राजनीति
आने वाले सालों में ट्विन सिटी, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी हब होगा गुजरात: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि गुजरात जल्द ही ट्विन सिटी के मॉडल और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी हब में बदल जाएगा।
शुक्रवार की सुबह उन्होंने गांधीनगर से वंदे-भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अहमदाबाद की यात्रा की।
अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद, उन्होंने अहमदाबाद मेट्रो ट्रेन के पहले चरण को झंडी दिखाकर रवाना किया और सार्वजनिक रैली स्थल तक पहुंचने के लिए पश्चिमी अहमदाबाद के दूरदर्शन चौक पर उतरे।
उन्होंने अहमदाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा।
पीएम मोदी ने अहमदाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, अहमदाबाद-गांधीनगर जुड़वां शहर का अच्छा उदाहरण बन गया है, अब इसे राज्य के अन्य हिस्सों जैसे नडियाद-आनंद, वडोदरा-हलोल-कलोल, भरूच-अंकलेश्वर, सूरत-नवसारी, वलसाड-वापी, मोरबी-वंकानेर और मेहसाणा-कादी में दोहराया जाएगा। इन शहरों में मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और शहरी बुनियादी सुविधाएं होंगी।
उन्होंने कहा कि ये ट्विन सिटी, अर्बन सिटीज डेवलपमेंट और विकास अगले 25 वर्षों में एक विकसित भारत के मानदंड होने जा रहे हैं।
उन्होंने लोगों से मेट्रो स्टेशनों और अन्य बुनियादी ढांचे का दौरा करने की अपील की, ताकि वे देख सके कि विकास कैसे किया जाता है, और इसमें जनता का कितना पैसा लगाया जाता है। जब लोग यह जान लेंगे, तो वे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बारे में कभी नहीं सोचेंगे, क्योंकि उन्हें इसके मालिक होने का एहसास होगा।
मेट्रो ट्रेनों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कम से कम एक दर्जन शहरों में मेट्रो ट्रेन परियोजनाएं या तो पूरी हो गई हैं या जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। वंदे भारत की 75 ट्रेनों को अगले साल तक चलाने की योजना है।
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों को आड़े हाथ लिया और कहा कि जब भी वे बुनियादी ढांचे के बारे में सोचते हैं तो वे लागत की गणना करते हैं, जबकि उनकी सरकार बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ-साथ व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा देने के बारे में सोचती है। मेट्रो ट्रेन हो या वंदे भारत या बुलेट ट्रेन, यह सब वैश्विक व्यापार की मांग को देखते हुए योजनाबद्ध है।
राजनीति
मानसून सत्र के हंगामे पर रिजिजू ने विपक्ष को घेरा, कहा-सवाल पूछ सकते हैं पर संसद को ठप नहीं कर सकते

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को मानसून सत्र के दौरान संसद में बार-बार हो रहे हंगामे को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि संविधान उन्हें सरकार से सवाल पूछने का अधिकार तो देता है लेकिन जब उनकी राजनीतिक मांगें नहीं मानी जातीं, तो बार-बार कार्यवाही में बाधा डालने की शक्ति नहीं देता।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपे एक लेख में रिजिजू ने कहा कि संसद भारत के लोगों की है न कि राजनीतिक दलों की। उन्होंने कई ऐसे उदाहरण दिए जिनमें सरकार ने अहम मुद्दों और कानूनों पर विपक्ष के साथ बातचीत की जबकि विपक्षी नेताओं पर व्यवस्थित बहस के मौकों को ठुकराने और फिर सदन के कामकाज में कमी के लिए सरकार को दोषी ठहराने का आरोप लगाया।
रिजिजू ने मानसून सत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 15 प्रतिशत हिस्से में ही चली, जबकि राज्यसभा 33 प्रतिशत समय चली। लोकसभा में ‘प्रश्नकाल’ अपने तय समय के बमुश्किल एक प्रतिशत और राज्यसभा में 12 प्रतिशत समय ही चल पाया।
रिजिजू ने कहा, “इसलिए विपक्ष का गणित बहुत ही नकारात्मक है। पहले यह सुनिश्चित करना कि संसद न चल पाए और फिर समय की बर्बादी को सरकार के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार से जवाब मांगने का संवैधानिक अधिकार है लेकिन वे संसदीय बहस की जगह सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का तरीका नहीं अपना सकते।
रिजिजू ने कहा, “संविधान विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने, आलोचना करने, विरोध करने, संशोधन लाने और सरकार के खिलाफ वोट करने का पूरा अधिकार देता है। यह विपक्ष को कोई ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं देता जिससे वे अपनी राजनीतिक मांगें न माने जाने पर संसद को बंद कर सकें।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष की चिंताओं को सुना, कानूनों पर बातचीत की, प्रावधानों में बदलाव किए और जायज मांगों को माना। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार जनता से मिले जनादेश को ऐसे विपक्ष के सामने नहीं झुकाएगी जो संसद को ठप कर देता है और फिर उससे पैदा हुई बाधा को तानाशाही का सबूत बताता है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर चर्चा की विपक्ष की मांग का भी जिक्र किया। रिजिजू के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मांग के लिए सहमत हो गए थे और बहस के लिए एक खास समय भी तय किया था।
