राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक में एक ही परिवार के 5 सदस्य शाल्मला नदी में डूबे; 3 शव बरामद, तलाशी अभियान जारी
उत्तर कन्नड़, कर्नाटक: रविवार को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में सिरसी के पास शाल्मला नदी में एक ही परिवार के पांच सदस्य डूब गए। परिवार के पांच सदस्यों में से तीन सदस्यों के शव पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय मछुआरों की मदद से बरामद कर लिए हैं। पुलिस ने कहा कि अब तक बरामद किए गए शवों में दो पुरुष सदस्य और एक महिला शामिल है। परिवार के सदस्यों की पहचान मोहम्मद सलीम (44), नादिया (20), मिस्बाह (21), नबील (22) और उमर (16) के रूप में की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना तब हुई जब परिवार का एक बच्चा फिसलकर नदी में गिर गया और फिर परिवार के अन्य सदस्य बचाव के लिए गए लेकिन वे भी डूब गए। 24 घंटे के भीतर कर्नाटक में डूबने की यह दूसरी घटना है। मछली पकड़ने के अभियान के दौरान उनकी नाव पलट जाने से दो मछुआरे अरब सागर में डूब गए। यह घटना रविवार और सोमवार की रात के बीच कर्नाटक के शिरूर केसरकोडी में भटकल से लगभग 15 किलोमीटर दूर बिंदूर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुई। यह घटना मंगलुरु के मंगला स्विमिंग पूल में एक 30 वर्षीय व्यक्ति के डूबने के 4 दिन बाद हुई है। अभिषेक आनंद नाम का यह शख्स गुरुग्राम से आया था और शहर का दौरा कर रहा था। वह मंगलवार शाम स्विमिंग पूल में तैरने गया था। हालाँकि जीवनरक्षकों ने उसे पूल के गहरे हिस्से से खींच लिया और अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक धरोहर की खोज, 3 किलो वजनी 2000 साल पुराना दुर्लभ ताम्रपत्र मिला

ज्ञान भारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले संजीव पाण्डेय के निवास से लगभग 3 किलोग्राम से अधिक वजन का एक दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है। इस ताम्रपत्र पर लगभग 2000 वर्ष पुरानी ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लेख उत्कीर्ण हैं, जो इसे ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद मूल्यवान बनाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मी लिपि भारत की सबसे प्राचीन लिपियों में से एक मानी जाती है, जिसका प्रयोग मौर्य काल से लेकर कई शताब्दियों तक होता रहा। वहीं पाली भाषा का संबंध मुख्यतः बौद्ध धर्म के ग्रंथों और शिक्षाओं से रहा है। ऐसे में इस ताम्रपत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। प्रारंभिक अध्ययन से संकेत मिलते हैं कि इस प्रकार के ताम्रपत्रों का उपयोग प्राचीन काल में भूमि दान, राजकीय आदेश या धार्मिक घोषणाओं के दस्तावेज के रूप में किया जाता था।
इस खोज को लेकर पुरातत्वविदों और इतिहासकारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि यदि इस ताम्रपत्र का वैज्ञानिक परीक्षण और गहन अध्ययन किया जाए, तो उस समय की सामाजिक व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचा और धार्मिक परंपराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। यह खोज न केवल मल्हार क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को उजागर करती है, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर साबित हो सकती है।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ज्ञान भारतम अभियान के तहत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों और धरोहरों की खोज और संरक्षण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को अपने पास मौजूद पुरानी पांडुलिपियों और ऐतिहासिक वस्तुओं को सुरक्षित रखने और उन्हें सामने लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इस पहल के तहत विशेषज्ञों द्वारा इन धरोहरों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जुड़ी रह सकें।
मल्हार में मिला यह ताम्रपत्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रयासों को और मजबूती प्रदान करता है।
वहीं, विशेषज्ञों द्वारा पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। यह अभियान न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि देश की ऐतिहासिक और बौद्धिक संपदा को पुनर्जीवित करने का भी एक सशक्त प्रयास है।
