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भारत में हिंसा, जाति को लेकर पश्चिम की रूढ़िवादी सोच की झलक दिखाती है ओबामा की किताब

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Obama

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने नए संस्मरण में ‘भारत की हिंसा और जातिवाद’ की उस छवि को सामने लाया है, जो पश्चिमी देशों के मन में उसके लिए हमेशा से सबसे खराब रूढ़िवादी तस्वीर की रही है। साथ ही ‘यूरोपीय मूल की मां’ सोनिया गांधी को लेकर भी बात की है जो सबसे शक्तिशाली राजनेता के रूप में उभरती हैं और अल्पसंख्यक तबके से मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करती हैं।

उन्होंने अपने नए संस्मरण ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में लिखा है, “पूरे देश में करोड़ों लोग गंदगी में झुग्गी-बस्तियों में रहते हैं। वहां का भारतीय उद्योग जगत वैसी विलासितापूर्ण जीवनशैली का आनंद लेता है, जैसे राजा और मुगल लेते थे।”

वह आगे लिखते हैं, “सार्वजनिक और निजी, दोनों ही तरह के भारतीय जीवन में हिंसा व्यापक तौर पर है।”

भारत की इस छवि को उन्होंने अपने पाठकों के लिए शानदार संवेदना के साथ पेश किया है। उन्होंने कहा है कि ये सब उन्होंने खुद नहीं देखा है, ना ही राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने कभी भारत की यात्रा की है, लेकिन ‘इस देश का मेरी कल्पनाओं में हमेशा एक विशेष स्थान रहा’।

रूढ़िवादी सोच के बारे में उन्होंने लिखा, “अपनी वास्तविक आर्थिक प्रगति के बावजूद, भारत एक गरीब देश बना हुआ है। धर्म और जाति को लेकर बड़े पैमाने पर विभाजित, भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों और सत्ता के दलालों से बंधा हुआ और एक पाखंडी नौकरशाही वाला देश जो बदलावों के प्रतिरोधी थे।”

उन्होंने भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी का भी जिक्र किया। इसके अलावा कहा, “सरकार में हुए बार-बार के बदलावों, राजनीतिक दलों के भीतर के तीखे झगड़ों, विभिन्न सशस्त्र अलगाववादी आंदोलनों और सभी तरह के भ्रष्टाचार के घोटाले के बाद भी कई मामलों में आधुनिक भारत को एक सफल कहानी के रूप में गिना जाता है।”

खबरों के मुताबिक ओबामा और उनकी पत्नी को अपने संस्मरण के लिए प्रकाशक से अग्रिम भुगतान के तौर पर रूप में 65 मिलियन डॉलर (4 अरब से ज्यादा रुपये) मिले हैं।

जातिवाद का जिक्र यहीं खत्म नहीं होता, उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर भी इस बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा, “एक से अधिक राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि सोनिया गांधी का चुनाव सही था। एक बुजुर्ग सिख, जिनका कोई राष्ट्रीय राजनीतिक आधार नहीं था और वह उनके 40 वर्षीय बेटे राहुल के लिए कोई खतरा नहीं थे।”

इस दौरान उहोंने पूर्व प्रधानमंत्री का जिक्र सिख धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य के तौर पर किया। साथ ही उन्हें ‘ईमानदार, बुद्धिमान और शालीन व्यक्ति’ के साथ-साथ ‘सफेद दाढ़ी और एक पगड़ी वाले सिख’ के तौर पर किया जो पश्चिमी लोगों को किसी धार्मिक व्यक्ति जैसा अहसास देते हैं।

बता दें कि ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ अभी खत्म नहीं हुआ है, इसमें केवल 2011 तक की बातों का समावेश किया गया है इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किताब में नहीं हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार और निवेश के खुलेंगे नए अवसर

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भारत और न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। दोनों देश पारंपरिक कूटनीतिक मित्रता से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कृषि और रणनीतिक सहयोग पर आधारित व्यापक साझेदारी की ओर जा रहे हैं। यह जानकारी एक लेख में दी गई।

ग्रीक समाचार पोर्टल डायरेक्टस में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे दोनों देशों के कारोबारियों, किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), उद्यमियों और युवा पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

लेख में कहा गया है कि इस समझौते का महत्व केवल सीमा शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है। यह बाजार तक पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने, कौशल एवं प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं वाली दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत कारोबारी संबंध बनाने का ढांचा प्रदान करता है।

‘रोडमैप टू 2030’ से मजबूत हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी इस आर्थिक जुड़ाव को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करती है। एफटीए और इसके साथ जुड़ी सहयोग पहल मिलकर भारत और न्यूजीलैंड को अधिक विविधतापूर्ण, मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं।

इस एफटीए की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक न्यूजीलैंड की ओर से भारत के सभी 8,284 उत्पाद श्रेणियों के निर्यात पर तत्काल शून्य शुल्क की सुविधा देना है। इससे भारतीय निर्यातकों को कीमतों के मामले में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने, विदेशी बाजारों में विविधता लाने और विकसित अर्थव्यवस्था में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।

