अपराध
पुलिस हिरासत में शाहजहां शेख की दबंग चालढाल पर मचा सियासी बवाल
नई दिल्ली, 29 फरवरी। संदेशखाली हिंसा के मुख्य आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख को आखिरकार 55 दिनों के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बंगाल पुलिस ने शाहजहां शेख को बशीरहाट कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। हालांकि, पुलिस ने कोर्ट से शाहजहां शेख की 14 दिन की रिमांड मांगी थी। पुलिस द्वारा शेख शाहजहां की गिरफ्तारी को लेकर अब सियासी घमासान तेज हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी नेता शेख शाहजहां की इतने दिनों बाद गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। वैसे डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में संदेशखाली हिंसा के मुख्य आरोपी शेख शाहजहां पर टीएमसी की तरफ से उसकी गिरफ्तारी के बाद बड़ा एक्शन लिया गया है और उसे 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया है।
भाजपा के नेताओं का आरोप है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शाहजहां की गिरफ्तारी एक सुनियोजित तरीके और एक सौदे के तहत मजबूरी में करवाई है। जिससे की वह पुलिस हिरासत में पूरी तरह से सुरक्षित रह सके। चौंकाने वाली बात यह भी है कि शाहजहां शेख की गिरफ्तारी संदेशखाली में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न या जबर्दस्ती जमीन कब्जाने जैसे आरोप में नहीं, बल्कि ईडी अधिकारियों पर हमले को लेकर की गई है। वह तब जब बीते दिनों कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए जांच एजेंसियों को उसे गिरफ्तारी करने का आदेश दिया था।
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने शाहजहां की गिरफ्तारी को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर शेख शाहजहां को बंगाल पुलिस द्वारा कोर्ट ले जाने का वीडियो भी शेयर किया है।
अमित मालवीय ने पोस्ट में लिखा, ”क्या यह गिरफ्तारी है? पश्चिम बंगाल पुलिस शेख शाहजहां को ऐसे एस्कॉर्ट कर रही है, जैसे वह सीएम ममता बनर्जी को एस्कॉर्ट करेंगे। इतने दिनों से शेख शाहजहां पश्चिम बंगाल पुलिस की सुरक्षा में था। जैसे ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईडी और सीबीआई को शेख शाहजहां को गिरफ्तार करने की इजाजत दी, ममता बनर्जी की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।”
आगे अमित मालवीय ने लिखा, ”ईडी और सीबीआई के वकीलों को अंदर जाने से रोकने के लिए वह उसे जल्दी से एक स्थानीय अदालत में ले गए। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि संदेशखाली की महिलाओं को ममता बनर्जी पर कोई भरोसा नहीं है।”
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शेख शाहजहां की बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तारी को लेकर ममता बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “शाहजहां शेख महफूज ठिकाने पर ममता सरकार की दामन-ए-रहमत में कहीं पर महफूज था। अब उसे दोबारा हिफाजत देने के लिए ताकि उसे ईडी और सीबीआई द्वारा गिरफ्तार न किया जा सके, इसलिए पश्चिम बंगाल पुलिस की मेहमान नवाजी में चला गया है।”
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैं मेहमान नवाजी इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि गिरफ्तारी के दौरान शाहजहां शेख की जो बॉडी लैंग्वेज थी, वह किसी गुनहगार की नहीं लग रही थी।
इसके साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ऐसा लगता है कि शाहजहां शेख को दीदी यानी ममता बनर्जी का संरक्षण प्राप्त है। पूनावाला ने कहा कि शाहजहां शेख की गिरफ्तारी बीजेपी के दबाव में की गई है।
बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी शेख शाहजहां की गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा, “यह गिरफ्तारी नहीं है, यह ममता सरकार द्वारा की गई आश्वासन पूर्ण गिरफ्तारी है कि आपको जेल में कुछ नहीं होगा।”
