अंतरराष्ट्रीय
पीसी, मोबाइल फोन, टैबलेट में 2022 में वैश्विक स्तर पर अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज
आर्थिक मंदी ने सभी डिवाइस सेगमेंट को प्रभावित किया है और 2022 में वैश्विक पीसी शिपमेंट में 9.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो इस साल सभी सेगमेंट की सबसे बड़ी गिरावट है। गार्टनर की एक रिपोर्ट में गुरुवार को इसकी जाकनारी दी गई है।
कुल मिलाकर, कुल उपकरणों (पीसी, टैबलेट और मोबाइल फोन) के विश्वव्यापी शिपमेंट में 2022 में 7.6 प्रतिशत की गिरावट की गति है, जिसमें यूरेशिया सहित ग्रेटर चीन और पूर्वी यूरोप में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।
जहां इस साल वैश्विक मोबाइल फोन शिपमेंट में 7.1 फीसदी की गिरावट की उम्मीद है, वहीं स्मार्टफोन शिपमेंट में 5.8 फीसदी (साल-दर-साल) की कमी होने का अनुमान है।
क्षेत्रीय रूप से, ग्रेटर चीन को कोविड लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा, जिसमें स्मार्टफोन शिपमेंट 18.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ होगा।
गार्टनर में वरिष्ठ निदेशक विश्लेषक रंजीत अटवाल ने कहा, “भू-राजनीतिक उथल-पुथल, उच्च मुद्रास्फीति, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के एक आदर्श तूफान ने दुनिया भर में उपकरणों के लिए व्यापार और उपभोक्ता मांग को कम कर दिया है और पीसी बाजार को सबसे कठिन प्रभावित करने के लिए तैयार है।”
उन्होंने भविष्यवाणी की, “उपभोक्ता पीसी की मांग 2022 में 13.1 प्रतिशत घटने की गति पर है और व्यावसायिक पीसी मांग की तुलना में बहुत तेजी से घटेगी, जो कि साल दर साल 7.2 प्रतिशत घटने की उम्मीद है।”
2022 में, गार्टनर को उम्मीद है कि दुनिया भर में 5जी फोन शिपमेंट कुल 710 मिलियन यूनिट होंगे। जबकि यह 2021 से 29 प्रतिशत की वृद्धि है, यह पिछली उम्मीदों से कम है।
अटवाल ने कहा, “वर्ष की शुरुआत में विकास दर 47 प्रतिशत की अपेक्षित वृद्धि से काफी कम है, जिसके परिणामस्वरूप 95 मिलियन 5जी फोन शिपमेंट का नुकसान हुआ है।”
5जी फोन की मांग 2023 में तेज गति से बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “5जी में अधिकतर माइग्रेशन डिफॉल्ट रूप से होगा क्योंकि उपयोगकर्ता अपने जीवन चक्र के अंत में पुराने 4जी स्मार्टफोन को 5जी-संगत स्मार्टफोन से बदल देंगे।”
व्यापार
मार्केट आउटलुक: आरबीआई मौद्रिक नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल से तय होगा शेयर बाजार का रुझान

SHARE MARKET
मुंबई, 5 अप्रैल : भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होगा। आरबीआई मौद्रिक नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल से शेयर बाजार की दिशा तय होगी।
ब्याज दरों की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक 6-8 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम उच्चतम स्तर पर बने हुए हैं, जिससे महंगाई को लेकर दुनियाभर में चिंताएं बढ़ रही हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध भी शेयर बाजार के लिए अगले हफ्ते एक अहम फैक्टर होगा, क्योंकि युद्ध का प्रभाव अब दुनिया की आपूर्ति श्रृंख्लाओं पर दिखाई देने लगा है। ऐसे में इस युद्ध से जुड़े अपटेड आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार के लिए अहम होंगे।
मौजूदा समय में कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। बीते एक महीने में इसमें 34 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल की चाल पर निवेशकों की निगाहें बनी रहेंगी।
बीते हफ्ते शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। इस दौरान सेंसेक्स 1,953.90 अंक या 2.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,319.55 और निफ्टी 593.35 अंक या 2.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,713 पर बंद हुआ। यह लगातार छठवां हफ्ता था, जब शेयर बाजार में गिरावट देखी गई।
सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक (5.21 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (4.06 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (4.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (3.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (3.84 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.27 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (2.90 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2.89 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे।
इस दौरान केवल निफ्टी आईटी (2.60 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (1.01 प्रतिशत) ही हरे निशान में बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.05 अंक या 1.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,650.50 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,654 अंक या 2.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,677.05 पर बंद हुआ।
व्यापार
ईरान के ऊपर अमेरिकी जेट विमान मार गिराए गए; बचाव कार्य जारी

