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सेंसेक्स, निफ्टी सपाट बंद; हेल्थकेयर और ऑटो शेयरों में रही तेजी
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मुंबई, 11 फरवरी : भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में करीब सपाट बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 40.28 अंक या 0.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 84,233.64 और निफ्टी 18.70 अंक या 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,953.85 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी भरने का काम हेल्थकेयर और ऑटो शेयरों ने किया। सूचकांक में निफ्टी हेल्थकेयर (1.62 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (1.30 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (1.03 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (1.01 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग (0.76 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (0.63 प्रतिशत) की तेजी के साथ शीर्ष पर थे।
दूसरी तरफ निफ्टी आईटी (1.76 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (0.16 प्रतिशत) और निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.16 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में एसबीआई, मारुति सुजुकी, इंडिगो, ट्रेंट, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, बीईएल, भारती एयरटेल और एलएंडटी गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, इटरनल, आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स और पावर ग्रिड लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी सपाट कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 18.65 अंक या 0.03 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,754.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.80 अंक की मामूली तेजी के साथ 17,455 पर बंद हुआ।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा कि सत्र के दौरान निफ्टी ने 26,000 का रुकावट का स्तर का सामान किया और इसके बाद गिरावट देखने को मिली। हालांकि, छोटी अवधि का ट्रेंड सकारात्मक बना हुआ है और सपोर्ट स्तर 25,800 के आसपास है। उन्होंने आगे बताया कि अगर निफ्टी 26,000 का स्तर पार करता है तो और तेजी आ सकती है।
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट हुई थी और सेंसेक्स अपने पिछले बंद (84,273.92) से 65.23 अंक उछलकर 84,339.15 पर खुला, तो वहीं निफ्टी अपने पिछले बंद (25,935.15) से 62.3 अंक की बढ़त के साथ 25,997.45 पर खुला।
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धनतेरस पर सोना या चांदी? छोटे निवेशकों के लिए क्या है बेहतर विकल्प, जानिए फायदे और जोखिम

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रोशनी का पर्व ‘दीपावली’ बस आने वाला ही है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, जो 6 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन लोग सोना और चांदी समेत कई कीमती धातुएं खरीदते हैं।
वहीं, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना केवल परंपरा नहीं, बल्कि निवेश का भी एक अहम माध्यम माना जाता है। हालांकि सीमित बजट वाले निवेशकों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि सोना खरीदें या चांदी। ऐसे में फैसला केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बजट, जोखिम क्षमता और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
सोना लंबे समय से संपत्ति सुरक्षित रखने (वेल्थ प्रिजर्वेशन) का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। इसकी मांग लगातार बनी रहती है और जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचा भी जा सकता है। हालांकि आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज और टैक्स अलग से देने पड़ते हैं, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश के नजरिए से गोल्ड कॉइन, गोल्ड बार, गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्प ज्यादा व्यावहारिक माने जाते हैं। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन आमतौर पर यह चांदी की तुलना में कम अस्थिर माना जाता है।
वहीं, चांदी छोटे निवेशकों के लिए अधिक किफायती विकल्प हो सकती है। कम बजट में निवेशक ज्यादा मात्रा में चांदी खरीद सकते हैं। इसके अलावा सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग चांदी को अतिरिक्त समर्थन देती है। हालांकि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक रहता है, क्योंकि इस पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में तेजी से मुनाफे के अवसर तो मिल सकते हैं, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है।
ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपका उद्देश्य संपत्ति सुरक्षित रखना और अपेक्षाकृत स्थिर निवेश है, तो सोना बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि आपका बजट सीमित है, आप ज्यादा मात्रा में धातु खरीदना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो चांदी पर विचार किया जा सकता है।
मौजूदा स्थिति में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 25 प्रतिशत और चांदी लगभग 55 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी है। ऐसे में कई निवेशक इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धनतेरस के दिन एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों और समयावधि के अनुसार फैसला लेना चाहिए।
जो निवेशक शुद्धता, सुरक्षा और स्टोरेज की चिंता से बचना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं। इनमें फिजिकल धातु रखने की जरूरत नहीं होती और निवेश एक्सचेंज के माध्यम से किया जा सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
1 नवंबर को प्रस्तावित रैली से व्यापारी वर्ग में चिंता, सीटीआई ने इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को लिखा पत्र

