राजनीति
विधानसभा चुनाव : यूपी में 108 सीटों के नुकसान के बावजूद सरकार बनाएगी भाजपा, उत्तराखंड और पंजाब में मजबूत स्थिति में कांग्रेस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत की प्रबल संभावना बनी हुई है। मगर पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले 108 सीटें कम मिलने की संभावना है, क्योंकि समाजवादी पार्टी (सपा) तेजी से आगे बढ़ रही है। एबीपी-सीवोटर-आईएएनएस फाइव स्टेट्स स्नैप पोल में सामने आए निष्कर्षो में यह जानकारी मिली है।
स्नैप पोल के अनुसार, कांग्रेस उत्तराखंड और पंजाब में मजबूत वापसी कर रही है। सर्वे से पता चला है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा 2022 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए अभी भी फेवरेट (लोगों की राय में पसंदीदा) बनी हुई है, वहीं समाजवादी पार्टी जोर पकड़ रही है और दोनों पार्टियों के बीच अंतर कम होता जा रहा है।
403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा और गठबंधन सहयोगियों को 217 सीटें मिलने का अनुमान है। यह 2017 के चुनावों में गठबंधन को मिली 325 सीटों से 108 सीटें कम है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और अब उसे 156 सीटें मिलने की उम्मीद है। यूपी में अब साफ तौर पर भाजपा और सपा के बीच मुकाबला है और दोनों के बीच महज 60 सीटों का अंतर है।
सर्वे के अनुसार, उत्तराखंड में, भाजपा पिछले चुनाव में मिली 57 सीटों के मुकाबले 38 सीटें जीत सकती है और वह 19 सीटों के नुकसान के साथ अभी भी दौड़ में आगे चल रही है। यह कांग्रेस ही है जो 70 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटों के आंकड़े को छूते हुए 21 सीटों की बढ़त के साथ भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है।
पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच की खाई कम होती जा रही है। आप अभी भी 117 सीटों वाली विधानसभा में 51 सीटों के साथ आगे है, लेकिन कांग्रेस भी 46 सीटों के अनुमान के साथ अंतर को कम करते हुए दिखाई दे रही है। हालांकि इसे पिछले चुनाव में मिली 77 सीटों के मुकाबले 31 सीटों का नुकसान झेलना पड़ेगा, लेकिन नए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी अंतर को कम करते जरूर दिख रहे हैं। अकाली दल 20 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर है।
गोवा में, भाजपा 40 सदस्यीय विधानसभा में 21 सीटों के साथ आगे चल रही है, जबकि अन्य 10 पर कब्जा कर सकते हैं। तटीय राज्य में आप को 5 और कांग्रेस को केवल 4 सीटें मिलने की उम्मीद है।
मणिपुर में, भाजपा 60 सदस्यीय विधानसभा में 27 सीटों के साथ आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 22 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपने वोट शेयर में 0.7 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखने को मिल सकती है और इसका शेयर 40.7 प्रतिशत पर रह सकता है, क्योंकि वह पिछले बार के मुकाबले 108 कम सीटों पर जीत हासिल करते हुए दिखाई दे रही है। इसके अलावा सपा अपने वोट शेयर में 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 31.1 प्रतिशत वोट पाने में कामयाब हो सकती है।
महाराष्ट्र
मुंबई: शब बरात के बाद से नरेलवाड़ी कब्रिस्तान की सफाई कब्रिस्तान में खंभे ठीक किए गए, पार्षद वकार खान की टीम ने कब्रिस्तान की सफाई की

मुंबई: मुंबई शब-ए-बारात से पहले कब्रिस्तान की सफाई का काम चल रहा है। साउथ मुंबई वार्ड नंबर 211 के कॉर्पोरेटर वकार खान ने हाल ही में नरेलवाड़ी कब्रिस्तान के ट्रस्टियों से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान ट्रस्टियों ने बताया कि कब्रिस्तान में लगी छह हाई-मास्ट लाइटें पिछले आठ महीनों से बंद थीं, जिससे रात में काफी दिक्कतें हो रही थीं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वकार खान ने BMC के संबंधित अधिकारियों से बात की और समस्या का तुरंत समाधान करने की मांग की। शुरू में अधिकारियों ने बताया कि इस काम के लिए करीब 24 लाख रुपये के फंड की जरूरत है, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं है और इसे मंजूरी मिलनी है। बाद में वकार खान ने सीनियर अधिकारियों और वार्ड अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा, जिसके चलते सिर्फ दो दिनों के अंदर सभी हाई-मास्ट लाइटें फिर से चालू कर दी गईं। कब्रिस्तान के दौरे के दौरान यह भी देखा गया कि वहां गंभीरता से सफाई की जरूरत है। तो दो से तीन दिन के अंदर, वकार खान की लीडरशिप में, मदनपुर हनागपाड़ा के करीब 40 से 50 लोकल लोगों ने बिना किसी पॉलिटिकल मकसद के खुद कब्रिस्तान की सफाई का काम अपने हाथ में ले लिया। दो से तीन घंटे में करीब 50 कब्रों के आस-पास का एरिया साफ हो गया।
इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, यह तय किया गया कि रविवार, 1 फरवरी को एक बड़ा सफाई अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें 100 से 150 लोकल, नॉन-पॉलिटिकल लोग हिस्सा लेंगे।
यह सफाई अभियान सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगा, जिसका मकसद मुसलमानों की इस आखिरी आरामगाह को साफ, सुथरा और इज्ज़तदार बनाना है। यह अभियान पूरी तरह से पब्लिक सर्विस और धार्मिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी के तौर पर चलाया जा रहा है, जिसमें कोई पॉलिटिकल मकसद शामिल नहीं है।
राजनीति
महाराष्ट्र: दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने ली उपमुख्यमंत्री पद की शपथ

