व्यापार
इस सप्ताह ब्याज दरों में और कटौती करने से परहेज कर सकता है आरबीआई: अर्थशास्त्री
नई दिल्ली, 2 फरवरी : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच आयोजित होने वाली है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बैठक में आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कटौती पर फिलहाल विराम लगाने की उम्मीद है। हालांकि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी, बॉन्ड बाजार की स्थिरता और करेंसी से जुड़े जोखिमों को संभालने के लिए सीधे कदम उठा सकता है।
आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है।
डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने कहा कि सरकार अपने फिस्कल कंसोलिडेशन (राजकोषीय घाटा कम करने) के रास्ते पर बनी हुई है, इसलिए मौद्रिक नीति की दिशा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
एमपीसी ने दिसंबर 2025 में ब्याज दरें घटाई थीं, लेकिन फरवरी की बैठक में और कटौती से बचा जा सकता है।
राधिका राव ने कहा कि इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 के दौरान आरबीआई बॉन्ड खरीद जारी रख सकता है। वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार की उधारी रिकॉर्ड स्तर पर रहने की बात कही गई है, इसलिए आरबीआई मनी मार्केट से जुड़े कदमों में सतर्कता बरतते हुए उधारी की लागत को काबू में रखना चाहेगा।
व्यापार से जुड़े तनाव के बावजूद आर्थिक ग्रोथ बनी हुई है, लेकिन महंगाई अब अपने निचले स्तर से ऊपर आ चुकी है। वहीं, रुपया लगातार दबाव में है और नए निचले स्तर पर पहुंच रहा है। इसके अलावा, बैंकों के लिए डिपॉजिट जुटाना भी एक चुनौती बना हुआ है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यूनियन बजट 2026 अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखता है और नीतियों में निरंतरता दिखाता है। फिस्कल कंसोलिडेशन जारी रहेगा, जिसमें केंद्र सरकार का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 0.5 प्रतिशत घटने और फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
राधिका राव ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट और प्राइमरी डेफिसिट में और सुधार हो सकता है। साथ ही, ब्याज दरों में और कटौती करने से रेट-सेंसिटिव पोर्टफोलियो निवेश (विदेशी निवेश) बाहर जा सकता है, इसलिए आरबीआई सतर्क है।
आरबीआई ने हाल ही में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिसके तहत बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम डाली जाएगी। इसके लिए ओपन मार्केट में बॉन्ड खरीद, फॉरेन एक्सचेंज स्वैप और वेरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कदम मौजूदा लिक्विडिटी और वित्तीय हालात की समीक्षा के बाद उठाए गए हैं।
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और चालू वित्त वर्ष में ओएमओ के जरिए 6.6 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली है। इसके बावजूद बॉन्ड यील्ड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है, क्योंकि लिक्विडिटी का असर बाजार के सभी हिस्सों में बराबर नहीं पड़ा।
एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि आरबीआई को ऐसे बॉन्ड में ओएमओ करना चाहिए जो ज्यादा लिक्विड हों, ताकि यील्ड पर सही असर दिखे। उदाहरण के तौर पर, आरबीआई मौजूदा 10 साल के 6.48 प्रतिशत (2035) बॉन्ड की बजाय 6.33 प्रतिशत (2035) वाले पुराने 10 साल के बॉन्ड में ओएमओ कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका का मानना, समुद्री नाकेबंदी से ईरान को हुआ 456 अरब रुपए का नुकसान: रिपोर्ट

अमेरिकी की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (456 अरब रुपए ) का नुकसान हुआ है। एक्सियोस के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नाकेबंदी के दौरान दो टैंकर जब्त किए गए। इसके अलावा, अधिकारियों ने दावा किया कि लगभग 53 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे 31 टैंकर इस समय “खाड़ी में फंसे हुए हैं,” जिससे ईरान के तेल निर्यात में आई भारी गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। कथित तौर पर इसी वजह से उसे 4.8 अरब डॉलर (करीब 45,600 करोड़ रुपए) का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ईरान के समुद्र में अमेरिकी नाकाबंदी पूरी ताकत से लागू है, जिससे ईरान की फंडिंग क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
इन्हीं अधिकारियों के अनुसार, कुछ जहाज अब “अमेरिकी नाकेबंदी के डर से चीन को तेल पहुंचाने के लिए एक महंगा और लंबा रास्ता चुन रहे हैं,” जिससे पता चलता है कि अमेरिकी सेना की सख्त कार्रवाई के डर से जहाजों के आने-जाने के तरीकों में बदलाव आया है।
यह नाकेबंदी अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर एक अस्थायी संघर्षविराम के दौरान लगाई थी। इसका मकसद ईरान पर दबाव डालना था ताकि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए उस युद्धविराम को मान ले, जिससे इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