उन्होंने कहा कि जब तक यह छोटा दाऊद केंद्रीय एजेंसियों के पास नहीं जाता, तब तक संदेशखाली के लोगों और खासकर पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने वाला नहीं है।
बता दें कि पुलिस द्वारा जब शाहजहां शेख को अदालत में पेश किया गया तो वह दबंग अंदाज में नजर आया। महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगने के बाद भी शेख शाहजहां के चेहरे पर मुस्कान थी और उसके चेहरे पर किसी भी तरह की शिकन नहीं थी, इतना ही नहीं पुलिस की हिरासत में भी वह एकदम निडर होकर चल रहा था और मीडियाकर्मियों को विक्ट्री साइन दिखा रहा था।
अपराध
बंगाल: मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी, युवक गिरफ्तार

पुलिस ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ‘अपमानजनक’ टिप्पणी करने के आरोप में आकाश सरकार नामक एक युवक को गिरफ्तार किया है।
शिकायत के आधार पर, उत्तरी कोलकाता के नागरबाजार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने उसे सोमवार को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आकाश पर सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप है, जिसमें न केवल मुख्यमंत्री बल्कि कई भाजपा नेताओं के खिलाफ भी झूठी जानकारी फैलाना शामिल है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां क्यों करता था।
आकाश सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बारे में एक के बाद एक अभद्र और भद्दी टिप्पणियां करता था। आरोप है कि वह पश्चिम बंगाल भाजपा के कई नेताओं के नाम पर सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी भी फैलाता था।
नागरबाजार पुलिस स्टेशन में आकाश के नाम से एक लिखित शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने घटना की जांच शुरू की।
शिकायत की प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार कर सोमवार को बैरकपुर अदालत में पेश किया।
पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने का आवेदन दिया है।
वहीं, पुलिस ने रविवार को पश्चिम मिदनापुर जिले में एक युवक को गिरफ्तार किया, जिस पर हिंदू देवी-देवताओं, प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री के बारे में सोशल मीडिया पर विकृत और व्यंग्यात्मक पोस्ट करने का आरोप है।
गिरफ्तार युवक की पहचान सुरजीत शी के रूप में हुई है।
हाल ही में हिंदुत्व संगठनों के कई लोगों ने सुरजीत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
गिरफ्तार युवक को रविवार को अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे 4 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अपराध
तेलंगाना में मिठाई की दुकानों पर छापा, गंदगी और मिलावट का खुलासा

तेलंगाना में मिठाई बनाने और बेचने वाली दुकानों पर की गई स्पेशल ड्राइव में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स (टीजी सेफ) ने पूरे राज्य में यह अभियान चलाया।
‘टीजी सेफ’ के फूड सेफ्टी ऑफिसर्स ने 53 मिठाई बनाने और रिटेल यूनिट्स पर छापेमारी की। ‘टीजी सेफ’ ने रविवार को एक बयान में बताया कि शुक्रवार को हुई जांच के दौरान अधिकारियों ने कुछ दुकानों में कई खामियां पाईं।
जांच में फर्श टूटा हुआ मिला और वहां खाने का कचरा बिखरा पड़ा था। धुलाई वाली जगह गंदी थी, नालियां खाने के कचरे से जाम थीं। दीवारों पर गंदगी, धूल और खाने के कचरे के दाग लगे थे। कई जगह कीट नियंत्रण रिकॉर्ड, फूड हैंडलर्स के हेल्थ रिकॉर्ड जैसे जरूरी कागजात भी नहीं थे। फूड हैंडलर्स बिना हेयरनेट और दस्तानों के काम कर रहे थे। एग्जॉस्ट और चिमनियां चिकनाई से भरी थीं और स्टोरेज का तरीका भी गलत था, जैसे खाने का सामान जमीन पर रखा होना और खाने और गैर-खाने के सामान को एक साथ रखना।
अधिकारियों ने मिलावट के शक में 38 सैंपल लिए। जांच में मिली खामियों को सुधारने के लिए 20 दुकानों को सुधार नोटिस दिया जाएगा।
