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Wednesday,23-September-2026
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भारतीय परिवार बन रहे निवेशक, बैंकों में जमा राशि में भारी बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 12 जनवरी: वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम लगभग तीन गुना हो गई है। इससे यह साफ होता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है।

लंबे समय की बात करें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले फायदे और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को फायदा मिलेगा।

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भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”

जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।

इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।

राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।

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सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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