व्यापार
भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 118 अंक उछला
पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के चलते बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार उतार-चढ़ाव के बाद मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
इस दौरान, सेंसेक्स 117.54 अंकों यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,318.39 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 50 41 अंकों यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,659 पर बंद हुआ।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 74,806.49 पर खुलकर 75,406.18 का इंट्रा-डे हाई और 74,529.41 का लो बनाया। वहीं एनएसई निफ्टी 23,457.25 पर खुलकर 23,690.90 का दिन का हाई और 23,397.30 का लो बनाया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इेंडेक्स में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, ऑयल एंड गैस में सबसे ज्यादा 1.59 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी मीडिया में 1.45 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में भी गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी50 इंडेक्स में हिंडाल्को, बजाज-ऑटो, ग्रासिम, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, विप्रो और इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत बीईएल, टेक महिंद्रा, इटरनल, टाटा स्टील, एसबीआई लाइफ और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
इस दौरान, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 459 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 461 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को इस सत्र में करीब 2 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिली है, जिससे उनके मुनाफे की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। वहीं दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड, जो इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम एशिया तनाव के कारण 111-112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, कारोबार के दौरान घटकर 105-106 डॉलर के आसपास आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में इस नरमी और घरेलू ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी, जिससे एनर्जी सेक्टर में संस्थागत निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर 97 रुपए के करीब पहुंच गया। रुपए पर दबाव मुख्य रूप से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बना हुआ है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि तकनीकी नजरिए से देखें तो अब 23,700 और 23,800 का स्तर निफ्टी के लिए निकटतम रेजिस्टेंस बन गया है, जहां मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है। इसके ऊपर 24,000 का स्तर सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
वहीं नीचे की ओर 23,500-23,600 का दायरा अब महत्वपूर्ण सपोर्ट बन गया है। अगर यह स्तर टूटता है तो 23,300 अगला बड़ा सपोर्ट रहेगा, जहां पहले भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली थी।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो बाजार में फिर से मजबूत तेजी लौट सकती है। लेकिन अगर 23,600 के ऊपर टिकाव नहीं बनता है तो बाजार में दोबारा बिकवाली और अस्थिरता बढ़ सकती है।
व्यापार
भारत ने जहाज रीसाइक्लिंग में नंबर 1 का खिताब लक्ष्य से पांच वर्ष पहले हासिल किया, वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक हुई

भारत ने दुनिया में अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बनने का लक्ष्य मैरीटाइम इंडिया विजन (एमआईवी) 2030 के तहत निर्धारित समय से पांच साल पहले अर्जित कर लिया है। साथ ही, वैश्विक बाजार में देश की हिस्सेदारी 35.4 प्रतिशत हो गई है। यह जानकारी मंगलवार को जारी की गई सरकारी फैक्टशीट में दी गई।
सरकारी फैक्टशीट में दी गई जानकारी में कहा गया कि भारत के जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर में हाल के वर्षों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 में जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर रहा। वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 में 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई। यह देश के समुद्री और औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत में जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा भी 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन (जीटी) से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन जीटी हो गई। यह रीसाइक्लिंग मात्रा में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है और वैश्विक बाजार में भारतीय जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को दिखाती है।
फैक्टशीट में आगे कहा गया कि गुजरात में अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है। इसे दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग हब के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह क्लस्टर भारत की जहाज रीसाइक्लिंग गतिविधि का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा है। इसकी वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता लगभग 6 मिलियन जीटी है।
अलंग में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किए बिना प्रति वर्ष लगभग 3.50 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) इस्पात का उत्पादन किया जाता है। यह अधिकृत जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड, डाउनस्ट्रीम स्टील री-रोलिंग मिलों और अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी ढांचे द्वारा समर्थित है। पिछले कुछ वर्षों में, क्लस्टर का व्यापक आधुनिकीकरण हुआ है और यह वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग बाजार के साथ भारत के प्राइमरी इंटरफेस का प्रतिनिधित्व करता है।
फैक्टशीट में बताया गया कि भारत का लक्ष्य अपनी जहाज रीसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना करके लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (एलडीटी) करना है। यह विस्तार अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के नियोजित विकास के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया गया है। यह योजना बुनियादी ढांचे में सुधार और जहाज रीसाइक्लिंग बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
इसके अतिरिक्त, अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड में सुरक्षा प्रशिक्षण और श्रम कल्याण संस्थान ने कुल मिलाकर 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षित किया है। प्रशिक्षण में व्यावसायिक सुरक्षा, खतरनाक सामग्री प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल है। इसके अलावा, भारत के पास कोलकाता में अमर लौह उद्योग में और केरल में स्टील इंडस्ट्रियल्स केरल लिमिटेड (सिल्क) में एक और जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड है।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कीमती धातुओं ने पकड़ी रफ्तार, सोने-चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा तक की बढ़ोतरी