1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे समेत सभी घटक दलों को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद कराने की मांग की है।
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी वर्ग रैली का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन 1 नवंबर, धनतेरस और दीपावली से पहले की तैयारियों के लिए पीक दिन है। अगर महारैली का आयोजन होता है तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप हो जाएगा।
सीटीआई ने इसके लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को टालने का अनुरोध किया। सीटीआई इससे पहले राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत करा चुकी है।
सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 20 बाजार आते हैं जो 300 साल पुराने हैं और पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।
इन बाजारों में रोजाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं और यहां से 3000 ट्रक रोजाना गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों समेत देशभर के सभी राज्यों में माल ले जाते हैं।
व्यापारी वर्ग के अनुसार, ऐसी स्थिति में अगर महारैली होती है तो 31 अक्टूबर दोपहर से ही बसें और गाड़ियां दिल्ली बॉर्डर (सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर) पर आना शुरू हो सकती हैं और शाम से ही बहादुर शाह जफर मार्ग, जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग लग सकती है। ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं। तो असर 1 नवंबर नहीं, 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा।
सीटीआई ने कहा कि 1 नवंबर की रैली को दीपावली बाद 10 या 11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई विघ्न न पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए, जहां 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।
व्यापार
एआई पर ज्यादा खर्च से मेटा की रेटिंग पर संकट, एसएंडपी ने ‘आउटलुक’ को किया निगेटिव

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई पर भारी-भरकम खर्च अब चिंता का कारण बन गया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मेटा की एए- क्रेडिट रेटिंग के आउटलुक को स्थिर से घटाकर निगेटिव कर दिया है।
रेटिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि कंपनी की बैलेंस शीट पर एआई से जुड़े ज्यादा खर्च के कारण दबाव बढ़ रहा है। कंपनी का बढ़ता कर्ज भी इस फैसले की एक बड़ी वजह है। कर्ज को कमाई के अनुपात में देखा जाता है, जिसे लेवरेज कहा जाता है।
एसएंडपी ने कहा कि मेटा की अपने एआई निवेश से कमाई करने की क्षमता अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ज्यादा सीमित है। एजेंसी को इस बात को लेकर भी अनिश्चितता है कि मेटा का पूंजीगत खर्च कब तक इतना ज्यादा बना रहेगा और फ्री ऑपरेटिंग कैश फ्लो कब तक निगेटिव रहेगा। इसी वजह से आउटलुक घटाने का फैसला लिया गया।
एजेंसी को शक है कि पूंजीगत खर्च से होने वाली कमाई बढ़ती लागत से ज्यादा कब होगी। निगेटिव आउटलुक का मतलब है कि अगले दो साल में रेटिंग घटने की संभावना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एसएंडपी अभी तुरंत रेटिंग काटने पर विचार कर रही है।
मेटा की एए- रेटिंग अभी भी चौथी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग है और एक पायदान नीचे जाने पर भी कंपनी मजबूती से इन्वेस्टमेंट-ग्रेड में बनी रहेगी।
रेटिंग एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि मेटा का पूंजीगत खर्च इस साल 140 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा और 2027 में बढ़कर 225 अरब डॉलर से ज्यादा हो जाएगा। कंपनी का लेवरेज 2027 में 1.0 गुना से ऊपर जा सकता है, जबकि पिछले साल यह करीब 0.1 गुना था।
निवेशक भी इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि मेटा और अन्य कंपनियां एआई पर किए गए भारी निवेश से ठोस रिटर्न कब पैदा करेंगी। शुक्रवार को नैस्डैक 100 में 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जो निराशाजनक टेक कमाई के कारण दबाव में था।
मेटा ने अक्टूबर की शुरुआत में बताया था कि उसने भविष्य में 800 अरब डॉलर से अधिक खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा उन लीज से जुड़ा है जो अभी शुरू भी नहीं हुई हैं और ये ज्यादातर डेटा सेंटर और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हैं।
सीईओ मार्क जुकरबर्ग और अन्य अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी अपने हाल ही में जारी किए गए म्यूज मॉडल और पर्सनल एआई एजेंट से कैसे कमाई कर सकती है। रेवेन्यू मॉडल में सब्सक्रिप्शन, ट्रांजैक्शन फीस और यहां तक कि विज्ञापन भी शामिल हैं, जो पहले से ही इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे ऐप के जरिए कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा पैदा करता है।
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