राष्ट्रीय
ईसीआई ने नागरिक स्वयंसेवकों को बोनस देने के मामले में बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी
कोलकाता, 19 मार्च : चुनाव आयोग ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार से एक रिपोर्ट मांगी। यह रिपोर्ट सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस, दोनों के तहत काम करने वाले नागरिक स्वयंसेवकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल पुलिस के तहत आने वाले ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 हेतु एक तदर्थ बोनस देने की घोषणा किए जाने के बाद मांगी गई है।
यह घोषणा राज्य सचिवालय, नबन्ना से जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए की गई।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चुनावों से पहले की गई यह घोषणा महत्वपूर्ण है, क्योंकि नागरिक स्वयंसेवक पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं और चुनाव के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ भी उठाते हैं। इसी संदर्भ में, इन वित्तीय लाभों के प्रावधान को उनकी सेवा की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।
साथ ही, इस घोषणा पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। विपक्ष के एक धड़े ने आरोप लगाया कि ऐसे कदम चुनावों से पहले नागरिक स्वयंसेवकों को खुश करने के मकसद से उठाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और वित्त विभाग की सिफारिशों के अनुसार उठाया गया है।
विपक्ष ने यह भी दावा किया है कि यह घोषणा विधानसभा चुनाव के नोटिफिकेशन के बाद की गई है, और इसलिए यह आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन है।
इस घटनाक्रम के बाद, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस के तहत सेवा देने वाले नागरिक स्वयंसेवक, साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस के तहत सेवा देने वाले ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों को इस चालू वित्त वर्ष के दौरान यह बोनस मिलेगा।
तदर्थ बोनस में एकमुश्त 600 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। 27 फरवरी को, राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए तदर्थ बोनस में बढ़ोतरी की घोषणा की थी; अब यह लाभ नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों तक भी बढ़ा दिया गया है।
इस घोषणा के साथ, नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों को अब 7,400 रुपए मिलेंगे, जो पहले 6,800 रुपए थे।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को, राज्य वित्त विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें कहा गया था कि जो सरकारी कर्मचारी ‘उत्पादकता-आधारित बोनस योजना’ के दायरे में नहीं आते हैं, और जिनका 31 मार्च, 2026 तक संशोधित मासिक वेतन 46,000 रुपए से अधिक नहीं है, उन्हें प्रति व्यक्ति 7,400 रुपए का बोनस मिलेगा।
कुछ विशिष्ट शर्तों के अधीन, संविदा कर्मचारी और वे लोग जिन्होंने छह महीने की सेवा पूरी कर ली है, वे भी यह बोनस पाने के हकदार हैं। भुगतान पश्चिम बंगाल सेवा (वेतन और भत्तों का संशोधन) नियम, 2019 के अनुसार किया जाएगा। इसमें मकान किराया भत्ता, चिकित्सा भत्ता और सब्सिडी जैसे भत्ते शामिल नहीं हैं। यह भी ध्यान देने लायक है कि 15 मार्च को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से कुछ घंटे पहले ही, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरोहितों और मुअज्जनों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, बनर्जी ने मासिक मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की। इस संशोधन के बाद, अब उन्हें हर महीने 2,000 रुपए मिलेंगे।
दुर्घटना
जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चार वाहनों की टक्कर, 18 अमरनाथ यात्री हुए घायल

जम्मू, 13 जुलाई: रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क हादसे में अमरनाथ यात्रा के 18 यात्री घायल हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रामबन के चंदरकोट में लंगर पॉइंट पर पहलगाम जा रहे काफिले में शामिल दो एसआरटीसी बसों, एक कार और एक प्राइवेट बस की टक्कर हो गई।
अधिकारियों के मुताबिक, पहले एसआरटीसी की बस (जेके 01वाई-1044) दूसरी एसआरटीसी (जेके 01 वाई-1052) बस से टकरा गई। टक्कर की वजह से दूसरी बस एक कार (जेके21के-8115) से जा टकराई और फिर उस कार ने एक प्राइवेट बस (जेके02 सीएल-5499) को टक्कर मार दी। 4 वाहनों में टक्कर के कारण 18 अमरनाथ यात्री घायल हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी 18 घायल तीर्थयात्रियों को इलाज के लिए तुरंत रामबन के ज़िला अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर है।
अभी तक 10 घायलों की पहचान हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले कमलेश राजपूत के 23 वर्षीय बेटे हर्ष राजपूत, सुरेश गुप्ता के 18 वर्षीय बेटे विशाल गुप्ता, हीरा लाल शंकर के 23 वर्षीय बेटे पंकज सुवनकर, महाराष्ट्र के यवतमाल के जीवन मोवाडे के 29 वर्षीय बेटे सुहास जीवन मोवाडे, राजस्थान के गंगानगर के रतन के 45 वर्षीय बेटे भारत भूषण, शिव के 51 वर्षीय बेटे विनोद कुमार घायल हुए हैं। वहीं, राजस्थान के बीकानेर के सत्तासर के रतन, राजस्थान के विनोद बागला की 48 वर्षीय पत्नी किरण, पंजाब के अक्षय कुमार की 50 वर्षीय पत्नी सीमा रानी, राजस्थान के शिव रतन के 67 वर्षीय बेटे पवन कुमार और राजस्थान के जनता सिंघा के 41 वर्षीय बेटे गंगा सिन्हा भी हादसे में घायल हुए हैं। बाकी 8 घायलों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
हादसे के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ। पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और आगे की जांच चल रही है।
3 जुलाई को शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ संपन्न होगी। इस साल की यात्रा शुरू होने के बाद से, कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में 2.45 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं।
अपराध
कर्नाटक: ब्लैकमेल कर व्यापारी से 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस नेता और उसका साथी गिरफ्तार

मंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक के मंगलुरु में जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रमुख व्यापारी को ब्लैकमेल करने और लगभग दो साल में 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और जितेश के तौर पर हुई है। आरोप है कि जितेश ने पहले व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस ने बताया कि जितेश ने शुरू में 35 लाख की मांग की और वीडियो को पीड़ित की पत्नी को दिखाने की धमकी दी। अपनी बदनामी के डर से व्यापारी ने चेक के जरिए यह रकम दे दी।
जब पैसों की मांग जारी रही तो व्यापारी ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया, हालांकि पुलिस का आरोप है कि निजाम ने मदद करने के बजाय जितेश का साथ दिया और जबरन वसूली के इस रैकेट में शामिल हो गया।
इसके बाद दोनों ने आत्महत्या की एक झूठी कहानी रची। निजाम ने मई 2024 में व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम लिखा है। कहानी को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने जितेश की मौत और अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिखाईं और व्यापारी को आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी।
गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से व्यापारी पैसे देता रहा। पुलिस ने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल 2.77 करोड़ रुपए वसूले गए। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देखा। जिस व्यक्ति को वह मरा हुआ समझ रहा था, उसे जिंदा देखकर वह हैरान रह गया और उसने उरवा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की और जानकारी के लिए आगे की जांच चल रही है। इस बीच गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मंगलुरु और पूरे कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ निजाम की तस्वीरें वायरल हो गई हैं।
अनन्य
नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।
आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।
शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।
बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।
सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।
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