मुंबई, 31 जनवरी : एनसीपी विधायक दल की नेता और दिवंगत उपख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने लोकभवन में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ग्रहण कर ली है। लोकभवन में एनसीपी विधायक दल की नेता और दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ लेने के दौरान मौजूद एनसीपी नेताओं ने ‘अजीत दादा अमर रहें’ के नारे लगाए।
इससे पहले दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार के एनसीपी विधायक दल की नेता चुने जाने के बाद पार्टी नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी।
एनसीपी नेता अनिल भैदास पाटिल ने कहा था कि सबसे जरूरी बात यह है कि पहले हमें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सभी विधायकों के साथ मिलकर यह तय करना था कि सुनेत्रा पवार को कैसे मनाया जाए।
उन्होंने कहा कि इतना बड़ा झटका लगा है कि सुनेत्रा पवार के लिए इससे उबरना लगभग नामुमकिन है। हालांकि, हमारी कोशिश है कि पार्टी की कमान किसी को सौंपी जाए। हमें लगता है कि इस समय सुनेत्रा पवार यह जिम्मेदारी संभाल सकती हैं क्योंकि जल्द स्थानीय निकाय चुनाव भी होने वाले हैं। जितने भी उम्मीदवार चुनाव में खड़े किए, अजित पवार उन्हीं को जिताने के लिए दौरे कर रहे थे। अजित पवार के निधन के बाद उम्मीदवारों को संभालने की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार पर होगी।
विधायक सना मलिक ने कहा कि पार्टी में अगर अजित पवार के बाद किसी को तुरंत स्वीकार किया जा सकता था, तो सुनेत्रा पवार ही हैं। वे पिछले दो साल से कार्यकर्ताओं के साथ खुद जुड़ी रहती थीं।
शरद पवार की पार्टी के साथ विलय की चर्चाओं पर अनिल भैदास पाटिल ने कहा कि संभावित विलय को लेकर दादा की कोशिशें चल रही थीं और हममें से कुछ लोगों को इसके बारे में थोड़ी जानकारी थी। कुछ नेताओं के बीच बातचीत हो रही थी और कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे थे कि अजित पवार और शरद पवार के साथ करीबी नेता बात करते दिख रहे थे। लेकिन मुलाकात के समय किन मुद्दों, गठबंधन और विलय को लेकर चर्चा हुई, इसका जवाब अजित पवार के निधन के बाद कोई देने वाला नहीं है।
राजनीति
सुनेत्रा पवार चुनी गईं एनसीपी विधायक दल की नेता, शाम 5 बजे लेंगी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ

मुंबई, 31 जनवरी : दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) विधायक दल का नेता चुना गया है। वे शाम 5 बजे उपमुख्यमंत्री की शपथ लेंगी।
जानकारी के अनुसार, बैठक में वरिष्ठ एनसीपी नेता दिलीप वलसे पाटिल ने विधायक दल के नेता के लिए सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा। छगन भुजबल और अन्य नेताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
महाराष्ट्र लोकभवन में शाम 5 बजे सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिलाई जाएगी। पांच बजे सुनेत्रा के शपथ ग्रहण की जानकारी राजभवन को दी गई। सादगीपूर्वक शपथ ग्रहण होगा। बताया जाता है कि शाम करीब चार बजे राज्यपाल मुंबई पहुंचेंगे।
एनसीपी नेता अनिल भैदास पाटिल ने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि पहले हमें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सभी विधायकों के साथ मिलकर यह तय करना था कि सुनेत्रा पवार को कैसे मनाया जाए। उसी के मुताबिक, शुक्रवार को वहां सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह यहां आईं।
उन्होंने कहा कि इतना बड़ा झटका लगा है कि सुनेत्रा पवार के लिए इससे उबरना लगभग नामुमकिन है। हालांकि, हमारी कोशिश है कि पार्टी की कमान किसी को सौंपी जाए। हमें लगता है कि इस समय सुनेत्रा पवार यह जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। क्योंकि जल्द स्थानीय निकाय चुनाव भी होने वाले हैं। जितने भी उम्मीदवार चुनाव में खड़े किए, अजित पवार उन्हीं को जिताने के लिए दौरे कर रहे थे। अजित पवार के निधन के बाद उम्मीदवारों को संभालने की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार पर होगी।
विधायक सना मलिक ने कहा कि उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख के लिए सुनेत्रा पवार के नाम की चर्चा हुई। पार्टी में अगर अजित पवार के बाद किसी को तुरंत स्वीकार किया जा सकता था, तो सुनेत्रा पवार ही हैं। वे पिछले दो साल से कार्यकर्ताओं के साथ खुद जुड़ी रहती थीं।
शरद पवार की पार्टी के साथ विलय की चर्चाओं पर अनिल भैदास पाटिल ने कहा कि संभावित विलय को लेकर दादा की कोशिशें चल रही थीं और हममें से कुछ लोगों को इसके बारे में थोड़ी जानकारी थी। कुछ नेताओं के बीच बातचीत हो रही थी और कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे थे कि अजित पवार और शरद पवार के साथ करीबी नेता बात करते दिख रहे थे। लेकिन मुलाकात के समय किन मुद्दों, गठबंधन और विलय को लेकर चर्चा हुई, इसका जवाब अजित पवार के निधन के बाद कोई देने वाला नहीं है।
विलय की अटकलों पर सना मलिक ने कहा, “मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुने जाते, दोनों पार्टियों का विलय मुश्किल है।
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