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Tuesday,29-September-2026
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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सपोर्ट, निफ्टी और सेंसेक्स ने लगातार तीसरे सप्ताह दर्ज की बढ़त

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कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक आई तेज गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात सामान्य होने से भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह भी बढ़त दर्ज की।

साप्ताहिक कारोबार के दौरान निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 109 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

घरेलू शेयर बाजार ने इस सप्ताह कई मिले-जुले संकेतों के बावजूद मजबूती दिखाई। हालांकि, व्यापक बाजार में खासकर मिडकैप शेयरों पर हल्का बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने से भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

हालांकि, असमान मानसून वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ने से महंगाई बढ़ने और ग्रामीण मांग पर असर पड़ने की आशंकाएं भी सामने आने लगी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे महंगाई, राजकोषीय घाटे और चालू खाते की स्थिति में सुधार होगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति को लेकर अधिक लचीलापन रहेगा।

साप्ताहिक कारोबार में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं निजी बैंकों के शेयरों में भी तेजी रही, जिसका कारण एफसीएनआर (बी) जमा स्वैप योजना को लेकर आरबीआई की ओर से दी गई स्पष्टता रही।

दूसरी ओर, कमोडिटी कीमतों में गिरावट के कारण मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। वहीं उपभोक्ता मांग को लेकर चिंताओं के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।

जहां प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, वहीं व्यापक बाजार में भिन्नता देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक सप्ताह के दौरान 1.15 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 में केवल 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24,400 और 24,500 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा, जबकि 23,900 और 23,800 का स्तर मजबूत समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,400 का स्तर प्रमुख सपोर्ट और 58,900-59,000 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

आने वाले हफ्तों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर कंपनियों की मांग, मुनाफे के मार्जिन और ऑर्डर बुक को लेकर प्रबंधन की टिप्पणियों पर रहेगी।

एक बाजार विशेषज्ञ ने कहा कि निवेशकों को फिलहाल संतुलित लेकिन सकारात्मक रणनीति अपनानी चाहिए और उन मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए, जिनके शेयर हाल की गिरावट के बावजूद बुनियादी रूप से मजबूत बने हुए हैं।

निवेशकों की निगाह अमेरिका के पीसीई (पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर) महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जो वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी दर के आंकड़े भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े और जून महीने के पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) निवेशकों को पहली तिमाही के नतीजों से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का शुरुआती संकेत देंगे।

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बढ़ती महंगाई और महंगे कच्चे तेल के बीच आरबीआई पर बढ़ा दबाव, ब्याज दरें स्थिर रखना हो सकता है मुश्किल: रिपोर्ट

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बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के दबाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मंगलवार को जारी बीएनपी परिबास इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के सप्ताहों में भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कुछ कमजोर हुआ है, जिससे मौद्रिक नीति पर दबाव बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। इसके साथ ही दुनिया भर में महंगाई के दबाव बने हुए हैं और कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि का रास्ता अपना रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर) जमा के जरिए अपने बाहरी क्षेत्र को मजबूत किया है, लेकिन विकसित देशों में बढ़ती ब्याज दरों के कारण पूंजी निकासी का जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे माहौल में आरबीआई के लिए नीतिगत दरों को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखना कठिन हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि निकट अवधि में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी कारण रुपए पर दबाव बढ़ा है और आरबीआई के पास ब्याज दरें अपरिवर्तित रखने की गुंजाइश सीमित होती जा रही है।

बीएनपी परिबास इंडिया के भारतीय इक्विटी अनुसंधान प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा कि भारत का व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण तेल कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है और पश्चिम एशिया में ताजा तनाव देश के लिए नकारात्मक संकेत लेकर आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में रुपया लगभग 1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वहीं भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली भी फिर शुरू हो गई है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एफसीएनआर जमा से समर्थन मिला है। अनुमानतः लगभग 127 अरब डॉलर के एफसीएनआर प्रवाह की मदद से विदेशी मुद्रा भंडार करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे निकट अवधि में कुछ राहत मिली है, लेकिन ये प्रवाह अगले तीन से पांच वर्षों में वापस भी जा सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची महंगाई का असर आने वाले महीनों में उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों पर दिखाई दे सकता है। शहरी क्षेत्रों में मजदूरी वृद्धि में कमी, बढ़ती महंगाई और कारोबारी विश्वास में गिरावट जैसे संकेत उपभोग मांग पर असर डाल सकते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की कमी, खाद्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी और फसल बुआई में कमी के कारण ग्रामीण मांग पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

इसके बावजूद रिपोर्ट ने कुछ सकारात्मक पहलुओं की भी ओर संकेत किया है। इनमें मजबूत ऋण वृद्धि, ऑटो बिक्री में मजबूती, रोजगार संबंधी आंकड़ों में सुधार और खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार शामिल है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

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लगातार दूसरे दिन गिरा बाजार, सेंसेक्स 243 अंक फिसला; निफ्टी 22,700 के करीब

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ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता के कारण जोखिम से बचने की भावना को बढ़ावा मिलने से लगातार दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। हालांकि शुरुआती बिकवाली के बाद बाजार संभलता नजर आया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स 1-1 प्रतिशत तक फिसल गए थे।

