राष्ट्रीय समाचार
भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन में 100 अरब डॉलर के अवसर: रिपोर्ट
भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन से 2030 तक 100 अरब डॉलर के कार्बन उत्सर्जन कमी के अवसर खुल सकते हैं। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।
टीडीके वेंचर्स और थेइया वेंचर्स की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी पूंजी की भारी कमी है – वर्तमान फंडिंग अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए स्तरों के आधे (40 प्रतिशत) से भी कम है।
रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन को न केवल जलवायु लक्ष्य के रूप में, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में भी बताया गया।
वर्तमान में, भारत को प्रतिवर्ष 140 अरब डॉलर के ऊर्जा आयात बिल का सामना करना पड़ता है, जिससे देश भू-राजनीतिक झटकों जैसे मध्य पूर्व संकट के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन एक ऐसी “मजबूत अर्थव्यवस्था” के निर्माण का मार्ग है जो देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से बचाएगी।
यह रिपोर्ट में तकनीक और निवेश के लिहाज से सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक आईओटी और डिजिटल ट्विन्स, और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।
टीडीके वेंचर्स के निवेश निदेशक रवि जैन ने कहा, “भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की यात्रा केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उद्योग में ऊर्जा का उपयोग कितनी कुशलता से किया जाता है। हम ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने, बड़े पैमाने पर औद्योगिक बुद्धिमत्ता को लागू करने और दक्षता प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में एक पीढ़ीगत निवेश अवसर देखते हैं।”
जैन ने आगे कहा, “यह अवसर विशाल है, इसमें पूंजी की कमी है और यह तेजी से विकसित हो रहा है। हम इसका नेतृत्व करने वाले उद्यमियों के दीर्घकालिक भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
थेया वेंचर्स की संस्थापक और जनरल पार्टनर प्रिया शाह ने कहा, “यह रिपोर्ट अनावश्यक बातों को दरकिनार करते हुए उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं को यह व्यावहारिक और ठोस दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए बनाई गई है कि सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले अवसर कहां हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर साकार करने के लिए क्या आवश्यक होगा।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल नियामक अनुपालन की औपचारिकता पूरी करने के बजाय लागत दक्षता ही अगले दशक में इस परिवर्तन को गति प्रदान करेगी, क्योंकि उद्योग स्थानीयकृत, सस्ते पदार्थों के साथ आगे बढ़ेंगे।
खेल
पहली बार भारत और जापान के बीच खेला जाएगा टी20 इंटरनेशनल मुकाबला, बीसीसीआई ने किया ऐलान

भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर इस महीने के आखिर में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक टी20 इंटरनेशनल मुकाबला खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को इस बात की घोषणा की है।
‘सुजुकी कप’ नाम का यह मैच 22 सितंबर को तोचिगी प्रान्त के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। यह मैच ‘स्पोर्ट 75’ नाम की एक बड़ी द्विपक्षीय पहल की शुरुआत करने वाला मुख्य कार्यक्रम है। यह पहल जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शिखर सम्मेलन में हुए समझौते से शुरू हुई थी, जिसका मकसद खेलों के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना है।
शुक्रवार को बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने एक बयान में कहा, “बीसीसीआई इस ऐतिहासिक मौके का हिस्सा बनकर खुश है, क्योंकि भारत और जापान की पुरुष टीमें जापान में एक खास टी20 इंटरनेशनल मैच के लिए एक साथ आ रही हैं। यह क्रिकेट के लिए एक अहम पल है, क्योंकि इससे भारतीय टीम एक नई जगह पर जा रही है और जापान व पूर्वी एशिया में ज्यादा लोगों तक खेल को पहुंचाने का मौका मिल रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत और जापान के बीच मजबूत रिश्ते और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती है। हमें खुशी है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के 75 साल पूरे होने के जश्न में क्रिकेट भी शामिल होगा। हम इस मैच को मुमकिन बनाने की कोशिशों के लिए जापान क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) का शुक्रिया अदा करते हैं।”
सैकिया ने आगे कहा कि भारतीय बोर्ड गैर-पारंपरिक इलाकों में खेल के विस्तार की कोशिशों में मदद करने की अपनी जिम्मेदारी को समझता है। उन्होंने कहा, “बीसीसीआई का मानना है कि क्रिकेट का विकास इसके पारंपरिक इलाकों से आगे बढ़ना चाहिए, और दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बोर्ड के तौर पर हम उस विकास में योगदान देने की अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। बीसीसीआई, जापान में क्रिकेट को और मजबूत करने और आने वाले वर्षों में इस रिश्ते को और आगे बढ़ाने के लिए जेसीए के साथ मिलकर काम करेगा।”
फैन्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए आयोजक सानो वेन्यू की क्षमता को आमतौर पर 500 दर्शकों से बढ़ाकर 2,000 करने की योजना बना रहे हैं। जल्द ही आधिकारिक तौर पर टिकटों की बिक्री शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय पुरुष टीम 24 सितंबर से 3 अक्टूबर तक एशियन गेम्स के पुरुष इवेंट में खेलने के लिए जापान आ रही है।
जापान क्रिकेट एसोसिएशन के चीफ एग्जीक्यूटिव नाओकी मियाजी ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियंस के आने को स्थानीय स्तर पर इस खेल के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। “मौजूदा वर्ल्ड चैंपियंस को जापान में क्रिकेट के लिए घर में बुलाना हमारी एसोसिएशन के लिए एक यादगार पल है। हम इस लक्ष्य को हासिल करने में हमारे साथ काम करने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया अदा करते हैं और भारतीय क्रिकेट फैंस के जोश का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साहित हैं। इसके साथ ही, हम क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाले स्थानीय जापानी लोगों को भी हमारी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि यह वाकई एक यादगार मौका होगा।”