श्रम-प्रधान और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को इस समझौते से विशेष लाभ मिलने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, रत्न एवं आभूषण, खेल के सामान, जूते और चमड़े के उत्पाद उन क्षेत्रों में शामिल हैं, जिनमें निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। ये उद्योग बेहतर बाजार पहुंच का लाभ उठाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं, नए ऑर्डर हासिल कर सकते हैं और अपने वितरण नेटवर्क को मजबूत कर सकते हैं।

इस समझौते से एमएसएमई, कारीगरों और महिला उद्यमियों को भी बाजार के बढ़ते अवसरों का लाभ मिलने की उम्मीद है। छोटे कारोबारियों को अक्सर अधिक लेनदेन लागत, बाजार से जुड़ी सीमित जानकारी और विदेशों में कारोबारी संबंध स्थापित करने में कठिनाइयों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में परेशानी होती है। बेहतर शुल्क सुविधा, संस्थागत सहयोग और कारोबारियों के बीच मजबूत संपर्क से इन बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

लेख में आगे कहा गया है कि एफटीए के रणनीतिक ढांचे के तहत 2030 तक वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंचने की परिकल्पना की गई है। ये लक्ष्य दोनों देशों की महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं, लेकिन इन्हें हासिल करना प्रभावी क्रियान्वयन, कारोबारियों की भागीदारी और कई क्षेत्रों में निरंतर वृद्धि पर निर्भर करेगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत और यूएई ने ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा की

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विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी के साथ बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और अधिक सुदृढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान, मिस्री और अल हाशमी ने पश्चिम एशिया घटनाक्रम और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूएई की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी से मुलाकात की। उन्होंने भारत-यूएई संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”

इससे पहले, भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने आधिकारिक दौरे पर यूएई पहुंचे विक्रम मिस्री का स्वागत किया।

20 अक्टूबर को, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मुंबई में एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। बैठक के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय (एमईए) में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बाद में विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, “यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। हमारे सहयोग का दायरा और महत्वाकांक्षा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई देती है। भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”

वहीं, यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर बैठक के बारे में जानकारी साझा की। लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”

शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का यह भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा के बाद हुआ।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका चीन और रूस की जासूसी ‘और भी बेहतर’ तरीके से करता है : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को अपने मध्यावधि चुनाव प्रचार अभियान का समापन किया। ईरान पर अमेरिकी हमले का बचाव किया, तेल की कीमतों को लेकर अपना पक्ष रखा और चीन -रूस की जासूसी को लेकर भी बड़ा बयान दिया। दावा किया कि अमेरिका ये काम उनसे कहीं बेहतर तरीके से करता है।

आयोवा के डुबुक में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने चीन और रूस की जासूसी को लेकर जताई गई चिंताओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसी ने मुझसे कहा कि चीन हमारी जासूसी कर रहा है। मैंने कहा, हां और हम भी उनकी जासूसी कर रहे हैं। इस बारे में चिंता न करें।”

उन्होंने आगे कहा, “चीन और रूस हमारी जासूसी कर रहे हैं। मैंने कहा, यह सच है। और हम भी उनके साथ ऐसा ही कर रहे हैं। लेकिन हम उनसे कहीं बेहतर तरीके से ऐसा करते हैं। इसलिए, इस बात की चिंता न करें।”

ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब न तो कोई सैन्य क्षमता बची है और न ही बातचीत करने के लिए कोई नेता। उन्होंने कहा, “हमने इसकी शुरुआत नहीं की थी, लेकिन हम इसे खत्म कर रहे हैं। हम उनकी अच्छे से धुनाई कर रहे हैं।”

ट्रंप ने कहा, “उनके पास न तो रडार है, न ही विमान-रोधी हथियार और न ही कोई नेता। शायद हम नेताओं के मामले में कुछ ज्यादा ही आगे निकल गए हैं (इसका मतलब शीर्ष ईरानी नेतृत्व की हमलों में मौत से है), अब बात करने के लिए कोई बचा ही नहीं है। मैं किसी ऐसे व्यक्ति को खोजने की कोशिश कर रहा हूं जिससे बात की जा सके, लेकिन कोई भी राष्ट्रपति नहीं बनना चाहता।”

डुबुक में दो घंटे से कुछ अधिक समय तक बोलने के बाद, ट्रंप अपने मध्यावधि (मिडटर्म) अभियान की आखिरी रैली के लिए कंसास के सलीना रवाना हो गए।

सलीना की रैली में, ट्रंप ने फिर से अर्थव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “पिछले तीन महीनों में आपकी महंगाई दर 1.7 प्रतिशत तक गिर गई है। मुझे ‘स्लीपी’ (सुस्त) जो बाइडेन से विरासत में ऊंची कीमतें मिली थीं; मैंने ये कीमतें नहीं बढ़ाईं।”

उन्होंने कहा, “मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि “तेल की कीमतें बाइडेन और बराक हुसैन ओबामा के समय की तुलना में काफी कम हैं।”

ट्रंप ने ईंधन की ऊंची कीमतों को “इस देश और दुनिया की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी कीमत” बताते हुए कहा, “जब यह संघर्ष खत्म हो जाएगा, तो कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी।”

अमेरिका में मंगलवार को मतदान होगा, जिसमें हाउस (प्रतिनिधि सभा) और सीनेट पर नियंत्रण दांव पर लगा है।

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