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अभी जारी रहेगी पाकिस्तानी रुपये की कमजोरी

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Pak-Rupees

इस्लामाबाद, 31 जनवरी : फिच सॉल्यूशंस ने मंगलवार को भविष्यवाणी की कि पाकिस्तानी रुपये की कमजोरी अभी भी जारी है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि देश पहले से ही रुपये में गिरावट, मुद्रास्फीति और कम ऊर्जा आपूर्ति से जूझ रहा है। द न्यूज ने बताया कि न्यूयॉर्क स्थित शोध एजेंसी के मुताबिक 25 जनवरी को स्थानीय विदेशी मुद्रा कंपनियों के बीच विनिमय दर पर स्वयं लगाए गए कैप को हटाने के फैसले से रुपये का अवमूल्यन शुरू हो गया था।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने शुरू में हस्तक्षेप किया, लेकिन रुपये में महत्वपूर्ण मूल्यह्रास इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अधिकारियों ने मुद्रा पर अपनी पकड़ ढीली कर दी है।

द न्यूज के मुताबिक फिच सॉल्यूशंस ने उल्लेख किया कि वर्ष के अंत तक रुपये के 248 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने का उनका मौजूदा पूवार्नुमान अब पुराना लग रहा है।

पिछले तीन दिनों (गुरुवार-सोमवार) में 14.36 प्रतिशत (या 38.74 रुपये) के भारी मूल्यह्रास के बाद बुधवार को 230.89 रुपये की तुलना में इंटरबैंक मार्केट में सुबह 11.04 बजे तक 268.20 रुपये पर चल रहा था।

शोध एजेंसी ने कहा, हमारा मानना है कि रुपये की कमजोरी अभी भी बनी रहेगी, खासकर पाकिस्तान के भुगतान संतुलन की स्थिति कई और महीनों तक कमजोर रहने की संभावना है।

द न्यूज के मुताबिक एजेंसी ने कहा कि इस मोड़ पर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि नवीनतम अवमूल्यन ने किस हद तक निवेशकों की भावना को आगे बढ़ाया है।

अपने विश्लेषण में फिच ने चेतावनी दी कि रुपये के लगातार कमजोर होने से निकट अवधि में व्यापक आर्थिक प्रभाव भी होंगे, यह आयातित मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकता है और अंतत: एसबीपी से नीतिगत दर में बढ़ोतरी हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिच को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2022-23 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 0.3 प्रतिशत तक सिकुड़ जाएगी।

फिच ने हालांकि उल्लेख किया कि रुपये के अवमूल्यन से इस्लामाबाद को आईएमएफ से और संवितरण सुरक्षित करने में मदद मिलेगी, जो लंबी अवधि के ²ष्टिकोण के लिए सकारात्मक होगा, क्योंकि इससे पाकिस्तान के भुगतान संतुलन तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।

द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी के पास स्टेट बैंक में 3.7 बिलियन डॉलर से कम का भंडार है, देश के केवल तीन सप्ताह के आयात के लिए पर्याप्त है।

व्यापार

वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट

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oil

नई दिल्ली, 18 मार्च : वैश्विक स्तर पर तनाव के बीच कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बुधवार को कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुबह 10:28 पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.40 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 2.35 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 100.99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था।

अंतराराष्ट्रीय बाजारों के साथ भारतीय बाजारों में भी कच्चे तेल में गिरावट देखने को मिल रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल का 20 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 8,621 रुपए पर था।

ईरान द्वारा वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की हत्या की पुष्टि के बाद भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल में भारी गिरावट आई है। उनकी मृत्यु को ईरान के युद्ध नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और यह क्षेत्रीय संघर्ष में और अधिक बिगड़ती स्थिति का संकेत है।

बाजार की चिंताओं के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जो एक महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्ग है और आमतौर पर वैश्विक ऑयल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी से होकर गुजरता है।

इस जलमार्ग से आवागमन अभी भी प्रतिबंधित है, और जहाजों का आवागमन सामान्य व्यापार प्रवाह के बजाय भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से अधिक प्रभावित हो रहा है।

मार्ग को सुरक्षित करने के लिए सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयास विफल होते दिख रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं को सामान्य करने की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इस बीच, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, ईरान ने हमले तेज कर दिए हैं और अमेरिकी सेना जलडमरूमध्य के पास स्थित मिसाइल ठिकानों को निशाना बना रही है।

तेल की कीमतों में इस वर्ष लगभग 70 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव का बढ़ना है।

अब इस उछाल का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर दिखने लगा है, अमेरिका में डीजल की कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं।

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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, मेटल और डिफेंस में खरीदारी

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मुंबई, 17 मार्च : मजबूत ग्लोबल संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 323.83 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,826.68 और निफ्टी 84.40 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,493.20 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी का नेतृत्व मेटल और डिफेंस शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी डिफेंस टॉप गेनर्स थे। कमोडिटीज, एनर्जी,फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और इन्फ्रा भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। दूसरी तरफ आईटी, पीएसयू बैंक, ऑयलएंडगैस, ऑटो, एफएमसीजी, सर्विसेज और रियल्टी लाल निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में इटरनल, बीईएल, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, इंडिगो, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, टाटा स्टील, एमएंडएम, पवार ग्रिड और एक्सिस बैंक गेनर्स थे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, टीसीएस, एचयूएल, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, एसबीआई और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 48 अंक या 0.08 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 54,663 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 12 अंक या 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,822 पर था।

व्यापक बाजार में भी मजबूती बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 51.48 प्रतिशत शेयर हरे निशान में, 43.78 लाल निशान में और 4.74 प्रतिशत बिना की बदलाव के कारोबार कर रहे थे।

एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। केवल शंघाई का बाजार लाल निशान में था। अमेरिकी बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ में 0.83 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में 1.22 प्रतिशत की तेजी थी।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर जारी है। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने सोमवार तो 9,365.52 करोड़ रुपए की बिकवाली की और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 12,593.36 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।

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व्यापार

सोने की चमक फीकी, चांदी का दाम 3 हजार रुपए से अधिक गिरा

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GOLD

मुंबई, 16 मार्च : सोने और चांदी की कीमत में सोमवार को कमजोरी देखी जा रही है, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 3,500 रुपए तक कम हो गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएस) पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना 1,192 रुपए या 0.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,57,274 रुपए पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,57,347 का उच्चतम स्तर और 1,56,665 रुपए का न्यूनतम स्तर बनाया है।

5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी का दाम 3,435 रुपए या 1.19 प्रतिशत कम होकर 2,56,340 रुपए था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,54,367 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,56,444 रुपए का उच्चतम स्तर छूआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में गिरावट देखी जा रही है। सोना 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,028 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80.70 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमत में गिरावट की वजह 17 मार्च से शुरू होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक है, जिसका परिणाम 18 मार्च को आएगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए अमेरिकी फेड ब्याज दरों को यथावत रख सकता है, जिसके चलते इस बैठक से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

इस बैठक के निर्णय सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

इसके अलावा, कच्चे तेल के लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण डॉलर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

वहीं, ईरान संघर्ष में कम होने के कोई संकेत नहीं दिखे, क्योंकि सप्ताहांत में अमेरिका और इजरायल ने एक प्रमुख निर्यात टर्मिनल पर हमला किया, जिसके बाद तेहरान की ओर से कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इससे सोने और चांदी की कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

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