राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही
अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।
बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।
आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।
अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।
आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।
वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।
इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।
हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।
साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।
टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।
जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम की शक्तियां सौंपीं

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार सौंपा है।
गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत कार्यों के निर्वहन के लिए शक्तियों के प्रत्यायोजन की घोषणा की है। ये शक्तियां दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के उपराज्यपालों और प्रशासकों को सौंपी गई हैं।
आदेश में लिखा, “संविधान के अनुच्छेद 239 के खंड (1) के अनुसरण में, राष्ट्रपति एतद्द्वारा निर्देश देते हैं कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक (चाहे वे उपराज्यपाल या प्रशासक के रूप में जाने जाएं) राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन रहते हुए और अगले आदेश तक, अपने-अपने केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 (21 ऑफ 2023) की धारा 29, 48 और 56 के तहत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का निर्वहन करेंगे।”
राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 देश में दंत चिकित्सा पेशे को विनियमित करता है, गुणवत्तापूर्ण और किफायती दंत शिक्षा प्रदान करता है, और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाली मौखिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सुलभ बनाता है।
यह ऐतिहासिक कानून अपने नागरिकों के लिए उच्चतम स्तर की दंत चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 ने राष्ट्रीय दंत आयोग (एनडीसी) की स्थापना करके एक अभूतपूर्व नियामक ढांचा पेश किया, जिसने मौजूदा भारतीय दंत परिषद (डीसीआई) का स्थान लिया और दंत चिकित्सक विधेयक, 1948 को निरस्त कर दिया।
इस अधिनियम का उद्देश्य दंत चिकित्सा शिक्षा और पेशे के परिदृश्य में व्यापक सुधार करके इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं में राष्ट्रीय दंत आयोग और राज्य दंत परिषदों का गठन, तीन स्वायत्त बोर्डों का प्रावधान; आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव के लिए निश्चित कार्यकाल (पुनर्नियुक्ति की कोई संभावना नहीं); उद्योग सहयोग और तकनीकी नवाचार; ऑनलाइन राष्ट्रीय रजिस्टर और दंत सलाहकार परिषद; और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया शामिल हैं।
यह अधिनियम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय आयोग सहित संबंधित वैधानिक निकायों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
यह अधिनियम आयोग को निजी दंत चिकित्सालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क निर्धारण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का अधिकार भी देता है। यह अधिनियम दंत चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण नियामक सुधार लाने के लिए तैयार है। यह जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता को बढ़ावा देता है।
किफायती मौखिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता को बढ़ावा देकर और भारतीय दंत चिकित्सकों की वैश्विक स्तर पर रोजगार क्षमता को बढ़ाकर, आयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दंत चिकित्सा मानकों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अपराध
गुजरात राजमार्ग पर कार-ट्रक की टक्कर में दो की मौत, चार घायल

गुजरात के पाटन जिले में राधनपुर-सामी राजमार्ग पर एक कार की ट्रक से आमने-सामने की टक्कर में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई और दो नाबालिगों सहित चार अन्य घायल हो गए।
मृतकों की पहचान रंजीत मंगिलाल और उनकी मां जमनाबेन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, टक्कर के बाद दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
यह परिवार द्वारका से पड़ोसी जिले बनासकांठा के भाभर की ओर जा रहा था, तभी यह हादसा हुआ।
उनकी कार विपरीत दिशा से आ रहे एक ट्रक से टकरा गई, जिससे कार में सवार चार अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि घायल परिवार के सदस्यों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
उनकी हालत के बारे में तत्काल अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने की प्रक्रिया में है और जांच आगे बढ़ने पर अधिक जानकारी सामने आएगी।
यह ताजा हादसा हाल के महीनों में राधनपुर क्षेत्र में हुई अन्य सड़क दुर्घटनाओं के बीच हुआ है।
6 सितंबर को, राजस्थान के खाटू श्याम तीर्थयात्रा से लौट रहे एक समूह को ले जा रही ईको कार राधनपुर-वराही राजमार्ग पर खड़ी एक ट्रक से टकरा गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
खबरों के अनुसार, यह दुर्घटना राधनपुर के पास राघवजी होटल के नजदीक हुई और घायलों को अस्पताल ले जाया गया।
पिछली दुर्घटना में ट्रक खड़ा था, जबकि आज की टक्कर में ट्रक विपरीत दिशा से आ रहा था।
इस ताजा आमने-सामने की टक्कर के कारणों की जानकारी तुरंत नहीं मिल पाई है। पुलिस अपनी जांच के तहत घटनाक्रम का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
पुलिस द्वारा जारी जानकारी में घायल चार लोगों (जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं) की पहचान और उन्हें भर्ती कराए गए अस्पताल का नाम तुरंत उपलब्ध नहीं कराया गया है।
राजनीति
सोनिया गांधी मेरी आदर्श नेता, उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: संध्या सवलखे

