व्यापार
लगातार तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, आईटी सेक्टर 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरा
मुंबई, 12 फरवरी : लगातार तीन सत्रों की तेजी के बाद हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स अपने पिछले बंद (84,233.64) से 265.21 अंकों की गिरावट के साथ 83,968.43 पर खुला, तो वहीं निफ्टी50 अपने पिछले बंद (25,953.85) से 47.15 अंक गिरकर 25,906.70 पर खुला।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.28 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 405.13 अंक या 0.48 प्रतिशत गिरकर 83,828.51 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 113.45 अंकों यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,840.40 पर ट्रेड कर रहा था।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.78 प्रतिशत की गिरावट आई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें, तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिसमें 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.35 प्रतिशत की गिरावट तो निफ्टी बैंक में 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। जबकि निफ्टी एफएमसीजी में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई।
निफ्टी50 इंडेक्स पर 30 से अधिक शेयर नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे, जिनमें इंफोसिस (5 प्रतिशत की गिरावट), टीसीएस (4.40 प्रतिशत की गिरावट), एचसीएल टेक (4.40 प्रतिशत की गिरावट), टेक महिंद्रा (4.24 प्रतिशत की गिरावट), विप्रो (3.32 प्रतिशत की गिरावट) और इटरनल (2.23 प्रतिशत की गिरावट) टॉप लूजर्स में शामिल रहे। इसके अलावा, एचडीएफसी लाइफ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एम एंड एम, एसबीआई लाइफ के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
जबकि आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, आइशर मोटर्स, एचयूएल, एनटीपीसी, बीईएल और एक्सिस बैंक के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी50 ने 80 अंकों की बढ़त के साथ गैप-अप ओपनिंग की थी, लेकिन पूरे दिन सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा, जिससे बाजार में कंसोलिडेशन और निवेशकों की अनिश्चितता झलकती है। तकनीकी नजरिए से देखें तो 26,050-26,100 के दायरे में निफ्टी पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जबकि 25,800-25,850 के बीच निकट अवधि का सपोर्ट दिखाई दे रहा है।
एक्सपर्ट ने कहा कि संस्थागत गतिविधियों की बात करें तो 11 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार चौथे सत्र में खरीदारी जारी रखी और 943 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) बिकवाली के रुख में दिखे और उन्होंने 125 करोड़ रुपए से अधिक के शेयर बेचे।
मार्केट एक्सपर्ट ने आगे बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को अनुशासित और चयनात्मक रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। नई लंबी पोजीशन तभी बनानी चाहिए जब निफ्टी 26,000 के ऊपर मजबूती से टिके, क्योंकि यह स्तर पार करना बाजार में स्थिर और सार्थक सुधार का संकेत होगा।
अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार, भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

नई दिल्ली, 13 फरवरी : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।
बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।
इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।
जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।
इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।
चीन की अगर बात करें, तो उसकी हमेशा से ही चटगांव पोर्ट पर नजर रही है। यूनुस के शासन में यह खबरें भी सामने आ रही थी कि बांग्लादेश के सभी बड़े पोर्ट का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया जाएगा। अगर ऐसा हो जाता, तो चीन भविष्य में भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता था।
बीएनपी सरकार चीन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग को और बढ़ा सकती है। इससे दक्षिण एशिया, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। यदि आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों तक महसूस हो सकता है।
भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।
भारत के लिए बांग्लादेश एक बड़ा निर्यात बाजार है। नीतिगत बदलाव से कारोबारी माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की वापसी के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच हालात में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन अगर जमात-ए-इस्लामी की वापसी होती तो यह भारत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता था।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 1,048 अंक लुढ़का

मुंबई, 13 फरवरी : भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,048.16 अंक या 1.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,626.76 और निफ्टी 336.10 अंक या 1.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,471.10 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल शेयरों ने किया। इसके कारण सूचकांकों में निफ्टी मेटल (3.31 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (2.24 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी (2.23 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (2.04 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.90 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (1.88 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (1.68 प्रतिशत) और निफ्टी कंजप्शन (1.63 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में एचयूएल, इटरनल, टाटा स्टील, टाइटन, टीसीएस, पावर ग्रिड, बीईएल, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक, एनटीपीसी, इन्फोसिस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडिगो लूजर्स थे। वहीं, बजाज फाइनेंस और एसबीआई ही केवल हरे निशान में बंद हुए ।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,032.85 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,438 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 311.20 अंक या 1.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,032.90 पर बंद हुआ।
एलकेपी सिक्योरिटीज में रूपक दे ने कहा कि अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत के बाद निफ्टी की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। दिन अंत में इंडेक्स एक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इंडिया विक्स फिर से 200 डीएमए के पार चला गया है, जो बाजार भागीदारों के बढ़ते डर को दिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 25,500 के आसपास है। अगर यह टूटता है तो निफ्टी 25,000 के आंकड़े को भी छू सकता है। इसके लिए रुकावट का स्तर 25,800 के आसपास है।
दूसर तरफ, कच्चे तेल में तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 68 डॉलर प्रति औंस और डब्ल्यूटीआई क्रूड आधा प्रतिशत की तेजी के साथ 63 डॉलर प्रति औंस पर था।
राजनीति
यूपी में वंदे मातरम पर भाजपा ने विपक्ष पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप

लखनऊ, 13 फरवरी : उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘वंदे मातरम’ और विधानसभा की कार्यवाही को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के नेताओं ने कहा कि विपक्ष देश को ‘वंदे मातरम’ के नाम पर गुमराह कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाचार एजेंसी मीडिया से बात करते हुए ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गजट जारी हो चुका है और अब पूरे देशवासियों को इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में गाना चाहिए। इसे उन्होंने गर्व का विषय बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।
केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि भारत में रहते हुए ‘वंदे मातरम’ गाना आवश्यक कर दिया गया है और इसका विरोध करने वाले अपना “असली रंग” दिखाएंगे।
कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान पर निशाना साधते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह अभियान खोखला है। उनका दावा है कि सरकार की विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों में व्यापक विकास कार्य हो रहे हैं।
उन्होंने बजट को लेकर भी विपक्ष पर तंज कसा और कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें बजट में भी भ्रष्टाचार नजर आता है, जबकि विकास पर ध्यान देने वालों को विकास दिखाई देता है।
प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी ‘वंदे मातरम्’ के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गान और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र चेतना और राष्ट्र प्रेम का आधार हैं। उनके अनुसार, इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिससे किसी मजहब या व्यक्ति को ठेस पहुंचे, इसलिए सभी को इसे सम्मानपूर्वक गाना चाहिए। मेरे ख्याल से ‘वंदे मातरम्’ में कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जिसके गाने से किसी मजहब या व्यक्ति पर कोई असर पड़े, इसलिए सभी को इसे गाना चाहिए।
वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि हाल ही में विधानसभा की कार्यवाही बेहद सकारात्मक और सार्थक रही।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को सदन रात करीब 9:30 बजे तक चला और सभी विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाया। सरकार ने भी सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद मजबूत हुआ।
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