अंतरराष्ट्रीय समाचार
2022 में तुर्की का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा : एर्दोगन
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने घोषणा की कि 2022 में देश का निर्यात 12.9 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज करते हुए 254.2 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। एर्दोगन ने सोमवार को इस्तांबुल में तुर्की एक्सपोर्टर्स असेंबली को बताया, हमारा लक्ष्य अब तुर्की को शीर्ष 10 निर्यातक देशों में से एक बनाना है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि 20 साल पहले जब सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी सत्ता में आई थी तब निर्यात केवल 36 बिलियन डॉलर था।
राष्ट्रपति के अनुसार, निर्यात फर्मों की संख्या 2002 में 33,523 से बढ़कर 2022 में 111,000 से अधिक हो गई और इसी अवधि में निर्यात में लगे शहरों की संख्या पांच से बढ़कर 24 हो गई।
एर्दोगन ने कहा कि इसके अतिरिक्त, तुर्की के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार यूरोपीय संघ को निर्यात ने 2022 में 12 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की, विदेशी व्यापार अधिशेष 10 बिलियन डॉलर से अधिक तक पहुंच गया।
तुर्की नेता ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार की बढ़ती मात्रा का संचालन करने के लिए अपने देश के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि तुर्की मुद्रा में किए गए विदेशी व्यापार की मात्रा 2022 में 350 बिलियन लीरा (18 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गई थी।
तुर्की कई आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसमें इसकी मुद्रा का तेज मूल्यह्रास शामिल है। इसने 2022 में अपने मूल्य का लगभग 70 प्रतिशत खो दिया। उच्च मुद्रास्फीति की दर पिछले साल नवंबर तक 84.39 प्रतिशत थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान की अमेरिका को चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट में दखल दिया तो मिलेगा करारा जवाब

ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करता है, तो ईरानी सशस्त्र बल ‘तेज और निर्णायक’ जवाबी कार्रवाई करेंगे।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका के लिए कोई ‘मनमर्जी करने की जगह’ नहीं है, बल्कि यह ईरान की ‘निर्विवाद संप्रभुता’ वाला क्षेत्र है।
बयान में कहा गया कि इस जलमार्ग की सुरक्षा और स्थिरता ईरानी सेना के लिए एक लाल रेखा है, जिसे किसी भी कीमत पर पार नहीं होने दिया जाएगा।
बयान में कहा गया कि इस होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को ईरान की ओर से तय किए गए समुद्री रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता या दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करता है, तो ईरानी सेना तुरंत और सख्त कार्रवाई करेगी। साथ ही, ऐसे जहाजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
मुख्यालय ने कहा कि अगर अमेरिका इस होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था में दखल देने या वहां किसी तरह की बाधा पैदा करने की कोशिश करता है, तो ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानेगा और उसका तुरंत व निर्णायक जवाब देगा।
बयान में कहा गया कि इस जलमार्ग के ऊपर अमेरिकी लड़ाकू विमान और ड्रोन की लगातार मौजूदगी से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ती है। ईरान ने कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए वह अमेरिका और उसके समर्थकों की किसी भी ‘आक्रामक कार्रवाई को कुचलने’ के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
इसी बीच, गुरुवार को ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट ‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड के नहीं, बल्कि ईरान के नियंत्रण में है।’
उनका यह बयान एक दिन बाद आया, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बहरीन में 12 देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ एक ‘सुरक्षा संवाद’ आयोजित किया। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
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अमेरिका ने 250वीं सालगिरह के लिए पासपोर्ट किया लॉन्च, रुबियो बोले- ये हमारी विरासत, मूल्यों का प्रतीक

अमेरिका ने अमेरिकी आजादी की 250वीं सालगिरह के मौके पर एक यादगार पासपोर्ट पेश किया है, जिसमें एक नए डिजाइन वाला ट्रैवल डॉक्यूमेंट भी शामिल है। आने वाले महीनों में पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया के ज्यादातर हिस्से को डिजिटाइज करने की योजना है।
इस विशेष संस्करण के पासपोर्ट पर अमेरिका की स्थापना की याद में विशेष कलाकृतियां (कस्टम आर्टवर्क) बनाई गई हैं, जबकि इसमें सामान्य अमेरिकी पासपोर्ट की सभी सुरक्षा विशेषताएं भी बरकरार रखी गई हैं। यह पासपोर्ट 6 जुलाई से आम लोगों के लिए उपलब्ध होगा।
वॉशिंगटन में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि यह पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज नहीं, बल्कि अमेरिका की विरासत, मूल्यों और राष्ट्रीय पहचान का भी प्रतीक है।
विदेश सचिव रुबियो ने कहा, “पासपोर्ट सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट नहीं है; यह अपने मतलब के हिसाब से बहुत कीमती है। जब हम विदेश जाते हैं तो हममें से कई लोगों के लिए यह बहुत गर्व की बात होती है कि हम वह अमेरिकी पासपोर्ट दिखा सकें।”
उन्होंने कहा कि यह स्मारक संस्करण “मानव इतिहास के सबसे महान राष्ट्र की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ” को समर्पित है।
रुबियो ने कहा कि रीडिजाइन किया गया पासपोर्ट अमेरिकी पासपोर्ट कार्यक्रम को मॉडर्न बनाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।
