हालांकि, हूती समूह ने सऊदी अरब पर किसी भी तरह का हमला करने से इनकार किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में, हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने मक्का के ऊपर ड्रोन रोके जाने के सऊदी अरब के दावे को खारिज करते हुए इसे “झूठा” बताया।
सरिया ने कहा कि उनके समूह ने शुक्रवार को “सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई अभियान नहीं चलाया।”
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