बीएसई सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी50 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत फिसलकर 22,716.20 पर पहुंच गया।

दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,771.72 से 138 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 72,633.68 पर खुला और एक समय इंट्रा-डे ट्रेड में यह करीब 708 अंक यानी 0.97 प्रतिशत गिरकर 72,064 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,780.25 से मामूली 0.20 प्रतिशत फिसलकर 22,732.45 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 210.6 अंक यानी 0.92 प्रतिशत गिरकर 22,569.65 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.99 प्रतिशत और 0.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी केमिकल और निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें क्रमशः 2.71 प्रतिशत, 2.31 प्रतिशत और 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया ने बेहतर प्रदर्शन किया।

निफ्टी50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी अदाणी इंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में रही, जिनमें क्रमशः 5 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, इंफोसिस और कोटक बैंक के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। जबकि इसके विपरीत, टाइटन, विप्रो, एचसीएल टेक, अपोलो हॉस्पिटल, टेक महिंद्रा, बजाज-ऑटो और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी के टेक्निकल आउटलुक पर बात करते हुए एक मार्केट एक्सपर्ट्स ने कहा कि 23,500-23,600 के जोन में भी खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखी, जिससे बाजार में रिकवरी की कोशिशें धीमी रहीं। ऊपर की तरफ़, 22,750–22,800 का लेवल अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है।

एक्सपर्ट ने कहा, “नीचे की तरफ, 22,550-22,600 का लेवल मुख्य इमीडिएट सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि 22,500 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,300-22,000 के लेवल तक जा सकता है।”

कमजोरी का असर पूरे बाजार पर दिखा क्योंकि इन्वेस्टर्स ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की। जानकारों का कहना है कि मार्केट में शामिल लोग सतर्क बने हुए हैं क्योंकि एनर्जी की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव निवेश के नज़रिए पर असर डाल रहे हैं। इससे कुछ सेक्टर में मजबूती के बावजूद निवेशक बचाव का रुख अपना रहे हैं।

मार्केट पर नजर रखने वालों का कहना है, “हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव निकट भविष्य में सेंटीमेंट को प्रभावित करते रहेंगे, लेकिन मार्केट का ध्यान धीरे-धीरे क्यू2 की कमाई की ओर बढ़ रहा है, और क्यू1 की तुलना में उम्मीदें पहले ही कम हो गई हैं।”

एक्सपर्ट ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आने से बेहतर रिस्क सेंटीमेंट के कारण ज़बरदस्त रिलीफ रैली आ सकती है। तब तक, निवेशकों के चुनिंदा रुख अपनाने की संभावना है, जो व्यापक मार्केट एक्सपोज़र के बजाय फंडामेंटल और कमाई की विज़िबिलिटी को प्राथमिकता देंगे।

इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया ऊंचाई से कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी गई, जिससे रुपया 95.97 के आसपास लगभग सपाट रहा और इसमें करीब 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई। एक्सपर्ट ने बताया, “रुपए की रेंज 95.65-96.15 के बीच देखी जा सकती है।

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आईओसीएल में अप्रेंटिस के 58 पदों पर आवेदन जारी, युवाओं के पास 18 अक्टूबर तक अवसर

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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) में नौकरी करने से अपने शानदार पेशेवर करियर की शुरुआत करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है। दरअसल, आईओसीएल ने अपनी बोंगाईगांव रिफाइनरी यूनिट में विभिन्न ट्रेड/विषय के आधार पर अप्रेंटिस के कुल 58 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।

आईओसीएल की ओर से जारी 58 रिक्तियों में ट्रेड अप्रेंटिस – अटेंडेंट ऑपरेटर (केमिकल प्लांट), डिसिप्लिन – केमिकल के 36; ट्रेड अप्रेंटिस (बॉयलर), विषय – मैकेनिकल के 14 और टेक्नीशियन अप्रेंटिस, विषय – इंस्ट्रूमेंटेशन के 8 पद शामिल हैं।

अप्रेंटिस के इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 28 सितंबर के सुबह 10 बजे से जारी है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक तय की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एनएपीएस/एनएटीएस पोर्टल पर रजिस्टर्ड होने के बाद आईओसीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि की शाम 5 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।

आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से ट्रेड अप्रेंटिस पदों के लिए 3 वर्ष का बीएससी (गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान या औद्योगिक रसायन विज्ञान) और टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग/इंस्ट्रूमेंटेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स/इंस्ट्रूमेंटेशन और कंट्रोल इंजीनियरिंग/एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग में 3 वर्ष का डिप्लोमा होना चाहिए।

आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 30 सितंबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, मेरिट सूची के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स को स्टाइपेंड आईओसीएल के नियमों के अनुसार दी जाएगी।

कैंडिडेट्स ध्यान दें कि प्रशिक्षण की अवधि पद के अनुसार 12 से 24 माह के बीच होगी। वहीं, दस्तावेज सत्यापन की संभावित तिथि 4 से 6 नवंबर 2026 होगी।

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