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Tuesday,14-April-2026
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भारत अपने कुछ एफटीए की समीक्षा कर सकता है

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S.-Jaishankar

भारत सरकार ने संकेत दिया है कि भारत आर्थिक रूप से वांछित परिणाम नहीं देने वाले अपने कुछ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की समीक्षा कर सकता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक समाचार चैनल पर भूराजनैतिक स्थिति पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत ने विभिन्न देशों के साथ बीते वर्षों में एफटीए किए हैं जिनसे देश को अपनी क्षमताओं के निर्माण के मामले में अर्थव्यवस्था के लिए कोई खास लाभ नहीं हुआ है।

मुक्त व्यापार समझौता उन देशों के बीच एक तरजीही व्यवस्था है जिसमें सदस्य देश अपने स्वयं के बीच के व्यापार के टैरिफ को कम करते हैं जबकि गैर सदस्य देशों के साथ अपनी टैरिफ दरों को बनाए रखते हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने श्रीलंका (1998), अफगानिस्तान (2003), थाईलैंड (2004), सिंगापुर (2005), भूटान (2006), नेपाल (2009), दक्षिण कोरिया (2009), मलेशिया (2011) और जापान (2011) के साथ एफटीए हैं।

जयशंकर ने चर्चा के दौरान कहा, “अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखें, विनिर्माण की स्थिति को देखें..फिर मेरी आखों से आंख मिलाकर कहें कि हां, इन एफटीए ने मुझे अच्छी तरह से सेवा दी है। आप ऐसा नहीं कह पाएंगे।”

हालांकि उन्होंने तुरंत ही यह भी जोड़ा कि सभी एफटीए एक जैसे नहीं हैं। मंत्री ने कहा कि दुनिया से संबंध बनाए रखने के जो तरीके हैं, वे जरूरी नहीं कि एफटीए केंद्रित हों।

उन्होंने कहा, “कोविड-19 के बाद दुनिया एक अधिक संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। या तो आप खेल में हैं या आप खेल में नहीं हैं..मैं कहूंगा कि व्यापक सावधानी का युग और बहुपक्षवाद पर बहुत अधिक निर्भरता, वह युग एक निश्चित सीमा तक हमारे पीछे चला गया है।”

जयशंकर ने कहा, “हमें और अधिक बाहर कदम रखना होगा, हमें और अधिक आश्वस्त होना होगा, हमें अपने हितों को बेहतर ढंग से स्पष्ट करना होगा, हमें जोखिम लेने की आवश्यकता है क्योंकि व्यवसाय या बैंकिंग जैसे जोखिमों को उठाए बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते। यह वे विकल्प हैं जिन्हें हमें चुनना है और मुझे नहीं लगता कि इनसे बचने का कोई रास्ता है।”

उन्होंने भारत के पड़ोस को ‘जटिल’ बताते हुए कहा कि भारत अक्सर ‘पंचिंग बैग’ की तरह होता है। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक संबंधों का निर्माण देशों की घरेलू राजनीति से पैदा हुई अस्थिरता की समस्या का समाधान कर सकता है।

विदेश मंत्री ने कहा, “अगर हमें अंतर्राष्ट्रीय स्थिति का लाभ उठाकर आगे बढ़ना है तो अवसरों का फायदा उठाना होगा।”

अंतरराष्ट्रीय समाचार

परमाणु मांगों पर विवाद के बीच अमेरिका और ईरान की वार्ता ठप

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “काफी प्रगति” हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका अपनी प्रमुख मांगों पर अड़ा रहा, जिनमें समृद्ध यूरेनियम को हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सत्यापन योग्य सीमाएं शामिल हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फाक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान में उच्च स्तर पर हुई वार्ताओं ने लचीलेपन और अमेरिका की “रेड लाइन्स” दोनों को स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि चीजें गलत हुईं। मुझे लगता है कि कई चीजें सही भी हुईं। हमने काफी प्रगति की,” और जोड़ा कि यह “पहली बार था जब ईरानी और अमेरिकी सरकारें इतने उच्च स्तर पर मिलीं।”

वेंस के अनुसार, मुख्य विवाद का मुद्दा यह रहा कि अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ईरान “कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता,” जो उसकी सभी वार्ता स्थितियों का आधार है।

उन्होंने दो गैर-समझौताकारी मांगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,“हमें समृद्ध सामग्री (यूरेनियम) को ईरान से बाहर करना होगा।” दूसरी मांग थी “परमाणु हथियार विकसित न करने की निर्णायक प्रतिबद्धता,” जिसे सत्यापन तंत्र के जरिए सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा, “ईरान यह कह दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, यह एक बात है… लेकिन इन बातों का सत्यापन भी जरूरी है।”

वेंस के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार “हमारी दिशा में बढ़े” लेकिन “पर्याप्त नहीं बढ़े” जिसके कारण दोनों पक्षों ने बातचीत रोककर अपने-अपने देशों में लौटने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, “अब गेंद उनके पाले में है” और संकेत दिया कि आगे की बातचीत तेहरान की अमेरिकी शर्तें मानने की इच्छा पर निर्भर करेगी।

वेंस ने वार्ता की प्रगति को क्षेत्रीय मुद्दों से भी जोड़ा, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।

