व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता के चलते इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज की गई उल्लेखनीय बढ़त
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरों से बाजार की धारणा मजबूत हुई, जिसके चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी में सप्ताह के दौरान 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 231 अंक या 0.31 प्रतिशत बढ़कर 75,415 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी रही।
एक विश्लेषक ने कहा, “बाजार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊंचे स्तरों पर मजबूत खरीदारी नहीं दिखने से बाजार की तेजी सीमित रही।”
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के कारण इसमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती बनी रही, जबकि एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर कमजोर रहे। थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बनी रही।
मिडकैप इंडेक्स ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की लगातार कोशिशों से रुपए को भी समर्थन मिला।
हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं के कारण घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा।
वहीं, बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस देखा जा रहा है, जबकि 53,600 से 53,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली करते रहे और कुल निकासी लगभग 7,570 करोड़ रुपए रही।
निवेशकों की नजर अब भारत के अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमजोरी अस्थायी है या लंबे समय तक रहने वाली है।
इसके अलावा, आरबीआई की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़े भी बाजार के लिए अहम संकेतक रहेंगे। यदि पीसीई आंकड़े ज्यादा आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश सीमित रह सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
एआई निवेश से ग्लोबल आईटी खर्च 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद : रिपोर्ट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एप्लिकेशन में तेजी से बढ़ते निवेश के चलते वर्ष 2026 में वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) खर्च बढ़कर 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक होगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर सिस्टम और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज ए सर्विस (आईएएएस) पर खर्च सबसे तेज गति से बढ़ेगा, क्योंकि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च 2025 के 506 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 822 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि 62.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है।
वहीं, आईएएएस पर खर्च 29.3 प्रतिशत बढ़कर 287 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि सॉफ्टवेयर पर खर्च 15.5 प्रतिशत बढ़कर 1.47 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, डिवाइस पर खर्च लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 868 अरब डॉलर, आईटी सेवाओं पर खर्च करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 1.57 ट्रिलियन डॉलर और कम्युनिकेशन सेवाओं पर खर्च 4.4 प्रतिशत बढ़कर 1.35 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
गार्टनर के वीपी एनालिस्ट जॉन-डेविड लवलॉक ने कहा, “एआई के लिए आवश्यक कंप्यूट क्षमता तैयार करना मानव इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। एआई वर्कलोड और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के चलते हाइपरस्केलर कंपनियां और बड़े उद्यम अगली पीढ़ी के डेटा सेंटरों की क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।”
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि तकनीकी बजट अभी भी महंगाई, सेमीकंडक्टर और मेमोरी की आपूर्ति संबंधी बाधाओं, हार्डवेयर लागत में बढ़ोतरी और उद्यमों की बदलती प्राथमिकताओं के कारण दबाव में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ताजा अनुमान यह दर्शाता है कि एआई के नेतृत्व में बाजार के विस्तार को लेकर भरोसा बढ़ा है। अतिरिक्त आईटी खर्च का बड़ा हिस्सा अब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सेवाओं और सॉफ्टवेयर पर केंद्रित होगा, जबकि पारंपरिक तकनीकी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि देखने को मिलेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां एंटरप्राइज एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एआई-अनुकूलित सर्वर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई-रेडी सॉफ्टवेयर में तेजी से निवेश कर रही हैं। इसके चलते एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर वैश्विक आईटी खर्च के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र बन गए हैं।
व्यापार
मध्य पूर्व में शांति से सोने और चांदी में लौटी रौनक, करीब एक प्रतिशत तक भागे

सोने और चांदी सोमवार को तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में दोनों की कीमती धातुओं के दाम एक प्रतिशत तक चढ़ गए थे।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,43,106 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,43,575 रुपए प्रति 10 ग्राम खुला।
सुबह 9:45 पर सोना 907 रुपए या 0.63 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,44,013 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,43,575 रुपए प्रति 10 ग्राम न्यूनतम स्तर और 1,44,111 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखी जा रही है। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,22,138 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,23,500 रुपए प्रति किलो पर खुला। फिलहाल यह 2,066 रुपए या 0.93 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,24,204 रुपए प्रति किलो पर थी।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,23,500 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,24,632 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सोना 0.47 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,090 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर थी।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह डॉलर इंडेक्स का कमजोर होना है, जो कि अमेरिका-ईरान में तनाव कम होने के बाद गिरावट देखने को मिली है। फिलहाल यह 0.25 प्रतिशत घटकर 101.03 पर आ गया था।
डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।
इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.23 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 87.80 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85.20 डॉलर प्रति बैरल पर था।
राष्ट्रीय समाचार
मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला शेयर बाजार, आईटी स्टॉक्स में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सोमवार को सकारात्मक हुई। सुबह 9:18 पर सेंसेक्स 507 अंक या 0.67 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,567 और निफ्टी 134 अंक या 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,901 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व आईटी शेयर कर रहे थे। निफ्टी आईटी एक प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ सूचकांकों में टॉप गेनर था। निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी एनर्जी के साथ करीब अन्य सभी सूचकांक हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इन्फोसिस, इटरनल, एचयूएल, बजाज फिनसर्व, आईटीसी, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, टाटा स्टील, एलएंडटी, ट्रेंट, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, एसबीआई, पावर ग्रिड, बीईएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स और भारती एयरटेल टॉप गेनर्स थे। केवल आईसीआईसीआई बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 608 अंक या 0.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,231 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 174 अंक या 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,059 पर था।
जानकारों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों का फिर से 90 डॉलर के नीचे आना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव में कमी बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें आगे भी नरम होती हैं, तो इससे बाजार में जारी हल्की तेजी को सहारा मिल सकता है। हालांकि, इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का निवेश रुख काफी अस्थिर रहा है और इसे लेकर निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
अमेरिकी-ईरान के बीच हमले कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक, डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 85 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 4.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 87.78 डॉलर प्रति बैरल पर था।
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