राष्ट्रीय
यूपी बजट में अवस्थापना से आईटी तक बड़े प्रावधान, औद्योगिक और रोजगार विस्तार पर जोर
लखनऊ, 11 फरवरी : उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में अवस्थापना, औद्योगिक विकास, एमएसएमई, आईटी, सड़क, सिंचाई और ग्रामोद्योग क्षेत्रों के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं। बजट में पूंजीगत निवेश के जरिए रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के लिए 27,103 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 13 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण एवं नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। अटल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 2,000 करोड़ रुपए तथा एफडीआई और फॉर्च्यून-500 कंपनियों को प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन के लिए 1,000 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना में 35,280 करोड़ रुपए के संभावित निवेश के साथ 200 एमओयू हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं, जिससे 53,263 प्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। ‘सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ योजना के लिए 575 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान हेतु 1,000 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रावधान है। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र को इस बजट में विशेष बढ़ोतरी मिली है। इस क्षेत्र के लिए 5,041 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना से अधिक है।
सुरेश खन्ना ने आगे बताया कि पावरलूम बुनकरों के लिए 4,423 करोड़ रुपए की फ्लैट रेट विद्युत योजना तथा वस्त्र एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के लिए 150 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। पीएम मित्र पार्क योजना के तहत मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए 2,059 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो 76 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपए तथा साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र के लिए 95 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान है। प्रदेश में 30,000 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने और 900 मेगावॉट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क एवं सेतु निर्माण के लिए 34,468 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं।
उन्होंने कहा कि नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, बाईपास, रिंग रोड, फ्लाईओवर और औद्योगिक लॉजिस्टिक मार्गों के विकास के लिए अलग-अलग मदों में हजारों करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के लिए 18,290 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो 30 प्रतिशत अधिक है। केन-बेतवा लिंक सहित प्रमुख परियोजनाओं से 4.49 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित होने का अनुमान है। 2,100 नए राजकीय नलकूपों और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं से लाखों किसानों और करीब 49.90 लाख आबादी को लाभ मिलने का दावा किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार, भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

नई दिल्ली, 13 फरवरी : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।
बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।
इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।
जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।
इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।
चीन की अगर बात करें, तो उसकी हमेशा से ही चटगांव पोर्ट पर नजर रही है। यूनुस के शासन में यह खबरें भी सामने आ रही थी कि बांग्लादेश के सभी बड़े पोर्ट का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया जाएगा। अगर ऐसा हो जाता, तो चीन भविष्य में भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता था।
बीएनपी सरकार चीन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग को और बढ़ा सकती है। इससे दक्षिण एशिया, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। यदि आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों तक महसूस हो सकता है।
भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।
भारत के लिए बांग्लादेश एक बड़ा निर्यात बाजार है। नीतिगत बदलाव से कारोबारी माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की वापसी के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच हालात में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन अगर जमात-ए-इस्लामी की वापसी होती तो यह भारत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता था।
राजनीति
यूपी में वंदे मातरम पर भाजपा ने विपक्ष पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप

लखनऊ, 13 फरवरी : उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘वंदे मातरम’ और विधानसभा की कार्यवाही को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के नेताओं ने कहा कि विपक्ष देश को ‘वंदे मातरम’ के नाम पर गुमराह कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाचार एजेंसी मीडिया से बात करते हुए ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गजट जारी हो चुका है और अब पूरे देशवासियों को इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में गाना चाहिए। इसे उन्होंने गर्व का विषय बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।
केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि भारत में रहते हुए ‘वंदे मातरम’ गाना आवश्यक कर दिया गया है और इसका विरोध करने वाले अपना “असली रंग” दिखाएंगे।
कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान पर निशाना साधते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह अभियान खोखला है। उनका दावा है कि सरकार की विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों में व्यापक विकास कार्य हो रहे हैं।
उन्होंने बजट को लेकर भी विपक्ष पर तंज कसा और कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें बजट में भी भ्रष्टाचार नजर आता है, जबकि विकास पर ध्यान देने वालों को विकास दिखाई देता है।
प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी ‘वंदे मातरम्’ के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गान और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र चेतना और राष्ट्र प्रेम का आधार हैं। उनके अनुसार, इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिससे किसी मजहब या व्यक्ति को ठेस पहुंचे, इसलिए सभी को इसे सम्मानपूर्वक गाना चाहिए। मेरे ख्याल से ‘वंदे मातरम्’ में कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जिसके गाने से किसी मजहब या व्यक्ति पर कोई असर पड़े, इसलिए सभी को इसे गाना चाहिए।
वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि हाल ही में विधानसभा की कार्यवाही बेहद सकारात्मक और सार्थक रही।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को सदन रात करीब 9:30 बजे तक चला और सभी विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाया। सरकार ने भी सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद मजबूत हुआ।
राजनीति
पुणे में बंगाल के प्रवासी मजदूर की हत्या पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- नफरत को हथियार बनाया जा रहा है

कोलकाता, 12 फरवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के पुणे में बंगाल के एक प्रवासी मजदूर की हत्या की निंदा की। उन्होंने इस घटना को हेट क्राइम करार देते हुए कहा कि किसी राज्य में बाहरी लोगों के प्रति नफरत को हथियार और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर घटना का वीडियो पोस्ट करते हुए गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं शब्दों से परे विचलित हो गई हूं, क्रोधित हूं और आहत हूं। पुरुलिया के बंडवान का 24 वर्षीय प्रवासी मजदूर सुखेन महतो, जो अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था, उसकी पुणे, महाराष्ट्र में बर्बर हत्या कर दी गई।”
ममता बनर्जी ने कहा, “यह सीधा-सीधा हेट क्राइम है। एक युवा को उसकी भाषा, पहचान और जड़ों की वजह से निशाना बनाया गया, उसे प्रताड़ित किया गया और मार डाला गया। यह उसी माहौल का नतीजा है, जहां जेनोफोबिया को हथियार बनाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। उन्होंने कहा, “मैं मांग करती हूं कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए। सुखेन के परिवार से मैं कहना चाहती हूं कि इस असीम दुख की घड़ी में पूरा बंगाल आपके साथ खड़ा है। न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने दूसरे राज्यों, खासकर भाजपा शासित राज्यों में बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर हमलों के मुद्दे पर आवाज उठाई है। वह पहले भी देशभर में बंगाली भाषी लोगों के साथ कथित उत्पीड़न के खिलाफ केंद्र सरकार को घेरती रही हैं।
यह प्रतिक्रिया उस घटना के एक दिन बाद आई है, जिसमें पुरुलिया जिले के एक प्रवासी मजदूर की महाराष्ट्र में कथित तौर पर हत्या कर दी गई। तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का आरोप है कि सुखेन महतो की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह बंगाली भाषा बोलता था।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मृतक का नाम सुखेन महतो है और वह पुरुलिया के बंडवान का निवासी था। बुधवार दोपहर पुणे के शिकारपुर पुलिस थाने के अंतर्गत कोरेगांव भीमा क्षेत्र से उसका शव बरामद किया गया। आरोप है कि उसे बंगाली में बात करने के कारण पीट-पीटकर मार डाला गया। इस मामले में उसके बड़े भाई तुलसीराम महतो ने शिकारपुर थाने में हत्या की शिकायत दर्ज कराई है।
बताया गया है कि सुखेन वर्ष 2021 से पुणे में प्रवासी मजदूर के रूप में काम कर रहा था। वह कोरेगांव भीमा के पास सनतबाड़ी इलाके में एक कार पार्ट्स निर्माण कंपनी में कार्यरत था। उसका शव उसी इलाके से बरामद किया गया।
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