राजनीति
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की पर्यावरण संरक्षण प्रतिबद्धता को मिल रही वैश्विक पहचान: सीएम योगी
नई दिल्ली, 31 जनवरी : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एटा की पटना बर्ड सेंचुरी को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को लगातार वैश्विक पहचान मिल रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “एटा की पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ में स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट्स में शामिल करना पॉलिसी, सुरक्षा और संरक्षण की एक यात्रा को दिखाता है, जहां इकोलॉजी और विकास साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।”
उन्होंने आगे लिखा, “यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान सतत संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की रक्षा के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। एटा के लोगों और वेटलैंड संरक्षण के लिए समर्पित सभी स्टेक होल्डर्स को बधाई।”
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढंड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। भूपेंद्र यादव ने दो फरवरी को ‘विश्व वेटलैंड्स दिवस’ से पहले भारत के रामसर नेटवर्क में दो नई वेटलैंड्स को शामिल करने की घोषणा की।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “विश्व वेटलैंड दिवस नजदीक होने के कारण मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत के बढ़ते रामसर नेटवर्क में दो नए नाम जुड़ गए हैं। उत्तर प्रदेश के एटा में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड प्रतिष्ठित रामसर साइटों की सूची में नए नाम हैं।”
इस पर प्रधानमंत्री ने खुशी जताते हुए कहा कि ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “खुशी है कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड रामसर साइट बन गए हैं। वहां की स्थानीय आबादी के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण के प्रति उत्साही सभी लोगों को बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। ये वेटलैंड अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलते-फूलते रहें।”
राजनीति
प्रयागराज में जलभराव पर अखिलेश का तंज, बोले भाजपा राज में सड़कें नदी बन गईं, विकास के दावों पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बारिश के बाद प्रयागराज की सड़कों पर हुए जलभराव को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शहर के जार्ज टाउन इलाके में जलभराव का वीडियो साझा करते हुए जल-निकासी व्यवस्था, भ्रष्टाचार और शहर के विकास को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा शासन में नदियों के किनारे सभ्यताएं विकसित होने के इतिहास के उलट अब शहरों की सड़कें ही नदी बनती दिखाई दे रही हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा है कि इतिहास में पढ़ाया जाता है, नदियों के किनारे शहर-सभ्यताएं विकसित हुईं, भाजपा राज में ये तस्वीर उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर की हो सकती है। महत्वपूर्ण शहर नहीं मुद्दा है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश के एक शहर की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वहां आए दिन सड़कें नदी में तब्दील हो जाती हैं। सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह “स्मार्ट सिटी प्रयागराज का सबसे सभ्रांत इलाका जार्ज टाउन” है। उन्होंने दावा किया कि यहां तक कि स्थानीय थाना भी पानी में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा, ” देश की जनता पूछ रही है कि यह इलाका भाजपा के उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक के अंतर्गत आता है। अब जनता पूछ रही है कि क्या ये क्षेत्र बहकर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में चला गया है? चारों ओर हालात ऐसे ही हैं, इसी वजह से भ्रम की स्थिति है।”
उन्होंने लिखा, “वैसे सुना है भाजपा राज में प्रयागराज के विकास पर 1 लाख करोड़ रुपये का गोरखधंधा हुआ है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायल का दावा, ‘हवाई हमले में हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर की मौत’

इजरायली सेना ने रविवार को दावा किया कि दक्षिणी लेबनान में किए गए हवाई हमले में हिज्बुल्लाह के बद्र रीजनल डिवीजन के एक वरिष्ठ कमांडर की मौत हो गई। लेबनानी मीडिया के अनुसार इस हमले में 4 लोगों की मौत हुई है।
इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि अबू हसन अला की शनिवार देर रात दीर अल-जहरानी पर हुए हमले में मौत हो गई। इजरायल ने इस हमले को दक्षिणी लेबनान में अपने सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलो का “जवाब” बताया। उस हमले में तीन सैनिक घायल हो गए थे।
लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी ने कहा कि इजरायली लड़ाकू विमानों ने दो मंजिला इमारत पर हमला किया, जिसमें चार लोग मारे गए और पांच घायल हो गए।