महाराष्ट्र प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संध्या सवलखे ने सोनिया गांधी की किताब के विमोचन, सांसद प्रणति शिंदे की फेसबुक पोस्ट पर की गई अश्लील टिप्पणी, पुणे विधान परिषद चुनाव समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सोनिया गांधी को अपना आदर्श बताते हुए उनके संघर्ष और महिलाओं के प्रति योगदान की सराहना की। वहीं, सांसद प्रणति शिंदे के खिलाफ की गई टिप्पणी के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी जताई और महाराष्ट्र सरकार से कार्रवाई की मांग की।
संध्या सवलखे ने सोनिया गांधी के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक समय उनके जीवन में भी काफी कठिनाइयां आई थीं और उन्होंने राजनीति छोड़ने का विचार किया था। उस दौरान वह सोनिया गांधी से मिलने गई थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने उन्हें एक ही दिन में दो बार बुलाकर समझाया था कि संघर्ष करने वाली महिलाएं ही राजनीति में टिकती हैं। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी का उदाहरण भी दिया था।
सवलखे ने कहा कि सोनिया गांधी की सभ्यता, संस्कार, व्यवहार और महिलाओं के लिए योगदान उन्हें एक आदर्श नेता बनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता सोनिया गांधी के बारे में लगातार टिप्पणी करते हैं, जबकि उनके संघर्ष और योगदान को समझने की जरूरत है।
उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी परिवार ने काफी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। सवलखे ने सोनिया गांधी के व्यक्तिगत जीवन में आए दुखों का जिक्र करते हुए उनके साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की बराबरी कोई नहीं कर सकता और उनका संघर्ष महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
मुंबई में बीएमसी द्वारा पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर सवलखे ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष की मंशा शहर को प्रदूषित करने वाली नीतियों को आगे बढ़ाने की है। उन्होंने कहा कि मुंबई में प्रदूषण की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि घरों की खिड़कियां खोलने पर छोटे बच्चे खांसने लगते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में पेड़ों की कटाई से स्थिति और बिगड़ सकती है। सवलखे ने कहा कि यदि पेड़ों को काटने का काम शुरू किया गया तो आम नागरिकों के साथ मिलकर इसका विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर लोग सड़कों पर उतरेंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि महंगाई के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य का सवाल भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब लोगों की सेहत ही प्रभावित होगी तो आम परिवारों के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी। महिला कांग्रेस शहर को प्रदूषण से बचाने के लिए विरोध करेगी।
सांसद प्रणति शिंदे के फेसबुक पोस्ट पर की गई अश्लील टिप्पणी को लेकर सवलखे ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टिप्पणी पढ़ने के बाद इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज कराने में काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी अधिवक्ता को चार दिन तक इस काम के लिए लगाया, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से मामला दर्ज करने में कठिनाई पैदा की गई। काफी प्रयासों के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई, फिर भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सवलखे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा कि यदि एक निर्वाचित महिला सांसद के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी होती है तो क्या महिला जनप्रतिनिधि सुरक्षित हैं? उन्होंने भाजपा सरकार पर पिछड़े वर्ग से आने वाली महिला नेताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शाम तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है तो महाराष्ट्र महिला कांग्रेस आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और जरूरत पड़ने पर संगठन कड़ा विरोध करेगा।
पुणे विधान परिषद चुनाव को लेकर सवलखे ने कहा कि शिक्षक मतदाता संघ का चुनाव पवित्र प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन भाजपा ने इसकी गरिमा बनाए नहीं रखी। उन्होंने वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। सवलखे ने कहा कि भाजपा का उम्मीदवार पार्टी का दुपट्टा पहनकर मतदान केंद्र के अंदर गया, जिसे उन्होंने अनुचित आचरण और गुंडागर्दी करार दिया। उन्होंने पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए मशीन की पूजा किए जाने और मतदान के दौरान लोगों के अंदर जाकर वोटिंग संबंधी गतिविधियों की जानकारी देने के आरोप भी लगाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सवलखे ने कहा कि उन्हें सरकार की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
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