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कीमती धातुओं में बड़ा उतार-चढ़ाव, तेजी के बाद फिर गिरा सोने-चांदी का भाव

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मुंबई, 12 फरवरी : पिछले कुछ दिनों से कमोडिटी बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। वहीं गुरुवार के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना बताया गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना गिरकर 1,57,701 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी भी गिरकर 2,58,730 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गई।

हालांकि खबर लिखे जाने तक (करीब 11.51 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.24 प्रतिशत यानी 378 रुपए की गिरावट के साथ 1,58,377 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 0.39 प्रतिशत यानी 1,015 रुपए की गिरावट के साथ 2,62,003 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।

शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स 96.83 से बढ़कर 96.94 पर पहुंच गया। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों के कारण डॉलर में मजबूती आई। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने-चांदी जैसी कीमती धातुएं अन्य देशों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग कम हो सकती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि जनवरी में अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा नौकरियां बढ़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई, जिससे संकेत मिलता है कि वहां का श्रम बाजार मजबूत है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेड) कुछ समय तक ब्याज दरों को अपरिवर्तित रख सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक मानव मोदी ने कहा कि पिछले 13 महीनों में नौकरी बढ़ोतरी सबसे ज्यादा रही, लेकिन संशोधित आंकड़ों के अनुसार 2025 में पहले बताए गए 5,84,000 नौकरियों की जगह केवल 1,81,000 नौकरियां ही जुड़ीं।

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के चलते सोना-चांदी की कीमतों में तेजी आई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत के बाद यह स्पष्ट हुआ कि ईरान के मुद्दे पर कोई ‘निर्णायक’ समझौता नहीं हो पाया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत जारी रहेगी।

विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,56,000 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,60,500 रुपए के आसपास रेजिस्टेंस है। कॉमेक्स में सोना 5000 से 5150 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है। पहले यह 5500 से 5600 डॉलर के उच्च स्तर से नीचे आया था।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोने का रुझान सकारात्मक बना हुआ है और हाल की गिरावट मुनाफावसूली के कारण हो सकती है।

कॉमेक्स में चांदी 80 से 87 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रही है, जबकि इससे पहले यह 121 डॉलर से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में चांदी की मांग बनी रहेगी, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निवेशक अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्रिटेन के जीडीपी आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इनसे बाजार की दिशा तय हो सकती है।

व्यापार

शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच लाल निशान में खुला, कंज्यूमर सेक्टर पर दबाव

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वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 625 अंक या 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,891 और निफ्टी 162 अंक या 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,215 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व कंज्यूमर सेक्टर कर रहा था। सूचकांकों में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप लूजर था। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी भी लाल निशान में थे। वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी पीएसई हरे निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,035 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक की मामूली तेजी के साथ 17,832 पर था।

सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, इंडिगो, इटरनल, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट और टाटा स्टील लूजर्स थे। वहीं, पावर ग्रिड और सन फार्मा गेनर्स थे।

वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेत मिल जुले थे। टोक्यो, बैंकॉक, सोल, जकार्ता, हांगकांग और शंघाई लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को तेजी के साथ बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.69 प्रतिशत और नैस्डैक 1.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कच्चे तेल में फिर से तेजी देखने को मिल रही है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है।

कच्चे तेल में तेजी की वजह ईरान के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान पर आर्थिक दबाव तेज, हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की हालिया संघर्ष का अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए अपने अंदाज में ईरान की बदहाली बयां की।

उन्होंने कहा कि ईरान “कैश के लिए तरस रहा है” और हर दिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान झेल रहा है, जिससे वह तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाना चाहता है। वहां के नौसैनिक और पुलिस को वेतन नहीं मिल रहा है और वो सब दुखी हैं।

ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।

होर्मुज, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है।

दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था इस जलमार्ग और तेल निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है। एक अनुमान के मुताबिक, नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना लगभग 43.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो तेल निर्यात और व्यापार रुकने से जुड़ा है।

हालात को और गंभीर बनाते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में लंबे समय तक नाकेबंदी रहने पर आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो सकती हैं, जिससे मुद्रा पर दबाव, महंगाई और बैंकिंग संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इस बीच, क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां पहले रोजाना 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद सीमित रह गई है। कई टैंकर और जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, तेहरान ने इस रणनीति को “आर्थिक युद्ध” बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह इसका जवाब दे सकता है।

स्थिति सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।

एटलांटिक काउंसिल ऑफ युनाइटेड स्टेट्स के अनुसार, अगर हॉर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है, तो न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में कमी और व्यापार मार्गों में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार में इन कारणों के चलते आई रैली, सेंसेक्स 650 अंक से अधिक उछला

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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार के कारोबारी सत्र में बड़ी रैली देखी गई। दोपहर 1 बजे पर सेंसेक्स 660 अंक या 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,180 और निफ्टी 173 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,538 पर था।

बाजार में चौतरफा रैली देखी जा रही है, जिसे बैंकिंग सेक्टर लीड कर रहा है। निफ्टी बैंक 691 अंक या 1.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,273 पर था। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी ऑटो जैसे सूचकांक टॉप गेनर्स में शामिल थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में जोरदार तेजी देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 411 अंक या 0.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,202 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 204 अंक या 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,691 पर था।

बाजार में तेजी की वजह कच्चे तेल में कमजोरी को माना जा रहा है। अमेरिका -ईरान शांति वार्ता के चलते कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

अमेरिका -ईरान शांति वार्ता मंगलवार को प्रस्तावित है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर उम्मीद लगाई जा रही है कि दोनों देश आपसी शांति का कोई नया मार्ग निकालेंगे। इसी कारण के चलते जापान और कोरिया जैसे वैश्विक बाजार हरे निशान में थे।

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। हालांकि, बुधवार को समाप्त होने वाले सीजफायर से पहले दोनों देश शांति वार्ता के लिए एक मंच पर आने को तैयार है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए मंगलवार को पाकिस्तान पहुंच सकते हैं। वहीं, ईरानी डेलिगेशन भी अमेरिका से बातचीत की तैयारी कर रहा है।

बैंकिंग सेक्टर में रैली भी बाजार में व्यापक बढ़त के पीछे एक बड़ा कारण है, जिसे आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे दिग्गज बैंक लीड कर रहे हैं।

इसके अलावा, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव दर्शाने वाले इंडेक्स इंडिया विक्स में गिरावट भी बाजार में तेजी की एक वजह है। आमतौर पर जब भी इंडिया विक्स में गिरावट होती है तो बाजार में तेजी देखने को मिलती है। फिलहाल इंडिया विक्स 5.69 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17.72 पर है।

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