राजनीति
पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों पर सीएम फडणवीस का बयान, बोले- स्थिति पूरी तरह सामान्य, नहीं लगेगा लॉकडाउन
मुंबई, 27 मार्च : पेट्रोल-डीजल की कमी और लॉकडाउन की अफवाहों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्तमान हालात पर कहा कि राज्य में किसी तरह की कोई कमी नहीं है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि युद्ध जैसे हालात के बीच पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपए की एक्साइज ड्यूटी कम करना एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का भार तेल कंपनियां उठाएंगी और आम नागरिकों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि जहां कुछ पड़ोसी देशों में शटडाउन जैसी स्थिति है, वहीं भारत में हालात सामान्य हैं और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की कूटनीति की भी सराहना की।
सीएम फडणवीस ने कहा कि राज्य में फिलहाल करीब एक महीने का पेट्रोल स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे घबराकर अतिरिक्त ईंधन जमा न करें क्योंकि इससे कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा, “जैसे सामान्य रूप से पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, वैसे ही उपयोग करें।”
गैस सप्लाई को लेकर भी उन्होंने स्थिति सामान्य बताते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति गैस के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगता है, तो उसकी शिकायत की जाए।
लॉकडाउन की अफवाहों पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य में किसी भी तरह का लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नरहरी जिरवाल के वायरल वीडियो पर फडणवीस ने कहा कि जिरवाल ने उनसे फोन पर बात कर बताया है कि वीडियो एडिट करके फैलाया गया है। उन्होंने जिरवाल को इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है और कहा कि यह गंभीर मामला है, जिस पर उचित फैसला लिया जाएगा।
अशोक खरात से जुड़े मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के साथ फोटो होना कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता। अगर किसी की भूमिका सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में आगे और केस दर्ज होंगे और लोग धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने चेतावनी दी कि पीड़ित महिलाओं के वीडियो या फुटेज को सोशल मीडिया पर साझा करना या उस पर टिप्पणी करना भी अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
ब्रिटेन की संसद में पहुंचने वाले पहले भारतीय थे दादाभाई नैरोजी, लड़कियों के लिए खोला था स्कूल

महान स्वतंत्रता सेनानी और ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाने जाने वाले दादाभाई नैरोजी का निधन 30 जून 1917 को बंबई (मुंबई) में हुआ था। वे देश के प्रसिद्ध राजनेता, उद्योगपति, शिक्षाविद और विचारक थे। देश की संपत्ति को अंग्रेजों की ओर से लूटकर ब्रिटेन ले जाने का खुलासा दादाभाई नैरोजी ने किया था।
4 सितंबर 1825 को एक पारसी परिवार में जन्मे दादाभाई नैरोजी भारतीय राजनीति में बौद्धिकता के स्तंभ माने जाते थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई एलफिंस्टन इंस्टीट्यूट स्कूल में हुई। उनको बड़ोदरा के महाराजा का संरक्षण मिला था और इस रियासत में उन्होंने दीवान के रूप में भी काम किया। दादाभाई नैरोजी ने एक प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। उनकी पहचान एक समाज सुधारक के तौर पर भी की जाती है।
उन्होंने वर्ष 1849 में लड़कियों के लिए स्कूल खोला था, तब उनको रूढ़ीवादी पुरुषों के विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि उनमें अपनी बात को रखने की अद्भुत कला थी और वे हवा के रूख को मोड़ना जानते थे। पांच वर्ष के भीतर ही उनकी ओर से खोले गए स्कूल में छात्राओं की संख्या में कापी बढ़ोतरी हो गई थी। इसके बाद उन्होंने लैंगिग समानता की मांग उठाई थी।
वर्ष 1855 में दादाभाई नैरोजी ने जब पहली बार ब्रिटेन की यात्रा की तो वहां की समृद्धि देखकर स्तब्ध हो गए थे। उन्होंने समझने की कोशिश की कि उनका देश यानी भारत, इतना पिछड़ा क्यों है? तब उन्होंने दो दशक आर्थिक विश्लेषण की शुरुआत की थी। उनकी ब्रिटिश संसद में पहुंचने की महत्वाकांक्षा देश की गरीबी थी।
दादाभाई नैरोजी ब्रिटेन में भारतीयों की आवाज बने। बतौर राजनेता वह वर्ष 1892 से लेकर 1895 तक यूके हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसद थे। वे भारतीयों की परेशानियों को ब्रिटिश सरकार और वहां की जनता तक पहुंचाते थे। दादाभाई नैरोजी ने ब्रिटेन में महिलाओं के अधिकार सहित कई मुद्दों को जोरों से उठाया था। भारत दादाभाई नैरोजी के योगदान को हमेशा याद करता है और देश उनका ऋणी है।
महाराष्ट्र
सपा नेता अबू आसिम ने मुहर्रम जुलूस के दौरान ज़हरीली गोली से जानलेवा घटना की जांच की मांग की है और बिगड़ती कानून-व्यवस्था व अशांति पर चिंता जताई है।

