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Tuesday,27-October-2026
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अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड एएए रेटिंग हासिल करने वाला भारत का पहला निजी बुनियादी ढांचा डेवलपर बना

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अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) ने मंगलवार को केयर रेटिंग्स द्वारा अपनी क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाकर एएए करने की घोषणा की।

कंपनी ने एक बयान में कहा, यह क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा भारत में किसी भी जारीकर्ता को दी गई उच्चतम संभावित रेटिंग है, जो एपीएसईजेड की साख के सबसे मजबूत स्तर और उसके सभी वित्तीय मार्गदर्शन को पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है।

एपीएसईजेड के प्रबंध निदेशक, करण अदाणी ने कहा, “हम अपने वित्तीय अनुशासन और डिलीवरेजिंग, विविध परिसंपत्ति आधार के साथ-साथ ग्राहक आधार और इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उच्चतम लाभप्रदता के प्रति प्रतिबद्धता की मान्यता को महत्व देते हैं।”

इस विकास के साथ एपीएसईजेड यह मान्यता पाने वाला पहला बड़े आकार का निजी बुनियादी ढांचा डेवलपर बन गया है।

रेटिंग एपीएसईजेड के मजबूत एकीकृत व्यवसाय मॉडल, प्रमुख उद्योग की स्थिति, स्वस्थ लाभप्रदता के साथ संचालन में मजबूत वृद्धि, उच्च तरलता और कम उत्तोलन के साथ मिलकर संचालित होती है। कंपनी ने कहा कि अधिग्रहण के बाद बंदरगाह परिसंपत्तियों में बदलाव के इसके सफल ट्रैक रिकॉर्ड और बंदरगाह गेट से ग्राहक गेट तक सेवाएं प्रदान करने वाली परिवहन उपयोगिता के रूप में इसके एकीकृत दृष्टिकोण के कारण वित्तवर्ष 2019-24 के लिए वॉल्यूम में सभी भारतीय बंदरगाहों के लिए 4 फीसदी सीएजीआर की तुलना में 15 फीसदी की वार्षिक वृद्धि हुई है।

वित्तवर्ष में एपीएसईजेड ने 419.95 एमएमटी का कार्गो वॉल्यूम किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 फीसदी ज्‍यादा है। एपीएसईजेड, विश्‍व स्तर पर विविधीकृत अदाणी समूह का एक हिस्सा, पश्चिमी तट पर रणनीतिक रूप से स्थित सात बंदरगाहों और टर्मिनलों और पूर्वी तट पर सात बंदरगाहों और टर्मिनलों के साथ देश का सबसे बड़ा बंदरगाह डेवलपर और ऑपरेटर है, जो देश के कुल पोर्ट वॉल्यूम के 27 फीसदी का प्रतिनिधित्व करता है।

कंपनी का लक्ष्य अगले दशक में दुनिया के सबसे बड़े बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स प्लेटफार्मों में से एक बनना है।

राजनीति

भाजपा 28 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत देशभर में पदयात्रा निकालेगी

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नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बुधवार को अपने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत देशभर में पदयात्रा आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अपने-अपने क्षेत्रों में शामिल होने की उम्मीद है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली में होने वाली पदयात्रा में हिस्सा लेंगे, जो चांदनी चौक इलाके में आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली इस पदयात्रा में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।

यह राष्ट्रव्यापी पहल भाजपा के उस अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद विपक्ष के आरोपों का जवाब देना और लोकतंत्र तथा चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना है।

दिल्ली में, यह पदयात्रा दोपहर 2 बजे लाल किले से शुरू होकर चांदनी चौक स्थित टाउन हॉल की ओर जाएगी। इस पदयात्रा में 15,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

भाजपा का लक्ष्य इन कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करना है। वरिष्ठ नेताओं के इन पदयात्राओं में शामिल होने से पार्टी के अभियान को मजबूती मिलेगी और वे जनता तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।

इस यात्रा को लेकर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के माध्यम से भाजपा प्रदेशभर में जनता के बीच जाकर कांग्रेस के झूठ और फेक नैरेटिव को तथ्यों के साथ उजागर करेगी। पदयात्राओं एवं जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को जागरूक करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और प्रदेश में सुशासन के प्रति जनविश्वास को और मजबूत किया जाएगा।

यहां बताते चलें कि भाजपा का यह अभियान उस वक्त शुरू होने जा रहा है, जब इंडिया ब्लॉक की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रैली प्रस्तावित है। यहां पर 1 नवंबर को मेगा रैली होने की उम्मीद जताई गई है।

