अंतरराष्ट्रीय
नासा-स्पेसएक्स के 2.9 अरब डॉलर के अनुबंध के खिलाफ अमेरिका ने बेजोस के विरोध को किया खारिज
अमेरिकी सरकार के जवाबदेही कार्यालय (जीएओ) ने जेफ बेजोस द्वारा संचालित ब्लू ओरिजिन की अंतरिक्ष एजेंसी नासा को एलोन मस्क के स्वामित्व वाले स्पेसएक्स को उसके 2.9 बिलियन डॉलर के मून लैंडर कार्यक्रम के लिए चुनौती देने की चुनौती को खारिज कर दिया है। ब्लू ओरिजिन और रक्षा ठेकेदार डायनेटिक्स ने 2024 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने के लिए स्पेसएक्स को 2.9 बिलियन डॉलर का अनुबंध देने के लिए नासा के खिलाफ यूएस जीएओ के साथ विरोध दर्ज कराया था।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से दो चंद्र लैंडर प्रोटोटाइप (ब्लू ओरिजिन में से एक सहित) लेने की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस से फंडिंग में कटौती ने एजेंसी को ब्लू ओरिजिन पर स्पेसएक्स का चयन करने के लिए प्रेरित किया।
गाओ ने ब्लू ओरिजिन के विरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नासा को कार्यक्रम के लिए उपलब्ध धन की राशि के परिणामस्वरूप चर्चा में शामिल होने, संशोधन करने या घोषणा को रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं थी।
एक ट्वीट में, मस्क ने फ्लेक्सिंग बाइसेप इमोजी के साथ जीएओ ट्वीट करके इस खबर का जवाब दिया।
अमेजॅन के संस्थापक जेफ बेजोस ने इस सप्ताह की शुरूआत में नासा को अपनी अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन को मानव चंद्र लैंडिंग सिस्टम (एचएलएस) अनुबंध देने के लिए 2 बिलियन डॉलर तक की छूट की पेशकश की।
मस्क के साथ अपने अंतरिक्ष युद्ध को आगे बढ़ाते हुए, बेजोस ने नासा के प्रशासक बिल नेल्सन को एक खुले पत्र में कहा कि उनकी कंपनी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की निकट-अवधि की बजटीय कमी को बंद कर देगी और एक सुरक्षित और टिकाऊ लैंडर का उत्पादन करेगी जो अमेरिकियों को चंद्रमा की सतह पर ले जाएगी।
ब्लू ओरिजिन के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, हम अपने विश्वास में ²ढ़ हैं कि नासा के फैसले के साथ मौलिक मुद्दे थे, लेकिन जीएओ उनके सीमित अधिकार क्षेत्र के कारण उन्हें संबोधित करने में सक्षम नहीं है।
नासा ने कहा कि गाओ का फैसला एजेंसी और स्पेसएक्स को चांद पर इंसानों को उतारने की समयसीमा तय करने की इजाजत देता है।
चंद्रमा लैंडर अनुबंध नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2024 तक अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह पर पहले मानव मिशन के लिए एक कदम के रूप में चंद्रमा पर वापस लाना है।
व्यापार
सोने और चांदी में तेजी के साथ कारोबार, कीमतें एक प्रतिशत तक बढ़ीं

सोने और चांदी की शुरुआत मंगलवार को तेजी के साथ हुई और दोनों कीमती धातुओं में करीब एक प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,42,915 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,43,559 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 9:50 पर यह 555 रुपए या 0.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,43,470 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,43,365 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,43,915 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखी गई।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,16,746 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,18,143 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 2,354 रुपए या 1.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,19,100 रुपए प्रति किलो पर खुला।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,18,143 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,19,896 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,113 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर था।
इसके अलावा, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 की दूसरी तिमाही में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही। वहीं, साल की पहली छमाही मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन (जिसकी कीमत 380 अरब डॉलर थी) हो गई है।
साल की दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ, बार और सिक्कों में निवेश घटकर 262 टन रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह दूसरी तिमाही में गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ से 45 टन की निकासी थी, हालांकि साल की पहली छमाही में ईटीएफ की मांग 18 टन के साथ थोड़ी सकारात्मक बनी रही। बार और सिक्कों में निवेश काफी हद तक स्थिर रहा; दूसरी तिमाही में इसमें साल-दर-साल सिर्फ 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पहली छमाही की मांग पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत ज्यादा रही, जिसकी वजह पहली तिमाही में हुई जबरदस्त मांग थी।
व्यापार
गोदरेज प्रॉपर्टीज का पहली तिमाही में मुनाफा 46 प्रतिशत घटा, रेवेन्यू में 85 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए। इस दौरान कंपनी के मुनाफे और राजस्व में गिरावट दर्ज की गई।
जून तिमाही में कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ (पीएटी) में तिमाही-दर-तिमाही 46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 650 करोड़ रुपए के मुकाबले 350 करोड़ रुपए रह गया।
