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Tuesday,25-August-2026
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राजनीति

मोदी कैबिनेट से हटाए गए मंत्रियों की नई भूमिका पर अनिश्चितता

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भाजपा के संगठनात्मक ढांचे या किसी अन्य जिम्मेदारी में इस महीने की शुरूआत में मोदी मंत्रिमंडल से हटाए गए पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की नई भूमिका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

कैबिनेट फेरबदल के बाद भाजपा के सर्कल में अटकलें लगाई जा रही थीं कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद से बाहर किए गए कुछ लोगों को संगठन में जगह दी जाएगी और उन्हें अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। लेकिन एक पखवाड़े के बाद, भगवा खेमे के कई लोगों का मानना है कि पूर्व मंत्रियों को प्रमुख संगठनात्मक पद दिए जाने की संभावना नहीं है।

पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “ऐसा लगता नहीं है कि पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाया जाएगा या उन्हें संगठन में प्रमुख जिम्मेदारियां दी जाएंगी।”

7 जुलाई को 12 मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने वालों में डी.वी. सदानंद गौड़ा, रविशंकर प्रसाद, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, डॉ हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, संतोष कुमार गंगवार, बाबुल सुप्रियो, धोत्रे संजय शामराव, रतन लाल कटारिया, प्रताप चंद्र सारंगी और देबाश्री चौधरी शामिल थे।

थावरचंद गहलोत ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि दो या तीन को छोड़कर उनमें से अधिकांश के पार्टी पदाधिकारी बनाए जाने की संभावना नहीं है।

जबकि एक दर्जन मंत्रियों को हटा दिया गया था, केंद्रीय मंत्रिमंडल में भाजपा के तीन राष्ट्रीय पदाधिकारियों को मंत्री बनाया गया था। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को भी मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय सचिव विश्वेश्वर टुडू को भी केंद्रीय मंत्री बनाया गया है।

पार्टी के एक नेता ने कहा कि मुकुल रॉय के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद से उपाध्यक्ष का एक और पद खाली है।

पार्टी के एक नेता ने कहा, “पार्टी हलकों में अटकलें हैं कि प्रसाद और जावड़ेकर को कुछ संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे राष्ट्रीय पदाधिकारियों के रूप में हों। हाल ही में, भाजपा ने प्रसाद से पेगासस जासूसी पर पार्टी का रुख पेश करने को कहा था।”

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति का पालन करती है, इसलिए अगले साल की शुरूआत में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ पूर्व मंत्रियों को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी।

भगवा पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि कुछ पूर्व मंत्रियों को पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए काम सौंपा जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए गए अन्य लोगों के भाग्य का फैसला भविष्य में किया जाएगा और पार्टी नेतृत्व और पार्टी लाइन के खिलाफ बोलने वालों को भविष्य में कहीं भी समायोजित नहीं किया जाएगा।

एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इन मंत्रियों को दरवाजे दिखाने का कारण प्रदर्शन था, तो यह संभावना नहीं है कि उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी।

राष्ट्रीय समाचार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को तीन और एफआईआर में दी अंतरिम राहत, गिरफ्तारी पर रोक

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन और एफआईआर में गिरफ्तारी सहित सख्त पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दी है।

अभिषेक बनर्जी को अब राज्य के अलग-अलग थानों में दर्ज कुल 16 एफआईआर में से 11 मामलों में अंतरिम सुरक्षा मिल गई है।

जिन तीन एफआईआर में हाईकोर्ट के सिंगल जज बेंच जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी है, उनमें से एक दक्षिण कोलकाता में कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र वाले भवानीपुर थाने में दर्ज है। वहीं, दो अन्य एफआईआर दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अंतर्गत आने वाले कालीतला और विष्णुपुर थानों में दर्ज हैं। यह अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक लागू रहेगी।

अंतरिम सुरक्षा देते हुए जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने यह भी कहा कि डायमंड हार्बर सांसद को इन तीन एफआईआर में जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करना होगा। जस्टिस भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि इन तीन एफआईआर के संबंध में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।

फैसले के मुताबिक, अगर जांच एजेंसी समन भेजती है तो अभिषेक बनर्जी को पेश होना होगा। ऐसे में सिंगल बेंच ने कहा कि डायमंड हार्बर सांसद को पेशी से 48 घंटे पहले सूचित करना होगा। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो राज्य सरकार इस बारे में अदालत का ध्यान आकर्षित कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को तय की गई है।

जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश में यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अब तक दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी उनके वकील को दी जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि अभिषेक बनर्जी कोर्ट की इजाजत के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने जोड़ा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दे रखी है, इसलिए यह आदेश उस विदेश यात्रा में बाधा नहीं बनेगा।

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राजनीति

चाय की कीमत बढ़कर 15 रुपए हो गई, 50 पैसे में चाय पीकर हमारी जिंदगी शुरू हुई है: संजय राउत

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चाय की कीमतों में बढ़ोतरी, कंगना रनौत के बयान और मराठी भाषा विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई है।

नेता संजय राउत ने चाय की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “चाय की कीमत 15 रुपये हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यही चाय 200-300 रुपये में मिलती है। हमारी जिंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।” राउत ने तंज कसते हुए कहा, “अब भाजपा वाले कहेंगे कि चाय मत पियो। चाय पीना अपराध है, देशद्रोह है। राष्ट्रभक्ति के नाम पर कोई आदेश जारी कर देंगे। खुद इथेनॉल पिएंगे। गरीब आदमी को मेहनत करके एक कप चाय नसीब होती है और ये लोग सरकारी चाय पीते हैं।”

कंगना रनौत की ओर से कृति सेनन और तापसी पन्नू पर कटाक्ष करने को लेकर संजय राउत ने कहा, “आप लोग कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? उनको इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ये अंधभक्त लोग हैं। उनसे पूछना चाहिए कि चाय क्यों महंगी हो गई है। चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल बनाने में चला गया।

महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोलने को लेकर संजय राउत ने कहा, “संविधान में जो अधिकार दिया गया है, उसका इस्तेमाल होना चाहिए। चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, कॉर्पोरेट में स्थानीय भाषा होनी चाहिए। देश की भाषा एक होनी चाहिए, हिंदी। अगर अंग्रेजी गुलामी का लक्षण है तो हिंदी में बात होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और ब्यूरोक्रेट्स को हिंदी में लिखना और बोलना चाहिए। उनको हिंदी में जवाब देने से किसने रोका है?

बीते दिन भी संजय राउत ने अखिलेश यादव के बयान पर कहा था, “अखिलेश यादव ने ऐसा कुछ नहीं कहा। यहां और हर राज्य में एक कानून है कि स्थानीय भाषा बोली जानी चाहिए। अखिलेश ने यही कहा, लेकिन यह कानून सभी पर लागू होना चाहिए। जो लोग कॉर्पोरेट में, ऊंचे पदों पर या ऑफिस में काम करते हैं, वे मराठी क्यों नहीं बोलते? उन्हें भी मराठी आनी चाहिए और उन पर भी मराठी सख्ती से लागू होनी चाहिए। हर राज्य में लोगों को गर्व और आत्म-सम्मान के साथ स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए।”

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र : पालघर के आश्रम स्कूल में 7 साल के बच्चे की मौत, 26 अन्य छात्र अस्पताल में भर्ती

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महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो गई है। वहीं 26 अन्य छात्रों को सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मसवण के आश्रम स्कूल में पढ़ने वाले पहली क्लास के छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार आया था। इसके बाद उसे इलाज के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया था।

सोमवार को जब उसका बुखार वापस आया तो पीएचसी के डॉक्टर ने देखा कि उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है। डॉक्टर ने उसे तुरंत एंबुलेंस से मनोर के ग्रामीण अस्पताल में भेजने की सलाह दी।

अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे का ईसीजी किया और फिर उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।

घटना के बाद स्वास्थ्य और प्रशासन के बड़े अधिकारी स्कूल पहुंचे। इस स्कूल में कुल 449 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 395 छात्र हॉस्टल में रहते हैं। मेडिकल टीम ने स्कूल परिसर में सभी छात्रों की पूरी स्वास्थ्य जांच भी की।

एहतियात के तौर पर सर्दी, खांसी या बुखार के हल्के लक्षण वाले 26 छात्रों को मसवण पीएचसी में निगरानी में रखा गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकारी विशाल खत्री ने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती छात्रों और उनके माता-पिता से मुलाकात की।

यह घटना कुछ हफ्ते पहले गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल हॉस्टल में हुई घटना के बाद हुई है, जहां तीन आदिवासी लड़कियों की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। बताया गया था कि वे जमीन पर सो रही थीं।

इन मौतों ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी महीने की शुरुआत में अधिकारियों ने बताया था कि पिछले दो सालों में राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूलों में 584 छात्रों की मौत हुई है। इन मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल रोग, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं।

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