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Sunday,19-July-2026
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ईरान का दावा,’ अमेरिका को दिया जवाब, कुवैत में उसके सैन्य ठिकानों पर किया ड्रोन से हमला’

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अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी आर्मी के अनुसार, उसने कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को ड्रोन से निशाना बनाया है। रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईएसएनए ने सेना की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई।

ईरानी सेना के अनुसार, उसने कामिकाजे ड्रोन के जरिए कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस बीच, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, जो खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख हैं, ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “निर्णायक और विनाशकारी जवाब” देंगे।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्दुल्लाही ने कहा कि देश किसी भी आक्रामक कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को “ग्रेट सैटन (महाशैतान)” बताते हुए उन पर “विश्वासघाती और धोखेबाज दुश्मन” होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सशस्त्र सेनाओं, सरकारी संस्थानों और आम जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भविष्य में ईरान अमेरिका को पिछले संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।

इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने 18 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक और दौर पूरा किया। सेंटकॉम के अनुसार, यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।

अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था।

सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े उन बलों को भी निशाना बनाया, जिन पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने का आरोप है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, वर्तमान में मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बयान में कहा गया कि सभी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं, अभियान के लिए तैयार हैं और क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका ने समझौते से किए वादे नहीं निभाए, इसलिए ईरान ने भी अपने दायित्वों का पालन रोका: उपविदेश मंत्री गरीबाबादी

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ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना बंद कर दिया है। वाशिंगटन ने समझौते के तहत अपने वादों को तोड़ा है।

सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में, गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को असल में तोड़ा है या रद्द कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब अपना बचाव करने पर ध्यान दे रहा है और बातचीत की कोई खबर नहीं है।

उन्होंने कहा, “अभी हमारे सामने देश का मजबूती से बचाव करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।”

दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिकी समयानुसार, शनिवार की रात को जानकारी देते हुए लिखा, “अमेरिकी सेना ने आज (शनिवार) शाम 6 बजे कमांडर इन चीफ के कहने पर ईरान के खिलाफ नए एयरस्ट्राइक शुरू किए। ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को और कम करने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सेना को तुरंत सजा देने के लिए किए गए हैं, जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे।”

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को बताया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में दो यूएस सैनिक मारे गए और एक लापता हैं। मार्च के बाद से ईरानी गोलीबारी में पहली अमेरिकी सैनिक की मौत है।

सेंट्रल कमांड ने कहा, “17 जुलाई को, जॉर्डन में दो अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड और साझेदार फोर्स ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव कर रहे थे। इसके अलावा, एक सेवा सदस्य अभी लापता है।”

कमांड के अनुसार, चार और अमेरिकी सेवा सदस्य को मेडिकली जॉर्डन के हॉस्पिटल में ले जाया गया, लेकिन उन्हें छुट्टी दे दी गई। दूसरे लोगों को मामूली चोटें आईं और वे ड्यूटी पर लौट आए हैं।

वहीं, शहीदों की पहचान से संबंधित जानकारी को लेकर उन्होंने कहा कि सैनिकों की पहचान उनके परिवार वालों को बताए जाने के 24 घंटे बाद तक सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सैनिकों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने बताया, “हमें ऐसा होते देखना अच्छा नहीं लग रहा। हमारे देश की सेवा करते हुए वो शहीद हुए।”

इसके अलावा, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, “भगवान आपका भला करे, हीरो। उनकी कुर्बानी हमारे इरादे को और मजबूत करती है।”

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने शनिवार को एक बयान में जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सेना के बेस पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली। आईआरजीसी ने दावा किया कि हमले में कई एयरक्राफ्ट पूरी तरह से नष्ट हो गए। यह हमला मिसाइलों और ड्रोन दोनों से किया गया था।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान के दक्षिणी प्रांतों में सैन्य ठिकानों और ढांचों पर कई हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि उनका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था।

ईरान ने जवाब में कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मास्को के पास वेयरहाउस पर हमले में 7 की मौत

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यूक्रेन ने शनिवार तड़के रूस के कई इलाकों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। रूसी अधिकारियों के अनुसार, मास्को से दक्षिण-पूर्व स्थित तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक लॉजिस्टिक्स सेंटर पर हुए ड्रोन हमले में 7 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 24 से 25 लोग घायल हुए हैं।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव ने बताया कि हमला रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के स्वामित्व वाले वेयरहाउस पर हुआ। उनके मुताबिक, सभी मृतक नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे।

