अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के बाद इमरान खान के सत्ता से बाहर होने की उल्टी गिनती शुरू
पाकिस्तान में विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद अब इमरान खान के सत्ता से बाहर होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सोमवार को विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
प्रस्ताव दो दिन के अवकाश के बाद पेश किया गया और इसकी अध्यक्षता नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम खान सूरी ने की।
शरीफ ने नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा, “मैं अनुरोध करूंगा कि आप (सूरी) इस वस्तु (अविश्वास प्रस्ताव) को सदन में पेश करने की अनुमति दें।”
इसके बाद मतदान किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जो प्रस्ताव पेश किया गया है, वह अनिवार्य सांसदों द्वारा समर्थित है या नहीं। नेशनल असेंबली यानी एनए के नियम अविश्वास प्रस्ताव को तभी पेश करने की अनुमति देते हैं, जब एनए के कम से कम 20 प्रतिशत सदस्यों द्वारा इस कदम का समर्थन किया जाता है। यानी अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 68 मत पड़ने जरूरी है।
खान के भाग्य का फैसला 31 मार्च को होगा, जब सदस्य मतदान करेंगे। हालांकि, गृह मंत्री शेख राशिद ने पहले कहा था कि मतदान 4 अप्रैल को हो सकता है, जिससे सत्ताधारी पार्टी को अविश्वास प्रस्ताव को बेअसर करने को लेकर संख्या बढ़ाने के लिए और समय मिल जाएगा। 31 मार्च को खान के भाग्य का फैसला नहीं होने की स्थिति में विपक्ष सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) के अध्यक्ष फजल-उर-रहमान के इस्लामाबाद पहुंचने के साथ लॉन्ग मार्च के आगमन और सड़क पर विरोध प्रदर्शन के साथ इस्लामाबाद पहले से ही उन्मादी राजनीतिक गतिविधियों से भरा हुआ है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) शासन के तहत बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
अगर अविश्वास प्रस्ताव प्रत्याशित स्क्रिप्ट के अनुसार असर नहीं दिखाता है, तो इस भीड़ का गुस्सा बेकाबू होने की भी संभावना है।
खान को बाहर करने के लिए विपक्ष को 172 सांसदों के समर्थन के साथ जादुई आंकड़ा पार करना होगा।
जम्हूरी वतन पार्टी के शाहजैन बुगती के रविवार को सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर निकलने के फैसले के बाद, संसद के 342 सदस्यीय निचले सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों की संख्या 178 हो गई है। इसके साथ ही विपक्ष के पास 163 सदस्यों का समर्थन है, जो आवश्यक संख्या से केवल 9 कम हैं।
पीएमएल-क्यू, बलूचिस्तान अवामी पार्टी और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान – तीन प्रमुख सरकारी सहयोगियों को 17 एमएनए का सामूहिक समर्थन प्राप्त है। अब इन्हें तय करना है कि वे किस ओर वोट करेंगे।
इस स्थिति के बीच, सत्तारूढ़ पीटीआई के एक दर्जन से अधिक असंतुष्टों ने खुले तौर पर सरकार की नीतियों की आलोचना की है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वे प्रधानमंत्री के खिलाफ अपना वोट देंगे। वोटिंग होने तक हॉर्स ट्रेडिंग (नेताओं की खरीद-फरोख्त) के बड़े पैमाने पर सरपट दौड़ने की उम्मीद है।
खान के पास स्थिति संभालने के लिए अब अधिक विकल्प नहीं बचे हैं। अब जबकि अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है, प्रधानमंत्री पाकिस्तान के मूल कानून के तहत सदन को भंग करने और नए चुनाव का आह्रान करने की सिफारिश नहीं कर सकते।
विश्वास मत हारने की स्थिति में, विपक्षी पीएमएल-एन के नेता शहबाज शरीफ नई सरकार बनाएंगे।
रविवार को ताकत का प्रदर्शन करते हुए पीएम खान के समर्थकों द्वारा ‘फ्लैग मार्च’ किए जाने के बाद इस्लामाबाद में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए अपनी सरकार को अस्थिर करने के लिए विदेशी शक्तियों को दोषी ठहराया।
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न्यूजीलैंड: 15 साल बाद वेलिंगटन में बर्फबारी, कई प्रमुख राजमार्ग बंद

एक तरफ जहां यूरोप के कई इलाके भीषण गर्मी की मार अब भी झेल रहे हैं वहीं ओशिनिया के द्वीपीय देश न्यूजीलैंड की राजधानी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का सामना कर रहा है। अंटार्कटिका से आई भीषण शीत लहर के प्रभाव से न्यूजीलैंड के बड़े हिस्से में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वेलिंगटन में करीब 15 वर्षों बाद समुद्र तल तक बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि दक्षिणी शहर डुनेडिन में लोगों ने दुनिया की सबसे खड़ी सड़क पर स्कीइंग कर इस दुर्लभ मौसम का आनंद लिया।
स्थानीय मीडिया आउटलेट स्टफ के अनुसार, राजधानी वेलिंगटन में बर्फबारी से शहर सफेद चादर में ढक गया। लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर बर्फबारी की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
दक्षिणी शहर डुनेडिन में भारी बर्फबारी के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए। बर्फ से ढकी दुनिया की सबसे खड़ी सड़क ‘बाल्डविन स्ट्रीट’ पर स्थानीय लोगों ने स्की और स्नोबोर्ड चलाकर मौसम का आनंद लिया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को देश के कई हिस्सों में तापमान शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। बर्फबारी और फिसलन के कारण कई प्रमुख राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं, जबकि क्राइस्टचर्च हवाई अड्डे पर भी उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है। पुलिस ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
