राजनीति
पूर्वाचल की धरती पर आज अखिलेश फिर भरेंगे हुंकार
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों समाजवादी विजय यात्रा निकाल रहे हैं। यात्रा के जरिए अपने मतदाताओं को एकजुट कर रहे हैं। उनकी दो दिवसीय विजय रथ यात्रा मंगलवार 14 दिसंबर को जौनपुर जाएगी। अखिलेश यादव की यहां धमार्पुर में एक जनसभा होगी। उनकी विजय यात्रा जौनपुर से धमार्पुर होकर केराकत जाएगी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अखिलेश यादव 14 दिसंबर को दो दिवसीय दौरे पर जनपद आ रहे हैं। वह विजय रथ यात्रा के साथ सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाएंगे। पहले दिन वह दो स्थानों और दूसरे दिन चार स्थानों पर सभा को संबोधित करेंगे।
सपा से मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव हेलीकाप्टर से आज पुलिस लाइन पहुंचेंगे। इसके वह जफराबाद विधानसभा क्षेत्र के धमार्पुर में सभा करेंगे। उनका सदर विधानसभा क्षेत्र के कुत्तूपुर चौराहा (बाईपास पर) पर स्वागत किया जाएगा। यहां से निकलकर मल्हनी बाजार पहुंचेंगे। जहां सभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद अपराह्न् तीन बजे जमुनिया में सभा करेंगे। वहां से वह जिला मुख्यालय आएंगे और गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे।
रथयात्रा की शुरुआत 12 अक्टूबर को कानपुर से हुई थी। यह यात्रा कानपुर से हमीरपुर गई थी। इस यात्रा के जरिए अखिलेश कानपुर नगर, कानपुर देहात, जालौन व हमीरपुर जिले गए थे। एक से तीन दिसंबर को उनकी रथ यात्रा बुंदेलखंड में बांदा से महोबा, ललितपुर व झांसी में निकल चुकी है। अखिलेश का विजय रथ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए गाजीपुर से लखनऊ तक आ चुका है। अब छठे चरण की विजय रथ यात्रा के जरिए 14 व 15 दिसंबर को अखिलेश जौनपुर जा रहे हैं।
पूर्वाचल का अपना किला मजबूत करने में जुटे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार दूसरी पार्टी के बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करा रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को भी सपा अध्यक्ष ने गोरखपुर के कद्दावर नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी व भीष्म शंकर तिवारी को अपनी पार्टी में शामिल कराया। विनय इस समय चिल्लूपार सीट से विधायक हैं। उनके साथ विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पाण्डेय भी साइकिल पर सवार हुए हैं।
अखिलेश यादव के जौनपुर कार्यक्रम का प्रभाव सभी विधानसभा सीट पर पड़ेगा। वर्तमान में 9 सीट में से 3 सीट सपा के खाते में। शाहगंज के ललई यादव और मछलीशहर में जगदीश सोनकर ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने जीत हासिल की थी।
2019 में मल्हनी विधानसभा में हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के लकी यादव ने चुनाव जीत था। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के पास 7 सीट थी। अखिलेश को लगता है कि उनके यहां आने से कई सीट पर समीकरण बदलने के आसार हैं।
राजनीति
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: निष्कासित भाजपा विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान की पुष्टि की

कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए गुरुवार को मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की अटकलों के बीच भाजपा से निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने खुलकर कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व ने उनका समर्थन मांगने के लिए औपचारिक संपर्क तक नहीं किया।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एस.टी. सोमशेखर ने कहा कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने तय नहीं किया था कि किस उम्मीदवार का समर्थन करेंगे, लेकिन उनके अनुसार जो दल संपर्क करता है, उसी पर विचार किया जाता है।
सोमशेखर ने कहा कि न तो भाजपा और न ही जेडी(एस) ने उनसे समर्थन मांगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें फोन कर बैठक में बुलाया और क्षेत्र के विकास के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने अंतरात्मा की आवाज पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा उनकी तरह के नेताओं के समर्थन से सत्ता में आई थी और अब उन्हें विश्वास है कि कांग्रेस सरकार उनके क्षेत्र के विकास के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के सभी पांच उम्मीदवार जीत दर्ज करेंगे।
दूसरी ओर, निष्कासित भाजपा विधायक शिवराम हेब्बार ने भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकास है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेताओं के साथ विकास संबंधी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान किया।
हेब्बार ने कहा कि भाजपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया, लेकिन विधान परिषद चुनाव में समर्थन मांगने के लिए कम से कम औपचारिक बातचीत की उम्मीद थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य जेडी(एस) उम्मीदवार को हराना था, इसलिए पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों ने उनसे समर्थन मांगा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
वहीं, उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक तय रणनीति के अनुसार मतदान करेंगे। उन्होंने दावा किया कि यदि कहीं क्रॉस वोटिंग की संभावना है तो वह भाजपा या जेडी(एस) खेमे में है।
भाजपा विधायक अरविंद बेल्लद ने विश्वास जताया कि पार्टी के सभी उम्मीदवार जीतेंगे। उन्होंने माना कि एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार के वोट कांग्रेस को जा सकते हैं, लेकिन बाकी सभी भाजपा विधायक पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य की जीत का भी भरोसा जताया।
जेडी(एस) के एनडीए समर्थित उम्मीदवार के. गोविंदराजू की संभावनाओं पर बेल्लद ने कहा कि वोटों की कमी जरूर है, लेकिन उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
कांग्रेस विधायक कोनारेड्डी ने भी दावा किया कि पार्टी के सभी पांच उम्मीदवार जीतेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार को लगभग 28 से 29 वोट आवंटित किए गए हैं और सभी विधायक तय योजना के तहत मतदान करेंगे। उनके अनुसार अन्य दलों के कुछ उम्मीदवारों का समर्थन भी कांग्रेस को मिलने की संभावना है।
भाजपा विधायक एस.आर. विश्वनाथ ने दावा किया कि एनडीए के तीनों उम्मीदवार जीतेंगे और भाजपा में किसी तरह की क्रॉस वोटिंग नहीं होगी। उन्होंने कहा कि असंतोष कांग्रेस के भीतर है, जहां मंत्रिमंडल विस्तार और गुटबाजी के मुद्दे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि तीसरे एनडीए उम्मीदवार के लिए तीन वोटों की कमी है, जबकि कांग्रेस को अपने पांचवें उम्मीदवार की जीत के लिए पांच अतिरिक्त वोटों की जरूरत है।
कांग्रेस विधायक और कांग्रेस विधायक दल के सचिव अल्लामप्रभु पाटिल ने कहा कि सभी विधायक पार्टी हाईकमान की रणनीति के अनुसार मतदान करेंगे।
पूर्व मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास लगभग 140 वोट हैं, जो पांचों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास पर्याप्त द्वितीय वरीयता मत भी हैं और कांग्रेस में किसी तरह की क्रॉस वोटिंग नहीं होगी।
राजनीति
ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाने के आरोपों को कोलकाता पुलिस ने किया खारिज, कहा- केवल दो अधिकारियों की हुई अदला-बदली

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है।
बुधवार रात टीएमसी के दो राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन और सागरिका घोष तथा लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने मौजूद पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन के निर्देश पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है।
हालांकि, राज्य पुलिस के सूत्रों ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। केवल उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदला गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान उनकी सुरक्षा संभालने वाले दो कोलकाता पुलिस अधिकारियों को ही उसी ड्यूटी पर बनाए रखा जाए। लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी की नियुक्ति या तैनाती व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “सुरक्षा अधिकारियों का तबादला ड्यूटी रोस्टर और तय सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होता है। इस मामले में भी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।”
सूत्रों के मुताबिक, जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को बुधवार रात कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।
इस बीच, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
लियोनेल मेसी ‘गोट इंडिया टूर’ विवाद: पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की बढ़ीं मुश्किलें, सवालों के जवाब देने थाने पहुंचे

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीडांगन में दिसंबर 2025 में आयोजित लियोनेल मेसी के “गोट इंडिया टूर” के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर जांच एक बार फिर तेज हो गई है। इस मामले को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।
इससे पहले पूर्व खेल मंत्री बिस्वास बुधवार को भी बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनसे पूछताछ की गई। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है जो मेसी की टीम की ओर से पुलिस को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी।
मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुंचे। आरोप में कहा गया है कि बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही कई अनधिकृत लोग भी मैदान में प्रवेश कर गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय लगभग 40 लोग मैदान में मौजूद थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ी, बल्कि मेसी भी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई, जिसके बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जांच में मददगार साबित होंगे। इसी घटना के बाद दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने भी पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए हैं।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70 हजार टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22 हजार टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ले लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को आगे परिचितों में बांटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई।
इस मामले में पुलिस ने कई बार अरूप बिस्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जांच में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।
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