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राजनीति

बिना ठोस वजह इस्तीफा देने वाले विधायकों से उपचुनाव का खर्च वसूलने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें बिना किसी ठोस वजह के अपनी सीट से स्वेच्छा से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों से उपचुनाव पर हुए सरकारी खर्च की वसूली के लिए व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (ईसीआई), तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी और राज्य में अपनी सीटों से इस्तीफा देने वाले छह पूर्व विधायकों समेत अन्य से जवाब मांगा है।

यह याचिका वकील के. सुथन ने दायर की है। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विधायकों के स्वेच्छा से इस्तीफा देने के कारण सरकारी खर्च पर उपचुनाव कराने के मामले में वित्तीय जवाबदेही की मांग करने वाली उनकी जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने ‘चुनाव व्यय सुरक्षा’ प्रणाली शुरू करने के लिए निर्देश देने की मांग की है। इसके तहत बिना कानूनी रूप से मान्य ठोस कारण के इस्तीफा देने वाले विधायक को दोबारा चुनाव लड़ने से पहले होने वाले उपचुनाव की लागत के बराबर राशि जमा करनी होगी।

उन्होंने ऐसे विधायकों के लिए चुनाव लड़ने पर पांच साल की अयोग्यता की भी मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 4 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के कुछ हफ्तों के भीतर ही एआईएडीएमके के छह विधायकों ने अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया और बाद में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए।

उनका इस्तीफा तब आया, जब उनमें से कुछ के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करने के आरोप में अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की गई थी।

याचिका के अनुसार, इस्तीफों ने विधायकों को लंबित कार्यवाही से बचने और एक अलग राजनीतिक बैनर के तहत फिर से चुनाव लड़ने में मदद की, जबकि इनके परिणामस्वरूप हुए उपचुनावों ने सरकारी खजाने पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डाला।

इसमें आगे तर्क दिया गया है कि चुनाव आयोग ने 2004 में चुनाव सुधारों के लिए अपने प्रस्तावों में सिफारिश की थी कि अपनी सीटें छोड़कर उपचुनाव कराने वाले उम्मीदवारों को संबंधित खर्च वहन करना चाहिए, लेकिन यह सिफारिश अब तक लागू नहीं हुई है।

याचिकाकर्ता मद्रास हाईकोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रस्तावित वित्तीय सुरक्षा और पांच साल की अयोग्यता चुनावी कानून में नए प्रावधान जोड़ देगी।

हाईकोर्ट ने कहा था कि मांगी गई राहत में एक नया वित्तीय और दंडात्मक ढांचा बनाना शामिल है, जो न्यायिक निर्देशों के बजाय विधायी नीति के दायरे में आता है।

हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को कहा था, “किसी विधायी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार स्वयं सदन की सदस्यता को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक योजना का एक पहलू है और न्यायिक आदेश द्वारा इस पर अतिरिक्त-वैधानिक शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं।”

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राजनीति

शाहदरा थाने में वकीलों से मारपीट पर भड़के सौरभ भारद्वाज, बोले-पुलिस की बर्बरता और सरकार के खिलाफ एकजुट हों अधिवक्ता

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नई दिल्ली । शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं की हड़ताल और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में अधिवक्ताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए पुलिस की कार्यशैली और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की बर्बरता और सरकार के अहंकार के खिलाफ सभी अधिवक्ताओं को एक साथ खड़ा होना चाहिए।

सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, शाहदरा थाने में वकीलों के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने के बदले रिश्वत ली थी। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि वकीलों की शिकायत पर थाना प्रभारी (एसएचओ) के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस ने अधिवक्ताओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानून के रखवाले ही न्याय की मांग कर रहे हों और उनके खिलाफ ही कार्रवाई होने लगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में पत्रकार से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार ने एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कथित छेड़छाड़ के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, तब बाद में पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ ही जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर दिया था। भारद्वाज ने दोनों मामलों के बीच समानता बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।

उनका आरोप है कि शिकायत करने वालों की बात सुनने और आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियों और आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच तथा संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। आप नेता ने बार काउंसिलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार से जुड़े मामले के समय बार काउंसिलों को आवाज उठानी चाहिए थी।

अब शाहदरा थाने के मामले में अधिवक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए बार काउंसिलों को आगे आना चाहिए। भारद्वाज ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में वकीलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ कथित अन्याय होने पर एकजुट होकर न्याय की मांग करनी चाहिए

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