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Tuesday,02-June-2026
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भारत में वीवो वाई50 क्वाड रियर कैमरे के साथ लॉन्च

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Vivo-Y50

चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो ने सोमवार को भारत में क्वाड रियर कैमरा सेटअप और 5,000एमएच बैटरी के साथ ऑल-न्यू वीवो वाई 50 लॉन्च किया। यह स्मार्टफोन 8जीबी रैम 128जीबी स्टोरेज वेरिएंट के साथ 17,990 रुपये में उपलब्ध होगा। इस स्मार्टफोन में कंपनी ने क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 665 प्रोसेसर दिया है। इसे ग्राहक किसी भी वीवो इंडिया ई-स्टोर, अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और रिटेल स्टोर से खरीद सकते हैं।

वीवो इंडिया ब्रांड रणनीति के निदेशक निपुन मारिया ने कहा, “हमारा नया प्रोडक्ट वीवो वाई50 ग्राहकों की उम्मीद पर खरा उतरेगा, जो कम दाम में अच्छी स्क्रीन क्वालिटी, कैमरा और लंबे समय तक टिकने वाली बैटरी की खोज में थे।”

इस स्मार्टफोन में कंपनी ने 6.53 इंच का आईव्यू डिस्प्ले दिया है, जो 90.7 स्क्रीन टू बॉडी रेशियो के साथ आता है। डिवाइस में पंच होल डिस्प्ले दिया गया है। इसमें फुलएचडी प्लस स्क्रीन मिलती है।

स्मार्टफोन क्वाड रियर कैमरा सेटअप के साथ आता है। जिसमें एफ 2.2 अपर्चर के साथ 13 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा लेंस, 8 मेगापिक्सल का सुपर वाइड एंगल कैमरा, 2 मेगापिक्सल का बूके और 2 मेगापिक्सल का मैक्रो लेंस मिलता है।

कंपनी ने 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया है। वीवो वाई 50 में सुपर नाइट फीचर दिया गया है। ये स्मार्टफोन एंड्रॉयड 10 पर आधारित फनटच ओएस 10 पर काम करता है। स्मार्टफोन में 5000 एमएएच की बैटरी दी गई है, जो फास्ट चाजिर्ंग सपोर्ट के साथ आती है।

अंतरराष्ट्रीय

अल-अक्सा मस्जिद में घुसपैठ पर कतर ने जताया विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून का बताया उल्लंघन

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दोहा, 1 जून: कतर ने सोमवार को अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने की निंदा की। कतर ने घटना को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनियाभर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने वाली अस्वीकार्य कार्रवाई’ बताया।

कतर ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद मुसलमानों का इबादतगाह है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिश करने वाले सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “कतर अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने और कब्जा करने वाली सेना की सुरक्षा में की गई उनकी उकसाने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत है, और कब्जे वाले यरुशलम तथा उसके इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों में नई स्थिति थोपने की खतरनाक कोशिश है।”

मंत्रालय ने कहा क‍ि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादत स्थल है। यरुशलम और उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति बदलने के लिए उठाए गए सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के उल्लंघन और बार-बार होने वाली उकसाने वाली घटनाएं क्षेत्र में हिंसा और तनाव को और बढ़ा सकती हैं, जिससे शांति और स्थिरता की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा।

बयान में कहा गया, “मंत्रालय चेतावनी देता है कि इस तरह के उल्लंघनों और लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाइयों से क्षेत्र में और अधिक हिंसा तथा तनाव पैदा हो सकता है। इससे तनाव कम करने और स्थिरता लाने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी।”

कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह तुरंत कदम उठाए और इजरायल को एक कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में, फि‍लिस्तीनी लोगों और उनके पवित्र स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघनों को रोकने तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए मजबूर करे।

मंत्रालय ने दोहराया कि कतर फि‍लिस्तीनी मुद्दे और फि‍लिस्तीनी जनता के समर्थन में मजबूती से खड़ा है। कतर का मानना है कि कब्जे का अंत होना चाहिए और फि‍लिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार मिलने चाहिए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फि‍लिस्तीनी राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो।

कतर का यह बयान उस घटना के बाद आया जब कुछ इजरायली बसने वालों ने ‘डोम ऑफ द रॉक’ की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस की सुरक्षा में इजरायल का राष्ट्रगान गाया।

अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग ‘अल-मघराबा गेट’ से मस्जिद परिसर में दाखिल हुए, जिस पर पूरी तरह इजरायली अधिकारियों का नियंत्रण है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर में अक्सर झड़पें होती रही हैं। इनमें इजरायली बसने वालों के छापे और मुस्लिम श्रद्धालुओं पर लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं।

मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी चेतावनी दी है कि कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक स्थल को समय और क्षेत्र के आधार पर विभाजित करने वाली नई व्यवस्था लागू करना हो।

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अंतरराष्ट्रीय

अंतहीन प्रक्र‍िया की ओर बढ़ रहा ईरान-अमेरिका समझौता, दोनों देश नई शर्तों के साथ कर रहे संशोधन की तैयारी

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वाशिंगटन, 1 जून: अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे समझौते की शर्तों में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ तेहरान नए बदलाव जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

