राजनीति
बाइडन को दोहा समझौते पर विचार करना चाहिए : तालिबान
तालिबान ने कहा है कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित हुए जो बाइडन को दोहा समझौते का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार के साथ किया गया था। मीडिया को यह जानकारी सोमवार को मिली। ‘खामा प्रेस’ के मुताबिक, तालिबान के एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि जब नया अमेरिकी प्रशासन सत्ता में आता है, तो उसे समझौते को कबूल करने की जरूरत होगी।
प्रवक्ता ने कहा कि तालिबान को उम्मीद है कि बाइडन प्रशासन दोहा शांति प्रोटोकॉल का पालन करेगा।
एक ऐतिहासिक कदम में, तालिबान ने 29 फरवरी को अमेरिका के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत आतंकवादी समूह अफगानिस्तान के अंदर अमेरिकी बलों पर हमला नहीं करेगा।
समझौते में शांति प्रक्रिया की घोषणा के बाद से 14 महीनों के भीतर अमेरिकी सैनिकों की वापसी का भी जिक्र है।
राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-रोमानिया व्यापार मंच को किया संबोधित, इंडिया-ईयू एफटीए के क्रियान्वयन पर दिया जोर

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जुलाई को बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन, रोमानिया सरकार के सदस्यगण, भारत और रोमानिया के बिजनेस लीडर्स और दोनों देशों के उद्योग संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप के प्रमुख संपर्क बिंदु पर स्थित रोमानिया अपनी रणनीतिक स्थिति, अत्यन्त कुशल मानव संसाधन, उन्नत औद्योगिक क्षमता और यूरोपीय संघ के साथ सुदृढ़ एकीकरण के कारण भारत का एक स्वाभाविक और महत्त्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। रोमानिया न केवल निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है बल्कि यह वृहत्तर यूरोपीय बाजार का प्रवेश द्वार भी है।
उन्होंने कहा कि इस मंच पर बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी, रोमानिया में विद्यमान अवसरों के प्रति भारतीय उद्योगों के बढ़ते विश्वास और रोमानियाई व्यवसायों के साथ स्थायी साझेदारी बनाने की उनकी इच्छा को व्यक्त करती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग भारत और यूरोपीय संघ की समकालीन साझेदारी का प्रमुख आधार हैं। लगभग दो अरब लोगों के संयुक्त बाजार और लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था के साथ, भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक है। इसका उद्देश्य व्यापारिक एकीकरण को और गहरा करना, निवेश के प्रवाह में तेजी लाना तथा सशक्त एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एफटीए का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा। इससे कारोबार के लिए विश्वसनीय परिवेश तैयार होगा, मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण मजबूत होगा तथा दोनों पक्षों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ‘विकसित भारत 2047’ का हमारा संकल्प, स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का है। इस यात्रा से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत कर व्यवस्था को सरल बनाकर और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी पहलों के माध्यम से पारदर्शी, विश्वसनीय और निवेशकों के अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत और रोमानिया के बीच ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन (पर्यावरण-अनुकूल परिवर्तन) के क्षेत्र में सहयोग की बहुत गुंजाइश है। रसायन और उर्वरक उद्योग में रोमानिया की क्षमताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। भारत का विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तेजी से बढ़ता स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और सूचना प्रौद्योगिकी में नेतृत्व, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, साइबर-सिक्योरिटी, रिसर्च और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में रोमानिया की खूबियों के साथ मिलकर काम कर सकता है।
भारत की राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी कंपनियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी सहयोग के अवसर हैं, जिनमें पोर्ट, रेलवे, हाईवे, लॉजिस्टिक्स पार्क और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट शामिल हैं। हम फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्रों में भी सहयोग को और मजबूत कर सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास जाहिर किया कि भारत और रोमानिया के कारोबारी समुदाय इन नए अवसरों का फायदा उठाएंगे और उन्हें सफल वाणिज्यिक साझेदारियों में बदलेंगे। उन्होंने रोमानियाई कंपनियों से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि हमारे कारोबार सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाएं बना सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं, नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं और हमारे लोगों के लिए दीर्घस्थायी समृद्धि ला सकते हैं।
राजनीति
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा सवाल, सबूत नहीं तो फास्ट ट्रैक कोर्ट का क्या मतलब

