अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरानी शिक्षा मंत्री का दावा, ‘1,300 में से आधे से अधिक स्कूलों की मरम्मत पूरी’
अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक के बाद 40 दिन तक चले संघर्ष में ईरान की कई इमारतों और बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा। कई शैक्षिक संस्थान तबाह हो गए। इस बीच ईरान में शिक्षा व्यवस्था को बहाल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने कहा है कि संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत अब तक पूरी कर ली गई है।
ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने बताया कि करीब 20 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जबकि सबसे अधिक नुकसान तेहरान, केर्मानशाह, इस्फहान और होर्मोजगान प्रांतों में हुआ। उन्होंने कहा कि बुरी तरह से क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है।
काजेमी ने यह भी बताया कि हमलों के बावजूद देश में शैक्षिक गतिविधियां जारी रहीं। कई स्थानों पर कक्षाएं ऑफलाइन चलाई गईं, जबकि अन्य जगहों पर ऑनलाइन माध्यम अपनाया गया, जिसमें इरानियन टेलीविजन स्कूल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही स्कूलों में उन 170 लोगों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो मिनाब स्थित शजराह तैयबा प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। इनमें अधिकांश छात्राएं और शिक्षक थे। अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के पहले दिन (28 फरवरी) ही प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ। हमले का शिकार हुई बच्चियों की उम्र 7 से 12 बरस के बीच की बताई गई थी।
ईरान सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि युद्ध के असर को कम किया जा सके और छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अफ्रीका के साथ हमारा रिश्ता पीढ़ियों का: विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने घाना के फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में एक खास सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका को अपने दिल में बसाए हुए है और वह ऐसी साझेदारी बनाएगा जो न सिर्फ आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी होगी।
यहां पर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया था। बदलते वैश्विक माहौल पर बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “आज के उथल-पुथल भरे दौर में, कूटनीति के सामने चुनौती यह है कि प्रतिस्पर्धा को टकराव में बदले बिना उसे कैसे संभाला जाए, और हितों के अलग होने पर भी सहयोग को कैसे बढ़ावा दिया जाए।”
उन्होंने भारत की महत्वाकांक्षा, काम करने के तरीके और आत्मविश्वास की कहानी पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि कैसे अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, डिजिटल, मैन्युफैक्चरिंग, उद्यमिता और लोगों की आकांक्षाओं में हो रहे बदलाव देश को वैश्विक विकास का एक अहम इंजन बना रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का संबंध सप्लाई चेन की मजबूती, तकनीकी क्षमताओं और जरूरी सामान बनाने की क्षमता से है। उन्होंने कहा कि भारत कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अहम क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को भी महत्व देता है।
विदेश मंत्री ने भारत और अफ्रीका के लिए अपनी युवा आबादी को उत्पादक, कुशल और सशक्त नागरिकों में बदलने के महत्व पर ज़ोर दिया।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “हमारी वैज्ञानिक और तकनीकी ताकत लगातार बढ़ रही है, जो हमारे विजन, प्रतिबद्धता और कम लागत में बेहतर काम करने की क्षमता को दर्शाती है। तकनीक का लाभ सभी तक पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त जैसी सप्लाई चेन को मजबूत करना बेहद जरूरी है।” उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को औद्योगीकरण का पूरा अधिकार है।
इस बात पर जोर देते हुए कि भारत की विदेश नीति का नजरिया रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित है, उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि साझेदारियों से हमारे विकल्प बढ़ने चाहिए, न कि सीमित होने चाहिए।”
ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “यह भारत की अध्यक्षता के दौरान जी20 में अफ्रीकन यूनियन को शामिल किए जाने में देखा गया था।”
उन्होंने एक सुधारे हुए वैश्विक व्यवस्था के भारत के विजन पर प्रकाश डाला—”जो अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के विकास, प्रगति और समृद्धि का समर्थन करे।”
विदेश मंत्री जयशंकर ने अफ्रीका के साथ भारत की मजबूत साझेदारी को रेखांकित किया, जिसमें व्यापार, बुनियादी ढांचा, क्षमता विकास, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), कृषि, स्वास्थ्य और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा, “बेहतर क्षमताओं वाला भारत एक ज्यादा गंभीर और असरदार पार्टनर है। हम अफ्रीका को अपने दिल में बसाए हुए हैं और हम ऐसी पार्टनरशिप बनाएंगे जो न सिर्फ आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी होगी।”
विदेश मंत्री जयशंकर ने घाना में भारतीय समुदाय और भारत के दोस्तों से भी बातचीत की और दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप को मजबूत करने में उनकी कोशिशों की तारीफ की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्जेटो अब्लाक्वा और शिक्षा मंत्री हारुना इड्रिसु के साथ मिलकर फ्रैंगीपानी (प्लमेरिया) का पौधा लगाया। यह भारत की ‘एक पेड़ मां के नाम’ और घाना की ‘ट्री फॉर लाइफ’ पहल की भावना को दर्शाता है।
