राजनीति
सीजेआई के खिलाफ ‘मोटिवेटेड’ कैंपेन पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 44 पूर्व जजों ने जताई कड़ी आपत्ति
नई दिल्ली, 10 दिसंबर: देश के 44 पूर्व सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) पर रोहिंग्या प्रवासियों से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर चल रहे ‘प्रेरित और भड़काऊ अभियान’ की कड़ी निंदा की है।
न्यायाधीशों ने इस मामले में 5 दिसंबर को जारी ओपन लेटर का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का यह प्रयास स्वीकार्य नहीं है। बता दें कि पत्र में कहा गया था कि 2 दिसंबर की सुनवाई में रोहिंग्या शरणार्थियों पर अमानवीय टिप्पणी हुई।
पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर तर्कसंगत आलोचना हो सकती है, लेकिन वर्तमान में जो कुछ हो रहा है, वह नियमित अदालत कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण रूप में पेश कर न्यायपालिका की वैधता पर सवाल उठाने का प्रयास है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि सीजेआई केवल यह पूछ रहे थे कि कानून के तहत रोहिंग्या के कौन से अधिकार या दर्जे का दावा किया जा रहा है।
पत्र में न्यायाधीशों ने यह भी रेखांकित किया कि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी व्यक्ति (नागरिक या विदेशी) के साथ यातना, गुमनामी या अमानवीय व्यवहार नहीं किया जा सकता और हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होना चाहिए। इस बात को नजरअंदाज कर अदालत पर अमानवीयता का आरोप लगाना गंभीर विकृति है।
पूर्व न्यायाधीशों ने रोहिंग्या प्रवासियों की स्थिति और कानूनी परिप्रेक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि रोहिंग्या प्रवासी भारतीय कानून के तहत शरणार्थी नहीं हैं। अधिकांश मामलों में उनकी भारत में प्रविष्टि अनियमित या अवैध है। केवल दावा करने से उन्हें कानूनी शरणार्थी दर्जा नहीं मिल सकता। भारत 1951 के यूएन शरणार्थी सम्मेलन और 1967 के प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं है। इसलिए भारत के कर्तव्य उसके संविधान, विदेशी और प्रवास कानूनों और सामान्य मानवाधिकारों से तय होते हैं, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय संधि से।
अवैध प्रवासियों द्वारा आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज प्राप्त करना गंभीर चिंता का विषय है। यह सिस्टम की विश्वसनीयता को कमजोर करता है और दस्तावेजी धोखाधड़ी तथा संगठित नेटवर्क की आशंका पैदा करता है।
ऐसे मामलों में कोर्ट-नियंत्रित विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्थापना आवश्यक है, जो जांच करे कि अवैध प्रवासियों ने कैसे पहचान और कल्याण दस्तावेज प्राप्त किए, कौन से अधिकारी और मध्यस्थ शामिल हैं और क्या कोई तस्करी या सुरक्षा-संबंधित नेटवर्क सक्रिय हैं।
रोहिंग्या की स्थिति म्यांमार में भी जटिल है, जहां उन्हें अवैध प्रवासी माना जाता है और नागरिकता का विवाद है। इस पृष्ठभूमि में भारतीय अदालतों को कानूनी श्रेणियों के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता है, न कि राजनीतिक नारे या लेबल के आधार पर।
पूर्व न्यायाधीशों ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का हस्तक्षेप संवैधानिक सीमाओं के भीतर है और यह देश की अखंडता बनाए रखते हुए मानव गरिमा की रक्षा कर रहा है।
संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में देश के कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित पूर्व न्यायाधीश शामिल हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनिल दवे, जस्टिस हेमंत गुप्ता, राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिल देव सिंह, दिल्ली एवं जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीसी पटेल और पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पीबी बाजंथरी समेत 44 प्रमुख पूर्व जजों के नाम शामिल हैं।
पूर्व न्यायाधीशों ने कहा, “भारत का संवैधानिक क्रम मानवता और सतर्कता दोनों की मांग करता है। न्यायपालिका ने मानव गरिमा की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय अखंडता बनाए रखी है और इसे सकारात्मक समर्थन मिलना चाहिए, न कि नकारात्मक प्रचार।”
राजनीति
सीएम फडणवीस की पहल, पालघर के 25 हजार स्कूली बच्चों को मिलेगा पौष्टिक भोजन

महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी और ग्रामीण बच्चों के पोषण के लिए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में रोजाना 25 हजार बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाला अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर स्थापित करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। इस योजना के पूरा होने से हजारों स्कूली बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना के लिए करीब डेढ़ एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय रसोईघर के निर्माण और संचालन के लिए जरूरी सरकारी अनुमतियां और मंजूरियां लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में कुल 29,124 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें जिला परिषद के स्कूलों में 15,091 विद्यार्थी, आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों में 2,636 विद्यार्थी और अनुदानित आदिवासी स्कूलों में 3,607 विद्यार्थी शामिल हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बेहतर भोजन मिलने से बच्चों की भूख की समस्या कम होगी, स्कूलों में उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा।
प्रस्तावित केंद्रीय रसोईघर की अंतिम क्षमता प्रतिदिन 25 हजार विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने की होगी लेकिन शुरुआत में लगभग 2 हजार से 3 हजार विद्यार्थियों को ही भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी मंजूरियों, संचालन की तैयारियों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर इसका विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
राज्य सरकार की योजना इस मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को जिला परिषद स्कूलों, स्वयं वित्तपोषित स्कूलों, निजी अनुदानित स्कूलों और सरकारी मानदंडों के अनुसार पात्र अनुदानित आदिवासी स्कूलों तक पहुंचाने की है। पात्र स्कूलों को धीरे-धीरे इस योजना में शामिल किया जाएगा।
परियोजना में पारदर्शिता और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, स्वतंत्र संस्थाओं से लेखा परीक्षण कराया जाएगा और योजना के परिणामों का मूल्यांकन भी किया जाएगा।
पालघर के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएम देवेंद्र फडणवीस की इस पहल को जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद विक्रमगढ़ के हजारों बच्चों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है, इसलिए निर्माण और संचालन को लेकर अंतिम फैसला सरकारी मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
होर्मुज स्ट्रेट में 21 भारतीय नाविकों वाले तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला, सभी सुरक्षित

होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। इस टैंकर पर 21 भारतीय नाविक सवार थे। हालांकि, राहत की बात है कि सभी नाविक पूरी तरह से सुरक्षित हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बारे में जानकारी दी है।
यह घटना स्थानीय समय के अनुसार बुधवार को हुई। कुवैत के झंडे वाला तेल टैंकर एम/टी अल दसमा जब होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “21 अक्टूबर को कुवैत के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी अल दसमा पर, जिसमें 21 भारतीय नाविक थे, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमारे सभी 21 भारतीय चालक दल के सदस्य बाकी क्रू के साथ पूरी तरह से सुरक्षित हैं।”
उन्होंने लिखा, “हम लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अपने नाविकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए जहाज प्रबंधन कंपनी के साथ निकट संपर्क में हैं।”
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने भी इस हमले को ट्रैक किया। उनके अनुसार हमला ओमान के बुखा से 11 नॉटिकल मील पश्चिम में हुआ।
टाइम्स कुवैत की रिपोर्ट के अनुसार, हमले के बाद जहाज पर आग लग गई थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टैंकर अभी भी वहीं रुका हुआ है और सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं।
यह हमला खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों से जुड़ी घटनाओं की श्रृंखला के बीच हुआ है। इससे पहले 16 अक्टूबर को भी होर्मुज स्ट्रेट में ही कच्चे तेल के टैंकर एमटी एसटी 3 पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। उस टैंकर पर 15 भारतीय नाविक सवार थे। उस घटना में भी सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित थे और किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी।
भारत ने मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच समुद्री नेविगेशन और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कई बार निंदा की है। नई दिल्ली ने कई मौकों पर दोहराया है कि वाणिज्यिक जहाजों और व्यापारी नाविकों पर सभी हमले ‘कानूनी और नैतिक रूप से अक्षम्य’ हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार के सुरक्षित प्रवाह की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अपराध
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: आरोपियों ने कई बार ऑटो चालकों को दिए एक हजार रुपए, क्राइम ब्रांच ने धारा-111 जोड़ी

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग मामले की जांच में बॉलीवुड सितारों के घरों की रेकी को लेकर नए खुलासे हुए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि जब वे मुंबई पहुंचे थे और अंधेरी के एक होटल में ठहरे हुए थे, तब वे रोजाना होटल से निकलकर किसी भी ऑटो रिक्शा को रोक लेते थे।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी ऑटो चालक से कहते थे कि वे पहली बार मुंबई आए हैं और उन्हें बॉलीवुड अभिनेताओं के घर देखने हैं। इसके बाद ऑटो चालक उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारों के घरों तक ले जाने के लिए आमतौर पर करीब 1,000 रुपए मांगते थे। आरोपियों ने कई बार ऑटो चालकों को 1,000 रुपए देकर अलग-अलग बॉलीवुड सितारों के घरों की रेकी की थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई बार आरोपी खुद गूगल पर अभिनेताओं के घरों का पता सर्च करते थे और फिर वही पता ऑटो चालक को बताकर वहां पहुंच जाते थे। इस तरह वे अलग-अलग सितारों के घरों और आसपास के इलाकों की जानकारी जुटा रहे थे। क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों शूटरों ने बॉलीवुड से जुड़े कई अभिनेता के घर की रेकी की थी।
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 भी जोड़ी है। इस घटनाक्रम के बाद मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, मकोका लगाने का अंतिम फैसला जांच के निष्कर्षों और कानून में निर्धारित शर्तों की पूर्ति के आधार पर लिया जाएगा।
यह जानकारी भी सामने आई है कि फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सूरत पहुंचे थे और उसी जगह उन्होंने बंदूक को छिपा दिया था। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन को भी उसी किसी जगह छिपाया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि आरोपियों की पूछताछ में मिली जानकारी के बाद पुलिस इसे सत्यापित कर रही है और सूरत में लोकल मदद से बंदूक और मोबाइल का पता लगाया जा रहा है।
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