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यूपी में वंदे मातरम पर भाजपा ने विपक्ष पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप

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लखनऊ, 13 फरवरी : उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘वंदे मातरम’ और विधानसभा की कार्यवाही को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के नेताओं ने कहा कि विपक्ष देश को ‘वंदे मातरम’ के नाम पर गुमराह कर रहा है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाचार एजेंसी मीडिया से बात करते हुए ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गजट जारी हो चुका है और अब पूरे देशवासियों को इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में गाना चाहिए। इसे उन्होंने गर्व का विषय बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।

केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि भारत में रहते हुए ‘वंदे मातरम’ गाना आवश्यक कर दिया गया है और इसका विरोध करने वाले अपना “असली रंग” दिखाएंगे।

कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान पर निशाना साधते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह अभियान खोखला है। उनका दावा है कि सरकार की विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों में व्यापक विकास कार्य हो रहे हैं।

उन्होंने बजट को लेकर भी विपक्ष पर तंज कसा और कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें बजट में भी भ्रष्टाचार नजर आता है, जबकि विकास पर ध्यान देने वालों को विकास दिखाई देता है।

प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी ‘वंदे मातरम्’ के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गान और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र चेतना और राष्ट्र प्रेम का आधार हैं। उनके अनुसार, इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिससे किसी मजहब या व्यक्ति को ठेस पहुंचे, इसलिए सभी को इसे सम्मानपूर्वक गाना चाहिए। मेरे ख्याल से ‘वंदे मातरम्’ में कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जिसके गाने से किसी मजहब या व्यक्ति पर कोई असर पड़े, इसलिए सभी को इसे गाना चाहिए।

वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि हाल ही में विधानसभा की कार्यवाही बेहद सकारात्मक और सार्थक रही।

उन्होंने कहा कि गुरुवार को सदन रात करीब 9:30 बजे तक चला और सभी विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाया। सरकार ने भी सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद मजबूत हुआ।

महाराष्ट्र

मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत जमा होने पर सीजेपी समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज

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मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत के इकट्ठा होने, नारे लगाने और घोषणाएं करने के आरोप में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस के अनुसार, लगभग 400 से 500 अज्ञात समर्थक और प्रदर्शनकारी, जिनमें सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे, प्रणय अहीरे, आशुतोष रंका, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलंगी और योगेश इंगले शामिल थे, ने दादर वेस्ट में मीनाताई ठाकरे मेमोरियल के सामने शिवाजी पार्क ग्राउंड के गेट नंबर 6 पर बिना अनुमति के जमा हुए।

बताया जा रहा है कि यह जमावड़ा 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक सड़क पर जमा हुए और नारे लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बिना जरूरी अनुमति के लाउडस्पीकर भी लगाए गए थे।

शुक्रवार को सीजेपी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए अपना ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

भारी पुलिस तैनाती और शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों नागरिक और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए नारे लगाए गए।

आयोजकों द्वारा अपने आंदोलन का ‘सीजन 2’ बताए गए इस विरोध प्रदर्शन को मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि दादर इलाके के कई हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए थे।

इस प्रदर्शन को सार्वजनिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और मतदान के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थानों के महत्व के बारे में बात की।

मौजूद लोगों में अभिनेता शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी भी शामिल थे। इस सभा में शामिल लोगों ने वोटिंग के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।

अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज के जरिए अपना समर्थन दिया और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।

सभा को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।

दिपके ने औपचारिक रूप से ‘जेल भरो’ आंदोलन का आह्वान किया और कहा कि वोटिंग के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के खिलाफ पुलिस की चेतावनियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चुनौती भी दी।

दिपके ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आपने हमें सिर्फ तीन दिन के लिए जेल में डालने की बात कही थी। अगर आपने तीन महीने कहा होता तो पूरा मुंबई शहर पूरी तरह ठप हो जाता।”