मुंबई; सीनियर एसपी लीडर अबू आसिम आज़मी ने आज मुंबई महाराष्ट्र विधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र में बिगड़ते लॉ एंड ऑर्डर पर गहरी चिंता जताई। हाल ही में छेड़छाड़ के विवाद में दो लोगों पर चाकू से हुए हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में चोरी, डकैती, मर्डर और रेप की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, जबकि एडमिनिस्ट्रेशन कोई एक्शन नहीं ले रहा है। आज़मी ने मांग की कि रेप जैसे घिनौने जुर्म में शामिल लोगों को तुरंत फांसी दी जाए ताकि उनमें डर पैदा हो सके। युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के ट्रेंड पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस इसे कंट्रोल करने में पूरी तरह फेल रहे हैं। उन्होंने पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन से अपील की कि मुहर्रम या किसी और मौके पर संदिग्ध केमिकल (जैसे चूहे मारने की दवा या ज़हरीले पदार्थ) के साथ पकड़े जाने वाले आरोपियों के पीछे की बड़ी साज़िश का पर्दाफाश किया जाए। पुलिस ने अपनी ड्यूटी पूरी लगन से की, जिसकी वजह से फैयाज नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसके पीछे इस साज़िश में कौन शामिल था, इसकी भी जांच होनी चाहिए। आज़मी ने एनईटी के बाद टीईटी पेपर लीक होने पर सरकार की आलोचना की और कहा कि सरकार एग्जाम कराने में फेल रही है।
महाराष्ट्र
भिवंडी : विधायक रईस शेख ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पत्र लिखकर कहा है कि मुसलमानों के विकास के लिए सर्वे ज़रूरी है।

मुंबई के मुसलमान डेवलपमेंट के प्रोसेस से मीलों दूर हैं और इस कम्युनिटी को डेवलपमेंट की मेनस्ट्रीम में लाने के लिए ‘अजीत पवार’ नाम का एक स्टडी ग्रुप बनाया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के भिवंडी ईस्ट से विधायक रईस शेख ने राज्य की माइनॉरिटी डेवलपमेंट और डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुनीता पवार से 15 साल से पेंडिंग सर्वे शुरू करने के लिए अजीत पवार स्टडी सेंटर बनाने की मांग की है। इस बारे में विधायक शेख ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुनीता पवार को एक लेटर लिखा है।
इस बारे में जानकारी देते हुए विधायक रईस शेख ने कहा कि 2013 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए गए डॉ. महमूद-उर-रहमान स्टडी ग्रुप ने मुसलमानों का सोशियो-एजुकेशनल-इकोनॉमिक सर्वे करने की सिफारिश की थी। 2022 में इस बारे में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को काम दिया गया था। सरकार का फैसला 21 सितंबर, 2022 को हुआ था। हालांकि, राज्य में सत्ता बदल गई और सर्वे नहीं हो सका। अगर मुस्लिम समुदाय के रहन-सहन, आर्थिक मदद, योजनाओं का फ़ायदा, इंफ़्रास्ट्रक्चर, पढ़ाई-लिखाई के मौके, हेल्थ सुविधाएँ वगैरह की असलियत सामने आ जाए, तो इस पिछड़े वर्ग की दिक्कतें समझ में आएंगी और सरकार के लिए मुस्लिम समुदाय को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए पॉलिसी बनाना आसान हो जाएगा। विधायक रईस शेख ने दावा किया कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट (2006) के बाद मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, पढ़ाई-लिखाई की स्थिति के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। विधायक रईस शेख ने आगे कहा कि मुस्लिम समुदाय का सर्वे करने के लिए ‘स्वर्गीय अजीत दादा पवार’ के नाम पर एक नया स्टडी ग्रुप बनाया जाना चाहिए। अजीत दादा ने मुस्लिम समुदाय के पेंडिंग मुद्दों को ज़ोर-शोर से आगे बढ़ाया। अजीत दादा के बड़े फ़ैसले की वजह से मार्ती बना, माइनॉरिटी कमिश्नरेट बना और चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है। मुस्लिम समुदाय का सर्वे करने से इस समुदाय की हालत की साफ़ तस्वीर सामने आएगी। राज्य में मुस्लिम आबादी 11.54% है, जो हिंदुओं के बाद दूसरे नंबर पर है। राज्य के 56 शहरों में मुस्लिम ज़्यादातर हैं। ऐसे सर्वे बाहरी सोर्स से लिमिटेड फंड और मैनपावर के साथ किए जाते हैं। विधायक रईस शेख ने कहा कि सरकार ने पहले भी कई जातियों के ऐसे सर्वे किए हैं।
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