हालांकि, उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया कि विपक्ष को गृह मंत्री के ‘लेक्चर’ में कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर किसी नेता को सच में बहस से रोका जाता है, तो वह 24 घंटे के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लेता है। वह उसे ‘लेक्चर’ कहकर खारिज नहीं करता। कोई पूरी संसदीय चर्चा से इनकार नहीं कर सकता और फिर यह शिकायत नहीं कर सकता कि संसद की आवाज दबा दी गई है।”
रिजिजू ने राहुल गांधी के संसदीय कामकाज के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और कहा कि 17वीं लोकसभा में उनकी भागीदारी को देखते हुए यह विरोधाभास और भी अहम हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत थी। उन्होंने राष्ट्रीय औसत 46.7 के मुकाबले आठ बहसों में हिस्सा लिया, औसत 210 के मुकाबले 99 सवाल पूछे और कोई भी ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ पेश नहीं किया।
रिजिजू ने कहा, “फिर भी अब वे कहते हैं कि सरकार ने ‘हमारे लोकतंत्र को खत्म कर दिया है’। वे यूके, जर्मनी और अमेरिका जाते हैं और भारत में लोकतंत्र की कमी की शिकायत करते हैं लेकिन उनमें संसद में आकर जवाबदेही मांगने की हिम्मत नहीं है। न तो वे और न ही कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र के रक्षक हैं। वे राजनीतिक नाटकबाजी में माहिर हैं जो पैरोडी जैसी लगती है।”
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि सरकार बात नहीं सुनती। उन्होंने कहा कि संसदीय रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। उन्होंने ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक’ का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष की चिंताओं के बाद इस कानून को एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था।
हालांकि, रिजिजू ने दावा किया कि बाद में विपक्ष ने विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग की, जिससे यह पता चलता है कि बातचीत के मामले में विपक्ष के नजरिए में एक बुनियादी समस्या है।
उन्होंने कहा, “इससे असली समस्या का पता चलता है। कुछ विपक्षी दलों के लिए, बातचीत का मतलब यह नहीं है कि सरकार उनकी बात सुने। इसका मतलब है कि सरकार को घुटने टेक देने चाहिए। बहस को तब तक बेकार माना जाता है जब तक कि मंत्री पहले से ही विपक्ष के निष्कर्षों को स्वीकार न कर लें।”
रिजिजू ने नीट परीक्षा के मुद्दे पर विरोध कर रहे छात्रों के साथ सरकार की बातचीत का भी जिक्र किया और कहा कि केंद्र ने प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए उनसे बातचीत की थी।
उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ सरकार की बातचीत का भी उदाहरण दिया और कहा कि अधिकारियों ने उनसे बात की और मेडिकल सलाह मानने की अपील की।
रिजिजू ने कहा, “लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गौर करें, विरोध प्रदर्शन हुआ; नागरिक समाज की चिंताओं को सुना गया; केंद्रीय मंत्रियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लिखित आश्वासन दिए गए; प्रधानमंत्री ने जवाब दिया; संसद में व्यापक बहस हुई; और कानून को और मजबूत बनाया गया।”
उन्होंने कहा, “बातचीत और जवाबदेही की इससे बेहतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कल्पना करना मुश्किल है।” संसद न तो सिर्फ सरकार की है और न ही सिर्फ विपक्ष की बल्कि यह भारत के लोगों की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों द्वारा दिए गए चुनावी जनादेश को ऐसी चीज नहीं माना जा सकता जिसे तब रद्द कर दिया जाए जब विपक्षी दल संसदीय बहस के बजाय हंगामा करना चुनें।
रिजिजू ने कहा, “उन्होंने जो जनादेश दिया है, वह कोई सजावटी सर्टिफिकेट नहीं है जिसे तब रद्द कर दिया जाए जब हारने वाले दल बहस के बजाय हंगामा करना चुनें। सदन के बाहर लगाए गए नारों से सदन के अंदर की बहस की जगह नहीं ली जा सकती। जो लोग बहस या वोट के जरिए सरकार को नहीं हरा सकते, उन्हें शोर-शराबे के जरिए संसद को हराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जापान में 1,800 लोगों ने रस्सियों से खींचकर 360 टन का किला फिर अपनी जगह पहुंचाया

जापान में 400 साल पुराने ऐतिहासिक हिरोसाकी कैसल (किले) को उसकी पुरानी जगह पर वापस पहुंचाने के लिए करीब 1,800 लोगों ने रस्सियों के सहारे 360 टन वजनी किले के मुख्य टावर को खींचा। यह अनोखी कवायद देश के आओमोरी प्रांत में सप्ताहांत के दौरान हुई और इसमें पारंपरिक जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
