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Saturday,01-August-2026
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बिहार : श्याम की घर वापसी, राजद के 3 विधायकों को भाया जदयू का ‘तीर’

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JDU

बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने की घोषणा भले ही अभी नहीं हुई है, लेकिन जोड़-तोड़ की सियासी रणनीति शुरू हो गई है। नेता हो या दल, सभी चुनाव से पहले अपने सुरक्षित ‘ठिकाने’ पर पहुंचने के लिए अपना पाला बदलने लगे हैं।

इसी कड़ी में सोमवार को बिहार के उद्योग मंत्री रहे श्याम रजक ने 10 वर्ष के बाद अपने पुराने घर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में वापसी कर ली, वहीं राजद के भी तीन विधायकों ने राजद की ‘लालटेन’ को छोड़कर जदयू का ‘तीर’ थाम लिया।

पूर्व मंत्री श्याम रजक को तेजस्वी यादव ने पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर राजद की सदस्यता दिलाई। राजद की सदस्यता ग्रहण करने के बाद रजक ने कहा कि उन्होंने सामाजिक न्याय की लड़ाई कभी नहीं छोड़ी है।

रजक ने कहा कि आज बड़े-बड़े बयान दिए जाते हैं, लेकिन वास्तव में बिहार में कहीं कोई काम नहीं हुआ है। उन्होंने अपने घर में फिर से वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि बिहार में आज दलितों के साथ धोखा हो रहा है।

पूर्व मंत्री ने कहा, “जदयू के पहले मैं राजद में भी मंत्री रहा था। मेरे लिए कभी भी पद मायने नहीं रखता।”

उन्होंने जदयू से निष्कासन को गलत बताते हुए कहा कि जो पार्टी खुद के संविधान को सुरक्षित नहीं रख सकती, उससे क्या अपेक्षा की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जदयू में अभी भी कई लोग परेशान हैं। उन्होंने कुछ और मंत्रियों के राजद में आने की संभावना जताते हुए कहा, “आगे-आगे देखिए होता है क्या?”

रजक के राजद में आने पर तेजस्वी ने कहा कि वे अपने पुराने घर में लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सरकार चल रही है, उसमें जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा नहीं रह गई है। अफसरशाही हावी है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को रजक को जदयू से निष्कासित कर दिया गया था। इसके अलावे मंत्रिपरिषद से भी हटा दिया गया था।

राजद सरकार में मंत्री रहे रजक 2009 में राजद छोड़कर जदयू में शामिल हुए थे। लालू प्रसाद के करीबी नेताओं में माने जाने वाले रजक 2010 में जदयू के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर फिर से मंत्री बने।

रजक को राजद की सदस्यता ग्रहण किए मात्र एक-दो घंटे ही गुजरे थे, कि जदयू के कार्यालय में भी एक मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जहां राजद के तीन विधायकों को जदयू की सदस्यता ग्रहण करवाई गई।

इस समाराोह में राजद के तीन विधायक प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव और अशोक कुमार ने राजद की ‘लालटेन’ छोड़कर जदयू का ‘तीर’ थाम लिया।

इन सभी विधायकों को मंत्री बिजेंद्र यादव, नीरज कुमार और श्रवण कुमार ने जदयू की सदस्ता ग्रहण करवाई।

उल्लेखनीय है कि राजद ने रविवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव और फराज फातमी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

फातमी फिलहाल पटना से बाहर हैं। कहा जा रहा है कि यही कारण है कि उन्होंने सोमवार को जदयू की सदस्यता ग्रहण नहीं कर सके।

जदयू की सदस्यता ग्रहण करने के बाद महेश्वर यादव ने कहा कि राजद में अब आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो चुका है। इसमें केवल परिवारवाद चल रहा है।

उन्होंने कहा, “गरीबों, दबे-कुचलों के लिए बनाई गई राजद आज पूंजीपतियों, उद्योगपतियों की पार्टी बन गई है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को लोकसभा और राज्यसभा भेजा जा रहा है।”

इधर, मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “हमलोग सभी लोग मिलकर बिहार को और मजबूत करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की।”