स्मारक संस्करण से शुरुआत करते हुए, पासपोर्ट को एक विशेष प्रेजेंटेशन बॉक्स में दिया जाएगा, जिसके साथ उसकी प्रामाणिकता का प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट ऑफ ऑथेंटिसिटी) भी शामिल होगा।
रुबियो ने कहा, “हमने सोचा कि अमेरिकी पासपोर्ट जैसी जरूरी और सम्मानजनक चीज के लिए, इसमें सच में उससे कुछ ज्यादा होना चाहिए।” उन्होंने भविष्य के अपग्रेड के बारे में भी बताया, जिससे आवेदक लगभग पूरा पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा कर सकेंगे।
रुबियो ने कहा, “आप असल में ऑनलाइन जा पाएंगे। आप लगभग सारा काम पूरी तरह से ऑनलाइन कर पाएंगे।”
प्रस्तावित नए सिस्टम के तहत, आवेदक अपने कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस पर कैमरे का इस्तेमाल करके पासपोर्ट फोटो ले सकेंगे। डिपार्टमेंट के सुरक्षा प्रणाली के जरिए फेशियल वेरिफिकेशन पूरा किया जाएगा, जिससे फोटो सेंटर जाने की जरूरत कम हो जाएगी।
रुबियो ने कहा, “इससे लंबे इंतजार, लंबी लाइनों और अपॉइंटमेंट में कमी आएगी। आने वाले महीनों में डिजिटल सुधार शुरू होने की उम्मीद है।”
भविष्य के पासपोर्ट संस्करणों में दस्तावेज में दिखाए गए अमेरिकी इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को समझाने वाले लघु वीडियो से जुड़े क्यूआर कोड भी शामिल होने की उम्मीद है।
विदश सचिव रुबियो ने कहा, “जब आप उस क्यूआर कोड पर जाएंगे, तो यह आपको अमेरिकी इतिहास के उस क्षण की वीडियो प्रस्तुति को पसंद करने के लिए प्रेरित करेगा। हमें लगता है कि यह गर्व का एक बड़ा स्रोत होगा।”
रुबियो ने बताया कि उन्होंने पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पहला स्मारक संस्करण पासपोर्ट दिया था। उन्होंने कहा, “मैंने आज सुबह राष्ट्रपति ट्रंप को यह दिया और उन्हें यह बहुत पसंद आया। राष्ट्रपति ट्रंप इसे कुछ दिनों के लिए रखना चाहते थे ताकि ऑफिस में आने वाले हर किसी को दिखा सकें।”
राज्य विभाग ने कहा कि स्मारक पासपोर्ट हमारे साझा इतिहास और अगले 250 सालों तक लीड करने, इनोवेट करने और प्रेरित करने के हमारे लगातार कमिटमेंट को दिखाता है। यह दस्तावेज आजादी, सेल्फ-गवर्नमेंट और एकता के हमेशा रहने वाले आदर्शों का सम्मान करता है। इसके साथ ही उन उच्च सुरक्षा फीचर्स को भी बनाए रखता है, जिन्होंने अमेरिकी पासपोर्ट को ‘यात्रा और पहचान वाले दस्तावेज के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड’ बनाया है।
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प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा करेंगे। इस पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताई है और कहा कि न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण देश है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आएंगे।”
दोनों देशों के बीच संबंधों के महत्व का जिक्र करते हुए पीएम क्रिस्टोफर ने कहा, “भारत दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण देश है।”
उन्होंने आगे लिखा, “हम अप्रैल में हुए न्यूजीलैंड-भारत मुक्त व्यापार समझौते के जरिए दोनों देशों के रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं। इससे न्यूजीलैंड में अधिक रोजगार मिलेगा, निर्यात बढ़ेगा और आर्थिक विकास मजबूत होगा। इससे 1.4 अरब की आबादी वाले भारतीय बाजार में हमारे वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे न्यूजीलैंड के समुदायों में अधिक पैसा आएगा, नए रोजगार सृजित होंगे और आय में वृद्धि होगी।”
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को वहां से रवाना होंगे। उनकी यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लगभग दो महीने बाद हो रही है।
अप्रैल में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता हुआ। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के संबंध काफी मजबूत होने की उम्मीद है। भारत और न्यूजीलैंड ने 16 मार्च 2025 को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत की घोषणा की और रिकॉर्ड 9 महीनों में इसे पूरा किया, जिसके चलते यह अब तक का सबसे तेजी से पूरा होने वाला मुक्त व्यापार समझौता बन गया।
एफटीए पर हस्ताक्षर से न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात के लिए बाजार पहुंच और टैरिफ में छूट में बढ़ोतरी होगी, साथ ही यह विस्तृत ओशिनिया और प्रशांत द्वीप बाजारों के लिए एक प्रवेश द्वार के तौर पर कार्य करेगा। मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत भारतीय निर्यात पर लगने वाला 100 प्रतिशत शुल्क खत्म कर दिया गया है। न्यूजीलैंड भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।
न्यूजीलैंड ने भारत में कीवी फल, सेब और शहद के उत्पादकों की उत्पादकता, गुणवत्ता और क्षेत्रीय क्षमताओं में सुधार लाने के लिए इन फलों के लिए केंद्रित कार्य योजनाओं पर सहमति जताई है। इसके साथ ही भारत में न्यूजीलैंड से चयनित कृषि उत्पादों (सेब, कीवी, मनुका शहद) और एल्ब्यूमिन के लिए बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। कृषि के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों में बागवानी, शहद उत्पादन, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और शराब क्षेत्र भी शामिल हैं।
भारत और न्यूजीलैंड की साझेदारी आर्थिक परिस्थितियों और मजबूत जन-संबंधों पर आधारित है। वर्तमान में न्यूजीलैंड ओशिनिया में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024 में न्यूजीलैंड का आयात 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर और निर्यात 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। न्यूजीलैंड अपनी जीडीपी का लगभग 8 प्रतिशत वार्षिक रूप से विदेशों में निवेश करता है।
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