प्रतिभागियों ने 30 मीटर लंबी रस्सियों को खींचते हुए किले के टावर को रेल जैसी पटरी पर आगे बढ़ाया। शनिवार को टावर को 1.13 मीटर और रविवार को 1.09 मीटर, यानी कुल 2.22 मीटर आगे खिसकाया गया। लोगों की टीमें बारी-बारी से रस्सियां खींचती रहीं और पूरे अभियान के दौरान उत्साह बढ़ाने के लिए जापानी नारे लगाए गए।
जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो के अनुसार, इस अभियान के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। आयोजकों को 1,800 स्थानों के लिए करीब 8,000 आवेदन मिले, यानी उपलब्ध अवसरों से लगभग चार गुना ज्यादा। प्रतिभागी सिर्फ हिरोसाकी शहर से ही नहीं, बल्कि जापान के दूसरे हिस्सों और विदेशों से भी पहुंचे।
किले को खींचने के लिए ‘हिकिया’ नाम की पारंपरिक तकनीक अपनाई गई। इसमें किसी ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने के बजाय उसे रोलर्स और रेल की मदद से धीरे-धीरे दूसरी जगह ले जाया जाता है। हिरोसाकी कैसल के अधिकारियों के मुताबिक, यह तकनीक प्राचीन जापान में इस्तेमाल होती रही है और करीब एक सदी बाद पहली बार किसी किले को इस तरह स्थानांतरित करने में इसका इस्तेमाल किया गया।
हिरोसाकी कैसल की पत्थर की दीवार को भूकंप से नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत के लिए 2015 में करीब 360 टन वजनी मुख्य टावर को उसकी मूल जगह से हटाकर लगभग 80 मीटर दूर ले जाया गया था। दीवार की मरम्मत दिसंबर 2024 में पूरी हुई और उसके 2,185 पत्थरों को उनकी मूल स्थिति में दोबारा लगाया गया।
अब टावर को वापस लाने का काम चल रहा है। अगस्त के अंत तक करीब 4,100 लोगों की मदद से इसे हाथों से कुल पांच मीटर तक खींचने की योजना है। इसके बाद बाकी करीब 73 मीटर की दूरी मशीनों की मदद से तय की जाएगी और पूरे साल के अंत तक टावर को उसकी मूल जगह पर वापस पहुंचाने का लक्ष्य है।
हिरोसाकी कैसल का निर्माण 1611 में हुआ था। मौजूदा मुख्य टावर 1810 में बनाया गया था। यह जापान में बचे केवल 12 ऐतिहासिक किला-टावरों में शामिल है और उत्तर-पूर्वी तोहोकू क्षेत्र में ऐसा एकमात्र टावर है।
मरम्मत पूरी होने के बाद भी पर्यटकों को इसे देखने के लिए इंतजार करना होगा। संरक्षण कार्य के कारण किले के मुख्य टावर को 2033 तक पर्यटकों के लिए फिर से खोलने की उम्मीद है।
राजनीति
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की राजनीतिक भूख बढ़ गई है : राम कृपाल यादव

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक बार फिर 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करने वाली है। सीजेपी का दावा है कि सरकार ने जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान जो वादे किए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इस पर बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की राजनीतिक भूख बढ़ गई है।
पटना में आईएएनएस से बातचीत में राम कृपाल यादव ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में खड़ा करने की कोशिश है। सरकार छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से ले रही है, लेकिन शायद उनकी महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े लोग राजनीति और पद हासिल करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते अलग राजनीतिक दुकान खोलना चाहते हैं।
बीपीएससी परीक्षा नियंत्रक द्वारा छात्रों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर राम कृपाल यादव ने सही ठहराया।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बयान था। एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा छात्रों के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। सरकार ने मामले में उचित कार्रवाई की है और सही फैसला लिया है। छात्रों के लिए इस तरह के शब्दों की कड़ी निंदा होनी चाहिए। एनडीए सरकार ने परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया है।
छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों की ओर से आवाज उठाए जाने पर राम कृपाल यादव ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है, इसलिए वह खुद ही अपने लिए मुद्दे खड़े करता रहता है। विपक्ष खुद ही एक मुद्दा बन गया है।
उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र हो या राज्य सरकार, हमने छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया है और उनके समाधान के लिए कदम उठाए हैं। छात्र सरकार के काम से संतुष्ट हैं, लेकिन विपक्ष ने इस मामले में केवल राजनीतिक लाभ के लिए हस्तक्षेप किया है।
राम कृपाल यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इसमें शामिल हो गया है।
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