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यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर अभी नहीं हो रहा कोई विचार : मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि फिलहाल यूक्रेन की नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) सदस्यता पर कोई विचार नहीं हो रहा है क्योंकि अमेरिका रूस के साथ युद्ध को खत्म करने की कोशिशों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
रूबियो ने इस लड़ाई के आगे बढ़ने के तरीके पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन हालात के “ट्रेंड” पर नजर रख रहा है और ऐसा नहीं लग रहा कि लड़ाई खत्म होने की तरफ बढ़ रही है।
रूबियो ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, अभी यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर कोई बात नहीं हो रही है, क्योंकि इसके लिए आम सहमति बनाने की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी है।”
वे रेक्याविक में आइसलैंड की विदेश मंत्री थोरगेरदुर कैट्रिन गुन्नार्सडॉटिर के साथ एक जॉइंट मीडिया ब्रीफिंग में बोल रहे थे। जब यूक्रेन के नाटो में शामिल होने पर उनकी राय पूछी गई, तो रूबियो ने कहा कि इसका कोई सीधा ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब नहीं है।
रूबियो ने कहा, “अभी हमारा पूरा ध्यान यूक्रेन के मामले में इस लड़ाई को खत्म करने पर है, अगर ऐसा मुमकिन हो तो। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाना दुखद है। हमने साफ कहा है कि अगर इस युद्ध को खत्म करने में हम कोई भूमिका निभा सकते हैं, तो हम एक सकारात्मक भूमिका निभाना चाहेंगे।”
रूबियो ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन मौजूदा हालात को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, “हम जाहिर तौर पर वहां के हालात के ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं और देख रहे हैं कि अभी मामला उस दिशा में नहीं बढ़ रहा है।”
उन्होंने ये बातें एक ऐसी चर्चा के दौरान कहीं जिसमें यूक्रेन के अलावा आर्कटिक और ‘हाई नॉर्थ’ (सुदूर उत्तर) इलाकों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं पर भी बात हुई।
रुबियो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते माहौल ने इस इलाके पर वॉशिंगटन का ध्यान फिर से खींचा है। 2006 में आइसलैंड में लंबे समय से मौजूद अमेरिकी सेना को कहीं और भेजे जाने के बाद ऐसा हुआ था।
उन्होंने कहा, “असलियत यह है कि पिछले 20 सालों में दुनिया बदल गई है। हमारा ध्यान भी बदल गया है। अब आर्कटिक पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।”
रुबियो ने आइसलैंड को यूरोप और अमेरिका, दोनों की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अहम बताया क्योंकि इसकी भौगोलिक स्थिति खास है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन रेकजाविक के साथ और सहयोग पर बातचीत करने के लिए तैयार रहेगा।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से आइसलैंड और उसकी लोकेशन यूरोप और अमेरिका, दोनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।”
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने कहा कि ‘हाई नॉर्थ’ में सुरक्षा चिंताएं सिर्फ पारंपरिक सैन्य खतरों तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने गुप्त गतिविधियों, समुद्र के नीचे बिछी केबलों और शिपिंग लेन (जहाजों के रास्तों) को होने वाले खतरों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आर्थिक व व्यावसायिक चुनौतियों का जिक्र किया।
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विदेश मंत्री का घाना-कोट डी आइवर-इथियोपिया का दौरा, द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 6 से 10 अक्टूबर तक घाना, कोट डी आइवर और इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे तीनों देशों में अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। बैठक में व्यापार, विकास, सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।
विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, घाना, कोट डी आइवर और इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान विदेश मंत्री तीनों देशों में अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और वहां के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
मंत्रालय ने बताया कि इन बैठकों में आपसी दोस्ती और सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के संबंधों के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होगी। इनमें व्यापार और आर्थिक संबंध, विकास से जुड़ा सहयोग, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे मुद्दे शामिल होंगे। इसके अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए जाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार, अदीस अबाबा में विदेश मंत्री क्षेत्रीय भारतीय मिशन प्रमुखों (एचओएमएस) के सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे। विदेश मंत्री की यह यात्रा अफ्रीका के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दिखाती है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की एकजुटता को भी और मजबूत करेगी।
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साह की प्रशंसा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर इस मुलाकात से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच बैठक से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “भारत की राजकीय यात्रा पर आए स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत-ईएफटीए टीईपीए के वादे को आगे बढ़ाते हुए हमारी साझेदारी को गहरा करने के राष्ट्रपति परमेलिन के विचारों की गहराई से सराहना करता हूं।”
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