राष्ट्रीय समाचार
चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देश की विकास दर बढ़ने की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 11 जनवरी। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल पेमेंट, बिजली की मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों, हवाई यात्रियों की संख्या, बढ़ते टोल और जीएसटी कलेक्शन जैसे सकारात्मक सूचकांकों के साथ चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देश की विकास दर बढ़ने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि क्षेत्र में 3.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 1.4 प्रतिशत थी। अब तक, रबी की बुवाई पिछले साल की तुलना में अधिक रही है और यह कृषि विकास के लिए अच्छा संकेत है।
वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में जीएसटी कलेक्शन में भी 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो उपभोग मांग में तेजी का संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार, कृषि की बेहतर संभावनाओं से ग्रामीण मांग को बढ़ावा मिलेगा, जबकि शहरी मांग में भी सुधार के संकेत मिलते हैं। दिसंबर 2024 में मुद्रास्फीति में कमी आई और आने वाले महीनों में इसमें और कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, रुपये का अवमूल्यन एक प्रमुख जोखिम है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तहत अमेरिकी नीतियों पर अधिक स्पष्टता होने तक वैश्विक और घरेलू फाइनेंशियल सिस्टम में कुछ हद तक अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है। हम 2025 में भारत की विकास संभावनाओं को लेकर आशावादी बने हुए हैं।”
कुछ हाई फ्रिक्वेंसी सूचकांकों ने डिजिटल पेमेंट, बिजली की मांग, इलेक्ट्रॉनिक आयात और फर्टिलाइजर बिक्री में वृद्धि के साथ मांग में तेजी का संकेत दिया है।
हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि त्योहारों के बाद की इन्वेंट्री और सीमित नए लॉन्च के कारण यात्री वाहनों की कुल बिक्री कम रही।
ग्रामीण फ्रंट पर, नकदी प्रवाह के मुद्दों और ईवी बाजार की ओर रुख के कारण दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी भारी गिरावट देखी गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष रूप से पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, निजी खपत वृद्धि वित्त वर्ष 2023-24 के चार प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में 7.3 प्रतिशत रहेगी, जिससे आने वाले महीनों में स्थिर वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।
इसमें यह भी बताया गया है कि नवंबर 2024 तक (12 मनी मार्केट अकाउंट के आधार पर) केंद्र का राजकोषीय घाटा 5.1 प्रतिशत पर स्थिर था। मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर 2024 तक कुल व्यय में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर 2024 में भी उसी स्तर पर थी।
राजस्व व्यय की वृद्धि अक्टूबर 2024 तक 8.7 प्रतिशत थी जो नवंबर 2024 तक के आंकड़े में घटकर 7.8 प्रतिशत रह गई। वहीं, इस दौरान पूंजीगत व्यय की गिरावट की दर कम हुई।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि आय के मामले में, नवंबर 2024 तक केंद्र की शुद्ध राजस्व वृद्धि भी 8.7 प्रतिशत पर स्थिर रही। प्रत्यक्ष कर संग्रह में सुधार हुआ (11.1 प्रतिशत के मुकाबले 12.1 प्रतिशत), जबकि अप्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि थोड़ी धीमी हुई (10.5 प्रतिशत के मुकाबले 9.2 प्रतिशत) जबकि गैर-कर संग्रह स्थिर रहा।
खेल
विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई डब्ल्यूएफआई को फटकार

भारत की महिला रेसलर विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहना है कि देश में मातृत्व का सम्मान होता है और डब्ल्यूएफआई के पुराने सिलेक्शन मानदंडों से हटना बहुत कुछ कहता है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह विनेश के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाकर उनका मूल्यांकन करे और आगामी एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करे। विनेश मैटरनिटी ब्रेक के बाद वापसी कर रही हैं।
गौरतलब है कि डब्ल्यूएफआई ने विनेश को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा था, जिसमें उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चार सवालों के जवाब मांगे थे। इसके साथ ही डब्ल्यूएफआई ने विनेश के किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में शामिल होने पर 26 जून, 2026 तक रोक लगा दी थी।
डब्ल्यूएफआई के इस फैसले की वजह से विनेश नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। विनेश ट्रायल की अनुमति मांगने के लिए डब्ल्यूएफआई के पास पहुंची थीं, लेकिन उनकी अपील को नजरअंदाज कर दिया गया था।
डब्ल्यूएफआई ने विनेश की नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट के ट्रायल में शामिल होने की अपील यह कहकर ठुकरा दी थी कि उनके खिलाफ वाडा के 5.6.1 नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है। डब्ल्यूएफआई के अनुसार, इस नियम के मुताबिक संन्यास से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को किसी भी टूर्नामेंट में खेलने से पहले कम से कम छह महीने तक का नोटिस पूरा करना जरूरी होता है।
इसके बाद विनेश ने कोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए एशियन गेम्स के लिए 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में शामिल होने की अपील की थी। विनेश ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के बाद कोर्ट से इस मामले में दखल देने की गुजारिश की थी। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई में कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि वह डब्ल्यूएफआई का पक्ष सुने बिना कोई भी निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
आरबीआई इस साल सरकार को देगी रिकॉर्ड डिविडेंड, भुगतान 2.8-3.3 लाख करोड़ रुपए के बीच होने की उम्मीद