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राजनीति

कर्नाटक में सूखे का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम, तीन दिन के दौरे के बाद निष्पक्ष रिपोर्ट का दिया भरोसा

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मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय सूखा आकलन टीम कर्नाटक का तीन दिन का दौरा करेगी। टीम जमीनी हालात का जायजा लेगी और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दिए गए डेटा और फील्ड में की गई पड़ताल के आधार पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपेगी। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और टीम के प्रमुख अजीत कुमार साहू ने यह भरोसा दिलाया है।

साहू ने शनिवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के ऑफिस-कम-रेसिडेंस ‘कृष्णा’ में हुई बैठक के दौरान यह भरोसा दिलाया। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ नियमों के तहत कर्नाटक के लिए सूखे से राहत के तौर पर 3,705.30 करोड़ रुपए की मांग की थी।

मुख्यमंत्री की मांग का जवाब देते हुए साहू ने कहा कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम तीन दिनों तक राज्य का दौरा करेगी, जमीनी हकीकत का जायजा लेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले राज्य सरकार के अधिकारियों से जरूरी डेटा इकट्ठा करेगी।

यह बैठक तब हुई जब केंद्र की टीम राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति और फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए कर्नाटक पहुंची।

शिवकुमार ने केंद्र की टीम को बताया कि कर्नाटक सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है, जिससे किसान और आम जनता परेशान हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि एनडीआरएफ नियमों के अनुसार राज्य को सूखे से राहत के लिए 3,705.30 करोड़ रुपए दिए जाएं।

उन्होंने कहा कि केंद्र के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक आकलन के बाद कर्नाटक के 240 तालुकों में से 217 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा, “बिना किसी दबाव में आए, केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए और बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से आकलन करके सूखा प्रभावित तालुकों की पहचान की गई।”

शिवकुमार ने कहा कि किसानों की परेशानी के राज्य की अर्थव्यवस्था और समाज पर व्यापक असर पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर किसान परेशान हैं, तो सब कुछ ठप हो जाता है। इसलिए, केंद्र सरकार को कर्नाटक के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।”

स्थिति को चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि अपने और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के चार दशकों के सार्वजनिक जीवन में, उन्होंने लोगों को इतनी गंभीर मुश्किलों का सामना करते हुए कभी नहीं देखा।

उन्होंने कहा, “यह बहुत चिंताजनक स्थिति है।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने चुने हुए प्रतिनिधियों और किसानों की समस्याओं को समझने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें 150 विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं के बारे में बात की।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कृष्णा बेसिन को छोड़कर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में जलाशयों में पानी की आवक कम है। उन्होंने कहा कि मलनाड और तटीय इलाकों में भी बारिश की भारी कमी देखी जा रही है।

उन्होंने शहरी इलाकों में पानी की स्थिति की ओर भी इशारा किया और कहा कि राज्य पर पानी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कावेरी जल समिति कर्नाटक को कावेरी नदी में पानी छोड़ने का निर्देश दे रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए 2,500 रुपए की राहत राशि की घोषणा की थी, लेकिन राज्य को केंद्र से और अधिक मदद की उम्मीद थी।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि मंत्रियों ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए जिलों का दौरा किया है, जबकि अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में एहतियाती और राहत के उपाय किए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक दौरे के दौरान राज्य को सूखे की स्थिति के बारे में आगाह किया था और उसके बाद उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों और अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने कहा कि बारिश की स्थिति को देखते हुए किसानों को बुवाई के फैसलों के बारे में भी सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसान भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जबकि गन्ना उत्पादक ज्यादा कीमत की मांग कर रहे हैं। दूध उत्पादक भी दूध की कीमतों में कम से कम 10 रुपए की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इस मुश्किल हालात में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।”

बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एल.के. अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त डॉ. उमा महादेवन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रितेश कुमार सिंह, राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन) के प्रधान सचिव मनोज कुमार मीना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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राजनीति