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वाशिंगटन, 4 अप्रैल : ईरान के ऊपर अमेरिका की वायु सेना का एक एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराया गया। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया, जिसमें एक चालक दल के सदस्य को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरा अभी भी लापता है।
विमान में मौजूद दोनों लोग इजेक्ट करके बाहर निकल गए थे। इनमें से एक को जीवित ढूंढ लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है और उसकी स्थिति अभी साफ नहीं है। एफ-15ई एक दो सीट वाला लड़ाकू विमान होता है, जिसमें एक पायलट और एक वेपन्स सिस्टम ऑफिसर होता है।
इसी दिन एक अलग घटना में अमेरिका का ए-10 थंडरबोल्ट II हमला करने वाला विमान भी इस इलाके में खो गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, उसके पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दोनों विमानों को ईरान की ओर से किए गए हमले में निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है और कुछ तस्वीरें भी जारी कीं, जिनमें एफ-15ई के मलबे को दिखाने का दावा किया गया। हालांकि इन तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड और रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें दक्षिण-पश्चिमी ईरान का बताया जा रहा है। इनमें अमेरिकी विमान काफी नीचे उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो संभवत:वे बचाव अभियान में लगे हैं।
अमेरिकी वायु सेना के पास इस क्षेत्र में खास बचाव टीमें मौजूद हैं, जिनमें एचसी-130जे कॉम्बैट किंग II विमान और एचएच-60 हेलीकॉप्टर शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, बचाव अभियान में शामिल कम से कम एक हेलीकॉप्टर पर भी ईरान की ओर से हमला हुआ, लेकिन वह सुरक्षित उतरने में सफल रहा।
इन घटनाओं को मौजूदा संघर्ष में अमेरिकी चालक दल वाले विमानों के पहले स्पष्ट नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 19 मार्च को ईरान के ऊपर एक मिशन के दौरान एफ-35 विमान को नुकसान पहुंचा था, जिसमें पायलट को कुछ चोट आई थी, लेकिन वह विमान सुरक्षित आपात लैंडिंग करने में सफल रहा।
इसके अलावा 2 मार्च को कुवैत के ऊपर तीन एफ-15ई विमान “फ्रेंडली फायर” की चपेट में आकर मार गिराए गए थे, जिसमें चालक दल के सभी छह सदस्य सुरक्षित रूप से इजेक्ट करने में सफल रहे थे। एक अन्य घटना में, केसी-135 टैंकर विमान पश्चिमी इराक में हवा में टक्कर के बाद गिर गया, जिसमें छह सैनिकों की मौत हो गई।
ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि यह घटना मौजूदा संघर्ष में पहली बार है जब उसने किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि जिस इलाके में विमान गिरा, वहां ईरानी बल लापता अमेरिकी सैनिक की तलाश कर रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना अभी भी ईरान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त बनाए हुए है और अब तक 12,300 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है।
राजनीति
ईरान युद्ध के बीच कुकिंग गैस पर निर्भरता घटाने की तैयारी, सरकार घरेलू इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाने पर कर रही फोकस

नई दिल्ली, 3 अप्रैल : केंद्र सरकार कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है। इस दिशा में शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक की।
इस बैठक में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए इंडक्शन हीटर और कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई, ताकि कुकिंग गैस की खपत कम की जा सके।
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पादों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की संभावना को देखते हुए आयात पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में बाधा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है।
कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है।
भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है और अब रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं।
इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों तक ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एजेज यानी पाषाण युग’ (उनकी पुरानी स्थिति जहां वे असल में थे) में पहुंचा देगा।
इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था।”
ट्रंप ने यह चेतावनी ऐसे समय दोहराई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी है। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे ‘बेहद एकतरफा और अव्यवहारिक’ बताया है।
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