राजनीति
मुख्यमंत्री योगी बोले-अखिलेश नहीं चाहते आजम जेल से बाहर आएं
उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण का मतदान चल रहा है। इसी बीच राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा मुखिया पर बड़ा आरोप लगाया और कहा कि अखिलेश यादव खुद नहीं चाहते हैं कि आजम खां जेल से बाहर आएं। अगर आजम खां बाहर आ गए तो अखिलेश जी की कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आज यहां पत्रकारों से बातचीत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद नहीं चाहते हैं कि आजम खां जेल से बाहर आएं। अगर आजम खां बाहर आ गए तो अखिलेश जी की कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। आजम खां या अन्य लोगों के मामले न्यायालय से जुड़े हैं, इनका राज्य सरकार से कोई लेना-देना नहीं। जमानत देने का अधिकार न्यायालय का होता है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां फर्जीवाड़ा के आरोप में एक वर्ष से अधिक समय से सीतापुर की जेल में बंद हैं। अखिलेश यादव खुद नहीं चाहते हैं कि आजम खां जेल से बाहर आएं। अगर आजम खां बाहर आ गए तो अखिलेश जी की कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अखिलेश जी के खानदान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला है, क्या ये भाजपा की सरकार के समय हुआ था? 2013 में तो बीजेपी की सरकार भी नहीं थी। इनके खिलाफ और भी बहुत सारे मामले हैं, क्या ये भाजपा के कारण हुआ है?
योगी ने कहा कि नए भारत में विकास सबका होगा लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं। सरकार सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ कार्य कर रही है। नया भारत संविधान के अनुरूप चलेगा, शरीयत के अनुरूप नहीं। मैं स्पष्टता से कह सकता हूं कि गजवा-ए-हिंद का सपना कयामत के दिन तक भी साकार नहीं होगा।
हिजाब मामले पर योगी ने कहा कि भारत की व्यवस्था संविधान के अनुरूप चलनी चाहिए, हमारी व्यक्तिगत आस्था और पसंद-नापसंद हम देश और संस्थाओं पर लागू नहीं कर सकते हैं। क्या मैं यूपी में सभी कर्मचारियों या लोगों को बोल सकता हूं कि आप भी भगवा धारण करें? स्कूल में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा की जीत के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण के चुनाव के बाद स्थिति साफ होती जा रही है, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भाजपा उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाएगी और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि प्रथम चरण के चुनाव के बाद स्थिति साफ होती जा रही है, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भाजपा यूपी में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाएगी और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां पहले चरण के चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुए हैं।
बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर बर्बर अत्याचार हो रहा था। वहां पर तो बूथ कैप्चर किए जा रहे थे और केरल में भी ऐसे ही हुआ था। उन्होंने कहा कि ये लोग जो बंगाल से यहां आकर अराजकता फैलाने की बात कर रहे हैं, इसके प्रति जनता को अलर्ट करने की जरूरत थी कि सावधान जो सम्मान और सुरक्षा मिली है उस पर सेंध लगाने के लिए लोग आ गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सभी सीट पर लड़ रही है। अब उसको डुबोने में किसी और की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस को डुबोने के लिए भाई-बहन ही पर्याप्त हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मैंने 80 बनाम 20 की बात की थी, 80 फीसदी के साथ होंगे और 20 फीसदी हमेशा विरोध करते हैं और विरोध करेंगे। हमने जाति, मत, मजहब की बात नहीं की थी। 80 फीसदी वो लोग जो हमेशा प्रदेश सरकार के अच्छे कार्यों का समर्थन करते हैं और 20 फीसदी वो लोग जिन्हें हमेशा विरोध करना है।
विपक्ष के ठोंको राज के सवाल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का भय हर उस व्यक्ति के मन में होना चाहिए जो किसी की भी सुरक्षा के लिए खतरा है। प्रदेश में पिछले पांच वर्ष में प्रदेश में कोई दंगा नहीं हुआ, कर्फ्यू नहीं लगा। आज तो प्रदेश में कावड़ यात्रा शानदार तरीके निकलती है ये आस्था का सम्मान है और प्रदेश के लोगों को सुरक्षा का एहसास कराता है।
राष्ट्रीय समाचार
त्योहारी मौसम से पहले सरकारी बफर स्टॉक से प्याज कोलकाता पहुंचेगा

पश्चिम बंगाल में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के तहत मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के बफर स्टॉक से प्याज लेकर कांडा एक्सप्रेस गुरुवार को कोलकाता पहुंचने वाली है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल में एनएएफईडी और एनसीसीएफ की मोबाइल वैन के माध्यम से लगभग 1,400 मीट्रिक टन प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से वितरित किया जा चुका है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि कांडा एक्सप्रेस के आने से अतिरिक्त मात्रा में प्याज की आवाजाही अधिक कुशलता से हो सकेगी, जिससे बाजार में उपलब्धता में सुधार होगा और मौसमी कीमतों पर दबाव कम होगा।
बयान में आगे कहा गया कि आगमन से प्याज की अधिक मात्रा की आवाजाही में तेजी आने की उम्मीद है और कोलकाता और आसपास के जिलों में, विशेष रूप से त्योहारी मौसम से पहले, इसकी उपलब्धता और मजबूत होगी।
बयान में आगे कहा गया है कि कोलकाता जाने वाली कांडा एक्सप्रेस, रेल और सड़क परिवहन के हाइब्रिड नेटवर्क के माध्यम से पीएसएफ बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित आपूर्ति की चल रही रणनीति का हिस्सा है।
एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का लक्षित निपटान 24 अगस्त से शुरू हुआ, और बाजार की आवश्यकताओं के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति धीरे-धीरे भेजी जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता में वर्तमान में 25 से अधिक स्थानों पर खुदरा बिक्री की जा रही है, जिनमें कोले मार्केट, मेचुआ मंडी, मानिकतला मार्केट, रामपुरिया मार्केट और श्याम बाजार जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।