ईरान ने पिछले महीने कहा था कि इजरायल और लेबनान में सशस्त्र समूह हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन के संघर्ष विराम की घोषणा के बाद होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से फिर से खोल दिया है।
हालांकि, बाद में इस जलमार्ग पर फिर से पाबंदी लगा दी गई, जब अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया। अमेरिका का कहना था कि जब तक ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए कोई पक्का समझौता नहीं हो जाता, तब तक ये पाबंदियां जारी रहेंगी।
अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर यानी लगभग 456 अरब रुपये (करीब 45,600 करोड़ रुपये) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
राष्ट्रीय समाचार
सोना एक हफ्ते में एक हजार रुपए और चांदी तीन हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः एक हजार रुपए और 3 हजार रुपए से अधिक सस्ते हो गए हैं।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 1,216 रुपए कम होकर 1,50,263 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,51,479 रुपए पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,37,641 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,38,755 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,12,697 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,13,609 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 29 अप्रैल को 1,47,973 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 27 अप्रैल को 1,51,186 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 3,494 रुपए कम होकर 2,40,331 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,43,828 रुपए प्रति किलो था।
इस हफ्ते चांदी में सबसे न्यूनतम दाम 29 अप्रैल को 2,36,300 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 27 अप्रैल को 2,43,720 रुपए प्रति किलो देखा गया।
वैश्विक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम कम होकर 4,585 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 74 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह फेड की ओर महंगाई बढ़ने के संकेत देना और सख्त टिप्पणी करना है, जिससे इस साल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों के लगातार ऊपरी स्तर पर बने रहने के कारण सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
व्यापार
महाराष्ट्र दिवस के चलते शेयर बाजार बंद, नहीं होगी खरीद-बिक्री

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के चलते बंद रहेगा। इस दौरान दोनों मुख्य स्टॉक एक्सचेंज- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं होगी।
अवकाश के चलते इक्विटी, डेरिवेटिव्स और एसएलबी सेगमेंट तीनों में कारोबार बंद रहेगा। सामान्य ट्रेडिंग अलगे सत्र यानी सोमवार, 4 मई को होगी।
कमोडिटी मार्केट आंशिक रूप से छुट्टी रहेगी। सुबह के सत्र (9 बजे से लेकर 5 बजे तक) में ट्रेडिंग बंद रहेगी, लेकिन शाम के सत्र (5 बजे से लेकर रात 11:55 तक) में कारोबार सामान्य रहेगा।
इसके अतिरिक्त, देश का प्रमुख कृषि-वस्तु बाजार, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स), सुबह और शाम दोनों सत्रों के लिए बंद रहेगा।
महाराष्ट्र दिवस के साथ-साथ आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे भी है, जिसके कारण एशिया के करीब सभी शेयर बाजार बंद हैं, जिसमें चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मॉरीशस, मलेशिया, वियतनाम, ताइवान, पाकिस्तान और श्रीलंका का नाम शामिल हैं।
यूरोप में फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, पोलैंड और अन्य देशों के बाजार भी आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे के कारण बंद रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,913.50 और निफ्टी 180.10 अंक या 0.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,997.55 पर था।
लार्जकैप के साथ स्मॉलकैप और मिडकैप में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 592.05 अंक या 0.98 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,784.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 86 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,007.15 पर बंद हुआ।
इस दौरान सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, इन्फोसिस, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टीसीएस गेनर्स थे। इटरनल, एचयूएल, टाटा स्टील, एलएंडटी, ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, एसबीआई, एक्सिस बैंक, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पावर ग्रिड लूजर्स थे।
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