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Monday,31-August-2026
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पैपराजी ने अस्पताल में किए अपने व्यवहार के लिए सलमान खान से माफी मांगी, एक्टर बोले-कोई बात नहीं

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बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने हाल ही में ऑनलाइन और असल जिंदगी दोनों में पैपराजी पर भड़क गए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से गुस्सा जाहिर करते हुए मीडियाकर्मियों को निजता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। इसके बाद पैपराजी ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता से अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी।

सलमान खान फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की सक्सेस पार्टी में पहुंचे थे तो पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और उनसे अपने दखलंदाजी भरे व्यवहार के लिए माफी मांगी। जैसे ही अभिनेता अंदर आए और इंडस्ट्री के अपने दोस्तों से मिले, पैपराजी लगातार “सॉरी” कहते सुनाई दिए। शोर सुनकर अभिनेता पैपराजी से इशारे में पूछा कि क्या हुआ। उनकी माफी सुनकर सलमान ने इशारे में कहा कि कोई बात नहीं।

दरअसल इससे पहले जब सलमान खान एक अस्पताल में किसी परिचित का हालचाल लेने पहुंचे थे तो बाहर निकलते वक्त उन्होंने पैपराजी को हंगामा करने और निजता का उल्लंघन करने पर उन्हें फटकार लगाई थी। इसके बाद मंगलवार देर रात सलमान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पैपराजी के व्यवहार पर अपनी घोर निराशा व्यक्त की।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अगर मैं किसी प्रेस को अस्पताल में मेरे दर्द का आनंद लेते हुए देखूं। जिनके लिए मैं खड़ा रहा हूं, जिनसे मैंने बातचीत की है, ये ध्यान दिया कि वे भी अपनी रोजी-रोटी कमा सकें, लेकिन अगर वे मेरे नुकसान से पैसा कमाना चाहते हैं तो चुप रहो खुश मत हो। भाई भाई भाई, मातृभूमि फिल्म की मां की आंख, पिक्चर जरूरी है या लाइफ।”

उन्होंने यह भी लिखा कि किसी के दर्द और मुश्किल हालात को मजाक या तमाशा बनाना सही नहीं है। सलमान ने गुस्से में लिखा कि अगली बार उनके साथ ऐसा व्यवहार करके देख लेना। 60 साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला। ये याद रख लेना, जेल में डालोगे हा हा।

ये पोस्ट इंटरनेट पर तुरंत वायरल हो गए और फैंस व सेलेब्रिटीज ने कमेंट सेक्शन में समर्थन जताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। वहीं, कुछ नेटिजन्स कैप्शन को लेकर असमंजस में दिखे और अभिनेता के लिए चिंतित भी थे।

राष्ट्रीय समाचार

बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

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अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।

आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।

आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।

अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।

हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।

टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।

इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।

जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

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राष्ट्रीय समाचार

यूपीआई लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हुई : केंद्र

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भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से 25 अगस्त, 2016 को यूपीआई को लॉन्च किया था। आज के समय में यह देश के डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन गया है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपए थी। यह बीते एक दशक में करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी दिखाता है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई के बड़े पैमाने, भरोसे और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया भर में पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने इसे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक, दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।

2026 में यूपीआई की ग्रोथ की रफ्तार और तेज हो गई है। मई में पहली बार यूपीआई लेनदेन की संख्या 2,300 करोड़ के आंकड़े को पार कर 2,320 करोड़ पर पहुंच गई। इसके बाद जुलाई में प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो इसके दस साल के सफर में सबसे अधिक मासिक लेनदेन का आंकड़ा है।

संस्थागत भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई, जिसमें पब्लिक सेक्टर बैंक, प्राइवेट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि मर्चेंट पेमेंट में यूपीआई को काफी ज्यादा अपनाया गया है। कुल लेनदेन की संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन का हिस्सा 63 प्रतिशत था, जबकि कुल लेनदेन वैल्यू में पर्सन-टू-पर्सन का योगदान 71 प्रतिशत था।

डेटा से यह भी पता चलता है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे भुगतान के लिए यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। वित्त वर्ष 26 में लगभग 86 प्रतिशत पी2एम लेनदेन 500 रुपए से कम के थे, जबकि 59 प्रतिशत पी2पी लेनदेन भी 500 रुपए से कम के थे।

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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, आईटी स्टॉक्स में खरीदारी

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मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 226 अंक या 0.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 77,765 और निफ्टी 52 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,305 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को सहारा आईटी शेयर ने दिया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक हरे निशान में थे।

वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,900 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 96 अंक या 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,068 पर था।

सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, एनटीपीसी, ट्रेंट, आईटीसी, मारुति सुजुकी, एसबीआई और सन फार्मा गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, बीईएल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और एमएंडएम लूजर्स थे।

जानकारों के मुताबिक, अमेरिका बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने जैसे सकारात्मक संकेतों से बाजार में तेजी को सहारा मिला है।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सरकार की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक की लिमिट को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 4 अरब डॉलर करने से 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में करीब आधा प्रतिशत की कमी आई है।

खबर लिखे जाने तक कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.35 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.60 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 85.68 डॉलर प्रति बैरल पर था।

वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स 0.98 प्रतिशत और नैस्डैक 0.43 प्रतिशत की उछाल के साथ बंद हुआ।

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