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Tuesday,20-October-2026
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जीएसटी परिषद ने कुछ दरों में बदलाव, पेट्रोलियम अभी भी जीएसटी से बाहर

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 जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को पेट्रोलियम उत्पादों को अपने दायरे में लाने पर कोई फैसला नहीं लेते हुए दवाओं पर शुल्क की रियायती दर को 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ाकर कोविड से संबंधित वस्तुओं पर राहत देने का फैसला किया है। उन्होंने जोमैटो और स्विगी जैसे फूड डिलिवरी ऐप को रेस्तरां के रूप में मानने का निर्णय लेते हुए फुटवियर और कपड़ा क्षेत्रों में उल्टे शुल्क ढांचे को ठीक करने का भी निर्णय लिया, जिससे उनके द्वारा की गई आपूर्ति पर 5 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार हो गया है। हालांकि, नई प्रणाली से भोजन महंगा नहीं होगा क्योंकि इसमें कोई नया कर नहीं जोड़ा गया है।

कोविड महामारी के प्रकोप के बाद पहली बार में लखनऊ में हुई परिषद ने केरल उच्च न्यायालय के निर्देश पर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत शामिल करने पर चर्चा की, लेकिन फैसला किया कि यह बदलाव करने का सही समय नहीं है।

बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “हमने कुछ लोगों के अनुकूल फैसले लिए हैं।”

सीतारमण ने यह भी कहा कि परिषद ने केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित मस्कुलर एट्रोफी के इलाज के लिए दवाओं पर कर छूट दी है और कैंसर के इलाज के लिए दवाओं पर शुल्क 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।

इसके अलावा, परिषद ने 30 सितंबर, 2022 तक पट्टे पर दिए गए विमानों के आयात और जहाज या हवाई द्वारा माल के निर्यात पर जीएसटी से छूट दी गई है।

हालांकि, इन्होंने रेलवे के पुजरें, लोकोमोटिव और अन्य सामानों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 कर दिया है।

इसने राज्यों के लिए जीएसटी के कारण अपने राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए सहमत मुआवजे के फार्मूले पर भी चर्चा की और निर्णय लिया कि केंद्र वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 में कमी को पूरा करने के लिए लिए गए ऋणों का भुगतान करने के लिए जुलाई 2022 से मार्च 2026 तक की निर्धारित पांच साल की अवधि से परे मुआवजा उपकर लगाना जारी रखेगा।

कोविड राहत दवाओं के संबंध में, 30 सितंबर तक वैध रियायती जीएसटी दर को एम्फोटेरिसिन बी (काले कवक के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला), रेमडेसिविर, टोसीलिजुमैब और हेपरिन जैसे एंटी-कोगुलेंट के लिए 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया था।

इसके अलावा, कोविड -19 उपचार दवाओं के मामले में 31 दिसंबर तक 5 प्रतिशत की घटी हुई जीएसटी दर भी उपलब्ध होगी और इटोलिजुमाब, पॉसाकोनाजोल, इन्फ्लिक्सिमैब, फेविपिरवीर, कासिरिविमैब और इम्देवीमैब, 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज, बामलानिविमैब, और एतेसेविमाब शामिल हैं।

परिषद ने लौह, तांबा, एल्यूमीनियम, जस्ता और कुछ अन्य धातुओं जैसे अयस्कों और कंसंट्रेटरों पर शुल्क को 5 से 18 प्रतिशत तक बढ़ाते हुए तेल कंपनियों को जैव ईंधन की आपूर्ति पर दर को 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने का भी निर्णय लिया है।

इसके अलावा, ईंट भट्टों को 1 अप्रैल, 2022 से 20 लाख रुपये की सीमा के साथ विशेष संरचना योजना के तहत लाया जाएगा। योजना के तहत आईटीसी के बिना ईंटों पर 6 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा और आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत अन्यथा ईंटों पर लागू होगा।

फुटवियर और टेक्सटाइल क्षेत्र में उल्टे शुल्क ढांचे को ठीक करने के लिए, जैसा कि पहले जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा की गई थी और उचित समय के लिए स्थगित कर दिया गया था, परिषद ने फैसला किया कि इसे 1 जनवरी, 2022 से लागू किया जाएगा।

मुआवजे के परि²श्य के मुद्दे पर परिषद को एक प्रस्तुति दी गई थी जिसमें यह बताया गया था कि जून 2022 से अप्रैल 2026 तक की अवधि में मुआवजा उपकर से राजस्व संग्रह 2020-21 और 2021-22 में अंतर को पाटने के लिए किए गए उधार और ऋण चुकौती के भुगतान में समाप्त हो जाएगा। इस संदर्भ में, विभिन्न समितियों/मंचों द्वारा अनुशंसित विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए गए, और परिषद ने इस मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

सीतारमण ने कहा कि परिषद ने प्रमुख क्षेत्रों के लिए उल्टे शुल्क ढांचे में सुधार के मुद्दे की जांच करने और दरों को युक्तिसंगत बनाने और जीएसटी से राजस्व वृद्धि के ²ष्टिकोण से छूट की समीक्षा करने के लिए एक जीओएम स्थापित करने का निर्णय लिया है।

यह भी निर्णय लिया गया कि बेहतर ई-वे बिल सिस्टम, ई-चालान, फासटैग डेटा के माध्यम से निगरानी और केंद्र और राज्य द्वारा खुफिया और समन्वित प्रवर्तन कार्यों को साझा करने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने सहित अनुपालन में और सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के तरीकों और साधनों पर चर्चा करने के लिए एक जीओएम स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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