GOLD
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं की कीमतों (सोने-चांदी) में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबारी में पीले धातु (सोने) की कीमतों में 1.5 प्रतिशत यानी 2,000 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा यानी 5,000 रुपए से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
मंगलवार को अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद 1,53,099 रुपए से 1.04 प्रतिशत यानी 1,600 रुपए की बढ़त के साथ 1,54,699 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं सत्र के दौरान इसने 2,338 रुपए यानी 1.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,55,437 रुपए का इंट्रा-डे हाई टच किया।
हालांकि खबर लिखे जाने तक पीली धातु 895 रुपए यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,53,994 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते हुए नजर आई।
वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद 2,36,867 रुपए से 3,132 रुपए यानी 1.32 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,39,999 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली और दिन के दौरान इसने 5,132 रुपए यानी 2.16 प्रतिशत का उच्चतम स्तर छुआ।
हालांकि खबर लिखे जाने तक यह सफेद धातु 371 रुपए यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,496 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई।
दरअसल, सोने और चांदी की कीमतों पर वैश्विक व्यापक आर्थिक बदलावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और घरेलू मांग में परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
अमेरिका की उदार मौद्रिक नीति की उम्मीदें बढ़ने से सोने की कीमतों में नई मजबूती आई है, वहीं डॉलर के कमजोर होने से इसकी मांग और भी बढ़ गई है।
वहीं, सिल्वर में निवेश में रुचि और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के समर्थन से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के संकेतों के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशील बना हुआ है, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है। साथ ही, सोने की ऊंची कीमतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
इन सभी कारकों के संयोजन से आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।
व्यापार
त्योहारी मांग और मजबूत वैश्विक संकेतों से चमका सोना-चांदी, एक हफ्ते में सोना 8,600 रुपए और चांदी 15,000 रुपए से ज्यादा महंगी

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ती खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर दोनों कीमती धातुओं में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दी।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 0.69 प्रतिशत यानी 1,050 रुपए उछलकर 1,52,870 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 1,52,946 रुपए का दिन का हाई टच किया। वहीं दिन का निचला स्तर 1,51,461 रुपए रहा।
पिछले एक सप्ताह में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। 31 जुलाई को एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 1,43,376 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि पिछले शुक्रवार को इसका भाव बढ़कर 1,51,985 रुपए पर पहुंच गया। इस तरह केवल पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत में 8,609 रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई। सोमवार के भाव के आधार पर देखें तो 31 जुलाई की तुलना में सोना कुल 8,644 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है।
वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया। सोमवार को एमसीएक्स पर सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 1.50 प्रतिशत यानी 3,473 रुपए की उछाल के साथ 2,34,939 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,35,221 रुपए का उच्चतम स्तर और 2,31,660 छुआ।
चांदी में तेजी का रुख पिछले एक सप्ताह से लगातार बना हुआ है। 31 जुलाई को एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 2,18,295 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो पिछले शुक्रवार को बढ़कर 2,31,381 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। यानी पांच कारोबारी दिनों में चांदी 13,086 रुपए प्रति किलो महंगी हुई। सोमवार के भाव को आधार मानें तो 31 जुलाई के मुकाबले चांदी की कीमत में कुल 15,435 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन से पहले ज्वेलरी और निवेश दोनों श्रेणियों में मांग बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती का असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा बाजार में लॉन्ग बिल्डअप भी देखने को मिल रहा है, जिससे आने वाले दिनों में कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूती बनी रह सकती है।
हालांकि चांदी में हालिया तेजी के बावजूद यह अभी भी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था। मौजूदा भाव 2,33,730 रुपए प्रति किलो के हिसाब से देखें तो चांदी अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तर से 1,86,318 रुपए प्रति किलोग्राम सस्ती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और त्योहारी मांग मजबूत रहती है, तो आने वाले दिनों में सोना और चांदी दोनों में तेजी का रुख जारी रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर बनी हुई है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
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