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में पर्याप्त सबूत ही पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह आश्वासन केवल दिखावा साबित हो रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए संसद में कानून लाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन उनके अनुसार, इसी बीच वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अदालत में कथित तौर पर यह कहे जाने से कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आप प्रमुख ने दावा किया कि वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक के समय सरकार ने संजीव मुखिया को पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया था और बड़े स्तर पर उसकी गिरफ्तारी को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था। हालांकि अब यदि सीबीआई अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कह रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर इस मामले का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने सवाल किया कि यदि वही मास्टरमाइंड नहीं है, तो क्या सरकार यह मान रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं?
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत सबूत पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से भी कोई परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि वास्तविक कार्रवाई के स्तर पर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। कई छात्रों ने मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना होनी चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश में पहले से ही पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं, लेकिन कई मामलों में वहां भी वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है। उनका कहना था कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच, मजबूत साक्ष्य और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने की होती, तो जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश करतीं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करतीं। उन्होंने केंद्र सरकार से पेपर लीक की घटनाओं पर पारदर्शी जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
महाराष्ट्र
मुंबई शिवाजी पार्क स्टूडेंट प्रोटेस्ट: महिला के साथ बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा, चार लेवल की कार्रवाई की मांग

मुंबई के शिवाजी पार्क दादर में एक प्रोटेस्ट के दौरान एक पुलिस ऑफिसर की शर्मनाक हरकत सामने आने के बाद, मुंबई पुलिस ने कॉन्स्टेबल दीपक का बचाव किया है और कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो गैर-जिम्मेदाराना है। ऑफिसर का इरादा महिला के साथ गलत व्यवहार या फ़्लर्ट करने का नहीं था। जब ऑफिसर प्रोटेस्ट के दौरान एक आदमी को अरेस्ट करने गया था, तो महिला प्रोटेस्टर बीच में आ गई और यह वीडियो है। इस मामले में जांच के बाद, पुलिस डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों ने वीडियो फुटेज की ध्यान से जांच करने के बाद ऊपर बताए गए पुलिस ऑफिसर को क्लीन चिट दे दी है। इससे नागरिकों में गुस्सा है। पुलिस ने अपने इनकार वाले बयान में कहा है कि प्रोटेस्ट करने वालों को कंट्रोल करने वाले कॉन्स्टेबल की कोई गलती नहीं है। उसने जानबूझकर महिला को नहीं छुआ। यह पक्का है कि वह प्रोटेस्ट करने वालों को कंट्रोल कर रहा था। इस मामले में, वकील नितिन सतपुते ने पुलिस कॉन्स्टेबल को मिली क्लीन चिट पर हैरानी जताई है और पीड़ित से अपील की है कि वह खुद ऑफिसर के खिलाफ केस दर्ज करे। अगर इस मामले में केस दर्ज नहीं हुआ तो वह केस दर्ज करवाने के लिए कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई और दूसरी जगहों पर स्टूडेंट्स के खिलाफ हिंसा के जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे चिंताजनक हैं। इसमें कई ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जो बहुत ज़्यादा क्रूरता पर आधारित हैं। एक वीडियो में एक कांस्टेबल दो स्टूडेंट्स को झूठे ड्रग केस में फंसाने की धमकी दे रहा है, जबकि दूसरे वीडियो में पुलिस कांस्टेबल की यह शर्मनाक हरकत सामने आई है। इस वीडियो के बाद कई पॉलिटिकल लीडर्स ने भी इसे ट्वीट करके एक्शन की मांग की है। पुलिस ने इस मामले में कांस्टेबल को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन इससे पुलिस डिपार्टमेंट की इमेज पर भी असर पड़ा है। इस वीडियो ने मुंबई पुलिस की इमेज खराब की है। पुलिस के बर्ताव से जनता में गुस्सा है और पुलिस के इस नए रुख से भी हैरान है कि कांस्टेबल बेगुनाह है और उसने कुछ भी गलत नहीं किया है।
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