शनिवार को ही, अंसार गांव पर इजरायली एयरस्ट्राइक में सात लोग मारे गए थे, जो 2024 में हुए सीजफायर के बाद सबसे भीषण हमला था।
इसे लेकर, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने एक बयान जारी किया था। कहा था कि उसने दक्षिणी लेबनान में रात भर किए हवाई हमलों में हिज्बुल्लाह की एलीट राडवान फोर्स के एक कमांडर को मार गिराया।
आईडीएफ ने कहा कि मारे गए शख्स की पहचान अली समीर अल-हज हसन के तौर पर हुई है, जो यूनिट में बटालियन कमांडर के पद पर तैनात थे।
इसमें यह भी कहा गया कि नबातिह जिले के अंसार शहर में हिजबुल्लाह हेडक्वार्टर में कमांडर को मार गिराया गया; यह हमला “सिक्योरिटी जोन” में काम कर रही इजरायली सेना के खिलाफ हिजबुल्लाह के हमले के जवाब में किया गया था।
इस बीच, लेबनान में यूनाइटेड नेशंस इंटरिम फोर्स (यूएनआईएफआईएल) की प्रवक्ता कैंडिस अर्दील ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में एक इंटरनेशनल मौजूदगी जरूरी बनी हुई है।
अर्दील ने बताया कि यूएन सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने विचार के लिए तीन विकल्प रखे हैं।
अर्दील ने कहा कि यूएनआईएफआईएल के शांति सैनिक दक्षिणी लेबनान में मौजूद हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को लागू करने में पार्टियों का समर्थन करते रहेंगे, जो उनके अनुसार दक्षिणी लेबनान में स्थिरता की नींव है।
राष्ट्रीय समाचार
साइबर सुरक्षा आकलन में मानवीय निर्णय क्षमता की परीक्षा को एनआईईएलआईटी ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ लॉन्च किया

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हैकाथॉन है, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की केवल कमजोरियों की पहचान करने की क्षमता नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा आकलन के दौरान मानवीय निर्णय क्षमता का परीक्षण करना है। इसकी घोषणा रविवार को की गई।
‘साइबर कुश्ती 2026’ को साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और इंटेलिजेंस पर आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीसीडीएफआई 2026) के आधिकारिक समानांतर तकनीकी ट्रैक के रूप में शुरू किया गया है। इस पहल का आयोजन नेशनल सिक्योरिटी डेटाबेस (एनएसडी) के अंतर्गत इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि सीईआरटी-इन इसमें नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।
प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण 15 अगस्त से शुरू हो चुका है और 10 सितंबर तक जारी रहेगा। इसमें भाग लेना पूरी तरह निःशुल्क है और तीन सदस्यीय टीमों में छात्र तथा स्वतंत्र शोधकर्ता हिस्सा ले सकते हैं। पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं से अलग, जो मुख्य रूप से कमजोरियों की पहचान या ‘कैप्चर द फ्लैग’ (सीटीएफ) चुनौतियों पर केंद्रित होती हैं, ‘साइबर कुश्ती 2026’ को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह प्रतिभागियों की सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन और प्राथमिकता तय करने की क्षमता की जांच कर सके।
आयोजकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता ऐसे पेशेवरों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो स्वचालित प्रणालियों द्वारा उत्पन्न गलत संकेतों (फॉल्स पॉजिटिव) और वास्तविक खतरों के बीच अंतर कर सकें।
प्रतियोगिता के प्रारूप के तहत सभी टीमों को एक समान, जानबूझकर अपूर्ण रखा गया ‘सिक्योरिटी असेसमेंट पैकेज’ प्रदान किया जाएगा। इस पैकेज में एआई द्वारा तैयार निष्कर्ष, सोर्स कोड, एप्लिकेशन लॉग, आर्किटेक्चर दस्तावेज, स्टैटिक एनालिसिस रिपोर्ट, डिपेंडेंसी स्कैन और सीक्रेट्स स्कैन जैसी सामग्री शामिल होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को परखने के लिए आयोजकों ने जानबूझकर इसमें कुछ गलत, दोहराए गए और वास्तविक निष्कर्ष शामिल किए हैं, जबकि कुछ वास्तविक कमजोरियों को छोड़ा भी गया है। प्रतिभागियों को एक संशोधित और प्राथमिकता-आधारित सुरक्षा आकलन रिपोर्ट तैयार करनी होगी तथा अपने निष्कर्षों और निर्णयों का स्पष्ट औचित्य भी बताना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिभागियों को केवल वास्तविक सुरक्षा खामियों की पहचान करने के लिए ही नहीं, बल्कि गलत या भ्रामक निष्कर्षों को सही ढंग से खारिज करने के लिए भी पुरस्कृत किया जाएगा।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि साइबर सुरक्षा का परिदृश्य अब केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तय करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि कौन-सी खामियां सबसे गंभीर हैं और किन पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मशीनें बड़े पैमाने पर सुरक्षा संबंधी निष्कर्ष तैयार कर सकती हैं, लेकिन उनकी सत्यता की पुष्टि करने और प्राथमिकता तय करने के लिए मानवीय विवेक और निर्णय क्षमता अब भी अपरिहार्य है।
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