व्यापार
मजबूत शुरुआत के बाद फिसला बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी में लाल निशान के साथ कारोबार
विदेशी बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत तेजी के रुझानों के साथ हुआ, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में गिरावट आ गई और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लाल निशान के साथ कारोबार चल रहा था। सेंसेक्स सुबह 9.24 बजे पिछले सत्र से 22.51 अंकों यानी 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 34348.07 पर जबकि निफ्टी 7.70 अंकों यानी 0.08 फीसदी की नरमी के साथ 10159.75 पर बना हुआ था।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 150.21 अंकों की बढ़त के साथ 34520.79 पर खुला और 34527.20 तक उछला लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में फिसलकर 34319.96 पर आ गया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र के मुकाबले 13.70 अंकों की तेजी के साथ 10181.15 पर खुला और 10214.80 तक चढ़ा लेकिन बाद में फिसलकर 10150.95 पर आ गया।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई में एमडीआर आने से इंडस्ट्री को 20,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है फायदा: ब्रोकरेज

यूपीआई भुगतान में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लागू करने से बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए आय के नए स्रोत खुल जाएंगे और इससे पूरी इंडस्ट्री का रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ रुपए से 20,600 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्मों की ओर से दी गई।
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) का संचालन करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पीटूएम) यूपीआई के लिए 0.4 प्रतिशत का एमडीआर 15 अक्टूबर से लगाने का ऐलान किया है। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। इसका भुगतान मर्चेंट करेगा, न कि ग्राहक।
यूबीएस का अनुमान है कि बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल 10,000–15,000 करोड़ रुपए का होगा। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बैंक इसमें से लगभग 60–70 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखेंगे, जबकि बाकी हिस्सा भुगतान कंपनियों को मिलेगा। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि फिनटेक कंपनियों की कमाई पर इसका असर ज्यादा होगा।
गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि इंडस्ट्री का संभावित रेवेन्यू पूल 20,600 करोड़ रुपए का हो सकता है। यह अनुमान इस कैलकुलेशन पर आधारित है कि कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग आधा हिस्सा पूरे 40 आधार अंक एमडीआर के दायरे में आ सकता है। जेपी मॉर्गन के अनुसार, अधिकतम रेवेन्यू पूल लगभग 17,000 करोड़ रुपए का हो सकता है, जिसमें इश्यूइंग और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लगभग 11,700 करोड़ रुपए शामिल हैं। यह रकम लिस्टेड कमर्शियल बैंकों के वित्त वर्ष 26 के शुद्ध मुनाफे का 2.1 प्रतिशत है।
सिटी का अनुमान है कि सालाना इंडस्ट्री रेवेन्यू पूल 16,000-17,000 करोड़ रुपए का होगा, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत बैंकों को, 25 प्रतिशत यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को और 15 प्रतिशत नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिलेगा।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला, एफएमसीजी स्टॉक्स में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ खुला। सेंसेक्स 242.54 अंक या 0.33 प्रतिशत की मजबूती के साथ 74,246.36 और निफ्टी 83 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,201.60 पर था।
शुरुआती कारोबार में तेजी का नेतृत्व एफएमसीजी स्टॉक्स कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी एक प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी आईटी के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे।
केवल निफ्टी इंडिया डिफेंस ही लाल निशान में था।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 95 अंक या 0.16 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60,975 और निफ्टी स्मॉलकैप 5 अंक या 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 19,416 पर था।
सूचकांकों में आईटीसी, एमएंडएम, बीईएल, एसबीआई, एचयूएल, एचसीएल टेक, एसबीआई, एशियन पेंट्स, अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, टाइटन, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस गेनर्स थे। वहीं, एनटीपीसी, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक और इटरनल लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार हरे निशान में थे। टोक्यो, शंघाई, सोल और जकार्ता में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा था। वहीं, हांगकांग और बैंकॉक लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि यूएस बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। जब तक ये दोनों अहम मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर प्रतिकूल बने रहेंगे, तब तक बाजार में बड़ी रिकवरी की उम्मीद करना सही नहीं होगा। पिछले 5 दिनों से एफआईआई बाजार में बिकवाली कर रहे हैं और यूएस 10-साल के बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत पर होने के कारण, बाजार में आने वाली हर छोटी तेजी पर उनके बिकवाली करने की संभावना है।
व्यापार
आरबीआई को वीआरआरआर नीलामी में 3.93 लाख करोड़ रुपए की बोलियां मिलीं

बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुरू किए गए वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) को नीलामी में 3,93,352 करोड़ रुपए की बोलियां मिली हैं।
आरबीआई की ओर से जारी बयान के अनुसार, केंद्रीय बैंक को 5 लाख करोड़ रुपए की अधिसूचित राशि के मुकाबले 3,93,352 करोड़ रुपए की बोलियां मिलीं और उसने 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ और भारित औसत दर पर सभी बोलियों को स्वीकार कर लिया।
आरबीआई पिछले एक महीने से बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने और ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने के लिए वीआरआरआर नीलामियां आयोजित कर रहा है।
11 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी का अनुमान लगभग 10.73 लाख करोड़ रुपए था।
बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर-बी) जमा की भारी मात्रा में जुटाई गई राशि के बाद बैंकिंग प्रणाली में नकदी सरप्लस में चली गई है।
इसके अलावा, आरबीआई ने पिछले सप्ताह नकदी को अवशोषित करने के लिए तीन चरणों में 1 लाख करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बिक्री की घोषणा की थी।
पहली ओएमओ नीलामी 50,000 करोड़ रुपए की होगी, जो 17 सितंबर को निर्धारित है। इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपए की दो नीलामियां होंगी।
केंद्रीय बैंक के ये नकदी प्रबंधन उपाय ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब वह बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त धनराशि का प्रबंधन करते हुए अल्पकालिक मनी मार्केट दरों को अपनी नीतिगत दर के अनुरूप बनाए रखना चाहता है।
इससे पहले सितंबर में केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने के लिए एक दिन की अवधि वाली ओवरनाइट वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के जरिए 3.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए थे।
रिवर्स रेपो नीलामी के लिए अधिसूचित राशि 5 लाख करोड़ रुपए थी, जबकि प्राप्त बोलियों की राशि 3,53,390 करोड़ रुपए थी।
बयान में कहा गया कि आरबीआई ने पूरी राशि को अवशोषित किया, जो अधिसूचित राशि का 70 प्रतिशत से अधिक है। उसने 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ दर और भारित औसत दर पर पूरी राशि स्वीकार की है।
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