व्यापार
अदाणी पोर्ट्स ने अगस्त में संभाला 5 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो, 19 प्रतिशत की हुई वृद्धि
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने बुधवार को कहा कि अगस्त 2026 में कंपनी ने 5 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभाला है। इसमें सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कंपनी ने कहा कि यह कंपनी द्वारा किसी एक महीने में संभाला गया, अब तक का सबसे अधिक कार्गो है, जो उसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की क्षमता को दिखाता है।
अगस्त में कार्गो ढुलाई में वृद्धि की वजह ड्राई कार्गो का सालाना आधार पर 25 प्रतिशत और कंटेनर वॉल्यूम का सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ना था।
एपीएसईजेड ने कहा कि यह प्रदर्शन उसकी अलग-अलग तरह से ग्रोथ करने की रणनीति की सफलता को दिखाती है, जिसमें विझिंजम और कोलंबो में ट्रांसशिपमेंट ऑपरेशन्स की वजह से कंटेनर वॉल्यूम में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
अगस्त तक, इस साल अब तक एपीएसईजेड ने 23.44 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभाला, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में ड्राई कार्गो (17 प्रतिशत की वृद्धि) और कंटेनर (15 प्रतिशत की वृद्धि) का अहम योगदान रहा।
कंपनी ने कहा कि महीने का यह शानदार प्रदर्शन एपीएसईजेड को वित्त वर्ष 2031 तक सालाना 100 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभालने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।
इसके बाद, बुधवार को बीएसई पर एपीएसईजेड के शेयरों में तेजी देखी गई। शेयर 1.61 प्रतिशत या 27 रुपए प्रति शेयर चढ़कर दोपहर 1:20 बजे तक 1,674 रुपए के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए।
एपीएसईजेड का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,891.80 रुपए और निचला स्तर 1,293.10 रुपए छुआ है।
पिछले दस सालों में इस स्टॉक में 500 प्रतिशत से ज्यादा और पिछले पांच सालों में लगभग 120 प्रतिशत की तेजी आई है। पिछले तीन सालों और एक साल में इसने क्रमशः 100 प्रतिशत और 24 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
इसके अलावा, कंपनी लिक्विड कार्गो में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है और साथ ही ड्राई कार्गो सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का सर्विसेज पीएमआई अगस्त में बढ़कर 54.1 रहा, रोजगार वृद्धि 15 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई।
इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था।
सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान ही बढ़े हैं।
एचएसबीसी के डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारतीय सेवा प्रदाताओं को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई से नए निर्यात ऑर्डर मिले थे।
इसके अलावा, भारत की सेवा अर्थव्यवस्था में रोजगार तेजी से बढ़ा है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 11 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, पिछले 15 महीनों में नौकरी पैदा होने की दर सबसे ज्यादा रही, क्योंकि कंपनियां अपनी कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशन को बेहतर बना रही हैं।
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जिसमें बेहतर आउटपुट और नए बिजनेस का योगदान रहा।
भंडारी ने कहा, “रोजगार में तेजी से बढ़ोतरी हुई और नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।” उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों का दबाव बहुत कम बढ़ा।
इसके अलावा, अगस्त में एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स 54.3 पर रहा, जो जुलाई के बराबर ही है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में तेज ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग में आई सुस्ती की भरपाई कर दी।
एचएसबीसी के डेटा से यह भी पता चला कि कुल रोजगार में 14 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर में जबरदस्त हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार की कमी की भरपाई से कहीं ज्यादा असर दिखाया है।
कुल नए ऑर्डर की मात्रा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि कम्पोजिट इनपुट लागत महंगाई सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को हरे निशान में हुई। इस दौरान सेंसेक्स 154.60 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,724.95 और निफ्टी 83.50 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,997.95 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व बैंकिंग और वित्तीय शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज टॉप गेनर्स थे। इसके बाद निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था।
वहीं, निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी कंजप्शन लाल निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,165 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 168 अंक या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,981 पर था।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और ट्रेंट गेनर्स थे।
दूसरी तरफ टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंडिगो, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, टाइटन, आईटीसी, एचयूएल और एशियन पेंट्स लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, जकार्ता और सोल हरे निशान में थे। केवल हांगकांग लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को हरे निशान में बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ और नैस्डैक 0.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में गिरावट से भारत के साथ वैश्विक बाजारों के लिए सकारात्मक माहौल बना है। एफसीएनआर (बी) जमा में रिकॉर्ड 136 अरब डॉलर का निवेश आने के डॉलर के मुकाबले रुपए को सपोर्ट मिलेगा और विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ेगा। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की 9,500 करोड़ रुपए की खरीदारी से भी इसकी पुष्टि होती है।
व्यापार
आईसीआईसीआई बैंक ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा के तहत 17.88 अरब डॉलर जुटाए

आईसीआईसीआई बैंक ने बुधवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर(बी)) जमा के जरिए करीब 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं।
बैंक ने बताया कि जुटाई गई राशि में से ऐसी जमाओं के बदले बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए ऋण की राशि करीब 9 अरब डॉलर रही। वहीं, ऐसी जमाओं से समर्थित ऋण के बदले बैंक द्वारा अन्य ऋणदाताओं को जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) करीब 3.63 अरब डॉलर के रहे।
हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरबीआई की डॉलर जमा योजना के जरिए 100 अरब डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई है।
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक ने बताया कि उसने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल 3.55 अरब डॉलर के अमेरिकी डॉलर-मूल्य वाले बॉन्ड जारी किए हैं।
आरबीआई ने रुपए पर दबाव के बीच विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए 8 जून को यह सुविधा शुरू की थी।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, 21 अगस्त तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस योजना के तहत 72.848 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया था। इसमें एफसीएनआर(बी) जमा की हिस्सेदारी 65.397 अरब डॉलर थी।
वहीं, 21 अगस्त तक इस सुविधा के तहत ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए 7.451 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह आया था। ईसीबी और ओएफसीबी के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
सरकार ने अगस्त में कहा था कि इस योजना से विदेशी मुद्रा के प्रवाह में तेज वृद्धि हुई है और इसे भारत द्वारा अब तक की गई सबसे बड़ी और सबसे तेज विदेशी मुद्रा जुटाने की कवायद बताया था। यह 2013 की एफसीएनआर(बी) स्वैप योजना के स्तर को भी पार कर गई है।
आरबीआई ने शुरुआत में घोषणा की थी कि एफसीएनआर(बी) विंडो 30 सितंबर तक खुली रहेगी, लेकिन उत्साहजनक प्रतिक्रिया और पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाए जाने का हवाला देते हुए इसे 31 अगस्त को ही बंद कर दिया गया।
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