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मन की बात : पीएम मोदी ने कहा- ‘राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 133वें एपिसोड को संबोधित किया। उन्होंने ‘सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’ पर चर्चा की और कहा कि खेती किसानी से लेकर आधुनिक इनोवेटर्स को भी भारत के ‘सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’ ने बहुत मदद की है।
पीएम मोदी ने रविवार को ‘सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’ पर चर्चा के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा, “भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है। इसी सोच के साथ हमारे वैज्ञानिक ‘सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’ को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दे रहा है। इससे हमारे औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बहुत लाभ हुआ है। खेती किसानी से लेकर आधुनिक इनोवेटर्स को भी भारत के ‘सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम’ ने बहुत मदद की है।”
उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले, हमारे न्यूक्लियर वैज्ञानिकों ने एक और बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। दरअसल, क्रिटिकैलिटी वह चरण है, जिसमें रिएक्टर पहली बार स्व-पोषी नाभिकीय शृंखला अभिक्रिया में सफलता हासिल करता है। इस चरण का मतलब है रिएक्टर का ऑपरेशन फेज में पहुंचना। भारत की परमाणु ऊर्जा की यात्रा में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।”
इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रीडर रिएक्टर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “ब्रीडर रिएक्टर के पीछे भी एक वजह है। यह एक ऐसा सिस्टम है, जो ऊर्जा के उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी खुद ही तैयार करता है।”
मार्च 2024 के एक क्षण को याद करते हुए ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “मुझे मार्च 2024 का वह समय भी याद है, जब मैं कलपक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग का साक्षी बना था।” इसी बीच, पीएम मोदी ने कहा, “मैं उन सभी को बधाई देता हूं, जिन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया है।”
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असम राइफल्स का मणिपुर के कामजोंग में बड़ा ऑपरेशन, हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा बरामद

असम राइफल्स ने खुफिया जानकारी के आधार पर काम करते हुए मणिपुर के कामजोंग जिले में एक सर्च ऑपरेशन चलाया। जानकारी मिली थी कि भारत-म्यांमार सीमा के पास कुछ जगहों पर हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखे गए हैं और उन्हें इधर-उधर ले जाने की तैयारी चल रही है।
यह ऑपरेशन 11 और 12 अप्रैल 2026 की रात के बीच किया गया था। सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने मेटल डिटेक्टर और एक विशेष प्रशिक्षित डॉग की मदद ली। इसी दौरान एक संदिग्ध जगह की पहचान हुई, जहां जमीन के अंदर छिपाकर रखा गया हथियारों का बड़ा जखीरा मिला। इसमें कई तरह के हथियार, गोलियां, विस्फोटक और अन्य युद्ध-सामग्री शामिल थी। बरामद सभी सामान को बाद में आगे की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया।
इसके बाद एक और बड़ी कार्रवाई में असम राइफल्स ने राज्य पुलिस कमांडो और टेरिटोरियल आर्मी के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई 16 से 19 अप्रैल 2026 के बीच थौबल, तेंगनौपाल और काकचिंग जिलों में की गई। इस दौरान तीन उग्रवादी कैडरों को गिरफ्तार किया गया।
पकड़े गए लोग प्रतिबंधित संगठनों प्रीपैक (प्रो) और केवाईकेएल (सोरेपा) से जुड़े बताए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने म्यांमार में ट्रेनिंग ली थी। इनके पास से मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई। गिरफ्तारी के बाद सभी को उनके सामान सहित पुलिस के हवाले कर दिया गया, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच हो सके।
इसी बीच मिजोरम में भी एक अलग कार्रवाई देखने को मिली। यहां असम राइफल्स ने कस्टम विभाग, आइजोल के साथ मिलकर जेमाबावक इलाके में एक संयुक्त ऑपरेशन किया। इस दौरान विदेशी सिगरेट की बड़ी खेप पकड़ी गई।
कुल 99 केस विदेशी सिगरेट जब्त किए गए, जिनकी बाजार में कीमत लगभग 2.37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है। बरामद माल और आरोपी को आगे की जांच के लिए कस्टम विभाग को सौंप दिया गया है।
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