उल्लेखनीय है कि प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव और फराज फातमी पहले भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते रहे हैं।

राष्ट्रीय समाचार

पिंगली वेंकैया: ब्रिटिश सैनिकों को सलामी देते देख आया था राष्ट्रीय ध्वज का विचार, फिर बना भारत का तिरंगा

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15 अगस्त 1947 को सुबह 5:30 बजे फहराया गया ध्वज एक नए युग के उदय के प्रतीक के रूप में शान से खड़ा था। सदियों के औपनिवेशिक शासन को सहने वाले राष्ट्र के लिए यह अपार खुशी, गौरव और राहत का क्षण था। उस विजयपूर्ण सुबह तक का सफर लंबा और कठिन था, जिसमें भारत के राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न स्वरूपों में बदलाव हुए। तीन रंगों और 24 चक्रों वाला राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा किसी डिजाइनर की कल्पना से नहीं बना, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रप्रेम की भावना और देश को विश्व में अपनी विशिष्ठ पहचान देने का एक संकल्प था। पिंगली वेंकैया ही वे शख्सियत थे, जिन्होंने हिंदुस्तान को उसके अभिमान का प्रतीक तिरंगा दिया।

2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे पिंगली वेंकैया एक स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी की लड़ाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को डिजाइन किया, जो आजादी के आंदोलन का प्रतीक बन गया था। जुलाई 1947 में हुई संविधान सभा की बैठक में इस ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया।

इतिहास में दर्ज है कि पिंगली वेंकैया ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की और दक्षिण अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था। यहीं से पिंगली गांधीजी के संपर्क में आए और उनकी विचारधारा से बहुत प्रभावित हुए।

युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों को उनके ध्वज को सलाम करते देखकर वह अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने सोचा कि भारत के पास इस प्रकार का कोई ध्वज नहीं है और यहां से भारत के ध्वज के डिजाइन बनाने की शुरुआत हुई।

1906 में एआईसीसी के अधिवेशन में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को बनाने की इच्छा दिखाई। उन्होंने गांधीजी को सुझाव दिया कि हमारा अपना ध्वज होना चाहिए। गांधीजी को सुझाव पसंद आया और उन्होंने कहा कि अच्छा होगा कि वे स्वयं ध्वज का डिजाइन करें।

इतिहासकार राजीव लोचन ने एक इंटरव्यू में बताया, “पिंगली वेंकैया ने विचार किया कि हमें देश के लिए अलग से झंडा बनाना चाहिए, जोकि हमारे देश को आसानी से बता सके और उन्होंने झंडे के लिए तकरीबन 25 डिजाइनें चुनीं। झंडे के बारे में उन्होंने लोगों से चर्चा करना भी शुरू कर दिया था।”

कई बदलाव के बाद उन्होंने महात्मा गांधी के सामने एक फाइनल डिजाइन प्रस्तुत किया। 1921 में ध्वज ने अपना अधिक परिचित स्वरूप धारण किया, जिसे पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। तीन पट्टियां भारत के अलग-अलग समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं और विविधता में एकता का आह्वान करती थीं। केंद्र में स्थित चरखा भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।

अंतिम परिवर्तन 1931 में हुआ, जब ध्वज के रंगों को अंतिम रूप दिया गया। केसरिया रंग साहस का, सफेद रंग शांति का और हरा रंग उर्वरता और विकास का प्रतीक था। चरखे की जगह धर्म चक्र को शामिल किया गया, जो शाश्वत धर्मचक्र और प्रगति का प्रतीक है। यह ध्वज, जिसे संविधान सभा की ओर से 22 जुलाई 1947 को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, आज हमारा पूजनीय तिरंगा बन गया।

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राष्ट्रीय समाचार

जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी, लेनदेन का कुल मूल्य बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

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देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन्स की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 23.66 अरब हो गई। वहीं, इन ट्रांजैक्शनों का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई के दौरान प्रतिदिन औसतन 76.3 करोड़ (763 मिलियन) यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।