गवर्नर ने दावा किया कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले 28 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। उन्होंने कहा कि यदि सभी ड्रोन अपने निशाने तक पहुंच जाते, तो नागरिक हताहतों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।

वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एक अलग घटना में ड्रोन हमले से एक तेल डिपो में आग लग गई। इसकी जानकारी मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन के मलबे के गिरने से नोगिंस्क शहर के एक तेल डिपो में आग लग गई।

उन्होंने बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। एहतियात के तौर पर पास के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल को खाली करा लिया गया। हालांकि, तेल डिपो को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह डिपो हल्के पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण और वितरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक, इस डिपो में पेट्रोल, डीजल और केरोसीन का भंडारण किया जाता है। यहां कुल 24 स्टोरेज टैंक हैं, जिनकी संयुक्त भंडारण क्षमता लगभग 11,500 घन मीटर (क्यूबिक मीटर) है।

रूसी अधिकारियों के अनुसार, कोटोव्स्क स्थित लॉजिस्टिक्स सेंटर के वेयरहाउस में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।

24 फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच ड्रोन हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी सुरक्षा पर दिए गए संबोधन के बाद जारी इन दस्तावेजों में कहा गया कि मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी खुफिया एजेंसियों और साइबर हमलावरों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्यों में से एक हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर करना हो सकता है।

व्हाइट हाउस द्वारा जारी अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में अमेरिका के सभी 50 राज्यों के मतदाता पंजीकरण सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई। इनमें से कम से कम 20 राज्यों में साइबर हमलावरों को सेंध लगाए।

रिपोर्ट में कहा गया, “राज्य स्तर के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी विरोधी देशों के लिए बेहद आकर्षक लक्ष्य हैं।” इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि मतदाताओं की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी लीक होने का खतरा सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चोरी किए गए मतदाता डेटा का इस्तेमाल डाक मतपत्र के लिए फर्जी आवेदन करने, मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड में बदलाव करने, मतदान केंद्र बदलने या मतदाता का नाम सूची से हटाने जैसे कामों में किया जा सकता है।

इस आकलन रिपोर्ट में वर्ष 2016 के बाद से चुनावी ढांचे पर हुए कई साइबर हमलों का भी जिक्र किया गया। इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन डेटाबेस की जांच करने की रूस की कोशिशें, वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल करने का ईरान का प्रयास और चुनाव से जुड़े नेटवर्क एवं आम लोगों के लिए उपलब्ध वोटर डेटा को निशाना बनाने वाली चीन की संदिग्ध साइबर गतिविधियां शामिल हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेज यह साबित करते हैं कि अमेरिका लंबे समय से जानता था कि उसकी चुनावी व्यवस्था विदेशी साइबर खतरों के संपर्क में है।

उन्होंने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने मतदाता पंजीकरण डेटाबेस, इलेक्ट्रॉनिक पोल बुक और आधिकारिक चुनावी वेबसाइटों को सबसे अधिक जोखिम वाले सिस्टम के रूप में चिह्नित किया है।

डीएचएस की रिपोर्ट में राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें मतदाता डेटाबेस का नियमित ऑफलाइन बैकअप, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का व्यापक उपयोग, नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटना, इंटरनेट से जुड़े सिस्टम की लगातार निगरानी और किसी भी साइबर हमले से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार करना शामिल है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैंकों, स्वास्थ्य सेवाओं और क्रेडिट रिपोर्टिंग एजेंसियों जैसी निजी कंपनियों के पास मौजूद व्यक्तिगत डेटा में बड़ी सेंध भी चुनावी सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इसी तरह की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग मतदाताओं की पहचान सत्यापित करने और डाक मतपत्र जारी करने में किया जाता है।

ट्रंप ने बताया कि उनका प्रशासन संभावित साइबर कमजोरियों से प्रभावित राज्यों के राज्यपालों, सांसदों और चुनाव अधिकारियों को सूचना देना शुरू कर चुका है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग अगले वर्ष होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले राज्यों के साथ मिलकर इन तकनीकी कमजोरियों को दूर करेगा।

हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि अब तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकला है कि इन साइबर हमलों ने किसी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को बदला हो। फिर भी रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी देशों की बढ़ती साइबर क्षमताओं को देखते हुए मतदाता पंजीकरण डेटाबेस की सुरक्षा अब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।

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