न्यूजीलैंड की मौसम एजेंसी ‘मेटसर्विस’ ने कहा है कि बुधवार को कुछ क्षेत्रों में मौसम में अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बाद ठंड की एक और लहर आने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार कई इलाकों में इस वर्ष की सबसे ठंडी सुबह हो सकती है।
इस बीच, राष्ट्रीय बिजली ग्रिड संचालक ‘ट्रांसपावर’ ने रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज होने की जानकारी दी है और सप्ताह के अंत तक बिजली आपूर्ति पर दबाव बने रहने की चेतावनी दी है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायली राजदूत अजार ने भारत और इजरायल के स्टार्टअप, इको सिस्टम और शिक्षा की सराहना की

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भारत और इजरायल की शिक्षा, स्टार्टअप और इको सिस्टम की सराहना की। हाल के दिनों में भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी आई है। इस बीच इजरायली राजदूत ने ये बयान दिया।
भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष यूनिवर्सिटी में से 6 इजरायली और 5 भारतीय को इस बात की संभावना के लिए चुना गया है कि उनके ग्रेजुएट में से कोई एक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, जिससे एक यूनिकॉर्न कंपनी बनेगी!”
अजार का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और इजरायल के बीच तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड का यह विश्लेषण वेंचर कैपिटल फंडिंग और यूनिकॉर्न बनने की दर के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही इजरायली राजदूत ने द जेरुसेलम पोस्ट का एक लेख भी साझा किया।
इसमें दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की सफलता को मापा गया। द जेरुसेलम पोस्ट में लिखा गया कि स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, नेगेव की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी इस मामले में इजरायल में पहले और अमेरिका के बाहर की यूनिवर्सिटी में तीसरे नंबर पर है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि उसका कोई ग्रेजुएट जो वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, वह आगे चलकर एक यूनिकॉर्न कंपनी बनाएगा।
अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष रैंक वाली संस्थाओं में छह इजरायली विश्वविद्यालय शामिल हुए, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा हैं। इजरायली संस्थानों में बेन-गुरियन विश्वविद्यालय का ऑड्स रेशियो 6.6 रहा, जो सबसे ऊंचा है। इसके बाद राइखमान विश्वविद्यालय, टेक्नियन-इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बार-इलान विश्वविद्यालय, तेल अवीव विश्वविद्यालय और हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलम का नंबर आता है।
इजरायली संस्थानों में राइखमान विश्वविद्यालय 5.4 के ऑड्स रेशियो के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद टेक्नियन 3.1 के साथ, बार-इलान विश्वविद्यालय 2.9 के साथ, तेल अवीव विश्वविद्यालय 2.8 के साथ और हिब्रू विश्वविद्यालय 2.2 के साथ रहा। शीर्ष 18 में भारत के 5 संस्थान शामिल थे, जबकि कनाडा के 3 और यूनाइटेड किंगडम के 2 संस्थान इस सूची में थे।
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ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए शांति समझौते (एमओयू) पर कायम रहने के लिए मजबूर करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि एमओयू पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों के बीच एक राय है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि उनका मानना है कि यह एमओयू भविष्य में ईरान के विदेशी संबंधों का केंद्र बिंदु होगा।
उन्होंने कहा, “हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।”
इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान हर दुश्मन की धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है। उन्होंने इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिए जाने को खारिज कर दिया।
अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।”
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए हमले टालने की बात कहने के बाद आया।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आतंक, ताकत और शक्ति के उस स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखा गया।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला टाल दिया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का हवाला दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।
इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्ते के अंत में हमले शुरू कर सकते हैं।
18 जून को, ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि, उनके बीच हाल ही में हुए तनाव के कारण बातचीत का नतीजा अधर में लटका हुआ है।
अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए थे और इनका मकसद कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
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