इससे पहले, जून 2026 में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो सालाना आधार पर 23 प्रतिशत अधिक थे। जून में इनका कुल मूल्य 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए रहा था। उस महीने प्रतिदिन औसतन 75.7 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे और दैनिक औसत लेनदेन मूल्य 96,405 करोड़ रुपए था।

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वित्त वर्षों में यूपीआई ट्रांजैक्शन में लगातार तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए हो गया।

इसके बाद वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई के जरिए 13,112.95 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन और 260.56 लाख करोड़ रुपए के कुल ट्रांजैक्शन तक पहुंच गई।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल), जिसकी स्थापना अप्रैल 2020 में एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में की गई थी, भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी कर रही है।

इन साझेदारियों के जरिए भारतीय पर्यटक और विदेशों में रहने वाले भारतीय आसानी से सीमा पार डिजिटल भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, साझेदार देशों को भी यूपीआई जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली और रुपे जैसी घरेलू कार्ड भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल रही है।

फिलहाल यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में भारत की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।

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महाराष्ट्र

मुंबई: 8 साल के बच्चे के माता-पिता को टी-शर्ट से मिला सुराग, जोगेश्वरी से लापता बच्चा सुरक्षित माता-पिता को सौंपा गया, मुंबई पुलिस की बड़ी कामयाबी

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मुंबई पुलिस ने एक गुमशुदा बच्चे के माता-पिता को ढूंढ निकाला, जो एक स्पेशल चाइल्ड था और अपना नाम और पता नहीं बता पा रहा था। पुलिस ने T-सीईआरटी से बच्चे के माता-पिता को ढूंढ निकाला। मुंबई 30 जुलाई, 2026 को जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में, पुलिस नायक मिसाल की तुरंत कार्रवाई से लड़के के माता-पिता को सफलतापूर्वक ढूंढ लिया गया। पेट्रोलिंग के दौरान गुमशुदा बच्चा मिल गया। 30 जुलाई, 2026 को शाम करीब 4 बजे, सुभाष रोड, जोगेश्वरी (ईस्ट), मुंबई में ‘यूल चाय’ दुकान के सामने, पैदल पेट्रोलिंग के दौरान, पुलिस नायक मिसाल को लगभग 7 से 8 साल का एक लड़का रोता हुआ और अकेला घूमता हुआ मिला। शुरुआती पूछताछ और उसका नाम और पता पूछने पर पता चला कि लड़का बोल नहीं सकता था। वह सिर्फ “अब्बा” (पिता) और “अम्मा” (माँ) शब्द बोल पा रहा था। पुलिस नाइक मैसेल ने लड़के की टी-शर्ट की बारीकी से जांच की और उस पर मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हिंदी स्कूल, जोगेश्वरी ईस्ट, मुंबई लिखा हुआ पाया। उन्होंने तुरंत उक्त म्युनिसिपल स्कूल का दौरा किया और वहां के एक शिक्षक लक्ष कुमार नंदेश्वर से संपर्क किया। शिक्षक ने कहा कि लड़का उस समय उस विशेष स्कूल में कक्षाओं में भाग नहीं ले रहा था, टी-शर्ट उसे प्रवेश के समय जारी की गई थी। हालांकि लड़के को वर्तमान में वहां भर्ती नहीं किया गया था, लेकिन स्कूल के प्रवेश रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि वह वर्तमान में ‘सुप्पन स्पेशल इंग्लिश मीडियम स्कूल’ में पढ़ रहा है। स्कूल से संपर्क करने पर, नेहा तेंदुलकर नामक एक शिक्षिका ने लड़के की पहचान की और उसके माता-पिता के बारे में जानकारी दी। माता-पिता की पहचान रियाज अहमद अकबर अली अंसारी के रूप में हुई है। बच्चे का नाम मुहम्मद शहबाज अंसारी उम्र: 8 वर्ष बताया गया है कि बच्चा ठीक से बोल या पढ़ नहीं सकता है। माता-पिता का बयान इसके बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उन्हें सौंप दिया गया। यह जानकारी जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर इकबाल शकीलगर ने दी।

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