उन्होंने कहा, “हमें जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला देखना होगा,” और ईरान पर बातचीत के दौरान “लक्ष्य बदलने” का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों की आवाजाही में “कुछ बढ़ोतरी” हुई है लेकिन “पूरी तरह से खुलना अभी नहीं हुआ है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूरी पहुंच बहाल नहीं हुई, तो इससे वार्ता की दिशा “मौलिक रूप से बदल सकती है।”

कार्रवाई के बारे में वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसैनिक अभियान केवल ईरानी झंडे वाले जहाजों ही नहीं बल्कि ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को भी निशाना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जो भी जहाज ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहा है या वहां से आया है… हमें इसकी जानकारी होगी,” और अमेरिकी खुफिया क्षमताओं का हवाला दिया।

उन्होंने ईरान पर वैश्विक शिपिंग को खतरे में डालकर “पूरी दुनिया के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद” करने का आरोप लगाया और कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो हम भी एक सिद्धांत पर काम करेंगे कि कोई भी ईरानी जहाज बाहर नहीं जा सकेगा।”

तनाव के बावजूद, वेंस ने कहा कि एक व्यापक समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “खुश होंगे यदि ईरान एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करे… और उसके लोग समृद्धि हासिल कर सकें” लेकिन इसके लिए उसे “परमाणु हथियार और आतंकवाद का पीछा न करना” होगा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरानी वार्ताकारों को किसी समझौते से पहले तेहरान में उच्च अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “उन्हें वापस जाकर हमारी तय शर्तों के लिए मंजूरी लेनी होगी।”

वेंस ने वार्ता में अमेरिका की स्थिति को मजबूत बताते हुए “सैन्य बढ़त” और “नाकाबंदी के जरिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत सारे पत्ते हैं। हमारे पास बढ़त है।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रूसी विदेश मंत्री लावरोव दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मंगलवार को चीन की दो-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर चर्चा करना है।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 14-15 अप्रैल तक चीन की अपनी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत करेंगे।

मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला, विभिन्न स्तरों पर संपर्कों की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा करेंगे। इसमें संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, एससीओ, जी20, एपीईसी और अन्य बहुपक्षीय तंत्रों व मंचों के भीतर संयुक्त कार्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व की स्थिति सहित कई ज्वलंत विषयों और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का विस्तृत आदान-प्रदान होने की उम्मीद है।

इसी बीच, शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय संबंधों के विकास, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग, और आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और अपने-अपने रुख में समन्वय स्थापित करेंगे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सोमवार को स्वीकार किया कि होर्मुज स्ट्रेट की अमेरिकी नाकेबंदी का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

मॉस्को में एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रूस की अग्रणी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने क्रेमलिन प्रवक्ता के हवाले से कहा, “बहुत हद तक संभावना है कि इस तरह की कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना जारी रहेगा। इस बात को काफी हद तक निश्चितता के साथ माना जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध करने के अमेरिकी कदम से संबंधित विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। स्ट्रेट को अवरुद्ध करने की अमेरिकी धमकी पर टिप्पणी करते हुए पेस्कोव ने कहा, “इस संबंध में कई विवरण अभी भी अस्पष्ट और समझ से परे हैं, इसलिए मैं इस समय कोई भी ठोस टिप्पणी करने से परहेज करूंगा।”

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राजनीति

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के फैसले से जनता दुखी: रामकृपाल यादव

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बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान जल्द हो सकता है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इस पूरे मामले पर मंत्री रामकृपाल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार दोपहर में पार्टी की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें विधायक दल के सदस्य शामिल होंगे और उसी बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। खास बात यह है कि इस बैठक में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होंगे।

रामकृपाल यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद वे संभवतः आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और फिर नया नेता चुना जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का बिहार के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिहार को अंधकार में माना जाता था लेकिन नीतीश कुमार ने अपने नेतृत्व में राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया। यही वजह है कि आज भी लोग उन्हें काफी पसंद करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो लोगों को दुख जरूर होगा लेकिन यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है, जिस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उनके अनुसार, यह सिर्फ आरक्षण नहीं बल्कि एक बड़ा बदलाव है, जो देश में एक नए युग की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है और इससे समाज में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।

रामकृपाल यादव ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक बड़े नेता हैं और चुनाव के समय प्रचार के लिए जाना स्वाभाविक है लेकिन पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है। अब वहां सीधी टक्कर तृणमूल कांग्रेस व भाजपा के बीच है और कांग्रेस के लिए वहां टिके रहना मुश्किल है।

उन्होंने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे घबराई हुई हैं और अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख भावनात्मक बातें कर रही हैं। उनके अनुसार, ममता बनर्जी गलत अफवाहें फैला रही हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हर भाषा, जाति और धर्म का सम्मान करती है और सभी को बराबर अवसर देने में विश्वास रखती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की नीति पर काम कर रही है और जनता ने इसी भरोसे के साथ प्रधानमंत्री मोदी को समर्थन दिया है। सरकार बिना किसी भेदभाव के देश के विकास के लिए काम कर रही है और आगे भी यही प्रयास जारी रहेगा।

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