इसके अलावा, सरकार ‘सुफल बंगला’ के माध्यम से बफर स्टॉक प्याज की खुदरा बिक्री की संभावना तलाश रही है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त पहुंच मिलेगी और इस पहल का दायरा व्यापक होगा।
बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति अब तक देश भर के 100 से अधिक शहरों में की जा चुकी है।
बफर स्टॉक हस्तक्षेप के बाद बाजार में उपलब्धता में सुधार का संकेत देते हुए, 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में खुदरा प्याज की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं या उनमें गिरावट आई है। पिछले सप्ताह जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की कीमतों में गिरावट आई है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
एआई समाधान दे सकता है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को उच्च शिक्षा में मल्टी-डिसिप्लिनरी (कई विषयों को मिलाकर) अप्रोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गरीबी उन्मूलन और लोकतंत्र जैसी जटिल समकालीन चुनौतियों का समाधान केवल अध्ययन के एक क्षेत्र से नहीं किया जा सकता।
गुजरात में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के कई विषय हैं, जो इसे ज्ञान की अलग-अलग धाराओं को एक साथ लाने की स्थिति में लाते हैं।
उन्होंने कहा, “आर्ट्स से लेकर साइंस, टेक्नोलॉजी से लेकर मेडिसिन, लॉ से लेकर सोशल वर्क, फाइन आर्ट्स से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट से लेकर जर्नलिज्म तक, यह यूनिवर्सिटी ज्ञान के कई क्षेत्रों में शिक्षा दे रही है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सामने आने वाली समस्याएं अब आपस में अधिक जुड़ी हुई हैं और उनके समाधान के लिए कई विषयों के ज्ञान की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “क्लाइमेट चेंज सिर्फ एनवायरनमेंटल स्टडीज का विषय नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं है। हेल्थ सिर्फ मेडिसिन या मेडिकल साइंस का विषय नहीं है। गरीबी दूर करना सिर्फ अर्थशास्त्री का विषय नहीं है। लोकतंत्र सिर्फ पॉलिटिकल साइंस का विषय नहीं है।”
उन्होंने कहा, “आज, सभी जरूरी समस्याओं को हल करने के लिए कई विषयों को मिलाकर काम करने (मल्टीडिसिप्लिनरी) के नजरिए की जरूरत है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को सिर्फ अपनी पढ़ाई के खास विषयों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अलग-अलग तरह की समझ और नजरिया विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमें एक वैज्ञानिक जैसी जिज्ञासा, एक कलाकार जैसी संवेदनशीलता, एक इतिहासकार जैसा नजरिया, अर्थशास्त्र की समझ और समाजशास्त्र की चेतना की जरूरत है।”
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों से उम्मीद की जाती है कि वे इसी दिशा में आगे बढ़ें और छात्रों को अलग-अलग विषयों में ज्ञान का इस्तेमाल करने में मदद करें।
राष्ट्रपति मुर्मु ने तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी को अपनाते समय छात्रों द्वारा सही समझ और विवेक का इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने छात्रों से कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समाधान दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए। टेक्नोलॉजी रफ्तार तो दे सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए, यह तय करना छात्रों का काम है।”
राष्ट्रपति ने छात्रों से टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के साथ जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे नागरिकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे संविधान में बताए गए “न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” के आदर्शों को अपने जीवन और कार्यस्थलों में अपनाएं।
यूनिवर्सिटी के विभागों में आर्ट्स, साइंस, एजुकेशन और साइकोलॉजी, कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग, मेडिसिन, लॉ, फाइन आर्ट्स, फ़ैमिली और कम्युनिटी साइंसेज़, सोशल वर्क, परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट स्टडीज, जर्नलिज़्म और कम्युनिकेशन और फार्मेसी शामिल हैं।
दीक्षांत समारोह की घोषणा के अनुसार, 229 उम्मीदवार डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी डिग्री, 2,857 उम्मीदवार मास्टर डिग्री, 8,863 उम्मीदवार बैचलर डिग्री और 657 उम्मीदवार पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा के लिए योग्य पाए गए।
राजनीति
राहुल गांधी ने एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा-समय आएगा, हम आपको नहीं बख्शेंगे

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और चुनाव अधिकारियों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि “समय आएगा, हम आपको बख्शेंगे नहीं।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने कहा, “वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।”
गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें उन्होंने कहा, “मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों से साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हैं, वह गलत है।”
उन्होंने कहा, “यह देशद्रोह है। समय आएगा! हम आपको पकड़ेंगे, आप बच नहीं पाएंगे।”
यह ताजा विवाद एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां कई तरह के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं। इनमें यह आरोप भी शामिल था कि नए वोटरों को जोड़ने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े कुछ मामलों और मुद्दों के बारे में आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया था।
इससे पहले दिन में ईसीआई ने एक प्रमुख अखबार की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कई फैसलों पर “आधिकारिक तौर पर आपत्ति” जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चुनाव आयोग के किसी भी फैसले पर किसी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति दर्ज नहीं कराई थी। उन्होंने कहा कि दोनों आयुक्तों ने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं, जिनकी बाद में आयोग ने समीक्षा की थी।
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