राजनीति
टीएमसी ने चुनाव आयोग से उत्तरपारा से भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ की शिकायत, मतदाताओं को रिश्वत देने का आरोप
टीएमसी ने हुगली जिले की उत्तरपारा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार दिपांजन चक्रवर्ती के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की है। टीएमसी का दावा है कि भाजपा कुछ दिन पहले शुरू किए गए “मातृ शक्ति भरोसा कार्ड” के जरिए मतदाताओं को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है।
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य निर्वाचन आयुक्त पश्चिम बंगाल, डीईओ हुगली और सामान्य पर्यवेक्षक को संबोधित करते हुए टीएमसी ने पत्र लिखकर शिकायत की है। पत्र में टीएमसी ने लिखा है, “हमें यह जानकारी मिली है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 185 उत्तरपारा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए गए दिपांजन चक्रवर्ती और उनके एजेंट व समर्थक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं को एक फॉर्म भरवाकर, जिसका नाम “मातृशक्ति भोष कार्ड” है, उन्हें 3000 मासिक भत्ता देने का वादा कर रहे हैं। मतदाताओं को रिश्वत देने की यह भ्रष्ट प्रथा भारतीय जनता पार्टी और उसके उम्मीदवार द्वारा मुख्य रूप से उत्तरपारा निर्वाचन क्षेत्र के पंचायत क्षेत्रों में अपनाई गई है।”
टीएमसी ने आगे लिखा है, “मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी इस वादे के साथ एकत्र करना कि सत्ता में आने पर पार्टी उन्हें 3000 मासिक भत्ता देगी, अवैध, अनैतिक और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत परिभाषित भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। केवल इसी कृत्य के लिए भाजपा उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए और उसके खिलाफ उचित आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।”
इसके पहले 17 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर गंभीर आरोप लगाए था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग द्वारा जारी ‘फोर्स डिप्लॉयमेंट इन इलेक्शंस मैनुअल, 2023”, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 का उल्लंघन किया गया है।
फेसबुक पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर यह शिकायत की गई थी। वीडियो में कुछ नागरिक यह दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सीआरपीएफ के जवान कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों के साथ घूम रहे थे, भाजपा के पर्चे बांट रहे थे और मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
पत्र में कहा गया था कि यह व्यवहार कथित तौर पर आपराधिक धमकी और चुनावी प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव (धारा 174) के तहत अपराध है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि इस तरह की गतिविधियां मतदाताओं में डर का माहौल पैदा करती हैं और स्वतंत्र मतदान के अधिकार को प्रभावित करती हैं।
राजनीति
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस, सपा और ‘आप’ का वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बैठक में पार्टी के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया।
महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका आरोप था कि एक गैर-मान्यता प्राप्त गुट को बैठक में स्थान दिया गया, जबकि लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं।
मोइत्रा ने सवाल उठाया कि पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर बैठक में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद अलग गुट के आधार पर मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी विपक्ष के वॉकआउट को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा तथा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के समर्थन में यह कदम उठाया है। उनका कहना था कि किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंवैधानिक है।
बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस सांसदों के बजाय पहले कथित बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार का अलोकतांत्रिक कदम बताया।
सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के वॉकआउट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज देश में विभिन्न तरीकों से सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित ढंग से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बगावत करने वाले सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि स्पीकर ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।
महुआ माजी ने परिसीमन के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों का काफी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दिलाए कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हों, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का दावा,’ अमेरिका को दिया जवाब, कुवैत में उसके सैन्य ठिकानों पर किया ड्रोन से हमला’

अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी आर्मी के अनुसार, उसने कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को ड्रोन से निशाना बनाया है। रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईएसएनए ने सेना की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई।
ईरानी सेना के अनुसार, उसने कामिकाजे ड्रोन के जरिए कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, जो खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख हैं, ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “निर्णायक और विनाशकारी जवाब” देंगे।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्दुल्लाही ने कहा कि देश किसी भी आक्रामक कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को “ग्रेट सैटन (महाशैतान)” बताते हुए उन पर “विश्वासघाती और धोखेबाज दुश्मन” होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सशस्त्र सेनाओं, सरकारी संस्थानों और आम जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भविष्य में ईरान अमेरिका को पिछले संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने 18 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक और दौर पूरा किया। सेंटकॉम के अनुसार, यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था।
सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े उन बलों को भी निशाना बनाया, जिन पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने का आरोप है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, वर्तमान में मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बयान में कहा गया कि सभी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं, अभियान के लिए तैयार हैं और क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
युवाओं को नशे से बचाने का अनोखा संकल्प, पंजाब का परिवार कर रहा 2,500 किमी की पदयात्रा

युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पंजाब का एक परिवार अनोखी पहल कर रहा है। यह परिवार बिना जूते-चप्पल के पंजाब से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक करीब 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है। रास्ते में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है।
पदयात्रा कर रहे सरदार लाल सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “हम अमृतसर से आए हैं। हमने अपने गांव से सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ तक लगभग 2,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। पंजाब में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। हम सभी के सुख-समृद्धि और भलाई की अरदास करते हैं। हमारी यह यात्रा युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए समर्पित है। यह मेरा 13वां साल है। हम वर्ष 2013 से लगातार यह यात्रा कर रहे हैं।”
नशे की बढ़ती समस्या आज युवाओं के सामने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता, विशेष रूप से निर्णय लेने वाला हिस्सा यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स विकसित हो रहा होता है। ऐसे में कम उम्र में नशे की शुरुआत जीवनभर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की रोकथाम के लिए परिवार और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं से खुलकर और संवेदनशीलता के साथ बातचीत करनी चाहिए। माता-पिता और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों की सही जानकारी देना भी जरूरी है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपचार प्रभावी साबित होते हैं। भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सरकारी सेवाओं के माध्यम से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध है।
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