यूपी में सपा ने बदले दो एमएलसी उम्मीदवार, अखिलेश बोले-अनुभवी चेहरों के आने से जीत पक्की

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उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अचानक अपने दो उम्मीदवार बदल दिए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव की जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी और आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रकाश चंद्र गुप्त की जगह पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की है। दोनों बदलावों को अखिलेश यादव ने संबंधित नेताओं की सहमति से लिया गया फैसला बताया।

अखिलेश यादव ने नए प्रत्याशियों का स्वागत करते हुए पहले घोषित उम्मीदवारों कमलेश यादव और प्रकाश चंद्र गुप्त, उनके परिवारों तथा समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों ने जिस तरह पार्टी के फैसले में सहयोग किया है, उसके लिए वह उनके हमेशा आभारी रहेंगे। अखिलेश ने यह भी कहा कि समय आने पर दोनों को उचित सम्मान दिया जाएगा। सपा ने इससे पहले गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर कमलेश यादव और आगरा शिक्षक सीट पर प्रकाश चंद्र गुप्त को प्रत्याशी घोषित किया था। अब पार्टी ने दोनों सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा है।

23 अक्टूबर को इन सीटों समेत विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के लिए मतदान होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। अखिलेश यादव ने कहा कि दोनों अनुभवी नेताओं के आने से पार्टी को चुनाव में मजबूती मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से नए प्रत्याशियों के साथ पूरी ताकत से जुटने और पार्टी के सभी उम्मीदवारों को जिताने की अपील की। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का नाम सामने आना खास तौर पर महत्वपूर्ण है। चुनावी घटनाक्रम के दौरान त्रिपाठी भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे थे।

भाजपा द्वारा ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बनाई थी और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद अब सपा ने उन्हें अपने उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. आकाश अग्रवाल पहले निर्दलीय एमएलसी रह चुके हैं। उनका कार्यकाल भी इस चुनाव के साथ समाप्त होने वाली सीटों में शामिल है। ऐसे में सपा का उन्हें उम्मीदवार बनाना क्षेत्र में उनके चुनावी अनुभव को साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोगों ने गलत तरीके से वोट बनवाए हैं। साथ ही उन्होंने पिछले 10 वर्षों के शासन, प्रशासन और पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने गोरखपुर में सड़क पर पानी भरे होने का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने वाले व्यक्ति के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने का दावा किया। उन्होंने संतकबीरनगर में एक पहलवान की हत्या का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने पुलिस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था खराब हो चुकी है।

सपा अध्यक्ष ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को भी आगामी चुनावों के प्रमुख मुद्दों में शामिल करने के संकेत दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक की घटनाएं बढ़ीं और सरकारी नौकरियों में भेदभाव हुआ। अखिलेश यादव ने कहा कि तदर्थ शिक्षक, वित्तविहीन शिक्षक, शिक्षामित्र और पुरानी पेंशन योजना जैसे मुद्दों को समाजवादी पार्टी अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ भेदभाव बड़ा सवाल है और पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।

उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। अखिलेश यादव ने सपा के पीडीए-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक-सामाजिक गठजोड़ को भी चुनावी विमर्श के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इंडिया ब्लॉक के साथ भाजपा को हराया था और आगामी चुनाव में पीडीए की ताकत के सामने भाजपा टिक नहीं पाएगी।

उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए में प्रेम, दया और अपनापन है तथा पार्टी हर दुखी, पीड़ित और अपमानित व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न वर्गों के साथ अन्याय और भेदभाव करने का आरोप लगाया। सपा अध्यक्ष ने नई पीढ़ी और जेन-जी के बीच रोजगार को लेकर चिंता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास पर्याप्त नौकरी और रोजगार के अवसर नहीं हैं तथा बेरोजगारी बढ़ रही है। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान युवाओं को लैपटॉप दिए गए थे और आज वही युवा मोबाइल और लैपटॉप के जरिए सरकार से सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विकास चाहती है और पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी।

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