वहीं, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले भी मुनाफा 41.7 प्रतिशत घटा है। एक साल पहले यह आंकड़ा 600 करोड़ रुपए था।
कंपनी की ऑपरेशनल आय यानी परिचालन से राजस्व में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में राजस्व घटकर 506 करोड़ रुपए रह गया, जबकि मार्च तिमाही में यह 3,458 करोड़ रुपए था। इस तरह तिमाही आधार पर राजस्व में 85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, सालाना आधार पर कंपनी का राजस्व 16.5 प्रतिशत बढ़ा है, क्योंकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 435 करोड़ रुपए था।
परिचालन स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन दबाव में रहा। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अप्रैल-जून तिमाही में 285 करोड़ रुपए का ईबीआईटीडीए घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ईबीआईटीडीए घाटा 243 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी की अन्य आय भी घटकर 839 करोड़ रुपए रह गई, जो एक साल पहले 1,186 करोड़ रुपए थी।
हालांकि, बिक्री और मांग के मोर्चे पर कंपनी को अच्छी सफलता मिली। जून तिमाही में कुल बुकिंग वैल्यू 8,651 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि यह लगातार छठी तिमाही है जब कंपनी की बुकिंग्स 7,000 करोड़ रुपए से ऊपर रही हैं।
तिमाही के दौरान कंपनी ने 3,738 आवासीय इकाइयों (यूनिट्स) की बिक्री की। इनकी कुल बिक्री योग्य क्षेत्रफल 62 लाख वर्ग फुट (6.2 मिलियन स्क्वायर फीट) रहा।
बुकिंग्स के लिहाज से बेंगलुरु कंपनी का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा, जहां से कुल बुकिंग्स का 44 प्रतिशत योगदान मिला। इसके बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) का योगदान 21 प्रतिशत, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का 18 प्रतिशत, पुणे का 11 प्रतिशत और हैदराबाद का 5 प्रतिशत रहा।
तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के निदेशक मंडल ने गोदरेज हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड में विलय को भी मंजूरी दे दी है। कंपनी का मानना है कि इससे कारोबारी ढांचे को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
कमजोर वित्तीय नतीजों के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बीएसई पर गोदरेज प्रॉपर्टीज का शेयर करीब 4 प्रतिशत गिरकर 1,992.80 रुपए के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। कंपनी का शेयर पिछले 52 हफ्तों में 2,351.60 रुपए के उच्चतम और 1,434 रुपए के न्यूनतम स्तर को छू चुका है।
व्यापार
देश की शीर्ष 10 में से नौ कंपनियों का मार्केटकैप 2.51 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से नौ का बाजार मूल्यांकन बीते हफ्ते 2.51 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसकी वजह इक्विटी बाजार में मजबूत रैली थी।
27-31 जुलाई के कारोबारी सत्र में जिन कंपनियों के मार्केटकैप में बढ़ोतरी हुई है उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, लाइफ कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) का नाम शामिल है।
इस दौरान केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर के ही मार्केट कैप में ही गिरावट आई।
बीते सप्ताह देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का मार्केट कैप 80,345.97 करोड़ रुपए बढ़कर 7,10,817.51 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
यह तेजी कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में समेकित कर-पश्चात लाभ में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत वृद्धि दर्ज करने के बाद आई। इसके चलते शुक्रवार को कंपनी के शेयर 8 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए।
भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 44,959.50 करोड़ रुपए बढ़कर 12,30,005.63 करोड़ रुपए हो गया। वहीं, टीसीएस के मार्केट कैप में 40,414.03 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और यह 8,55,894.78 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 39,447.35 करोड़ रुपए बढ़कर 17,69,108.79 करोड़ रुपए हो गया।
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का मार्केट कैप 21,096.80 करोड़ रुपए बढ़कर 5,41,844.69 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं, एसबीआई का बाजार पूंजीकरण 10,845.97 करोड़ रुपए बढ़कर 9,47,799.81 करोड़ रुपए हो गया।
एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 8,164.73 करोड़ रुपए बढ़कर 11,52,150.63 करोड़ रुपए हो गया।
एलआईसी का मार्केट कैप 4,427.49 करोड़ रुपए बढ़कर 5,37,435.05 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं, आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 1,660.37 करोड़ रुपए बढ़कर 10,29,878.30 करोड़ रुपए हो गया।
इसके विपरीत, हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार पूंजीकरण 10,326.46 करोड़ रुपए घटकर 4,93,602.13 करोड़ रुपए रह गया। यह बीते हफ्ते शीर्ष 10 में एकमात्र कंपनी थी, जिसके मार्केटकैप में कमी आई।
सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।
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