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सेंट्रल बोर्ड शुक्रवार को संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत सरकार को सरप्लस फंड्स के ट्रांसफर को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस साल डिविडेंड पिछले वर्ष के 2.69 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड भुगतान को पार कर जाएगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा और ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का अनुमान है कि डिविडेंड 2.8 लाख करोड़ रुपए से 3.3 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा।
गैर-कर राजस्व में होने वाली यह अप्रत्याशित वृद्धि सरकार के वित्त को मजबूत करेगी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार से अधिक ऋण लिए बिना राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने में सहायक होगी।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों और केंद्रीय बैंक से 3.16 लाख करोड़ रुपए डिविडेंड की उम्मीद जताई थी। पिछले साल, आरबीआई ने 2.68 लाख करोड़ रुपए डिविडेंड के रूप में सरकार को दिए थे। इसमें पिछले साल की अपेक्षा 27 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोरा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आरबीआई का डिविडेंड इस वर्ष 2.8 लाख करोड़ रुपए से 3.3 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा, जो पूंजी के उपयोग के स्तर पर निर्भर करेगा। उच्च ब्याज आय और संभावित रूप से कम बफर आवश्यकता के चलते पिछले वर्ष के 2.7 लाख करोड़ रुपए के डिविडेंड की तुलना में अधिक डिविडेंड देने में सहायक हो सकती है।”
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस का अनुमान है कि इस वर्ष डिविडेंड 3-3.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा, जिसका मुख्य कारण कंटीजेंसी बफर आवश्यकता में कमी है। उन्होंने कहा कि 2025-26 के सरप्लस के कारक 2024-25 से भिन्न होंगे, जब विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग से अधिक आय के कारण आरबीआई के डिविडेंड में भारी वृद्धि हुई थी।
सबनाविस ने बताया, “पिछले वर्ष डिविडेंड 2.7 लाख करोड़ रुपए था, इसलिए इस वर्ष यह लगभग 50,000 करोड़ रुपए अधिक होगा। इस बार कंटीजेंसी बफर में कमी के कारण सरप्लस अधिक होगा।”
कंटीजेंसी बफर, उस फंड को कहा जाता है जो कि आरबीआई मौद्रिक नीति झटकों, क्रेडिट रिस्क और प्रतिभूतियों में मूल्यह्रास को कवर करने के लिए उपयोग करता है। इसका साइज आरबीआई की बैलेंसशीट में 4.5 से 7.5 प्रतिशत के बीच होता है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन में 100 अरब डॉलर के अवसर: रिपोर्ट

भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन से 2030 तक 100 अरब डॉलर के कार्बन उत्सर्जन कमी के अवसर खुल सकते हैं। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।
टीडीके वेंचर्स और थेइया वेंचर्स की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी पूंजी की भारी कमी है – वर्तमान फंडिंग अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए स्तरों के आधे (40 प्रतिशत) से भी कम है।
रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन को न केवल जलवायु लक्ष्य के रूप में, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में भी बताया गया।
वर्तमान में, भारत को प्रतिवर्ष 140 अरब डॉलर के ऊर्जा आयात बिल का सामना करना पड़ता है, जिससे देश भू-राजनीतिक झटकों जैसे मध्य पूर्व संकट के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन एक ऐसी “मजबूत अर्थव्यवस्था” के निर्माण का मार्ग है जो देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से बचाएगी।
यह रिपोर्ट में तकनीक और निवेश के लिहाज से सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक आईओटी और डिजिटल ट्विन्स, और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।
टीडीके वेंचर्स के निवेश निदेशक रवि जैन ने कहा, “भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की यात्रा केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उद्योग में ऊर्जा का उपयोग कितनी कुशलता से किया जाता है। हम ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने, बड़े पैमाने पर औद्योगिक बुद्धिमत्ता को लागू करने और दक्षता प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में एक पीढ़ीगत निवेश अवसर देखते हैं।”
जैन ने आगे कहा, “यह अवसर विशाल है, इसमें पूंजी की कमी है और यह तेजी से विकसित हो रहा है। हम इसका नेतृत्व करने वाले उद्यमियों के दीर्घकालिक भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
थेया वेंचर्स की संस्थापक और जनरल पार्टनर प्रिया शाह ने कहा, “यह रिपोर्ट अनावश्यक बातों को दरकिनार करते हुए उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं को यह व्यावहारिक और ठोस दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए बनाई गई है कि सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले अवसर कहां हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर साकार करने के लिए क्या आवश्यक होगा।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल नियामक अनुपालन की औपचारिकता पूरी करने के बजाय लागत दक्षता ही अगले दशक में इस परिवर्तन को गति प्रदान करेगी, क्योंकि उद्योग स्थानीयकृत, सस्ते पदार्थों के साथ आगे बढ़ेंगे।
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