‘टीजी सेफ’ कमिश्नर ने कहा कि इन दुकानों का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि उन्होंने फूड सेफ्टी के नियमों का पालन किया है या नहीं। दोबारा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और एक दुकान को जांच के दौरान मिली खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
यह स्पेशल ड्राइव मंचेरियल, जंगांव, सिद्दीपेट, खम्मम, नारायणपेट, जोगुलाम्बा गडवाल, वनपर्थी, नलगोंडा, सूर्यापेट, पेद्दापल्ली, कामारेड्डी, नागरकुरनूल, निर्मल, निजामाबाद, हनुमाकोंडा, मेडक, वारंगल, राजन्ना सिरसिला, जगतियाल, महबूबनगर और कोठागुडेम जैसे जिलों में चलाई गई।
इससे पहले पिछले हफ्ते हैदराबाद में ‘टीजी सेफ’ की छापेमारी के बाद तीन मिठाई की दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। अधिकारियों ने जांच के दौरान साफ-सफाई में कमी और फूड सेफ्टी से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियां पाईं और जनहित में तीन दुकानों को तुरंत कारोबार बंद करने का निर्देश दिया।
छापेमारी में मकड़ी के जाले, चिकनाई से भरे एग्जॉस्ट, गलत स्टोरेज और फूड हैंडलर्स की खराब व्यक्तिगत सफाई मिली, जिनमें से कुछ के नाखून बढ़े हुए थे। अधिकारियों ने खाने के सामान में कीड़े, कॉकरोच और अचार में फंगल संदूषण की भी सूचना दी।
ये तीन दुकानें उन 21 खोवा और मिठाई बनाने और बेचने वाली इकाइयों में से थीं, जिनकी 11 प्रवर्तन टीमों ने जांच की थी, जिसमें फूड सेफ्टी ऑफिसर और पुलिस कर्मी शामिल थे।
पूरी जांच के दौरान अधिकारियों ने मिलावट के शक में 21 सैंपल लिए और 7,75,850 रुपए मूल्य के 1,035 किलो खाद्य पदार्थ जब्त किए।
अपराध
ओडिशा में 2.60 करोड़ के घोटाले में वन विभाग का अधिकारी गिरफ्तार

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस ने रविवार को राज्य वन विभाग के सीनियर क्लर्क को 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान बबलू सुना के रूप में हुई है, जो सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) कार्यालय में स्थापना अनुभाग के प्रभारी वरिष्ठ सहायक के रूप में तैनात था।
आरोप है कि उसने 2023 से संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एमएसीपी) और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (आरएसीपी) योजनाओं के तहत फर्जी बिल बनाकर 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि का गबन किया।
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, विस्तृत सत्यापन और जांच में पता चला कि बबलू सुना ने एमएसीपी और आरएसीपी योजनाओं के तहत फर्जी एरियर बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
विजिलेंस ने रविवार को एक बयान में कहा, “सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग के पूर्व, सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों की साख और पहचान का उपयोग करके फर्जी बिलों को संसाधित किया गया ताकि सार्वजनिक धन को उसके परिवार के सदस्यों (पत्नी, भाई, बहन और दो करीबी सहयोगियों) के निजी बैंक खातों में भेजा जा सके।”
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर अपने वैध अधिकार से अधिक समय-समय पर वेतन वृद्धि हासिल करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया। उसने लंबी अवधि तक अतिरिक्त मासिक वेतन बिल भी बनाए, जिससे गलत तरीके से 10.58 लाख रुपए से अधिक की निकासी की गई। कथित तौर पर गबन की गई कुल राशि 2,60,21,306 रुपए आंकी गई है।
इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी के खिलाफ कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज किए गए हैं।
आरोपी पिछले छह महीनों से कथित तौर पर फरार था। उसे ओडिशा विजिलेंस ने शनिवार रात बलांगीर में उसके ठिकाने से पकड़ा।
18 अक्टूबर को विजिलेंस ने ढेंकानाल जिले में वन विभाग के एक सीनियर क्लर्क और उसके दो सहयोगियों को 2016 से 2026 की अवधि में 65,90,773 रुपए की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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