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दिल्ली में सीईसी से मिलेंगी सीएम ममता बनर्जी, एसआईआर के मुद्दे पर होगी

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नई दिल्ली, 2 फरवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को नई दिल्ली में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) के मुख्यालय में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगी।

इसके अलावा, वह रिवीजन एक्सरसाइज के खिलाफ आम सहमति बनाने के मकसद से विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से भी बातचीत कर सकती हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर नेशनल कैपिटल की यात्रा के लिए यह समय चुना है, क्योंकि चल रहे बजट सत्र के कारण सभी विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता वहां मौजूद रहेंगे। सीएम ममता के कोलकाता लौटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह 5 फरवरी से पहले लौट आएंगी, क्योंकि उस दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में वोट ऑन अकाउंट पेश किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र भी महत्वपूर्ण है और ट्रेजरी बेंच सदन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करेगी। इसमें एक प्रस्ताव राज्य में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका की निंदा करने के लिए होगा। तो वहीं, दूसरा प्रस्ताव राज्य में चल रहे एसआईआर को जिस तरह से किया जा रहा है, उसकी निंदा करने के लिए होगा।

इससे पहले सीईसी को लिखे पत्र में सीएम ममता ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (एसआरओ) और माइक्रो-ऑब्जर्वर के अधिकार पर सवाल उठाया था, जिन्हें उनके अनुसार, राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समीक्षा के लिए केवल पश्चिम बंगाल में नियुक्त किया गया है।

पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री का मुख्य तर्क यह है कि एसआरओ और माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख तक सीमित नहीं थी, क्योंकि उन्हें अप्रूविंग अथॉरिटी के रूप में भी नामित किया गया है। सीईसी के नाम लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने दावा किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अधिकार देने से चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) असहाय, अलग-थलग पड़ गए हैं और सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अतिरिक्त अधिकार भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत लोकतांत्रिक मूल्यों, संघवाद और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ है।

राजनीति

लखीसराय भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया शोक, पीएम बोले- मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ

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बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “बिहार के लखीसराय जिले में भगदड़ की दुर्घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में भगदड़ से हुई मौतों से दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।”

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में हुई घटना हृदयविदारक है। इस दुःखद हादसे से मन व्यथित है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने एवं शोकाकुल परिजनों को कठिन घड़ी में संबल देने की प्रार्थना करता हूं।”

बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “लखीसराय की हृदयविदारक घटना में 7 महिलाओं के निधन से मन अत्यंत व्यथित है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों को धैर्य तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”

जदयू नेता राजीव रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है और कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। एसडीपीओ ने कुछ अफवाहों का जिक्र किया है, लेकिन जब तक सरकार पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखती, तब तक कुछ भी पक्के तौर पर कहना ठीक नहीं होगा।”

बता दें कि भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है और 12 से ज्यादा लोग घायल हैं। बिहार सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका के साथ शांति समझौता ‘सम्मान और ताकत’ के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) ‘सम्मान’ और ‘ताकत’ के साथ किया है।

मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में हुई एक बैठक में ये बातें कहीं। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्रपति ने उस एमओयू का बचाव किया, जिस पर ईरान और अमेरिका ने 18 जून को क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए थे।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, “हमने हालिया समझौते को मजबूती से आगे बढ़ाया और अपने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके। यह एमओयू विशेषज्ञों के साथ सोच-समझकर और विस्तार से चर्चा करने के बाद तैयार किया गया था।”

आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, शनिवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने शांति एमओयू को “ईरान की शान और जीत” का सबूत बताया और कहा कि यह कूटनीति के क्षेत्र में देश की जीत को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।

एमओयू के तहत, ईरान और अमेरिका को सोमवार को खत्म होने वाली 60 दिनों की अवधि में बातचीत करके किसी अंतिम समझौते पर पहुंचना था। हालांकि, हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

इस बीच, रविवार को अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बिना किसी स्पष्ट योजना, बाहर निकलने की रणनीति या तय मिशन के ईरान युद्ध में शामिल हुआ, जिसका खामियाजा अमेरिकी सैनिकों को भुगतना पड़ा।

इराक युद्ध के अनुभवी और मरीन कॉर्प्स में सेवा दे चुके गैलेगो ने रविवार को कहा कि इस संघर्ष ने पेंटागन की योजना और नेतृत्व में गंभीर कमियों को उजागर किया है।

सीनेटर ने एबीसी न्यूज से कहा, “इस प्रशासन ने इस युद्ध के लिए कोई योजना नहीं बनाई थी। उन्होंने यह योजना नहीं बनाई कि इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए और न ही वे वास्तव में यह समझ पाए कि यह युद्ध कैसे बढ़ेगा।”

एरिजोना के सीनेटर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर थकान, गिरते मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

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राष्ट्रीय समाचार

झारखंड छात्र आंदोलन का 24वां दिन : चार मंत्रियों का समूह करेगा रिफॉर्म मंच से बातचीत

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झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को एक बार फिर वार्ता होगी। आंदोलन के 24वें दिन दोपहर दो बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्रियों का समूह जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेगा।

छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की दो प्रमुख मांगों पर कायम हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक दोनों प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आज की वार्ता को आंदोलन के मौजूदा गतिरोध को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से छात्रों को बातचीत का यह प्रस्ताव रविवार को दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर ने आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। सरकार ने छात्रों के विधिक सलाहकारों को भी बातचीत में शामिल होने की अनुमति देने की बात कही है। वार्ता से एक दिन पहले रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा। यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके।

छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे। छात्र आंदोलन की दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार का अब तक का रुख अलग है। वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।

सरकार का तर्क है कि इस चरण पर परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। सरकार यह भी कहती रही है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले हुई है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजर चुका है। फिलहाल मामले से जुड़ी जांच राज्य की सीआईडी कर रही है। छात्र सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अब तक हुई जांच से उनका विश्वास बहाल नहीं हुआ है। वे पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव सामने आ चुका है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच, सरकार और छात्रों के बीच पूर्व की वार्ताओं में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी है। सरकार 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी कर चुकी है। आंदोलनकारी छात्रों ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

हालांकि, सरकार के साथ आज होने वाली बातचीत में मुख्य फोकस भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और छात्रों की प्रमुख मांगों पर रहने की संभावना है। अब सबकी निगाहें दोपहर दो बजे होने वाली इस वार्ता पर टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बनती है तो करीब साढ़े तीन सप्ताह से चल रहे आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में 20 अगस्त के प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर आंदोलन और तेज होने की संभावना है।

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