सूत्रों से म‍िजी जानकारी के अनुसार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने बताया क‍ि इस अंतहीन प्रक्र‍िया में व्हाइट हाउस बातचीत में ईरान की नई प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। लगता है क‍ि यह बातचीत फिर से शुरुआती और मुश्किल स्थिति में पहुंच सकती है।

एडनक्रोनोस समाचार एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया क‍ि ट्रंप बातचीत को तेज करना चाहते हैं और दूसरी तरफ दबाव बढ़ाकर समझौता जल्दी करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें ईरान की जटिल सत्ता व्यवस्था से भी निपटना पड़ रहा है।

तेहरान में किसी भी बदलाव या समझौते को अंतिम मंजूरी सर्वोच्च नेता के पास होती है। अगर समझौते के मसौदे में बदलाव होता है, तो बातचीत और लंबी हो सकती है।

तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नए प्रस्ताव के बाद ईरान भी समझौते के ड्राफ्ट में कुछ नए बदलाव जोड़ना चाहता है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप 60 प्रत‍िशत तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार को लेकर ज्यादा साफ और सख्त नियम चाहते हैं, जो अभी ईरान के पास हैं। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलने के तरीके साफ किए जाएं।

जो मौजूदा ड्राफ्ट समझौता है, उसमें ईरान यह मानने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही इसमें 60 दिनों की एक समय-सीमा भी है, जिसमें दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जमा हुए संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर बातचीत करेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें और साफ नियम जोड़ना चाहते हैं, खासकर इस बात पर कि अमेरिका उस सामग्री को कब और कैसे हासिल करेगा।

ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे बस यही गारंटी चाहिए कि परमाणु हथियार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह मान लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ईरान ने सिर्फ यह कहा था कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन अब समझौते में यह भी शामिल किया गया है कि वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार न तो बनाएंगे और न ही हासिल करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा, “उन लोगों से बातचीत करना बहुत मुश्किल है और इसमें समय लगता है, लेकिन मुझे जल्दी नहीं है।”

व्हाइट हाउस अभी भी इस समझौते को पूरा होने को लेकर आशावादी है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक सरकारी टीवी पर कहा क‍ि अमेरिका के साथ ‘बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान’ अभी भी जारी है, लेकिन जब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक इन पर कोई पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस समय जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।”

हालांकि, तेहरान से कई बड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विदेश मंत्री अराघची के नरम रुख के उलट, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने सख्त बयान दिया।

उन्होंने कहा, “जब तक हमें यह पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।” गालिबाफ ने कहा कि जो लोग कूटनीति से जुड़े हैं, वे अमेरिका के वादों या बातों पर भरोसा नहीं करते।

इस बीच, ईरान की राजनीति को लेकर स्थिति और भी जटिल बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। यह जानकारी लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट ‘ईरान इंटरनेशनल’ से जुड़े एक सूत्र ने दी है, लेकिन ईरान सरकार ने इस खबर को तुरंत खारिज कर दिया और इसे ‘झूठी मीडिया रिपोर्ट’ बताया।

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राष्ट्रीय

नीट यूजी और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जुड़े मुद्दों पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक

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नई दिल्ली, 1 जून: नीट-यूजी परीक्षा व सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर संसदीय स्थायी समिति वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल कर रही है। नीट-यूजी परीक्षा के विषय पर, सोमवार को हो रही समिति की बैठक में विमर्श किया जा रहा है। सोमवार को यहां शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और नेशनल एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक को समिति के समक्ष जवाब देने के लिए बुलाया गया है।

समिति देश की प्रमुख प्रवेश एवं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रही है। मंगलवार को कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। संसद भवन एनेक्सी परिसर में शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई है।

बैठक के एजेंडे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) बनाम पारंपरिक पेन-एंड-पेपर परीक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर चर्चा शामिल है। इसके साथ ही नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों, परीक्षा संचालन की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

बैठक में विशेष रूप से नीट-यूजी परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और उससे जुड़े विवादों पर सवाल किए जाएंगे। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़े प्रभाव को लेकर एनटीए और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से जवाब मांगे जा सकते हैं। समिति इस बात की भी समीक्षा कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष नीट-यूजी के प्रश्न लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। अब इसकी पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। पुनर्परीक्षा के निर्णय, उसकी आवश्यकता, परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय तथा प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी समिति की चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

संसदीय दस्तावेजों के अनुसार, बैठक के पहले सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) से संबंधित रिपोर्टों पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा है। इसके बाद शुरू हुए दूसरे सत्र में शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और एनटीए के वरिष्ठ अधिकारियों से परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाने हैं।

समिति की अगली बैठक 2 जून को होगी, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और सीबीएसई अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।

ओएसएम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन छात्रों और शिक्षकों ने स्कैन की गुणवत्ता, आरेखों के मूल्यांकन और तकनीकी समस्याओं जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है। इसके अलावा, कक्षा 9 और 10 में त्रिभाषा सूत्र के क्रियान्वयन की स्थिति और उसके प्रभावों की भी समीक्षा की जाएगी। संसदीय स्थायी समिति की ये बैठकें देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता और शिक्षा प्रणाली में सुधार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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