इस बीच, बाएं हाथ के स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर विक्की ओस्तवाल, तेज गेंदबाज रसिक सलाम और कार्तिक त्यागी नेट बॉलर के तौर पर एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम के साथ जाएंगे। उनके पासपोर्ट और वीजा से जुड़ी औपचारिकताएं चल रही हैं। उम्मीद है कि ये तीनों 19 सितंबर को नई दिल्ली से भारतीय टीम के साथ टोक्यो के लिए रवाना होंगे।
बीसीसीआई के एक सूत्र ने शुक्रवार को बताया, “इन तीनों की प्रोग्रेस पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के क्रिकेट हेड वीवीएस लक्ष्मण बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो एशियन गेम्स में टीम के हेड कोच भी हैं। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने और मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का अनुभव लेने से इन तीनों को अच्छा एक्सपोजर मिलेगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंचा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 28 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए डेटा में दी गई।
इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 729.328 बिलियन डॉलर था, जो कि 21 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में दर्ज किया गया था।
आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 9.337 बिलियन डॉलर बढ़कर 600.670 बिलियन डॉलर हो गई है।
एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की कई अहम वैश्विक मुद्राएं जैसे येन, यूरो और पाउंड होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में दिखाया जाता है।
इस दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 2.191 बिलियन डॉलर बढ़कर 116.409 बिलियन डॉलर हो गई है।
आरबीआई के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 43 मिलियन डॉलर घटकर 18.810 बिलियन डॉलर रही है। वहीं, भारत की आरबीआई में रिजर्व पॉजिशन 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.914 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की वजह डॉलर आकर्षित करने की लिए आरबीआई की ओर से शुरू की गई स्कीमों को माना जा रहा है, जिसके तहत देश में करीब 136 बिलियन डॉलर से अधिक का फंड आया है।
किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है, और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।
उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है।
राष्ट्रीय समाचार
ऑपरेशन चक्र-वीआई: सीबीआई ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर मारा छापा, डिजिटल अरेस्ट के 3 आरोपी गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि उसने ‘ऑपरेशन चक्र-वीआई’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों में शामिल संगठित गिरोहों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई शुरू की है और 20 राज्यों में 89 जगहों पर एक साथ छापेमारी की है।
सीबीआई ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान धोखाधड़ी से मिली रकम को लेने, उसे अलग-अलग खातों में घुमाने और आगे भेजने में भूमिका के लिए हरियाणा और कोलकाता में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े कई मामलों की जांच अपने हाथ में ली है। ऐसे तीन मामलों में जांचकर्ताओं ने विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।
जांच में बैंक खातों, ऑनलाइन अकाउंट एक्सेस डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों की पड़ताल की गई ताकि धोखाधड़ी से मिली रकम के लेन-देन का पता लगाया जा सके और सिंडिकेट के संचालकों व लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
सीबीआई ने कहा कि एक मामला बिट्स पिलानी से जुड़ा है, जहां पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया और पुलिस अधिकारी बनकर आए स्कैमर्स ने उससे 7.67 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। गुजरात के एक अन्य मामले में पुलिस अधिकारी बनकर आए लोगों ने पीड़ित को तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और 19.24 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। कर्नाटक में दर्ज तीसरे मामले में, पीड़ित को एक महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया और 15.45 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई।
तलाशी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज, खाते से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और जांच के लिए अहम मानी जाने वाली अन्य सामग्री जब्त की गई।
एजेंसी ने कहा कि जब्त किए गए सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि सिंडिकेट द्वारा राज्यों की सीमाओं के पार काम करने के लिए इस्तेमाल किए गए व्यापक वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।
सीबीआई ने ऑपरेशन के दौरान तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में धोखाधड़ी से मिली रकम को लेने, उसे अलग-अलग खातों में घुमाने और आगे भेजने में उनकी कथित भूमिका का पता चला।
एजेंसी के मुताबिक, हरियाणा के रहने वाले आकाश के बैंक खाते में धोखाधड़ी की रकम में से 1.95 करोड़ रुपए आए थे। उसने यह खाता खुद खोला था और उसी दिन रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी थी, जिससे धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने (मनी लॉन्ड्रिंग) में उसकी कथित सीधी संलिप्तता का संकेत मिलता है।
कोलकाता के राजा करमाकर को कथित तौर पर धोखाधड़ी की रकम में से 1.5 करोड़ रुपए अपनी फर्म के खाते में मिले थे। एजेंसी ने बताया कि ज्योति रानी, जिसके खाते में धोखाधड़ी की रकम का कुछ हिस्सा आया था, उसने कथित तौर पर कुछ पैसे नकद निकाले और बाकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी ताकि पैसे के लेन-देन का पता न चल सके।
यह कदम ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए उठाया गया है। इस तरह की धोखाधड़ी में साइबर अपराधी पुलिस अफसर, सरकारी अधिकारी और कानून लागू करने वाले दूसरे कर्मचारियों का रूप धरकर पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह ऐसे अपराध करने वालों और ऐसे अपराधों में मदद करने वाले बड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
सीबीआई ने कहा है कि इस बड़े नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। मामले की आगे जांच चल रही है और एजेंसी का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और संगठित साइबर अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
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