व्यापार
अमेरिकी फेड के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार की फ्लैट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली गिरावट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त रुख अपनाने के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार के सत्र में कारोबार की शुरुआत फ्लैट की। इस दौरान निफ्टी50 और सेंसेक्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,155.62 से 23.96 अंक गिरकर 77,131.66 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,085.70 से 11.9 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,073.80 पर ओपन हुआ।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9:18 बजे) सेंसेक्स 19.04 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 77,136.58 पर था, जबकि निफ्टी50 4.30 अंक या 0.02 प्रतिशत बढ़कर 24,090.00 पर ट्रेड कर रहा था।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 0.17 प्रतिशत और 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ने बेहतर प्रदर्शन किया।
निफ्टी50 इंडेक्स में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएलटेक सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर और भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है, जिसके चलते पिछले लगातार चार कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में अच्छी बढ़त देखने को मिली।
इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फेडरल फंड्स के लक्ष्य को 3.5 प्रतिशत और 3.7 प्रतिशत पर स्थिर रखा। हालांकि चेयरमैन केविन वॉर्श ने ब्याज दर के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं दिया, लेकिन डॉट प्लॉट से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को 2026 में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना है।
वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में और गिरावट आई है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा और तेहरान के तेल पर वाशिंगटन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाया जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की गति फिलहाल सकारात्मक बनी हुई है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) बढ़कर 60.87 पर पहुंच गया है, जो खरीदारी की ताकत बढ़ने का संकेत देता है। वहीं एमएसीडी भी पॉजिटिव क्रॉसओवर के साथ हरे रंग की बढ़ती हिस्टोग्राम बार दिखा रहा है, जो बाजार में मजबूत खरीदारी का संकेत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ है। यदि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो 24,300 से 24,500 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर 23,900 से 23,800 का क्षेत्र मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा।
व्यापार
एसबीआई में 207 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की तारीख बढ़ी, 5 अक्टूबर तक करें अप्लाई

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, एसबीआई ने कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर स्पेशलिस्ट कैडर अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया है। कुल 207 पदों पर रिक्तियों की घोषणा की गई है।
एसबीआई की ओर से स्पेशलिस्ट कैडर अधिकारी पोस्ट के लिए जारी 207 रिक्तियों में जोनल हेड (रिटेल) का 1, रीजनल हेड (आरएच) के 5, रिलेशनशिप मैनेजर-टीम लीड के 24, इन्वेस्टमेंट स्पेशलिस्ट (आईएस) के 9, इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (आईओ) के 4, वीपी वेल्थ के 91 और एवीपी वेल्थ के 73 पद शामिल हैं।
इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 4 सितंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 25 सितंबर तक तय की गई थी, जिसे आगे बढ़ाकर अब 5 अक्टूबर तक कर दिया गया है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने से चूक गए थे, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय नई अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लें।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से पद के अनुसार कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री, फाइनेंस/अकाउंटेंसी/बिजनेस मैनेजमेंट/कॉमर्स/इकोनॉमिक्स/कैपिटल मार्केट्स/बैंकिंग/इंश्योरेंस/एक्चुरियल साइंस में पीजी डिग्री या पीजी डिप्लोमा या सीए/सीएफए की प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इसके अलावा कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में पद के अनुसार निर्धारित 3 से 15 वर्षों का अनुभव और अन्य निर्धारित पात्रता व कौशल का होना भी अनिवार्य है।
आवेदकों की न्यूनतम आयु पद के अनुसार 23 से 35 वर्ष के बीच और अधिकतम आयु 35 से 50 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन जमा किए हुए आवेदन पत्र की जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, व्यक्तिगत/फोन पर/वीडियो इंटरव्यू, सीटीसी पर बातचीत और अंतिम मेरिट सूची के आधार पर की जाएगी, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सीटीसी पोस्ट के अनुसार 30.20 से 97 लाख रुपए सालाना होगी।
आवेदन पत्र भरते समय अभ्यर्थियों को अपने वर्ग के अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/ईडब्ल्यूएस/ओबीसी के लिए 750 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
कैंडिडेट्स ध्यान दें कि एसबीआई की ओर से इन पदों पर नियुक्ति शुरू में 5 वर्ष के लिए होगी, जिसे बैंक की मर्जी से 4 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
तीन दिन की बैंक हड़ताल से पहले जरूरी काम निपटा लें ग्राहक, 28 सितंबर से कई सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और कुछ पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों के ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने महत्वपूर्ण बैंकिंग लेनदेन पहले ही पूरा कर लें, क्योंकि बैंक कर्मचारी यूनियनें 28 सितंबर से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रही हैं। प्रस्तावित हड़ताल से कई बैंकों की शाखा सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और यह बैंकिंग क्षेत्र के महत्वपूर्ण अर्धवार्षिक समापन (हाफ-ईयर क्लोजिंग) के दौरान हो रही है।
यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) की ओर से बुलाई गई है, जो दावा करता है कि वह देश के लगभग 90 प्रतिशत बैंक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। यूनियनें पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह को लागू करने, पेंशन सुधारों और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े अन्य मुद्दों पर मांग कर रही हैं।
ग्राहकों को होने वाली असुविधा कम करने के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रविवार, 27 सितंबर को भी खुले रखने का निर्देश दिया है, ताकि लोग हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी बैंकिंग कार्य पूरे कर सकें।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने जारी एडवाइजरी में कहा है कि वह शाखाओं और कार्यालयों में आवश्यक सेवाएं जारी रखने का प्रयास करेगा, लेकिन हड़ताल के दौरान कुछ बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक ने ग्राहकों से कहा है कि वे अपने महत्वपूर्ण लेनदेन पहले ही निपटा लें और जहां संभव हो, योनो, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनों जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग करें।
बैंक ऑफ इंडिया ने भी ग्राहकों को संभावित हड़ताल के बारे में आगाह करते हुए सलाह दी है कि वे बैंकिंग जरूरतों के लिए इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट पॉइंट और यूपीआई जैसी चौबीसो घंटे उपलब्ध डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करें।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो सकते हैं, जिससे देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर असर और व्यापक हो सकता है।
हालांकि, नई पीढ़ी के निजी क्षेत्र के बैंक जैसे आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक के सामान्य रूप से काम जारी रखने की उम्मीद है। ऐसे में ग्राहकों के लिए नियमित बैंकिंग सेवाओं का एक वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध रहेगा।
इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने बैंक कर्मचारी यूनियनों से हड़ताल टालने और लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की थी। मंत्रालय का कहना है कि यूनियनों द्वारा उठाई गई अधिकांश चिंताओं पर पहले ही काफी हद तक कार्रवाई की जा चुकी है।
व्यापार
वैश्विक चिंताओं के चलते लगातार 7वें सप्ताह फिसला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी 0.88 प्रतिशत तक टूटा

वैश्विक चिंताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.88 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
साप्ताहिक आधार पर निफ्टी 0.88 प्रतिशत कमजोर हुआ, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.34 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 73,895 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सप्ताह के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांक 1.6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए थे, जबकि शुक्रवार को चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते सीमित रिकवरी देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह भर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने तेल बाजार को सहारा दिया। हालांकि सप्ताह के अंत में तेल कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपए और कॉरपोरेट लागत पर दबाव की आशंकाएं थोड़ी कम हुईं।
दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड बाजार ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को सख्त बनाती है और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बना सकती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई लगातार छठे सप्ताह शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने सप्ताह के दौरान 11,490 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए 16,398 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया, जिससे बाजार में गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
सितंबर महीने में अब तक एफआईआई कुल 18,531 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि डीआईआई ने 52,617 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से लगभग 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।
बाजार की नजरें अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी टिकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को एक नया सात-दिवसीय प्रस्ताव दिया है, जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत और व्यापक युद्धविराम के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है। निवेशकों का मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो तेल कीमतों पर भू-राजनीतिक प्रीमियम कम हो सकता है।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि 23,000 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट क्षेत्र बना हुआ है, जबकि 23,200 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस है। बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एफआईआई की बिकवाली जारी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं, तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी फिलहाल बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अगले सप्ताह निवेशकों की नजर विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों, अमेरिका-ईरान वार्ता के घटनाक्रम और अमेरिका की दूसरी तिमाही (क्यू2) जीडीपी के आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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